सितारों (जैसे सूर्य) में प्लाज्मा बनने का मुख्य कारण वहां का अत्यधिक उच्च तापमान और भारी दबाव है। जब तारों के केंद्र में तापमान लाखों डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, तो गैस के परमाणुओं के बीच इतनी अधिक ऊर्जा आ जाती है कि उनके इलेक्ट्रॉन अपने नाभिक (Nucleus) के आकर्षण को छोड़कर अलग हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को 'आयनिकरण' (Ionization) कहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, गैस एक ऐसे मिश्रण में बदल जाती है जिसमें स्वतंत्र रूप से घूमते हुए धनावेशित आयन और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
पदार्थ की इसी आवेशित गैसीय अवस्था को प्लाज्मा कहा जाता है। चूंकि सितारे पूरी तरह से इसी आयनित गैस से बने होते हैं, इसलिए प्लाज्मा को ब्रह्मांड में पदार्थ की सबसे प्रचुर अवस्था (लगभग 99%) माना जाता है। इसी उच्च तापमान और प्लाज्मा अवस्था के कारण ही तारों के भीतर 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) जैसी ऊर्जा पैदा करने वाली प्रतिक्रियाएं संभव हो पाती हैं।