भौतिक विभाजन (भारत का भूगोल) (भाग-II)

Total Questions: 29

11. निम्नलिखित में से किसका उत्तरी भाग सह्याद्रि के नाम से भी जाना जाता है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पश्चिमी घाट
Solution:
  • पश्चिमी घाट के उत्तरी भाग को सह्याद्रि के नाम से भी जाना जाता है।
  • पश्चिमी घाट अपने वनस्पतियों और जीवों के अपने समृद्ध और अद्वितीय संयोजन के लिए जाना जाता है।
  • पश्चिमी घाट को केरल में सव्य पर्वतम कहा जाता है।
  • निम्नलिखित में से उत्तर: सह्याद्री (Sahyadri) का उत्तरी भाग जिसे सह्याद्री के नाम से भी जाना जाता है
  • पश्चिमी घाट के उत्तरी भाग को ही कहा जाता है।
  • संक्षिप्त उत्तर विस्तार सहित:
    • परिभाषा: सह्याद्री पश्चिमी घाट की एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट के साथ फैली है।
    • यह श्रृंखला अक्सर तीन भागों में विभाजित की जाती है
    • उत्तरी सह्याद्री, मध्य सह्याद्री (मध्य पश्चिमी घाट), और दक्षिणी सह्याद्री (दक्षिणी पश्चिमी घाट) [sources: सामान्य भौगोलिक इतिहास/पश्चिमी घाट के विभाजन के सामान्य reference]।
    • उत्तरी भाग: पश्चिमी घाट का उत्तर भाग ही “सह्याद्री” के नाम से पुकारा जाता है।
    • इस भाग में माथेरान, लोनावाला-खंडाला, महाबलेश्वर, पंचगनी, अंबोली घाट आदि प्रमुख हिल स्टेशनों के क्षेत्र आते हैं।
    • यह भाग महाराष्ट्र के भीतर विख्यात है और गोवा/कर्नाटक की सीमा के समीप से शुरू होकर दक्षिणी तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ता है
    • [उद्धरण: सामान्य भूगोल/पश्चिमी घाट के विभाजन सम्बन्धी लेख]।
    • अन्य भागों के नाम: दक्षिणी पश्चिमी घाट और बीच का मध्य पश्चिमी घाट भी अस्तित्व में है
    • जिन्हें कई स्रोत दक्षिण/मध्य भाग के रूप में अलग करते हैं, पर उत्तरी भाग ही सह्याद्री के नाम से विशेष रूप से पहचाना जाता है
    • [स्रोत संदर्भ: पश्चिमी घाट के बहुविभाजन वाले भूगोलिक विवरण]।
  • अतिरिक्त संदर्भ-सुझाव (यदि आप चाहें तो और गहराई से पढ़ना चाहेंगे):
    • सह्याद्री के उत्तरी भाग के प्रमुख पर्वत-श्रृंखलाओं और उनके उल्लेखनीय नदियों/हिल स्टेशन के बारे में विस्तार से जानकारी।
    • पश्चिमी घाट के भूगोलिक इतिहास, जैव विविधता और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थिति आदि।
    • कृपया बताएं अगर किसी खास राज्य (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक) के हिस्से या किसी विशिष्ट पर्वत-श्रृंखला/हिल स्टेशन के बारे में विस्तृत विवरण चाहिए।

12. काठियावाड़ प्रायद्वीप भारत के किस राज्य का हिस्सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) गुजरात
Solution:
  • काठियावाड़ प्रायद्वीप कच्छ की खाड़ी और खंभात की खाड़ी से घिरा हुआ है।
  • यह प्रायद्वीपीय भारत के गुजरात राज्य का हिस्सा है।
  • भौगोलिक स्थिति
    • यह उत्तर में कच्छ की खाड़ी, पूर्व में खंभात की खाड़ी, पश्चिम और दक्षिण में अरब सागर से घिरा हुआ है।
    • इसका क्षेत्रफल लगभग 21,432 वर्ग मील है और इसमें जूनागढ़, पोरबंदर, राजकोट, भावनगर, सुरेंद्रनगर जैसे जिले शामिल हैं।
    • इस क्षेत्र की तटरेखा उभरी हुई है, जिसमें दक्कन लावा और तृतीयक चट्टानें प्रमुख हैं, तथा गिर रेंज दक्षिणी भाग में स्थित है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • ऐतिहासिक रूप से काठियावाड़ काठिया राजपूतों के प्रभाव क्षेत्र के रूप में जाना जाता था
    • जहां कई छोटी-छोटी रियासतें जैसे जूनागढ़, पोरबंदर, भावनगर आदि थीं। 1956 में सौराष्ट्र को बॉम्बे राज्य में मिला दिया गया
    • 1960 में भाषाई आधार पर गुजरात राज्य का गठन हुआ
    • जिसके बाद यह पूर्णतः गुजरात का अंग बन गया।
    • महात्मा गांधी का जन्मस्थान पोरबंदर इसी प्रायद्वीप में है, जो स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण रहा।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • जैव विविधता: गिर राष्ट्रीय उद्यान यहां स्थित है, जो एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थान है।
    • यह 1,412 वर्ग किलोमीटर में फैला है और 1965 में स्थापित हुआ।​
    • आर्थिक महत्व: कृषि, पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र उद्योग और बंदरगाह जैसे कांडला, मुंद्रा यहां सक्रिय हैं।
    • गुजरात का सबसे लंबा तट इसी क्षेत्र से जुड़ा है।
    • सांस्कृतिक धरोहर: नवरात्रि उत्सव, पारंपरिक नृत्य-संगीत, जूनागढ़ के प्राचीन मंदिर और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (समीपवर्ती) जैसे स्थल इसे समृद्ध बनाते हैं।
    • प्रमुख नदियां भादर और शतरंजी हैं।​
  • अन्य तथ्य
    • यह प्रायद्वीप उभरी तटरेखा का उदाहरण है और दक्कन पठार से जुड़ा हुआ है।
    • गुजरात की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान प्रमुख है
    • जिसमें पर्यटन, उद्योग और संरक्षण प्रयास शामिल हैं।​

13. कौन-सा दर्रा कुल्लू घाटी को भारत के हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) रोहतांग दर्रा
Solution:
  • रोहतांग दर्रा कुल्लू घाटी को भारत के हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है।
  • बनिहाल दर्रे से जम्मू से श्रीनगर जाने का मार्ग गुजरता है।
  • लिपुलेख दर्रा भारत-चीन सीमा पर उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
  • विस्तृत जानकारी
    • भूगोलिक महत्त्व: रोहतांग दर्रा हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र में एक ऊँचा पास है
    • जो मनाली-लेह राजमार्ग NH-3 (अब NH-3/पूर्व नाम) पर स्थित है
    • कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से कनेक्ट करता है।
    • इसकी ऊँचाई लगभग 3,978 मीटर (13,050 फीट) के आस-पास मानी जाती है
    • यह राह हिमाचल की तीन प्रमुख घाटियों को एक साथ जोड़ती है
    • कुल्लू (मनाली), लाहौल और स्पीति, तथा आगे लेह-लद्दाख के मार्गों से जुड़ती है।
    • [उद्योग/शिक्षा स्रोतों के अनुसार यह जानकारी सामान्य तौर पर इसी स्तर की मानी जाती है]​
    • मौसमी खुलन/यातायात: रोहतांग दर्रा मुख्य रूप से गर्मियों में बंद होने वाले समय से खुलता है
    • बरफबारी के मौसम में बंद रहता है; अटल टनल के उद्घाटन के साथ सर्दियों में भी कुछ मार्गों से मार्ग सुविधाओं में बदलाव आता है
    • पारंपरिक रास्ता अक्सर मई से नवंबर के दौरान अधिक सक्रिय रहता है
    • यह बात कई स्रोतों में उल्लेखित है कि यह दर्रा पर्यटक गतिविधियों और एडवेंचर ट्रिप्स के लिए एक प्रमुख आकर्षण है.​
    • पहुँच और कनेक्टिविटी: मनाली से दर्रे तक पहुंचने के लिए मार्गरीह सड़कें जापानी शैली के ऊँचे राजमार्गों के समान हैं
    • रोहतांग दर्रा मनाली-लेह मार्ग पर है और लाहौल-स्पीति को जोड़ने वाला एक जीवनरेखा है
    • अटल टनल के खुलने से पूर्व और बाद में भी यह क्षेत्र यातायात के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बना रहा है
    • क्योंकि यह लाहौल और स्पीति घाटियों को सालभर कनेक्टिविटी देता है.​
    • पर्यटन/संरचना: दर्रा हिमालय की रोचकताओं जैसे बर्फ से ढके पहाड़, ग्लेशियर, और हिमालयी दृश्यावली के लिए प्रसिद्ध है
    • बाइकिंग, ट्रेकिंग, फोटोग्राफी आदि गतिविधियाँ यहाँ बड़े पैमाने पर की जाती हैं
    • उच्च ऊँचाई पर स्थित होने के कारण साहसिक गतिविधियों के लिए यह एक प्रतिष्ठित डेस्टिनेशन बन चुका है.​
    • वैकल्पिक संदर्भ/यथार्थता: कुछ स्रोतों में रोहतांग दर्रे को कुल्लू घाटी और लाहौल- स्पीति घाटियों के बीच का प्रमुख कड़ी बताया गया है
    • इसका उल्लेख लगभग सभी शिक्षा/जनरल नॉलेज स्रोतों में मिलता है
    • यदि आप हिमाचल GK प्रश्नों के लिए पूर्ण विवरण चाहते हैं
    • तो आप रोहतांग दर्रा, ऊँचाई, समय पर खुलना/बंद होना, और अटल टनल से कनेक्टिविटी जैसे बिंदुओं को मैप पर देख सकते हैं.​
    • संबंधित दर्रे का स्पष्ट विकल्प: कुल्लू से लाहौल-स्पीति की ओर जाने वाले अन्य दर्रों में डीलुची, बारालाचा आदि भी उल्लेखित होते हैं
    • सबसे अधिक मान्यता प्राप्त और प्रश्नों में अक्सर पूछे जाने वाला दर्रा रोहतांग है

14. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय राज्य दक्कन के पठार से घिरा नहीं है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मध्य प्रदेश
Solution:
  • दक्कन का पठार एक प्रमुख पठार है जो दक्षिण भारत के अधिकांश भाग को कवर करता है।
  • यह मुख्यतः तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तक फैला हुआ है।
  • इस प्रकार मध्य प्रदेश राज्य दक्कन के पठार से घिरा नहीं है।
  • दक्कन पठार का विस्तार
    • दक्कन का पठार, जिसे प्रायद्वीपीय पठार भी कहा जाता है, त्रिभुजाकार आकार का विशाल क्षेत्र है
    • जो उत्तर में सतपुड़ा-विंध्याचल पर्वतों, पूर्व में पूर्वी घाट और पश्चिम में पश्चिमी घाट से घिरा हुआ है।
    • यह लगभग 4,22,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और भारत के 43% भूभाग को कवर करता है।
    • इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल के साथ-साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से शामिल हैं।​
  • पंजाब की भौगोलिक स्थिति
    • पंजाब सिंधु-गंगा मैदानी क्षेत्र का हिस्सा है, जो हिमालय की तलहटी से घिरा हुआ है
    • दक्कन पठार से पूर्णतः अलग है। इसकी भू-संरचना में उपजाऊ मैदान, नदियाँ जैसे सतलज और व्यास प्रमुख हैं, न कि पठारी इलाके।
    • दक्कन पठार दक्षिण भारत तक सीमित रहता है, इसलिए उत्तर के राज्य जैसे पंजाब इससे बाहर हैं।​
  • विशेषताएँ और महत्व
    • दक्कन पठार की औसत ऊँचाई 600-900 मीटर है, जो काली मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है
    • कपास, गन्ना जैसी फसलें उगाता है। पश्चिमी घाट मानसून को रोकते हैं, जिससे यहाँ सूखा जलवायु रहता है।
    • पंजाब में विपरीत रूप से हरित क्रांति वाले सिंचित मैदान हैं।​

15. कौन-सी पहाड़ियां मेघालय पठार का हिस्सा हैं? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) जयंतिया पहाड़ियां
Solution:
  • जयंतिया पहाड़ियां मेघालय पठार का हिस्सा हैं। लुम मैरींगकसीह जयंतिया पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी है।
  • मेघालय में गारो, खासी और जयंतिया प्रमुख पहाड़ियां हैं।
  • मेघालय पठार (Shillong Plateau) की तीन प्रमुख पहाड़ियाँ हैं:
  • Khasi Hills (खासी पहाड़ियाँ)
  • Garo Hills (गारो पहाड़ियाँ)
  • Jaintia Hills (जयन्तिया/जयन्तिया हिल्स)
  • पूरक विवरण:
    • Meghalaya Plateau उत्तर-पूर्वी भारत का एक हिस्सा है
    • यह डक्कन पठार का पूर्वी विस्तार माना जाता है।فه यह क्षेत्र खासी, गारो और जयन्तिया हिल्स द्वारा निर्मित तीन मुख्य पहाड़ी क्षेत्रों से संगठित है.​​
    • खासी हिल्स पठार के पश्चिमी भाग में स्थित है और इसकी ऊँचाई अक्सर लगभग 1,900–2,000 मीटर के क्रम में मापा जाती है
    • यह क्षेत्र शिलांग शहर के आसपास विस्तृत है.​
    • गारो हिल्स पश्चिमी मेघालय में मुख्य इलाके के भीतर फैला है और यहाँ की चोटियाँ भी उच्चतम चोटी के समीप रहती हैं
    • गारो हिल्स का क्षेत्र पठार के संरचनात्मक बनावट में विशेष भूमिका निभाता है.​
    • जयन्तिया हिल्स पूर्वी हिस्सा है और यह मेघालय पठार का एक हिस्सा मानी जाती हैं
    • जयन्तिया हिल्स जैव विविधता और वन्यजीवन के लिए प्रसिद्ध हैं.​​
  • महत्वपूर्ण बिंदु और संदर्भ:
    • मेघालय पठार का गठन आर्कियन क्वार्टजाइट्स एवं अन्य रॉक ग्रुप्स द्वारा हुआ है
    • जो इसे भू-रचना के हिसाब से एक विशिष्ट पर्वतीय-plateau संरचना बनाते हैं.​
    • शिलोंग पीक, सिलॉन्ग पीक जैसी चोटियाँ शिलांग पठार के भीतर स्थित प्रमुख शिखरों में आती हैं
    • क्षेत्रीय भूगोल को पहचानने में मदद करती हैं.​​

16. दक्कन का पठार भारत में एक त्रिकोणीय भूभाग है, जो ....... नदी के दक्षिण में स्थित है। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) नर्मदा
Solution:
  • दक्कन का पठार भारत में एक त्रिकोणीय भू-भाग है, जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है।
  • भौगोलिक स्थिति
    • पश्चिम में पश्चिमी घाट और पूर्व में पूर्वी घाट इसे तीन ओर से घेरते हैं, जबकि दक्षिण में ये घाट मिल जाते है
    • जिससे इसका त्रिकोणीय आकार स्पष्ट होता है। यह लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है
    • महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु जैसे राज्यों को कवर करता है।​​
  • भूगर्भीय संरचना
    • पठार मुख्य रूप से बेसाल्ट चट्टानों से बना है, जो डेक्कन ट्रैप के नाम से जाना जाता है
    • यह प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों का परिणाम है। इसकी औसत ऊंचाई 600 मीटर (2,000 फीट) है
    • जो पूर्व की ओर झुकी हुई है। नर्मदा नदी उत्तर की ओर अरब सागर में बहती है
    • जबकि पठार इसके दक्षिण में स्थित होने से जल विभाजक रेखा का निर्माण करती है।​​
  • प्रमुख नदियाँ और जलवायु
    • गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रमुख नदियाँ पठार से निकलकर पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं
    • गहरी घाटियाँ बनाते हुए। जलवायु शुष्क से अर्ध-शुष्क है, मानसून पर निर्भर, जिससे काला मिट्टी (रेगुर) वाली कृषि भूमि उपजाऊ बनती है
    • कपास, गन्ना और अनाज की खेती होती है।​​
  • आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
    • यहां लौह अयस्क, मैंगनीज, कोयला जैसे खनिज प्रचुर हैं, जो स्टील उद्योग को बढ़ावा देते हैं।
    • ऐतिहासिक रूप से चालुक्य, राष्ट्रकूट, विजयनगर जैसे साम्राज्यों का केंद्र रहा, आज भी अजंता-एलोरा गुफाएँ सांस्कृतिक धरोहर हैं।​

17. ....... की काली मिट्टी वाले क्षेत्र को दक्कन उमेदन (Deccan Trap) के नाम से जाना जाता है। [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रायद्वीपीय पठार
Solution:
  • प्रायद्वीपीय पठार की काली मिट्टी वाले क्षेत्र को दक्कन उद्भदन के नाम से भी जाना जाता है। यह दक्षिण भारत के अधिकांश भाग को कवर करता है।
  • काली मिट्टी वाला क्षेत्र दक्कन ट्रैप के रूप में प्रसिद्ध है और यह दक्कन पठार का हिस्सा है।
  • यह क्षेत्र खास तौर पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के कुछ भागों, गुजरात के कुछ क्षेत्रों और अन्य आसपास के इलाकों में पाया जाता है।
  • यह मिट्टी जैव-आंशिक रूप से भारी रहती है और पानी धारण करने की क्षमता के कारण बरसात के मौसम में उपजाऊ रहती है
  • जिससे कपास जैसी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।​
  • पृथ्वी विज्ञान और भू-रचना
    • उत्पत्ति और प्रकृति: डेक्कन ट्रैप विशाल बेसाल्ट लावा के विस्फोटों के कारण बनकर अरबों वर्ष पुराने आग्नेय चट्टानों का ढेर बन गया
    • समय के साथ बेसाल्ट के क्षरण से काली मिट्टी बन गई जिसे आमतौर पर “रेगुर” मिट्टी कहा जाता है।
    • यह मिट्टी कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम तथा अन्य खनिजों से भरपूर होती है
    • परंतु जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की कमी हो सकती है।​
    • भू-Applicant: दक्कन ट्रैप पश्चिम-मध्य भारत में फैला एक विशाल आग्नेय प्रांत है
    • जो गोदावरी और कृष्णा घाटियों तक फैलता है। इस क्षेत्र के किनारे-किनारे काली मिट्टी का विस्तृत क्षेत्र बनता है
    • जिसे क्षेत्रीय कृषि के हिसाब से “काली मिट्टी का पठार” भी कहा जाता है।​
  • कृषीय महत्त्व (क्यों उपयुक्त है)
    • पानी का धारण क्षमता: काली मिट्टी पानी को अच्छी तरह से संभाल लेती है
    • जिससे लंबे सूखे सीजन में भी फसलों को जल उपलब्ध रहता है।
    • इसका यही गुण कृषि के लिए इसे काफी उपयुक्त बनाता है
    • खासकर उसी क्षेत्र में जहां वर्षा पर्याप्त नहीं होती या जल-संरक्षण आवश्यकता रहती है।​
    • फसलों के अनुसार उपयुक्तता: प्रचलित ज्ञान के अनुसार कपास की खेती इस मिट्टी के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है
    • क्योंकि कपास को मिट्टी में ऊँची नमी आवश्यकता होती है और यह मिट्टी उसे बेहतर नियंत्रण के साथ प्रदान कर सकती है।​
    • नमी और मिट्टी की संरचना: काली मिट्टी में चूना, मैग्नीशिया आदि खनिजों की मात्रा अधिक हो सकती है
    • जिससे मिट्टी का पीएच और संरचना कुछ परिस्थितियों में अनुकूल रहते हैं
    • जबकि उर्वरा तत्वों की कमी (जैसे नाइट्रोजन) अन्य फसलों के लिए चुनौतियाँ पैदा कर सकती है।​
  • भूगोलिक संदर्भ
    • दक्कन पठार भारत का एक पुराना और स्थिर भू-भाग है, जो पश्चिम में पश्चिमी घाट से लेकर पूर्व में पूर्वी घाट तक फैला है
    • सतपुड़ा- विंध्य पर्वतमालाओं से घिरा है।
    • ट्रैप क्षेत्र का विस्तार महाराष्ट्र, मालवा, गुजरात के कुछ हिस्से, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के पठारों तक जाता है।​
    • “ट्रैप” शब्द का ऐतिहासिक अर्थ पर्वतीय ढांचे के लिए सीढ़ीनुमा स्थलाकृति को दर्शाने के कारण है
    • यह भू-गतिकीय प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप विकसित हुआ है।​
  • संरचना एवं विशेषताएं (काली मिट्टी की विशेषताएं)
    • रसायन: काली मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश आदि खनिज प्रचुर होते हैं
    • परंतु फॉस्फोरस और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की मात्रा कुछ परिस्थितियों में कम रह सकती है।​
    • जैविक सामग्री: कुछ जगहों पर जैविक पदार्थों की कमी पाई जाती है
    • जिसे सुधारने के लिए मल्चिंग, गहरी कृषि, या उर्वरक उपयोग की सलाह दी जाती है।​
    • प्राकृतिक चक्र: यह मिट्टी गुड-नमी बनाये रखने में सक्षम होती है
    • जिससे वर्षा-संरक्षण और जल-नीति में यह क्षेत्र निरंतर कृषि से जुड़ा रहता है।​
  • आकड़ा-आधारित संदर्भ (संक्षेप)
    • दक्कन ट्रैप का क्षेत्रफल और संरचना भारत के प्रमुख पठारों में से एक माना जाता है
    • यह क्षेत्र दोनों कृषि और भू-वैज्ञानिक महत्त्व रखता है।​

18. निम्नलिखित में से कौन-सा भाग मेघालय के पठार का एक उपमंडल नहीं है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) धनसिरी
Solution:
  •  गारो, खासी एवं जयंतिया इस पठार के उपमंडल हैं। धनसिरी, ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है।
  • विस्तृत विवरण
    • मेघालय पठार, जिसे शिलांग पठार भी कहा जाता है, उत्तरपूर्वी भारत के प्रायद्वीपीय भूखंड के विस्तार के रूप में पहचाना जाता है
    • यह तीन मुख्य पहाड़ी इकाइयों में विभाजित है: खासी हिल्स (Khasi Hills), जयंतिया हिल्स (Jaintia Hills), और गारो हिल्स (Garō Hills) (यह तीनों मिलकर मेघालय पठार की प्रमुख उपखंड रेखा बनाते हैं)
    • ये उपमंडल मेघालय के भीतर स्थित हैं और वहां की स्थानीय जनजातीय आबादियों के नामों पर पहचाने जाते हैं.​
    • भुवन पहाड़ियाँ (Bhuvan Hills) असम राज्य के बराक घाटी में स्थित हैं
    • ये असम की क्षेत्रीय भौगोलिक इकाई मानी जाती हैं
    • न कि मेघालय पठार के उपखंड/उपमंडल के रूप में गिनी जातीं
    • अतः यह क्षेत्र मेघालय पठार का भाग नहीं है; यह बराक घाटी के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक अलग पहाड़ी क्षेत्र है.​
    • अन्य मेघालय पठार के उपखंडों के उदाहरणों में खासी पहाड़ियाँ (Khasi Hills), जयंतिया पहाड़ियाँ (Jaintia Hills) और गारो पहाड़ियाँ (Garō Hills) शामिल हैं
    • जो मेघालय के भीतर पठार की तीन प्रमुख धाराओं के रूप में पहचाने जाते हैं
    • इन पहाड़ أجزاء के कारण मेघालय पठार का भूगोल-आकृति बनती है
    • यहाँ की वर्षा, वनस्पति तथा जनजातीय विविधता प्रभावित होती है.​
  • टिप्पणियाँ और संदर्भ
    • मेघालय पठार के स्तर पर प्रमुख उपखंड: खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स, गारो हिल्स; ये सभी मेघालय के भीतर स्थित हैं
    • पठार की संरचना बनाते हैं.​
    • भुवन पहाड़ियाँ असम के बराक घाटी क्षेत्र में स्थित हैं
    • इस कारण वे मेघालय पठार का हिस्सा नहीं मानी जातीं.​
    • अगर आप किसी विशिष्ट उपमंडल के बारे में और स्पष्ट जानकारी चाहते हैं
    • (उदा., हर उपखंड की स्थति, स्थानीय जनजातियाँ, भूगर्भीय गठन), बताइए ताकि उसकी विस्तृत सूची और विवरण दे सकूँ।

19. दक्कन के पठार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) पश्चिम में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है
Solution:
  •  उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है। दक्कन का पठार पश्चिम में ऊंचा एवं ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है।
  • इस पठार का भू-भाग त्रिभुजाकार है।
  • दक्कन का पठार: परिभाषा और भौगोलिक बनावट
    • दक्कन का पठार भारत के दक्षिणी भाग में स्थित एक विशाल त्रिभुजाकार भूभाग है
    • जो सतपुड़ा- विंध्य के उत्तर से शुरू होकर पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में पूर्वी घाट तक फैला है.​
    • इसका निर्माण मुख्यतः बेसाल्ट प्लैट्स की बहिर्गमन lava flows, पुराने इलाकों की अपरदन-प्रक्रियाओं, और प्रवर्तक भूवैज्ञानिक समयों के दौरान tectonic activity के मिलेजुले से हुआ माना जाता है.​
    • ऊँचाई की सामान्य रेंज लगभग 600 मीटर तक दक्षिण में और कुछ स्थानों पर अधिक भी पाई जाती है
    • जबकि उत्तर की ओर ऊँचाई घटती है, जिससे यह पश्चिमी घाट की तरफ ऊँचा और पूर्वी हिस्सों की ओर ढलान देता है.​
  • कथनों के बारे में विश्लेषण (क्यों कौन सा कथन गलत है, इसे स्पष्ट किया गया है)
    • एक प्रमुख कथन यह है कि दक्कन पठार पश्चिम की ओर ऊँचा है और पूर्व की ओर ढलान मंद है, जिससे नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं
    • यह कथन सामान्यतः सत्य माना जाता है क्योंकि पठार की ऊँचाई पश्चिम में अधिक है और पूर्व की ओर ढलान है
    • जिससे पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ प्रभावित होती हैं.​
    • एक अन्य सामान्य कथन यह है कि दक्कन पठार सतपुड़ा/विंध्य के उत्तर में है और इसके साथ महादेव/मैकाल पर्वत श्रृंखलाएं आसपास मिलती हैं
    • यह भौगोलिक स्थिति में सही है, किंतु कतिपय विवरण में त्रुटियाँ भी मिलती हैं
    • जैसे कि सतपुड़ा-मैकाल रेखा के साथ पथर संरचना की स्पष्टता में विविधताएँ हो सकती हैं.​
    • कुछ स्रोत इस पठार को त्रिभुजाकार आकार का बताते हैं और पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, सतपुड़ा-विड्ंध्य से घिरा होने की बात करते हैं
    • यह आयाम-संरचना के बारे में सामान्य सहमति के अनुरूप है.​
  • गलत/सही निर्धारण (संक्षेप में)
    • अगर जो कथन कहा गया है कि “दक्कन पठार पूर्वोत्तर की दिशा में सतह से बढ़कर छोटा नागपुर पठार में विलीन नहीं होता” जैसे दावें हैं
    • तो वह कथन गलत साबित होता है क्योंकि दक्कन पठार अक्सर उत्तर-पूर्व दिशा में कुछ क्षेत्रों में अन्य संरचनाओं के साथ मिलकर दिखता है
    • कुछ जगहों पर छोटा नागपुर पठार से जुड़ता है या मिलने के संकेत मिलते हैं, इस प्रकार वह हिस्सा गलत बैठता है.​
    • साथ ही, दक्कन पठार की त्रिकोणीय सीमा, उत्तर में सतपुड़ा और विंध्य, पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व में पूर्वी घाट के साथ घिरा होना एक सामान्य मान्यता है
    • अगर किसी स्रोत में इसे त्रिकोणीय नहीं बताता या किसी महत्त्वपूर्ण पड़ताल को छोड़ देता है, तो वह कथन संदेह योग्य है.​

20. दक्कन के पठार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सतपुड़ा पर्वत इस पठार के दक्षिण में है।
Solution:
  • दक्कन का पठार पश्चिम में ऊंचा है और ढलान मंद रूप से पूर्व की ओर है।
  • दक्कन का पठार देश के अधिकांश दक्षिणी भाग को कवर करता है।
  • इस पठार का एक विस्तार उत्तर-पूर्व में भी दिखाई देता है।
  • सतपुड़ा पर्वतमाला विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण में स्थित है।
  • पश्चिमी घाट दक्कन के पठार के पश्चिम में है।
  • विंध्याचल पर्वत इस पठार के उत्तर में है।
  • पूर्वी घाट इस पठार के पूर्व में है। दक्कन के पठार का उत्तरी छोर सतपुड़ा श्रेणी है।
  • दक्कन का पठार क्या है
    • दक्ष‍िणी भारतीय प्लेट के दक्षिण में फैला एक विशाल पठार है
    • जिसकी औसतन ऊँचाई लगभग 600 मीटर के आसपास मानी जाती है
    • यह क्षेत्र महादेव-मैकाल के उत्तरपूर्वी विस्तार और पश्चिमी घाट के साथ परस्पर संबंध रखता है.​
    • पठार की आकृति सामान्यतः त्रिकोणीय मानी जाती है; इसकी ढलान पश्चिम से पूर्व की ओर होती है
    • जिससे अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं.​
  • सतपुड़ा पर्वतमाला की स्थिति
    • सतपुड़ा श्रेणी पठार के उत्तर में स्थित है, और यह मुख्यतः पश्चिमी दिशा से उत्तर-पूर्व की दिशा में विस्तार करती है
    • जबकि दक्कन पठार के उत्तर एवं पूर्वी भागों के साथ भू-आकृति बनाती है.​
    • सतपुड़ा पर्वतमाला दक्कन पठार के विस्तृत आधार को पश्चिम में फैलाती नहीं है
    • वे इंडो-गंगा मैदानों और पठार के बीच की सीमा को निर्धारित करते हैं
    • इनकी वास्तविक स्थितियाँ उत्तर/पूर्व की ओर हैं और पश्चिमी घाट की श्रृंखलाओं से भिन्न दिशा में जाती हैं.​
  • अन्य प्रमुख तथ्य
    • दक्कन का पठार प्राचीन ज्वालामुखीय पत्थरों से बना है और विविध मृदा प्रकारों के लिए जाना जाता है
    • जिसमें काली मिट्टी (काली मृदा) प्रमुख उदाहरण है, जो महाराष्ट्र के पठारों में दिखती है.​
    • इसकी पूर्व दिशा में स्थित नदियाँ अक्सर बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं
    • क्योंकि पठार पश्चिम से पूर्व की ओर ढलान करता है.​