Solution:नगरीकरण का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जो अधिवासित प्रारूप में गत्यात्मक परिवर्तन लाती है। यह परिवर्तन मूलतः जनसंख्या, आकार, संरचना और कार्मिक क्षेत्र में होता है। कार्मिक दृष्टि से नगरीय अधिवासित क्षेत्रों में गैर-प्राथमिक (कृषि) कार्यों की प्रधानता होती है। भारत जैसे विकासशील देशों में ग्रामीण-नगरीय स्थानांतरण के कारण नगरीकरण की प्रक्रिया को अधिक बल मिला है। भारत के अधिकतर नगर पहले गांव थे, जो सेवाओं के केंद्रीकरण के कारण नगर बन गए। भारत सरकार के जनगणना विभाग ने नगरीय केंद्रों को जनसंख्या के आधार पर 6 भागों में वर्गीकृत किया है-1. प्रथम वर्ग के नगर - 100,000 से अधिक जनसंख्या
2. द्वितीय वर्ग के नगर - 50,000 से 99,999 जनसंख्या
3. तृतीय वर्ग के नगर - 20,000 से 49,999 जनसंख्या
4. चतुर्थ वर्ग के नगर - 10,000 से 19,999 जनसंख्या
5. पंचम वर्ग के नगर - 5000 से 9,999 जनसंख्या
6. षष्ठ वर्ग के नगर - 5,000 से कम जनसंख्या