Solution:हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों में चार सौ वर्ष पहले 'कुल्ह' नामक नहर सिंचाई की एक स्थानीय प्रणाली विकसित की गई थी।
• नदियों में बहने वाले पानी को मानव निर्मित नहरों में बदल दिया गया, जो पहाड़ी के नीचे के कई गांवों में पानी ले गया।
• इन 'कुल्ह' में बहने वाले पानी का प्रबंधन सभी गांवों में आम सहमति से होता था।
अन्य स्थानीय प्रणालियों हैं-
• बावड़ी (Baoli): ये पारंपरिक कुएं या सीढ़ीदार कुएं होते हैं, जिनका उपयोग जल संचयन और सिंचाई के लिए किया जाता है।
• जोहड़ (Johad): राजस्थान में वर्षा जल को इकट्ठा करने के लिए छोटे तालाब या गड्ढे, जो भूजल को रिचार्ज करते हैं और सिंचाई में मदद करते हैं।
• ढेकली (Dhekli): पानी उठाने की एक पारंपरिक, मैन्युअल विधि, जिसमें एक लंबी लकड़ी के डंडे और बाल्टी का उपयोग किया जाता है।