भौतिक विभाजन (भारत का भूगोल) (भाग-I)

Total Questions: 30

11. भारत में बाबा बूदन पहाड़ियों पर ....... की खेती शुरू की गई थी। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कॉफी
Solution:
  • भारत में बाबा बूदन पहाड़ियों पर कॉफी की खेती शुरू की गई थी।
  • कॉफी की कटाई का मौसम आमतौर पर नवंबर और फरवरी के बीच होता है।
  • भारत में कॉफी पूर्वी तथा पश्चिमी घाट के संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में छायादार वृक्षों के नीचे उपजाई जाती है।
  • भारत में चाय की खेती असम क्षेत्र में शुरू की गई थी।
  • भारत में इलायची की खेती पश्चिमी घाट में शुरू हुई थी।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • सूफी संत बाबा बूदन ने 17वीं शताब्दी में मक्का की तीर्थयात्रा के दौरान यमन के मोका बंदरगाह से सात कॉफी के बीज चुराकर भारत लाए।
    • उन्होंने इन्हें कर्नाटक के चिक्कमगलूर जिले में चंद्रगिरि पहाड़ियों (अब बाबा बूदन गिरी के नाम से प्रसिद्ध) पर बोया, जो 1,829 मीटर ऊंची हैं।
    • इससे भारत में कॉफी की खेती का प्रारंभ हुआ, जो पहले अरब देशों में सख्ती से नियंत्रित थी।​
  • खेती का प्रसार
    • 1670 में निजी मालिकों द्वारा व्यवस्थित खेती शुरू हुई
    • 1840 से बाबा बूदन गिरी तथा आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्लांटेशन स्थापित हुए।
    • कॉफी मुख्य रूप से छायादार पेड़ों के नीचे उगाई जाती है, जो कड़ी धूप से बचाव करती है
    • इसे अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तथा मध्यम वर्षा की जरूरत होती है।
    • कटाई का मौसम नवंबर से फरवरी तक रहता है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • बाबा बूदन गिरी पर्वत श्रृंखला चंद्रद्रोण के नाम से भी जानी जाती है
    • जो अर्धचंद्राकार आकार की है।​
    • यह क्षेत्र अब कॉफी उत्पादन का केंद्र है, और भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश बन चुका है, मुख्यतः अरेबिका प्रजाति।​
    • यहां लौह अयस्क खनन भी होता है
    • लेकिन कॉफी की शुरुआत बाबा बूदन से जुड़ी प्रसिद्ध कथा है।​

12. निम्नलिखित में से कौन-सा शिखर झारखंड का सबसे ऊंचा शिखर है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) पारसनाथ
Solution:
  • पारसनाथ पहाड़ी झारखंड राज्य की सबसे ऊंची चोटी है।
  • इसका नाम जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के नाम पर रखा गया है।
  • यह झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित है।
  • जैन धर्म के लोगों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
  • स्थान और ऊंचाई
    • पारसनाथ शिखर गिरिडीह जिले के मधुबन क्षेत्र में स्थित है, जो छोटा नागपुर पठान का हिस्सा है।
    • इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 1365 मीटर (लगभग 4478 फीट) है, जो झारखंड की सभी चोटियों में सबसे अधिक है।
    • 24 तीर्थंकरों में से 20 ने मोक्ष प्राप्ति की मानी जाती है।​
  • धार्मिक महत्व
    • इसे 'सम्मेद शिखरजी' भी कहा जाता है, जो जैन तीर्थयात्रियों का प्रमुख केंद्र है।
    • चोटी तक पहुंचने के लिए लगभग 14 किलोमीटर लंबा ट्रेक या हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं
    • जिसमें मंदिर और कुंड शामिल हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं
    • खासकर सूर्योदय-सूर्यास्त के समय प्रकृति का मनोरम दृश्य देखने।​​
  • पर्यटन आकर्षण
    • यह स्थान ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है
    • जहां हरे-भरे जंगल, झरने और बादलों भरी चोटियां रोमांच प्रदान करती हैं।
    • पारसनाथ रेलवे स्टेशन से आसानी से पहुंचा जा सकता है
    • रांची से सड़क मार्ग से करीब 190 किलोमीटर दूर है।
    • बरसात में बादलों को छूने जैसा अनुभव होता है, लेकिन पूरे वर्ष घूमने लायक है।​​

13. कलसूबाई शिखर निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य में स्थित है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) महाराष्ट्र
Solution:
  • महाराष्ट्र की सबसे ऊंची पर्वत चोटी कलसूबाई शिखर (ऊंचाई-1646 मीटर) है।
  • यह शिखर पश्चिमी घाट श्रृंखला का भाग है।
  • कलसूबाई शिखर भारत के महाराष्ट्र राज्य में स्थित है।
  • यह पश्चिमी घाट का हिस्सा है और महाराष्ट्र का सबसे ऊंचा शिखर माना जाता है।​
  • स्थान और ऊंचाई
    • कलसूबाई शिखर अहमदनगर जिले के अकोले तालुका में बारी गाव के पास स्थित है
    • जो नासिक और अहमदनगर जिलों की सीमा पर है।
    • इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 1646 मीटर (5400 फीट) है
    • जिसके कारण इसे "महाराष्ट्र का एवरेस्ट" कहा जाता है।
    • यह सह्याद्री पर्वत श्रृंखला का उच्चतम बिंदु है
    • कालसूबाई-हरिश्चंद्रगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है।​​
  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
    • शिखर पर कालसूबाई देवी का मंदिर स्थित है
    • जिसकी कथा एक आदिवासी लड़की कालसू से जुड़ी है
    • जो भगवान विष्णु की भक्त थी। लोककथाओं के अनुसार, कालसू ने अपनी तपस्या से इस पहाड़ को ऊंचा बनाया।
    • यह स्थान धार्मिक यात्रा और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध है
    • जहां प्राचीन गुफाएं, जलकुंड और कोरीव संरचनाएं मिलती हैं।​​
  • ट्रेकिंग और पर्यटन
    • ट्रेक की दूरी लगभग 6.6 किलोमीटर है, जिसमें लोहे की सीढ़ियां, चट्टानी रास्ते और झरने शामिल हैं; यह मध्यम से कठिन स्तर का है।
    • मुंबई से 200 किमी और पुणे से 170 किमी दूर, यह वर्ष भर घूमा जा सकता है, लेकिन मानसून में सबसे सुंदर होता है।
    • सूर्योदय-सूर्यास्त के दृश्य और हरी-भरी घाटियां इसे साहसिक पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाती हैं।​​

14. धिनोधर पहाड़ियां (Dhinodhar Hills) किस भारतीय राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में स्थित हैं? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गुजरात
Solution:
  • धिनोधर पहाड़ियां भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित हैं। ये पहाड़ियां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों का घर हैं।
  • स्थान और भौगोलिक विवरण
    • धिनोधर पहाड़ियां (Dhinodhar Hills) गुजरात के कच्छ क्षेत्र में फैली हुई हैं
    • जो भुज से लगभग 75 किमी दूर हैं। इनकी ऊंचाई करीब 386 मीटर है
    • ये एक प्राचीन ज्वालामुखी प्लग हैं, जो गोंडवानालैंड के टूटने से जुड़ी अवसादी चट्टानों से बनी हैं।
    • ये पहाड़ियां डायनासोर काल की कहानी बयां करती हैं और भूवैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।​​
  • सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
    • यह स्थान संत धोरमनाथ के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है
    • जिन्होंने 12वीं शताब्दी में यहां 12 वर्षों तक तपस्या की थी।
    • मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है।
    • आसपास का थान मठ भी आध्यात्मिक शांति और योग के लिए जाना जाता है।​​
  • पर्यटन आकर्षण
    • ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए चुनौतीपूर्ण ट्रेल्स उपलब्ध हैं
    • विशेषकर मानसून के बाद जब क्षेत्र हरा-भरा हो जाता है।
    • विविध वन्यजीव, औषधीय पौधे और लुभावने दृश्य इसे लोकप्रिय बनाते हैं।
    • आसपास के गांव और रण ऑफ कच्छ इसे एक दिन की यात्रा के लिए आदर्श बनाते हैं।​​
  • अन्य तथ्य
    • कुछ स्रोतों में भावनगर जिले का उल्लेख है, लेकिन अधिकांश विश्वसनीय जानकारी कच्छ की पुष्टि करती है।
    • यह क्षेत्र वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य का घर है।​

15. निम्नलिखित में से कौन-सा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे ऊंचा शिखर है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) सैडल
Solution:
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे ऊंचा शिखर सैडलपीक (सैडल) है।
  • यह भारत के अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उत्तरी अंडमान द्वीप पर स्थित है।
  • दस डिग्री चैनल अंडमान द्वीपसमूह को निकोबार से अलग करता है।
  • देवमाली चोटी भारत के ओडिशा के कोरापुट जिले में स्थित है। कलसूबाई चोटी महाराष्ट्र राज्य में स्थित है।
  • सैडल पीक (Saddle Peak) अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे ऊंचा शिखर है।
  • यह उत्तर अंडमान द्वीप पर स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 732 मीटर है।​
  • भौगोलिक स्थिति
    • सैडल पीक बंगाल की खाड़ी में अंडमान द्वीपसमूह का सर्वोच्च बिंदु है, जो दिगलीपुर से मात्र 10 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
    • यह सैडल पीक नेशनल पार्क से घिरा हुआ है, जो 32.54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है
    • नम उष्णकटिबंधीय वनों तथा सदाबहार वनों से भरा है।
    • इसकी ढलानों से अंडमान की एकमात्र प्रमुख नदी कल्पोंग (Kalpong) नदी निकलती है।​​
  • जैव विविधता और महत्व
    • यह क्षेत्र पक्षियों, तितलियों, समुद्री कछुओं के घोंसलों और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। नेशनल पार्क 1979 में स्थापित हुआ था
    • ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय है, जो लामिया बे से शुरू होता है।
  • यह पर्यावरणीय संरक्षण का प्रतीक है और डिगलीपुर के समुद्री जीवन तथा वनों से जुड़ा है।​​
  • अन्य प्रमुख चोटियां
    • अंडमान-निकोबार में अन्य उल्लेखनीय शिखरों में माउंट थुइलर (ग्रेट निकोबार, 642 मीटर), माउंट डियावोलो (मध्य अंडमान, 515 मीटर) और माउंट कोयोब (दक्षिण अंडमान, 460 मीटर) शामिल हैं।
    • हालांकि, सैडल पीक ही सबसे ऊंचा है। 10 डिग्री चैनल अंडमान को निकोबार से अलग करता है।​
  • पर्यटन और पहुंच
    • ट्रेकिंग प्रेमी लामिया बे बीच से 45 मिनट की ड्राइव के बाद चढ़ाई शुरू कर सकते हैं।
    • क्षेत्र संतरे, चावल और वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है।
    • निकोबार द्वीपों में ऊंचाई कम है, इसलिए सैडल पीक पूरे समूह का शीर्ष है।​​

16. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे पुराना परमाणु ऊर्जा संयंत्र है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) तारापुर
Solution:
  • भारत का सबसे पुराना परमाणु ऊर्जा संयंत्र तारापुर में है। तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन महाराष्ट्र में स्थित है।
  • यह भारत की पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना के रूप में शुरू हुई। परमाणु ऊर्जा संयंत्र, एक थर्मल पॉवर स्टेशन है
  • जो परमाणु विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया के माध्यम से विद्युत का उत्पादन करता है।
  • यह महाराष्ट्र के तारापुर में स्थित है और 28 अक्टूबर 1969 को चालू किया गया था
  • परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) द्वारा संचालित यह संयंत्र देश का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है.​
  • स्थापना और इतिहास
    • तारापुर संयंत्र का निर्माण 1960 के दशक में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते के तहत हुआ
    • जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक और बेचतेल ने भूमिका निभाई. 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौजूदगी में अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए
    • अमेरिका ने 30 वर्षों तक संवर्धित यूरेनियम की आपूर्ति का वादा किया
    • हालांकि 1974 के परमाणु परीक्षण के बाद यह रुकी
    • संयंत्र की शुरुआत 210 मेगावाट क्षमता से हुई जो अब बढ़कर 1400 मेगावाट हो गई है.​
  • तकनीकी विवरण
    • यहां चार इकाइयां हैं: पहली दो उबलते पानी रिएक्टर (BWR) हैं, प्रत्येक 160-210 मेगावाट की, जबकि इकाई 3 और 4 दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) हैं
    •  तकनीक में पानी शीतलक और मंदक दोनों का काम करता है, जो ऊर्जा उत्पादन को सरल बनाता है
    • कुल मिलाकर, यह भारत के परमाणु कार्यक्रम का प्रतीक है
    • जो डॉ. होमी भाभा के नेतृत्व में 1950 के दशक से शुरू हुआ.​
  • स्थापना का प्रारंभ
    • केंद्र का निर्माण भारत-अमेरिका समझौते के तहत 1961 में शुरू हुआ, जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक (GE) और बेचतेल ने प्रमुख भूमिका निभाई।
    • 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की उपस्थिति में अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए
    • अमेरिका ने संवर्धित यूरेनियम की 30 वर्षों तक आपूर्ति का वादा किया।
    • हालांकि 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद यह आपूर्ति रुक गई, जिससे भारत को स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर देना पड़ा।​
  • चालू होना और विस्तार
    • 28 अक्टूबर 1969 को इकाई 1 और 2 (प्रत्येक 210 मेगावाट की उबलते पानी रिएक्टर या BWR) ग्रिड से जुड़ीं, जो भारत में परमाणु बिजली उत्पादन की शुरुआत थी।
    • बाद में 2005 और 2006 में इकाई 3 (540 मेगावाट) और 4 (उसी क्षमता की PHWR) जोड़ी गईं, जिससे कुल क्षमता 1400 मेगावाट हो गई।
    • 2019 में इकाई 1 और 2 ने 50 वर्ष का सुरक्षित संचालन पूरा किया, जो विश्व के सबसे पुराने सक्रिय रिएक्टरों में से हैं।​
  • महत्वपूर्ण घटनाएं
    • यह केंद्र डॉ. होमी भाभा के परमाणु कार्यक्रम का प्रतीक है, जो 1950 के दशक से चला।
    • कम लागत वाली बिजली (प्रति यूनिट लगभग 2 रुपये) प्रदान करने के कारण यह महत्वपूर्ण है।
    • सुरक्षा उन्नयन और जीवन विस्तार कार्यक्रमों से यह आज भी कुशलता से चल रहा है।​

17. हिमालय के किस भाग में इसकी दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी कंचनजंगा स्थित है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय
Solution:
  • हिमालय के दार्जिलिंग और सिक्किम भाग में इसकी दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी कंचनजंगा स्थित है।
  • कंचनजंगा की ऊंचाई लगभग 8598 मी. है। वर्ष 2016 में यूनेस्को द्वारा कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को मिश्रित वर्ग के अंतर्गत विश्व धरोहर स्थल के रूप में संरक्षित किया गया।
  • हिमालय का कौनसा भाग?
    • कंचनजंगा “पूर्वी हिमालय” (Eastern Himalaya) में स्थित है, जो हिमालय पर्वत तंत्र का पूर्वी भाग माना जाता है।​
    • यह क्षेत्र तमूर नदी (पश्चिम) और तीस्ता नदी (पूर्व) के बीच फैले ऊँचे पर्वतीय भाग “कंचनजंगा हिमाल” के रूप में जाना जाता है
    • जो पूर्वी हिमालय की ही एक उप‑श्रृंखला है।​
  • भौगोलिक स्थिति और ऊँचाई
    • कंचनजंगा की ऊँचाई लगभग 8,586 मीटर (28,169 फीट) है
    • जिससे यह विश्व की तीसरी और हिमालय की दूसरी सबसे ऊँची चोटी बनती है।​
    • यह दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) से लगभग 74 किमी उत्तर‑पश्चिमोत्तर दिशा में, सिक्किम और पूर्वी नेपाल की सीमा पर, ग्रेट हिमालय रेंज का हिस्सा बनकर स्थित है।​
  • किस राज्य / क्षेत्र में स्थित?
    • राजनीतिक दृष्टि से कंचनजंगा भारत के सिक्किम राज्य और नेपाल की सीमा पर स्थित है और भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी मानी जाती है।​
    • भारत की तरफ से यह सिक्किम के उत्तरी भाग से दिखाई देती है
    • जबकि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों से भी साफ मौसम में इसका अत्यंत भव्य दृश्य मिलता है।​
  • पर्वत संरचना और हिमनद
    • कंचनजंगा शिखर‑समूह (मासिफ) का आकार एक विशालकाय सलीब (क्रॉस) जैसा माना जाता है
    • जिसकी भुजाएँ उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की ओर फैली हैं।​
    • इन भुजाओं से चार प्रमुख हिमनद बहते हैं – ज़ेमू (पूर्वोत्तर), तलुंग (दक्षिण‑पूर्व), यालुंग (दक्षिण‑पश्चिम) और कंचनजंगा ग्लेशियर (उत्तर‑पश्चिम), जो पूर्वी हिमालय की हिमनदीय प्रणाली को समृद्ध करते हैं।​
  • धार्मिकसांस्कृतिक महत्व
    • कंचनजंगा” नाम तिब्बती मूल के शब्द से निकला है, जिसका अर्थ लगभग “बर्फ के पाँच खजाने” या “बर्फ के पाँच भंडार” जैसा माना जाता है
    • जो इसकी पाँच प्रमुख चोटियों की ओर संकेत करता है।​
    • स्थानीय समुदायों, विशेषकर सिक्किम और पूर्वी नेपाल के निवासियों के लिए कंचनजंगा एक पवित्र पर्वत है
    • इसलिए इसकी चोटी पर चढ़ाई के संदर्भ में भी कई सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं।​

18. निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है? [MTS (T-I) 11 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) नंदा देवी
Solution:
  • दिए गए विकल्प में भारत की सबसे ऊंची पर्वत चोटी नंदा देवी (ऊंचाई 7816 मीटर) है।
  • भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कंचनजंगा है।
  • यह हिमालय की दूसरी सबसे ऊँची चोटी होने के साथ ही भारत की सर्वोच्च शिखर मानी जाती है।​
  • ऊँचाई और वैश्विक स्थिति
    • कंचनजंगा की ऊँचाई 8,586 मीटर (28,169 फीट) है
    • जो इसे विश्व की तीसरी सबसे ऊँची चोटी बनाती है—माउंट एवरेस्ट और K2 के बाद।​
    • भारतीय क्षेत्र में यह पूरी तरह से स्थित सबसे ऊँची चोटी है
    • हालाँकि K2 (8,611 मीटर) भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा है
    • लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (बाल्टिस्तान) में पड़ता है।​
  • स्थान और भौगोलिक विवरण
    • यह पूर्वी हिमालय में सिक्किम राज्य (भारत) और नेपाल की सीमा पर स्थित है।​
    • कंचनजंगा हिमाल नामक पर्वत समूह का मुख्य शिखर है
    • जो तमूर और तीस्ता नदियों के बीच फैला हुआ है
    • दार्जिलिंग से उत्तर-पश्चिम दिशा में दिखाई देता है।​
  • हिमनद और संरचना
    • इसके चार प्रमुख हिमनद—ज़ेमू, तलुंग, यालुंग और कंचनजंगा ग्लेशियर—इस क्षेत्र को हिमनदीय रूप से समृद्ध बनाते हैं।​
    • शिखर का आकार क्रॉस जैसा है, जिसमें पाँच प्रमुख चोटियाँ हैं, जिससे नाम "बर्फ के पाँच खजाने" पड़ा।​
  • सांस्कृतिक महत्व और चढ़ाई
    • सिक्किम और नेपाल के निवासियों के लिए पवित्र, चढ़ाई में धार्मिक प्रतिबंध हैं—शिखर तक नहीं पहुँचना।​
    • पहली सफल चढ़ाई 1955 में ब्रिटिश टीम ने की, और यह कठिन चोटियों में गिनी जाती है।​

19. निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ियां पश्चिमी घाट का हिस्सा हैं? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अन्नामलाई पहाड़ियां
Solution:
  • अन्नामलाई पहाड़ियां पश्चिमी घाट का हिस्सा हैं। पश्चिमी घाट की लंबाई लगभग 1500 किमी. है।
  • इसे सह्याद्रि के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी अन्नामलाई पहाड़ी का भाग है।
  • अन्नामलाई के दक्षिण में कार्डामम (इलायची) की पहाड़ियां हैं।
  • प्रमुख पहाड़ियाँ
    • पश्चिमी घाट की उत्तरी भाग में सतमाला, बालाघाट, अजंता और हरिश्चंद्रघाट जैसी पहाड़ियाँ शामिल हैं
    • जबकि दक्षिणी भाग में अनामलाई (अन्नामलाई), नीलगिरि, पालनी और कार्डमम पहाड़ियाँ प्रमुख हैं।
    • अनामलाई पहाड़ियों को हाथी पहाड़ी भी कहा जाता है, और इनकी सर्वोच्च चोटी अनामुडी (2,695 मीटर) दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
    • नीलगिरि पहाड़ियाँ पश्चिमी और पूर्वी घाटों का संगम स्थल हैं।​
  • क्षेत्रीय विस्तार
    • उत्तरी पश्चिमी घाट: सतमाला (गुजरात-महाराष्ट्र), बालाघाट (मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र, मैंगनीज के लिए प्रसिद्ध), अजंता (महाराष्ट्र, गुफाओं के लिए जाना जाता)।​
    • मध्य भाग: हरिश्चंद्रघाट (महाराष्ट्र, कलसूबाई चोटी सबसे ऊँची)।​
    • दक्षिणी भाग: अनामलाई (केरल-तमिलनाडु), पालनी, इलायची पहाड़ियाँ, और नीलगिरि (कर्नाटक-तमिलनाडु)।​
  • भौगोलिक विशेषताएँ
    • पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढलान तीव्र (45 डिग्री) है, जिससे नदियाँ तेज प्रवाह वाली V-आकार घाटियाँ बनाती हैं
    • जबकि पूर्वी ढलान मंद है और डेल्टा निर्माण होता है। थाल घाट, भोर घाट और पाल घाट जैसे दर्रे यातायात के लिए महत्वपूर्ण हैं। औसत ऊँचाई 1,000-1,300 मीटर है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • यहाँ 5,000 से अधिक फूलों की प्रजातियाँ, 508 पक्षी प्रजातियाँ और अनगिनत उभयचर पाए जाते हैं।
    • प्रसिद्ध हिल स्टेशन जैसे माथेरान, महाबलेश्वर, कोडागु इसी श्रृंखला में हैं।
    • नोट: खासी हिल्स पूर्वोत्तर भारत (मेघालय) में हैं और पश्चिमी घाट का हिस्सा नहीं।​

20. निम्नलिखित में से कौन-सा तमिलनाडु का सबसे ऊंचा शिखर है? [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) दोद्दाबेटा
Solution:
  • तमिलनाडु का सबसे ऊंचा शिखर दोद्दाबेटा है। यह भारत के पश्चिमी घाट की पर्वतमाला की एक चोटी है।
  • यह तमिलनाडु राज्य के नीलगिरि जिले में नीलगिरि पर्वत की सबसे ऊंची चोटी है।
  • डोड्डाबेट्टा तमिलनाडु का सबसे ऊंचा शिखर है। यह नीलगिरि पर्वतमाला में स्थित है
  • इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2,637 मीटर है। यह ऊटी शहर के पास है
  • जो तमिलनाडु के नीलगिरि जिले का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।​
  • भौगोलिक स्थिति
    • डोड्डाबेट्टा नीलगिरि पहाड़ियों का हिस्सा है, जो पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण भाग हैं।
    • यह चोटी तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल राज्यों की सीमा पर फैली नीलगिरि श्रृंखला की सर्वोच्च बिंदु है।
    • ऊटी से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर होने के कारण यह आसानी से पहुंच योग्य है।​
  • ऊंचाई और महत्व
    • इसकी ऊंचाई 2,637 मीटर होने से यह तमिलनाडु की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है।
    • यहां से नीलगिरि घाटी, केट्टी घाटी और आसपास के चाय बागानों का मनोरम दृश्य दिखता है।
    • पर्यटक टेलीस्कोप से कोयंबटूर मैदान तक देख सकते हैं।​
  • पर्यटन आकर्षण
    • डोड्डाबेट्टा पर एक पर्यटक केंद्र है, जहां पार्किंग, रेस्तरां और दृश्य प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।
    • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा अद्भुत होता है।
    • आसपास के स्थान जैसे ऊटी झील, बॉटनिकल गार्डन और केट्टी वैली व्यू इसे और आकर्षक बनाते हैं।​
  • पहुंचने का मार्ग
    • ऊटी से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
    • नीलगिरि पहाड़ी रेलवे भी निकट है।
    • सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम सुहावना रहता है।
    • ट्रेकिंग प्रेमी यहां हल्की चढ़ाई का आनंद ले सकते हैं।​