भारत के अनुसंधान केंद्र (भारत का भूगोल)

Total Questions: 3

1. 16 जुलाई, 1929 को स्थापित कौन-सा संगठन, जिसे पहले इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के नाम से जाना जाता था, भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा का प्रभारी है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
Solution:
  • ICAR कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्तशासी संस्था है।
  • इसकी स्थापना 16 जुलाई, 1929 को इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च नाम से हुई थी।
  • यह परिषद देश में बागवानी, मात्स्यिकी और पशु विज्ञान सहित कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान एवं शिक्षा का समन्वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन के लिए एक सर्वोच्च निकाय है।
  •  जो पहले इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के नाम से जाना जाता था।
  • यह संगठन भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा का प्रमुख प्रभारी है।​
  • स्थापना का इतिहास
    • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप या ICAR) की स्थापना रॉयल कमीशन ऑन एग्रीकल्चर की रिपोर्ट के अनुसरण में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम
    • 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में हुई।
    • ब्रिटिश काल में कृषि सुधारों की आवश्यकता को देखते हुए इसे गठित किया गया
    • जो स्वतंत्र भारत में भी कृषि क्षेत्र की रीढ़ बना रहा।
    • इसका मुख्यालय नई दिल्ली के कृषि भवन में स्थित है।​
  • संगठन की संरचना
    • ICAR भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) का स्वायत्त संगठन है।
    • वर्तमान में इसके 113 कृषि अनुसंधान संस्थान, 74 कृषि विश्वविद्यालय और कई क्षेत्रीय स्टेशन कार्यरत हैं
    • जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक बनाते हैं।
    • यह फसल विज्ञान, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि इंजीनियरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में कार्य करता है।​
  • प्रमुख कार्य और योगदान
    • ICAR कृषि अनुसंधान, शिक्षा और तकनीकी प्रसार का नेतृत्व करता है
    • जिसमें नई फसल किस्मों का विकास, जैव प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और किसान प्रशिक्षण शामिल हैं।
    • इसने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बना।
    • हाल के वर्षों में यह जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और सतत कृषि पर जोर दे रहा है।​
  • उपलब्धियां और प्रभाव
    • ICAR ने 6000 से अधिक पेटेंट, हजारों नई किस्में और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से लाखों वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया है।
    • 2025 तक इसके 97 वर्ष पूरे हो चुके हैं
    • जिसमें उत्पादकता वृद्धि से किसानों की आय दोगुनी करने में योगदान दिया।
    • यह वैश्विक चुनौतियों जैसे खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर कार्यरत है।​

2. हरित क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान है। यह कहां स्थित है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) नई दिल्ली
Solution:
  • हरित क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में स्थित है।
  • इसे पूसा संस्थान के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा प्रशासित है।
  • पूर्ण विवरण:
    • संस्थान का नाम: Indian Council of Agricultural Research (ICAR)
    • स्थापित होने की पृष्ठभूमि: ICAR 16 जुलाई 1929 को स्थापित हुआ था
    • पहले Imperial Council of Agricultural Research के रूप में जाना जाता था।
    • यह रॉयल कमीशन ऑन एग्रीकल्चर के सुझावों पर आधारित एक राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थान है। [ICAR इतिहास/संरचना]
    • मुख्यालय का स्थान: ICAR का मुख्यालय कृषि भवन, नई दिल्ली में स्थित है।
    • यह मंत्रालय of Agriculture और farmers welfare के अंतर्गत कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अंतर्गत ऑथरिटी के रूप में कार्य करता है।
    • [ICAR प्रशासन पन्ने/हिस्ट्री]
    • पूरक परिसर और संरचना: नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के साथ पूसा
    • नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर आदि अन्य विभाग भी स्थित हैं
    • ICAR के पास देशभर में कई अनुसंधान संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय हैं। [ICAR प्रशासन/About Us]
  • हरित क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:
    • ICAR ने हरित क्रांति के दौरान उच्च Yielding किस्मों के विकास, आधारभूत कृषि विज्ञान की शिक्षा, तकनीकी प्रसार और किसानों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई।
    • इससे भारत की खाद्य सुरक्षा और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार आया। [ICAR योगदान/History]
    • यदि चाहें तो ICAR के मुख्यालय, पूसा परिसर और अन्य प्रमुख संस्थानों के सटीक पते, संपर्क विवरण और हालिया संगठनात्मक बदलावों का ताजा स्रोत-उद्धरण भी दे सकता हूँ।

3. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की स्थापना 1851 में मुख्य रूप से ....... के लिए कोयला भंडार खोजने हेतु की गई थी। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) रेलवे
Solution:
  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की स्थापना 1851 ई. में मुख्य रूप से रेलवे के लिए कोयला भंडार खोजने हेतु की गई थी।
  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत सरकार के खान मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है।
  • स्थापना का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1830 के दशक में भारत में रेलवे विस्तार की योजना बनाई
    • जिसके लिए कोयले की आवश्यकता थी क्योंकि भाप इंजन कोयले पर चलते थे।
    • 4 मार्च 1851 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में सर थॉमस ऑल्डहैम को पहला महानिदेशक नियुक्त किया गया
    • जो आयरिश भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से आए थे।
    • GSI का प्रारंभिक फोकस पूर्वी भारत के कोयला क्षेत्रों जैसे रानीगंज और सिंहभूम में सर्वेक्षण पर था।​
  • प्रारंभिक उद्देश्य और कार्य
    • GSI की स्थापना का मुख्य लक्ष्य रेलवे ईंधन के लिए कोयला भंडारों की पहचान करना था
    • क्योंकि उस समय आयातित कोयला महंगा पड़ रहा था।
    • 1840 के दशक में कोयला समिति का गठन हुआ था
    • जिसकी रिपोर्ट ने GSI के औपचारिक गठन का आधार तैयार किया।
    • शुरुआती वर्षों में GSI ने भूगर्भीय मानचित्रण, खनिज सर्वेक्षण और भूकंप अध्ययन भी शुरू किए।​
  • विकास और विस्तार
    • स्वतंत्रता के बाद GSI का दायरा बढ़ा; अब यह खान एवं खनिज मंत्रालय के अधीन है
    • कोलकाता से संचालित होता है। इसके प्रमुख कार्यों में खनिज संसाधनों का मूल्यांकन, भू-आपदा प्रबंधन, भूकंप विज्ञान और राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक डेटा संग्रह शामिल हैं।
    • GSI ने स्वर्ण, हीरे, कोयला जैसे संसाधनों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।​
  • वर्तमान भूमिका
    • आज GSI आधुनिक तकनीकों जैसे जियोफिजिकल सर्वे, रिमोट सेंसिंग और ड्रिलिंग का उपयोग करता है।
    • यह राष्ट्रीय खनिज भंडार आकलन और पर्यावरण अध्ययन करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, हाल में राजस्थान के बांसवाड़ा में स्वर्ण भंडार की खोज GSI के प्रयासों का परिणाम है।​