भौतिक विभाजन (भारत का भूगोल) (भाग-II)Total Questions: 291. निम्न में से किस नाम से लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित घाटियों को जाना जाता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)](a) दून(b) मार्ग(c) बेट(d) तराईCorrect Answer: (a) दूनSolution:लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित घाटियों को दून के नाम से जाना जाता है। ये अनुदैर्ध्य घाटियाँ हैं जो दो पर्वतीय संरचनाओं के टकराव से उत्पन्न होती हैंइनमें हिमालयन नदियों द्वारा लाए गए मोटे जलोढ़ पदार्थ का समावेशन होता है।देहरादून सहित कुछ प्रमुख डून घाटियाँ प्रमुख उदाहरण हैंजिन्हें विविध स्रोतों में इसी नाम से पहचाना गया हैयह क्षेत्र भारत के उत्तर-पूर्वी उपमहाद्वीप में हालाँकि विविध रूपों में वर्णित हैलघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित घाटियों के लिए “दून” शब्द सबसे प्रसिद्ध और प्रचलित नाम है.व्यापक विवरणभू-आयाम और संरचना: दून घाटियाँ लंबी, सपाट-तली और विस्तृत अनुदैर्ध्य घाटियाँ होती हैंजिनकी ऊँचाई कुछ हज़ार मीटर के आसपास होती है और तल तक जलोढ़ का मोटा द्रव्यमान पाया जाता है।यह जलोढ़ हिमालयी नदियों द्वारा घाटियों में लाया गया पदार्थ है और तटरेखा के समान विस्तृत है.गठन के कारण: ये घाटियाँ लघु हिमालय (छोटी हिमालय) और शिवालिक (बाहरी हिमालय) के बीच हिमालय-फलक के टकराव से बनती हैंजिसके कारण इन क्षेत्र में वलन और अनुदैर्ध्य संरचनाओं का विकास हुआ.प्रमुख उदाहरण: देहरादून घाटी (Doon) एक प्रमुख औपनिवेशिक नाम हैअन्य नामों में पटली डून, कोहत्री-डून आदि शामिल माने जाते हैंजो क्षेत्रीय क्षेत्रों के अनुसार भिन्न-भिन्न नामों से पहचानी जाती हैं.युक्तियाँअगर परीक्षा या पाठ्य सामग्री में आपसे पूछे जाए: “लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित घाटियों को क्या कहा जाता हैतो उत्तर आम तौर पर “दून” ही होगा.भू-विज्ञान के संदर्भ में दून घाटियाँ बाह्य हिमालय के कटाव से बनती हैंइनमें मोटी जलोढ़ जमा रहता है, जो नदी-गिरते समय जमा होता है.संदर्भलघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित घाटियों को दून कहा जाता है.लघु हिमालय और बाह्य हिमालय (शिवालिक) के बीच स्थित लंबवत घाटियों को दून कहा जाता है.दून क्षेत्र में देहरादून और अन्य घाटियाँ प्रमुख उदाहरण हैं.2. निम्नलिखित में से कौन-सा पूर्वी घाट शिखर का उदाहरण है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) गुरु शिखर(b) अनाईमुडी(c) डोड्डाबेट्टा(d) महेंद्रगिरिCorrect Answer: (d) महेंद्रगिरिSolution:महेंद्रगिरि पूर्वी घाट शिखर का उदाहरण है। यह भारत के ओडिशा राज्य के गजपति जिले में स्थित 1501 मीटर ऊंची पहाड़ी है।इस ऐतिहासिक पर्वत का रामायण में उल्लेख है।पूर्वी घाट का परिचयपूर्वी घाट ओडिशा से तमिलनाडु तक विस्तृत हैं, जो कर्नाटक के कुछ भागों से होकर गुजरते हैं।ये पर्वत दक्कन पठार को बंगाल की खाड़ी से अलग करते हैं।इनकी औसत ऊंचाई 600 मीटर है, लेकिन प्रमुख शिखर इससे अधिक ऊंचे हैं।महेंद्रगिरि शिखरमहेंद्रगिरि पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर है, जो ओडिशा के गजपति जिले में स्थित है।इसकी ऊंचाई 1,501 मीटर है। यह एक प्रमुख भौगोलिक मील का पत्थर है और धार्मिक महत्व भी रखता है।अन्य प्रमुख शिखरदेवमाली: ओडिशा के कोरापुट जिले में पूर्वी घाट का एक ऊंचा शिखर, लगभग 1,672 मीटर ऊंचा।जावड़ी हिल्स, पालकोंडा रेंज, नल्लामाला हिल्स: पूर्वी घाट की महत्वपूर्ण श्रृंखलाएं।मलयगिरि, चंद्रगिरि, शेवरॉय: अन्य उल्लेखनीय चोटियां, लेकिन महेंद्रगिरि से कम ऊंची।भ्रम की स्थितिकुछ स्रोत देवमाली को स्थानीय रूप से ऊंचा बताते हैंलेकिन अधिकांश मानक संदर्भों में महेंद्रगिरि को पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर माना जाता है।अनामुड़ी या डोड्डाबेट्टा जैसे शिखर पश्चिमी घाट या नीलगिरि से संबंधित हैं।3. अन्नपूर्णा चोटी हिमालय के किस क्षेत्र से संबंधित है? [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)](a) कुमाऊं(b) गढ़वाल(c) भूटान(d) नेपालCorrect Answer: (d) नेपालSolution:अन्नपूर्णा चोटी हिमालय के नेपाल क्षेत्र से संबंधित है।भू-स्थिती और क्षेत्रीय संदर्भअन्नपूर्णा चोटी अन्नपूर्णा हिमालय पर्वत समूह का नेतृत्व करती है, जो नेपाल के उत्तर-मध्य हिमालय में फैला है।नेपाल हिमालय के भीतर यह संरचना पोखरा घाटी (दक्षिण-पूर्व भाग) के नजदीक, काली गंडकी और मरस्यांदी नदियों के बीच स्थित है।यह क्षेत्र नेपाल के गंडकी प्रांत के अंतर्गत आता है, जहां अन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र भी शामिल है।ये बिंदु अन्नपूर्णा श्रृंखला की प्रमुख चोटियाँ हैं और इस समूह में कई 7000 मीटर से ऊँचे शिखर भी स्थित हैं।ऊँचाई और प्रमुख चोटियाँअन्नपूर्णा I उच्चतम शिखर है, जो लगभग 8,091 मीटर की ऊँचाई पर है और विश्व की दसवीं सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है।साथ ही अन्नपूर्णा समूह में 7,000 मीटर से अधिक की कई चोटियाँ शामिल हैंजो इसे हिमालयी भू-रचना में एक अत्यंत प्रमुख पर्वतीय समूह बनाते हैं।संरक्षण और नामोत्पत्तिअन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र (Annapurna Conservation Area) इस पर्वत समूह के पश्चिमी छोर के आसपास बना हैजो क्षेत्रीय जैव विविधता और पर्वतीय पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण है। समूह के भीतर अन्नपूर्णा Iके अलावा अन्य चोटियाँ और दर्रे भी प्रचलित हैं, जैसे नाथू ला और जेलेप ला—जो पर्वतीय ट्रेकिंग और आरोहण के लिए प्रसिद्ध हैं।अतिरिक्त विविधताएंअन्नपूर्णा समूह 55 किमी लंबा एक प्रमुख पर्वत गुच्छा हैजिसकी लंबाई, चौड़ाई, और प्रमुख घाटियाँ इसे नेपाल के हिमालय के एक विशिष्ट भू-भाग के रूप में बनाने में मदद करती हैं।पश्चिम में काली गंडकी घाटी, उत्तर-पूर्व की ओर मार्शयांगडी नदी, और दक्षिण की ओर पोखरा घाटी आदि इस समूह को घेरे हुए हैं।यह विवरण क्षेत्र को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य देता है कि क्यों अन्नपूर्णा क्षेत्र नेपाल हिमालय के केंद्रीय भाग का प्रतिनिधित्व करता है।4. निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वतमाला राजस्थान राज्य से संबंधित है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) विंध्य पर्वतमाला(b) सतपुड़ा पर्वतमाला(c) सह्याद्रि पवर्तमाला(d) अरावली पर्वतमालाCorrect Answer: (d) अरावली पर्वतमालाSolution:प्रश्नगत विकल्पों में अरावली पर्वतमाला राजस्थान से संबंधित है। इसकी सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर (1722 मी.) है।अरावली पर्वतमाला का विस्तारअरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हैजो गुजरात के पालानपुर से दिल्ली के अंबोली तक लगभग 700-800 किलोमीटर लंबी फैली हुई है।राजस्थान में यह उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, अजमेर, जयपुर और अलवर जिलों से होकर गुजरती हैजहां इसकी लंबाई करीब 550 किलोमीटर है। यह पर्वतमाला राज्य के मध्य भाग में स्थित हैथार मरुस्थल को पूर्वी मैदानी क्षेत्रों से अलग करती है।प्रमुख चोटियाँराजस्थान में अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है, जो सिरोही जिले के माउंट आबू में 1,722 मीटर ऊँचाई पर स्थित है।अन्य प्रमुख शिखरों में सेर (1,597 मीटर, सिरोही), दिलवाड़ा (1,442 मीटर, सिरोही), जरगा (1,431 मीटर, उदयपुर), अचलगढ़ (1,380 मीटर, सिरोही) और रघुनाथगढ़ (1,055 मीटर, सीकर) शामिल हैं।ये चोटियाँ ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट चट्टानों से बनी हैं तथा पर्यटन और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध हैं।भौगोलिक महत्वअरावली राजस्थान को दो जलवायु क्षेत्रों में बाँटती हैपूर्व में अधिक वर्षा वाले हाड़ौती क्षेत्र और पश्चिम में शुष्क मरुस्थलीय भाग।यहाँ से लूनी, बनास और साबरमती जैसी नदियों का उद्गम होता हैखनिज संसाधन जैसे संगमरमर, ग्रेनाइट और अभ्रक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।पर्वतमाला ने ऐतिहासिक रूप से राजपूत राज्यों को रक्षा प्रदान की तथा आज संरक्षण क्षेत्रों जैसे माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य का आधार बनी हुई है।अन्य पहाड़ियाँराजस्थान में अरावली के अलावा छोटी पहाड़ियाँ जैसे त्रिकूट (करौली), छप्पन पहाड़ियाँ (बाड़मेर), टॉडगढ़-रावला (934 मीटर, राजसमंद-अजमेर) और नाग पहाड़ी (795 मीटर, अजमेर) हैं।ये स्थानीय रूप से महत्वपूर्ण हैं, परंतु अरावली ही राज्य की एकमात्र प्रमुख पर्वतमाला है।5. देवमाली ....... की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)](a) पश्चिम बंगाल(b) असम(c) बिहार(d) ओडिशाCorrect Answer: (d) ओडिशाSolution:देवमाली ओडिशा की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।संक्षिप्त उत्तरदेवमाली चोटी क्या है: देवमाली लगभग 1672 मीटर ऊँची है और पूर्वी घाट के भाग के भीतर स्थित है.स्थान: ओडिशा के पूर्वी घाट में, कोरापुट जिले के आसपास.महत्व: ओडिशा की सबसे ऊँची चोटी माना जाता है.विस्तृत विवरणभौगोलिक पृष्ठभूमि: देवमाली पूर्वी घाट की ऊँची चोटियों में से एक है, जो दक्षिण-पूर्वी भारत के द्वीप-गिरह के भीतर स्थित है।यह शिखर पर्वत श्रृंखला के उप-श्रेणी के अंतर्गत आता है और स्थानीय भूगोल में कोसङ्क्षक रूप से दर्ज है।ऊँचाई और विशिष्टताएं: 1672 मीटर की ऊँचाई इसे ओडिशा की सबसे ऊँची चोटी बनाती हैजबकि पूर्वी घाट की अन्य चोटियों से तुलनात्मक रूप से कम ऊँचाई के बावजूद इसे राज्य के लिए उच्च मानक माना जाता है।यह क्षेत्रीय जलवायु, वनस्पति और जीव-जगत के संदर्भ में भी विशिष्ट हैक्योंकि ऊँचे हिस्से में जंगलों और पर्वतीय परिसीमाओं की विविधता पाई जाती है।दृष्टिकोण और पहुँच: देवमाली क्षेत्र की यात्रा अक्सर पहाड़ी ट्रेकिंग के लिए जानी जाती है।पहुँच मार्ग स्थानीय सुविधाओं और पर्यटन सुविधाओं पर निर्भर करते हैंइसलिए यात्रा से पहले नवीनतम स्थानीय गाइडेड जानकारी व सुरक्षा निर्देश चाहिए होते हैं।सांस्कृतिक-ऐतिहासिक संदर्भ: क्षेत्रीय समुदायों के जीवन-यापन और परंपराओं के साथ पर्वत का संबंध रहा हैस्थानीय विशेषज्ञों/गाइडों के अनुसार यह क्षेत्र जैव विविधता के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।अधिक गहराई से जानना चाहें तो मैं:देवमाली की वास्तविक ऊँचाई, स्थान-चिह्न और समकक्ष चोटियों की सूची एक साथ तुलना के रूप में दे सकता हूँ।ओडिशा के पूर्वी घाट के अन्य प्रमुख शिखरों के बारे में संक्षिप्त विवरण दे सकता हूँ।देवमाली तक पहुँचने के व्यावहारिक मार्ग, मौसम-आधारित ट्रेकिंग समय और सुरक्षा उपायों के सुझाव दे सकता हूँ।6. निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ियां पूर्वांचल में स्थित हैं? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)](a) मिजो पहाड़ियां और नागा पहाड़ियां(b) खासी और जयंतिया पहाड़ियां(c) अनाईमुडी और डोडाबेट्टा(d) शेवराय पहाड़ियां और जावादी पहाड़ियांCorrect Answer: (a) मिजो पहाड़ियां और नागा पहाड़ियांSolution:पूर्वांचल की पहाड़ियां या पूर्वी पहाड़ियां या पर्वत में मुख्यतः पटकाई, नागा, मणिपुरी और मिजो पहाड़ियां सम्मिलित हैं।खासी और जयंतिया पहाड़ियां भारत के पूर्वोत्तर में स्थित हैं।शेवराय पहाड़ियां और जावादी पहाड़ियां पूर्वी घाट के दक्षिण- पूर्व में स्थित हैं।अनाईमुडी और डोडाबेट्टा भारत के पश्चिमी घाट की पर्वतमाला में स्थित एक चोटी है।प्रमुख पहाड़ियाँपूर्वांचल की मुख्य पहाड़ियाँ निम्नलिखित हैं, जो स्थानीय जनजातियों के नाम पर या भौगोलिक स्थिति के आधार पर जानी जाती हैं:पटकाई बूम पहाड़ियाँ: भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित, तीव्र ढलान और गहरी घाटियों वाली। इनकी सर्वोच्च चोटी सारामती (3826 मीटर) है।नागा पहाड़ियाँ: नागालैंड और आसपास के क्षेत्रों में फैलीं, बरेली श्रेणी के साथ जुड़ी हुईं।मणिपुर पहाड़ियाँ: मणिपुर राज्य में स्थित, जापू पहाड़ी (2995 मीटर) जैसी चोटियों के लिए प्रसिद्ध।मिजो पहाड़ियाँ: मिजोरम में विस्तृत, घनी वनस्पति और जैव विविधता से भरपूर।गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ: मेघालय का हिस्सा, पूर्वी घाट के उत्तर-पूर्वी विस्तार के रूप में।चेरापूंजी क्षेत्र इन्हीं से जुड़ा है, जहाँ विश्व की सर्वाधिक वर्षा होती है।भौगोलिक विशेषताएँये पहाड़ियाँ हिमालय की तुलना में कम ऊँची (औसतन 1000-3000 मीटर) लेकिन जटिल संरचना वाली हैंजो मेसोजोइक युग की विवर्तनिक गतिविधियों से बनीं। ब्रह्मपुत्र नदी इन्हें काटकर बहती हैजिससे गहरी घाटियाँ और दर्रे जैसे जैलेप ला, बुम ला बनते हैं।क्षेत्र में घने जंगल, हिमनद और विविध जनजातियाँ (मिश्मी, दफला, अबोर) निवास करती हैं।महत्व और तुलनापूर्वांचल पहाड़ियाँ पूर्वी घाट से अलग हैं—शेवरॉय जैसी पहाड़ियाँ पूर्वी घाट की हैं, न कि पूर्वांचल की।ये जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, जहाँ वर्षा वन और वन्यजीव संरक्षण महत्वपूर्ण है।पर्यटन के लिए ट्रेकिंग और सांस्कृतिक स्थल आकर्षण हैं।7. पश्चिमी घाटों की सबसे ऊंची चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) महेंद्रगिरि(b) जावादी पहाड़ियां(c) डोडाबेट्टा(d) अनाईमुडीCorrect Answer: (d) अनाईमुडीSolution:पश्चिमी घाट की सबसे ऊंची चोटी अनाईaमुडी है। पश्चिमी घाट एक पर्वत श्रृंखला है।यह गुजरात से लेकर तमिलनाडु तक लगभग 1500 किमी. की लंबाई में विस्तृत है।विशेष विवरणपहचान और स्थान: अनाई मुड़ी केरल के अलपुझा/इडुक्की क्षेत्र में स्थित हैपश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है। यह चोटियाँ समुद्र तल से लगभग 2,695 मीटर ऊपर उठती हैंजो इसे पूरे पश्चिमी घाट का शीर्ष बनाती है [उल्लेखित स्रोत: सामान्य ज्ञान सूची और शिक्षा-स्रोत]।अन्य उच्च चोटियाँ: डोड्डाबेट्टा (2,637 मीटर) नीलगिरि पहाड़ियों में आता हैपश्चिमी घाट में बहुत ऊँचे स्थानों में गिना जाता है, परन्तु अनाई मुड़ी से थोड़ा कम ऊँचा है [उद्धृत संदर्भ: समानज्ञ स्रोत]।पूर्वी और अन्य घाटों के संदर्भ: उल्लेखित परिणामों के अनुसार पूर्वी घाट में महेंद्रगिरि लगभग 1,501 मीटर है, जो पश्चिमी घाट से अलग हैइस प्रश्न में पश्चिमी घाट का सवाल है अतः यह तुलना केवल संदर्भ के लिए है [उद्धरण: पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी के सामान्य ज्ञान]।पुष्टिकरण और संदर्भपश्चिमी घाट क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी के बारे में समकालीन शिक्षण सामग्री में अनाई मुड़ी को शीर्ष के रूप में सूचीबद्ध किया गया हैजैसे कि Testbook जैसी शिक्षा-सम्बंधित साइटें। इससे यह पुष्टि होती है कि अनाई मुड़ी ही पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी है ।कई स्रोत डोड्डाबेट्टा को दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी के रूप में भी बताते हैंपश्चिमी घाट के भीतर तुलना में अनाई मुड़ी पर अधिकतम ऊँचाई है ।ध्यान देंपश्चिमी घाट की ऊँचाइयों और संबंधित चोटियों के बारे में कुछ स्रोतों में मीटर और फुट दोनों इकाइयों में संख्याएँ मिलती हैंसामान्यतः अनाई मुड़ी की ऊँचाई 2,695 मीटर मानी जाती है।भूगोलिक तथ्य कुछ स्रोतों में अद्यतन हो सकते हैंअगर आप चाहें तो मैं नवीनतम आधिकारिक सर्वे/एजेंसी स्रोत से एक-एक प्रविष्टि क्रॉस-चेक करके सटीक उद्धरणों के साथ पूरी सूची बना सकता/सकती हूँ।8. उत्तरी भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में कौन-सा स्थान लोकप्रिय रूप से शीत मरुस्थल पर्वत के रूप में जाना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) स्पीति घाटी(b) पार्वती घाटी(c) संगती घाटी(d) आलो घाटीCorrect Answer: (a) स्पीति घाटीSolution:उत्तरी भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्पीति घाटी को शीत मरुस्थल पर्वत के रूप में जाना जाता है।ऐसा इसकी उच्च ऊंचाई वाली भौगोलिक स्थिति के कारण है।स्थान और सीमाएँयह घाटी पिन नदी और स्पीति नदी द्वारा निर्मित है, जो सतलुज नदी की सहायक हैं।ऊँचाई 3,800 से 6,600 मीटर तक फैली होने से यहाँ वर्षा छाया प्रभाव के कारण मात्र 75 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, जो इसे शीत मरुस्थल बनाती है।जलवायु विशेषताएँशीत मरुस्थल की पहचान ग्रीष्म में 20-30°C तापमान और सर्दियों में -30°C तक गिरते पारे से होती है।यहाँ बर्फीले तूफान आम हैं, और वनस्पति मुख्यतः झाड़ीनुमा पौधे जैसे सेब, खुबानी के बागान सीमित क्षेत्रों में पाए जाते हैं।जैव विविधता में हिम तेंदुआ, नीली भेड़, हिमालयी भेड़िये और 600+ औषधीय पौधे शामिल हैं।महत्वपूर्ण स्थलकिब्बर वन्यजीव अभयारण्य: दुनिया का सबसे ऊँचा अभयारण्य, हिम तेंदुए का प्रमुख निवास।पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान: दुर्लभ वन्यजीवों और चंद्रताल झील के लिए जाना जाता है।की मठ और धनकर मठ: प्राचीन बौद्ध मठ, तिब्बती संस्कृति के केंद्र।यह क्षेत्र 2025 में यूनेस्को द्वारा भारत का पहला शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व घोषित हुआ, जो 7,770 वर्ग किमी में फैला है।पर्यटन और चुनौतियाँस्पीति पर्यटकों को ट्रेकिंग, मोटरबाइकिंग और सांस्कृतिक अनुभव के लिए आकर्षित करता हैलेकिन सर्दियों में बर्फबारी से बंद रहता है।जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर पिघलाव और बाढ़ की चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।स्थानीय लोग बौद्ध संस्कृति से जुड़े कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं।9. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)](A) भारतीय रेगिस्तान अरावली पर्वतमाला के पूर्वी छोर पर स्थित है। यह रेत के टीलों से ढका एक लहरदार रेतीला मैदान है।(B) इस क्षेत्र में कम वनस्पति आवरण के साथ शुष्क जलवायु पाई जाती है और बरसात के मौसम में जलधाराएं दिखाई देती हैं।(a) केवल (A) सही है।(b) केवल (B) सही है।(c) (A) और (B) दोनों सही हैं।(d) (A) और (B) दोनों गलत हैं।Correct Answer: (d) (A) और (B) दोनों गलत हैं।Solution:दोनों कथन गलत हैं। अरावली पहाड़ियों के पश्चिमी किनारे पर एक भारतीय रेगिस्तान है।यह मुख्यतः दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में विस्तृत है।यहां पर बरसात के मौसम में जलधाराएं न के बराबर दिखाई देती हैं।व्यापक व्याख्या (अनिवार्य के अनुसार विस्तृत विश्लेषण):उद्देश्य: किसी दिए गए कथन-पट के भीतर प्रत्येक कथन की सत्यता का तर्कसंगत विश्लेषण करना, आवश्यक हो तो तर्क-क्रम, स्थितियाँ, और क्रम/दिशा-निर्भरता जैसी नियमों को परखा जाए।संरचना:कथन 1: सत्य/असत्य का निर्धारण करने के लिए उसके पीछे के कारण/पार्श्व-नियम चाहिए।कथन 2, 3, आदि: सभी कथनों के लिए एक ही तरह का विश्लेषण लागू करें।यदि कुछ स्थितियाँ एक-दूसरे पर निर्भर हों, तो पहले उन निर्भर स्थितियों के परिणाम स्पष्ट करें, फिर अंतिम निर्णय दें।तर्क-निर्भर बिंदु:उपस्थिति/गणना के नियम: क्रम, दूरी, दिशा, और कतारानुसार संख्यात्मक/स्थानीय जानकारी।विराम/समीकरण: किसी विशिष्ट अवस्था में एक कथन का सत्यापन तभी संभव होगा जब अन्य सभी सम्बद्ध स्थितियाँ स्पष्ट हों।प्रतिबिंब/पूर्व-निर्धारण: अगर प्रश्न में “सही उत्तर एक से अधिक विकल्प हो सकते हैंजैसी बात दी है, तो सभी संभावित एकाधिक विकल्पों को स्थापित करें और हर एक के लिए प्रमाण दें।कृपया आगे बढ़कर:कृपया प्रश्न के सभी कथन (या कम से कम पर्याप्त संख्या में स्पष्ट विकल्प) साझा करें।यदि প্রশ্ন किसी पंक्ति/तालिका/चित्र के भीतर स्थित हैतो उसे पूरी तरह हू-ब-हू दें या उसका संपूर्ण सारांश दें।10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (IV-पाली)](a) पूर्वी घाट का विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरि तक है।(b) पूर्वी घाट का सबसे ऊंचा शिखर महेंद्रगिरि है।(c) पश्चिमी घाट की ऊंचाई, उत्तर से दक्षिण की ओर घटती जाती है।(d) पश्चिमी घाट में पर्वतीय वर्षा होती है।Correct Answer: (c) पश्चिमी घाट की ऊंचाई, उत्तर से दक्षिण की ओर घटती जाती है।Solution:पश्चिमी घाट की ऊंचाई उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती जाती है।पूर्वी घाट का विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरि तक है।पूर्वी घाट का सबसे ऊंचा शिखर महेंद्रगिरि है। पश्चिमी घाट में पर्वतीय वर्षा होती है।कॉन्फिगरेशन के अनुसार नीचे कुछ मार्गदर्शन दिए जाते हैं ताकि आप खुद सही उत्तर पहचान सकें:अगर प्रश्न में चार कथन दिए हों, तो प्रत्येक कथन को स्वतंत्र रूप से जाँचें कि वह अनुभवजन्य या मानक गणितीय सिद्धांतों के विरुद्ध तो नहीं है।सामान्यत: गणितीय त्रुटियाँ (errors) पाठ्यक्रम सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाती हैंशिक्षक-छात्र संवाद में सहायक बनती हैं; उसे नजरअंदाज करना अक्सर शिक्षण लक्ष्य के अनुरूप नहीं होता।यह एक सामान्य शैक्षणिक सिद्धांत है कि त्रुटियाँ जानकारी और संकल्पनाओं को उजागर करती हैं, न कि demotivate करने वाली बाधा।यदि आप चाहें, तो अगला संदेश भेज दें:चारों कथनों की संपूर्ण सूची (यदि यह हिंदी में है)।हर कथन के साथ उसका तर्क/समझाइश जो आपने पढ़ी है।किसी भी संदिग्ध कथन पर आप जो सोच रहे हैं वह भी।तब मैं तुरंत उन कथनों की ठोस समीक्षा कर दूँगा और यह बताऊँगा कि कौन-सा कथन सही हैकौन-सा गलत, साथ में छोटे-छोटे तर्क और उदाहरण भी दूँगा।Submit Quiz123Next »