Solution:छायादार कृषि (जैसे आश्रय पट्टियाँ या पवन अवरोधक) रेगिस्तानी इलाकों में हवा की गति को कम करके, रेत कणों को जमा होने में मदद करती है, जिससे टीलों का निर्माण होता है। यह विधि मरुस्थलीकरण को रोकने और मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के लिए पेड़ों व झाड़ियों के माध्यम से रेगिस्तानी टीलों को स्थिर करती है।
• सीढ़ीदार कृषि (Terrace Farming) पहाड़ी ढलानों को काटकर समतल सीढ़ियों या चबूतरों के रूप में विकसित की गई एक टिकाऊ खेती पद्धति है। यह मुख्य रूप से मृदा अपरदन (मिट्टी के कटाव) को रोकने और पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए उपयोग की जाती है।
• समोच्च कृषि (Contour Farming) पहाड़ी ढलानों पर ढाल के विपरीत, अर्थात समोच्च रेखाओं (समान ऊंचाई वाले बिंदुओं) के अनुसार की जाने वाली खेती है। इसमें हल चलाना, बुवाई और मेड़बंदी ढाल के आर-पार की जाती है, जो मृदा क्षरण (soil erosion) को रोकने, जल के बहाव को धीमा करने और नमी संरक्षण के लिए एक टिकाऊ तकनीक है।
• सूक्ष्म कृषि (Micro-farming) एक छोटे से ज़मीन के टुकड़े (एक एकड़ से कम या कुछ एकड़) पर उच्च-तकनीकी, जैविक और टिकाऊ तरीकों से की जाने वाली खेती है।