भौतिक विभाजन (भारत का भूगोल) (भाग-I)

Total Questions: 30

21. निम्नलिखित में से कौन-सी पश्चिम बंगाल की सबसे ऊंची चोटी है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) संदक्फू
Solution:
  • संदक्फू चोटी, पश्चिम बंगाल की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
  • यह पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले तथा नेपाल में स्थित है।
  • यह सिंगालीला पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आता है।
  • दार्जिलिंग जिले में सिंगालीला रिज पर स्थित है
  • इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 3,636 मीटर (11,930 फीट) है।
  • यह चोटी हिमालय की सिंगालीला रेंज का हिस्सा है, जो नेपाल की सीमा के निकट है।​
  • भौगोलिक स्थिति
    • संदक्फू सिंगालीला नेशनल पार्क के किनारे बसा है, जो जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है।
    • यह मनेभंजन गांव से शुरू होने वाले लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट का अंतिम बिंदु है।
    • आसपास के इलाके रोडोडेंड्रॉन फूलों और हिमालयी कोबरा लिली जैसे दुर्लभ पौधों के लिए प्रसिद्ध हैं।​
  • ऊंचाई और दृश्य
    • 3,636 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह चोटी दुनिया की पांच सबसे ऊंची चोटियों में से चार—माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू—का मनोरम दृश्य प्रदान करती है।
    • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय कंचनजंगा का नजारा यहां सबसे शानदार होता है।
    • इसे "ट्रेकर्स वंडरलैंड" भी कहा जाता है।​
  • पर्यटन आकर्षण
    • चोटी पर छोटा सा गांव है, जहां पर्यटकों के लिए हॉस्टल और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
    • सिंगालीला ट्रेक (लगभग 51 किमी) साहसिक प्रेमियों को आकर्षित करता है।
    • आसपास के स्थान जैसे तोंग्लू झील, फालूत और बुम्बू भी ट्रेकर्स के लिए प्रमुख पड़ाव हैं।​
  • पहुंच और सर्वोत्तम समय
    • दार्जिलिंग से जीप या ट्रेकिंग द्वारा 2-3 दिनों में पहुंचा जा सकता है।
    • सर्वोत्तम समय अक्टूबर-नवंबर और मार्च-मई है, जब मौसम साफ रहता है।
    • सर्दियों में बर्फबारी होती है, जो इसे और रोमांचक बनाती है।​

22. हिमालय की निम्नलिखित चोटियों का उनकी ऊंचाइयों के साथ सही-सही मिलान कीजिए। [CHSL (T-I) 06 जून, 2022 (II-पाली)]

चोटीऊंचाई (मीटर में)
1. माउंट एवरेस्टA. 8848
2. धौलागिरिB. 8172
3. कामेतC. 8078
4. अन्नपूर्णाD. 7756

Code :

1234
(a)BADC
(b)CBAD
(c)DCBA
(d)ABCD

 

Correct Answer: (a)
Solution:
  • यह प्रश्न आमतौर पर किसी सूची/विकल्पों (A, B, C, D…) के साथ पूछा जाता है
  • इसलिए सही मिलान बताने के लिए पहले वे विकल्प जानना ज़रूरी हैं।
  • अभी वे विकल्प दिए नहीं गए हैं, इसलिए सटीक “मिलान” (matching) बताना संभव नहीं है।
  • प्रमुख हिमालयी चोटियाँ और ऊँचाइयाँ
    • सामान्यतः प्रतियोगी परीक्षाओं में जिन हिमालयी शिखरों का मिलान ऊँचाइयों से कराया जाता है
    • वे इस प्रकार हैं (समुद्र तल से ऊँचाई लगभग):
    • माउंट एवरेस्ट (नेपाल–तिब्बत सीमा) – लगभग 8848.86 मीटर
    • के–2 / गॉडविन ऑस्टिन (काराकोरम, भारत–पाकिस्तान क्षेत्र) – लगभग 8611 मीटर
    • कंचनजंघा (भारत–नेपाल सीमा, सिक्किम क्षेत्र) – लगभग 8586 मीटर
    • ल्होत्से – लगभग 8516 मीटर
    • मकालू – लगभग 8485 मीटर
    • धौलागिरी – लगभग 8167 मीटर
    • मनास्लु – लगभग 8163 मीटर
    • नंगा पर्वत – लगभग 8126 मीटर
    • अन्नपूर्णा – लगभग 8091 मीटर
    • नंदा देवी (भारत, उत्तराखंड) – लगभग 7816–7817 मीटर
    • इन ऊँचाइयों का उपयोग कर प्रश्नों में दिये गये विकल्पों का सही मिलान किया जाता है।
  • मिलान कैसे किया जाता है (परीक्षा दृष्टि से)
    • “हिमालय की निम्नलिखित चोटियों का उनकी ऊँचाइयों के साथ सही-सही मिलान कीजिए” – तो आम तौर पर:
    • बाएँ स्तंभ में शिखर (जैसे: माउंट एवरेस्ट, धौलागिरी, अन्नपूर्णा, नंदा देवी आदि)
    • दाएँ स्तंभ में ऊँचाइयाँ (जैसे: 8848.86 m, 8167 m, 8091 m, 7816 m आदि)
  • फिर आप निम्न आधार पर मिलान करते हैं:
    • माउंट एवरेस्ट → 8848.86 मीटर
    • धौलागिरी I → 8167 मीटर
    • अन्नपूर्णा I → 8091 मीटर
    • नंदा देवी → लगभग 7816–7817 मीटर
  • इसी प्रकार यदि विकल्पों में कंचनजंघा, के–2, मकालू, ल्होत्से दिए हों तो:
    • के–2 → 8611 मीटर
    • कंचनजंघा → 8586 मीटर
    • ल्होत्से → 8516 मीटर
    • मकालू → 8485 मीटर
  • उपयोगी तथ्य (GK के लिए)
    • विश्व की सबसे ऊँची चोटी – माउंट एवरेस्ट (हिमालय की महालंगुर श्रेणी)
    • विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी – के–2 (काराकोरम क्षेत्र, प्रायः हिमालय के व्यापक पर्वत तंत्र से जोड़ा जाता है)
    • भारत में स्थित सर्वोच्च चोटी (भारत की भौगोलिक सीमा के अंदर) – कंचनजंघा
    • केवल भारत की सीमा के भीतर सर्वोच्च चोटी – नंदा देवी
  • आप क्या करें
    • कृपया अपना पूरा प्रश्न या विकल्प साझा करें, जैसे:
    • बाएँ तरफ़ दिए शिखरों के नाम
    • दाएँ तरफ़ दी गई ऊँचाइयाँ (या A, B, C, D जैसे विकल्प)

23. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्लेशियर जम्मू और कश्मीर में स्थित नहीं है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) मिलम
Solution:
  • मिलम हिमनद (ग्लेशियर) जम्मू और कश्मीर में स्थित नहीं है। यह भारत के उत्तराखंड राज्य में पाया जाता है।
  • शेष तीनों हिमनद (ग्लेशियर) जम्मू और कश्मीर में स्थित हैं।
  • जम्मू और कश्मीर में कई प्रमुख ग्लेशियर स्थित हैं, लेकिन प्रश्न में दिए गए विकल्पों (जैसे सियाचिन, बाल्टोरो, हिस्पर, बियाफो आदि) में से आमतौर पर गंगोत्री ग्लेशियर वह है
  • जो जम्मू-कश्मीर में स्थित नहीं है, क्योंकि यह उत्तराखंड में भागीरथी नदी का उद्गम स्थल है।​​
  • जम्मू-कश्मीर के प्रमुख ग्लेशियर
    • जम्मू-कश्मीर (विशेषकर काराकोरम पर्वत श्रेणी में) में सियाचिन, बाल्टोरो, हिस्पर, बियाफो और सासामी जैसे ग्लेशियर प्रमुख हैं।
    • सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र वाला ग्लेशियर है, जो नुब्रा घाटी में स्थित है
    • इसकी लंबाई लगभग 75 किमी है। बाल्टोरो ग्लेशियर 62 किमी लंबा है
    • यह श्योक नदी को जल प्रदान करता है, जबकि हिस्पर और बियाफो ग्लेशियर भी इसी क्षेत्र में हैं।​​
  • गंगोत्री ग्लेशियर की स्थिति
    • गंगोत्री ग्लेशियर हिमालय की गंगोत्री श्रेणी में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है
    • जो जम्मू-कश्मीर से सैकड़ों किलोमीटर दूर है। यह गंगा नदी का मुख्य उद्गम स्थल है
    • भारत का सबसे बड़ा ग्लेशियर माना जाता है (लंबाई करीब 30 किमी)। यह कश्मीर के काराकोरम या पीर पंजाल क्षेत्र से पूरी तरह अलग है
    • इसलिए प्रश्न के संदर्भ में यह जम्मू-कश्मीर में नहीं आता।​
  • अन्य संभावित विकल्प
    • यदि विकल्पों में कोलाहोई, थाजीवास या माचोई जैसे ग्लेशियर शामिल हैं, तो वे कश्मीर घाटी में हैं
    • लेकिन गंगोत्री, अमरगंगा या छोटा शिगरी (हिमाचल प्रदेश) जैसे बाहर के ग्लेशियर को बाहर किया जा सकता है।
    • सियाचिन पर भारत-पाक विवाद है, लेकिन यह भौगोलिक रूप से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा ही है।
    • कुल मिलाकर, गंगोत्री सबसे स्पष्ट उत्तर है जो जम्मू-कश्मीर से बाहर है।​

24. भारत का सबसे ऊंचा शिखर निम्नलिखित में से कौन-सा है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कंचनजंगा
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में भारत में हिमालय की सबसे ऊंची पर्वत चोटी कंचनजंगा (ऊंचाई 8598 मीटर) है।
  • कंचनजंगा भारत में हिमालय की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।
  • भारत में हिमालय की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट गाडविन ऑस्टिन या के-2 है।
  • इस पर्वत चोटी की समुद्रतल से ऊंचाई 8611 मीटर है।
  • K2 की विशेषताएं
    • K2 दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा शिखर है
    • जो पाक-अधिकृत कश्मीर (बाल्टिस्तान) और चीन (शिनजियांग) की सीमा पर स्थित है
    • लेकिन भारत इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
    • इसकी चढ़ाई बेहद कठिन है, जिसे 'सैवेज माउंटेन' कहा जाता है
    • पहले सफल आरोहण 1954 में इतालवी पर्वतारोही अचिले कंपानोनी ने किया।
    • यह काराकोरम रेंज का हिस्सा है, जहां मौसम अत्यंत कठोर रहता है।​
  • अन्य प्रमुख शिखरों से तुलना
    • कंचनजंघा (8586 मीटर) भारत का दूसरा सबसे ऊंचा शिखर है
    • जो सिक्किम-नेपाल सीमा पर हिमालय में स्थित है और दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा शिखर माना जाता है।
    • नंदा देवी (7816 मीटर) उत्तराखंड में पूरी तरह भारत के अंदर स्थित सबसे ऊंची चोटी है
    • जबकि साल्टोरो कांगड़ी (7742 मीटर) सियाचिन क्षेत्र में है।​
  • विवाद और महत्व
    • कुछ स्रोत कंचनजंघा को भारत का सबसे ऊंचा शिखर मानते हैं
    • क्योंकि K2 पर PoK विवाद है, लेकिन भौगोलिक रूप से K2 भारत का सर्वोच्च है। यह पर्यावरणीय महत्व रखता है
    • क्योंकि इससे कई ग्लेशियर जैसे सियाचिन निकलते हैं, और पर्वतारोहण के लिए चुनौतीपूर्ण स्थल है।​

25. ....... पूर्वी घाट का सबसे ऊंचा शिखर है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) महेन्द्रगिरि
Solution:
  • महेंद्रगिरि पूर्वीघाट की सबसे ऊंची (1501 मीटर) चोटी है।
  • खासी, जयंतिया एवं गारो पहाड़ियां मेघालय राज्य में स्थित हैं।
  • अरावली पर्वतमाला का विस्तार मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, हरियाणा एवं दिल्ली तक है, जो कि अवशिष्ट पर्वत का उदाहरण है।
  • पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर महेंद्रगिरि है।
  • यह ओडिशा राज्य के गजपति जिले में स्थित है
  • स्थान और भौगोलिक महत्व
    • महेंद्रगिरि पूर्वी घाट की प्रमुख चोटियों में से एक है
    • जो बंगाल की खाड़ी के समानांतर असंतत पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है।
    • यह ओडिशा से आंध्र प्रदेश तक फैली पूर्वी घाटों में उत्तरी छोर पर स्थित है
    • नल्लामाला, पालकोंडा तथा जावड़ी हिल्स जैसी अन्य श्रेणियों से जुड़ा हुआ है।
    • पर्वत की चोटी धार्मिक महत्व रखती है
    • जहाँ प्राचीन महेंद्रगिरि मंदिर स्थित है, जो रामायण काल से जुड़ा माना जाता है।​
  • ऊँचाई विवाद
    • कुछ स्रोतों में झिंडागढ़ा (1,690 मीटर, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में) या अरमाकोंडा (1,620 मीटर) को सर्वोच्च बताया जाता है
    • लेकिन अधिकांश मानक संदर्भ जैसे NCERT और प्रतियोगी परीक्षा सामग्री महेंद्रगिरि को ही पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर मानते हैं।
    • यह विवाद ऊँचाई मापन और सीमा निर्धारण पर आधारित है, क्योंकि पूर्वी घाट असंतत हैं और नदियों द्वारा कटे हुए।​
  • वन्यजीव और पर्यावरण
    • महेंद्रगिरि क्षेत्र जैव-विविधता हॉटस्पॉट है
    • जहाँ उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन, चन्दन के वृक्ष और विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं।
    • यहाँ महेंद्रगिरि हाथी अभयारण्य है
    • जो एशियाई हाथी, बाघ और दुर्लभ पक्षियों का घर है।
    • पर्यटन के लिए ट्रेकिंग और धार्मिक स्थल आकर्षण हैं
    • लेकिन वनों की कटाई एक चुनौती बनी हुई है।​

26. निम्नलिखित में से कौन भारत में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के सभी दूनों में सबसे बड़ा है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) देहरादून
Solution:
  • देहरादून भारत में शिवालिक पर्वत श्रृंखला की सबसे बड़ी दून (घाटी) है। यह उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
  • देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है।
  • यह शहर दून घाटी में स्थित है, जो शिवालिक में सबसे बड़ा दून है।
  • शिवालिक और दून क्या हैं
    • शिवालिक हिमालय की सबसे बाहरी, निम्न और युवा श्रृंखला है
    • जिसकी ऊँचाई औसतन 900-1200 मीटर होती है।
    • इनकी उत्तरी ओर निम्न हिमालय और दक्षिणी ओर गंगा के मैदान के बीच चौरस घाटियाँ दून कहलाती हैं
    • जो तलछट से भरी देशांतरीय संरचनाएँ हैं।
    • ये दून कृषि के लिए उपजाऊ हैं और घग्गर से व्यास नदी तक फैले हुए हैं।​
  • प्रमुख दूनों की सूची
    • शिवालिक के मुख्य दून निम्न हैं:
    • देहरादून (सबसे बड़ा, उत्तराखंड में)​
    • पाटली दून​
    • कोटली दून​
    • जम्मू दून​
    • हरिके दून​
    • चौखंबा दून​
  • देहरादून की विशेषताएँ
    • देहरादून लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जो अन्य दूनों से बड़ा है।
    • यह शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच स्थित है
    • जहाँ गंगा की सहायक नदियाँ जैसे यमुना और गंगा इसे सींचती हैं।
    • यहाँ हरियाली, चाय बागान और वनस्पति उद्यान प्रसिद्ध हैं
    • साथ ही यह सैन्य और शैक्षिक केंद्र भी है।​

27. हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण ....... के टकराव से हुआ है। [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट
Solution:
  • हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण यूरेशियन प्लेट और भारतीय प्लेट के टकराव से हुआ है।
  • जिन स्थलों पर दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, वहां इतना अधिक दबाव पैदा होता है
  • उससे सतह पर विशाल सिलवटें पड़ जाती हैं, जिनसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं का निर्माण होता है।
  •  यह प्रक्रिया प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत पर आधारित है
  • जो लगभग 50-70 मिलियन वर्ष पूर्व शुरू हुई और आज भी जारी है।​​
  • निर्माण प्रक्रिया
    • भारतीय प्लेट अफ्रीकी प्लेट से अलग होकर उत्तर की ओर तेजी से बढ़ी, जिससे टेथिस महासागर बंद हो गया।
    • टकराव के दौरान समुद्री तलछट संपीड़ित होकर ऊपर उठी, जिससे फोल्ड पर्वत बने; माउंट एवरेस्ट जैसी चोटियाँ इसी प्राचीन समुद्री चूना पत्थर से बनी हैं।
    • यह संवहनीय सीमा पर हो रहा निरंतर दबाव हिमालय को प्रतिवर्ष कुछ मिलीमीटर ऊँचा कर रहा है।​​
  • चरणबद्ध विकास
  • हिमालय का निर्माण छह चरणों में हुआ:
    • चरण 1: 100 मिलियन वर्ष पूर्व टेथिस सागर का अवसादन।​
    • चरण 2: 71 मिलियन वर्ष पूर्व प्लेटों का प्रारंभिक टकराव।​
    • मध्य चरण: तलछट की ऊँचाई बढ़ना और प्रमुख शिखरों का उदय।​
    • अंतिम चरण: शिवालिक का निर्माण हिमालयी नदियों के अवसाद से।​
  • भूगर्भीय विशेषताएँ
    • इस टकराव से मुख्य सीमा फॉल्ट (MBF) और मुख्य केंद्रीय फॉल्ट (MCF) जैसे दोष रेखाएँ बनीं, जो भूकंपों का कारण हैं।
    • तिब्बती पठार यूरेशियन प्लेट के ऊपर उठने से बना, जबकि गंगा मैदान हिमालयी अपरदन से। हिमालय युवा फोल्ड पर्वत है
    • जिसमें अपरदन, हिमनदी क्षरण और भूकंपीय गतिविधियाँ निरंतर आकार बदल रही हैं।​​

28. हिमालय के सबसे उत्तरी भाग में स्थित श्रृंखला को ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) आंतरिक हिमालय
Solution:
  • हिमालय के सबसे उत्तरी भाग में स्थित श्रृंखला को आंतरिक हिमालय कहते हैं।
  • हिमालय को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है-वृहत/आंतरिक हिमालय या हिमाद्रि, लघु हिमालय या हिमाचल हिमालय और बाह्य हिमालय या शिवालिक हिमालय।
  • आंतरिक हिमालय लघु हिमालय की एक उप-श्रेणी है।
  • आंतरिक हिमालय महान हिमालय और बाह्य हिमालय के बीच स्थित है।
  • हिमाद्रि की विशेषताएँ
    • हिमाद्रि हिमालय की सबसे उत्तरी और आंतरिक श्रेणी है
    • जो लगभग 6,000 मीटर से अधिक ऊँची चोटियों वाली सतत पर्वतमाला बनाती है।
    • इसमें माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर), K2 (8,611 मीटर) और कंचनजंगा (8,586 मीटर) जैसी विश्व की सर्वोच्च चोटियाँ शामिल हैं।
    • यह श्रेणी मुख्य रूप से बर्फ से ढकी रहती है और ग्लेशियरों से भरी हुई है, जो इसे जलवायु अवरोध का रूप प्रदान करती है।​
  • हिमालय का विभाजन
    • हिमालय को सामान्यतः तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है: शिवालिक (बाहरी हिमालय), हिमाचल (मध्य हिमालय) और हिमाद्रि (वृहत हिमालय)।
    • हिमाद्रि सबसे उत्तर में स्थित है, जबकि शिवालिक सबसे दक्षिणी भाग है।
    • कुछ स्रोतों में परा-हिमालय या ट्रांस-हिमालय (जैसे कराकोरम) को चौथी उत्तरी श्रेणी माना जाता है
    • लेकिन मानक वर्गीकरण में हिमाद्रि को ही सबसे उत्तरी मुख्य श्रृंखला कहा जाता है।​
  • भौगोलिक और पारिस्थितिक महत्व
    • यह श्रेणी गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का स्रोत है, जिसमें गंगोत्री और यमुनोत्री ग्लेशियर प्रमुख हैं।
    • हिमाद्रि मध्य एशिया की ठंडी हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकती है तथा जैव विविधता को समर्थन देती है
    • जैसे बर्फीले तेंदुए और हिमालयी नीली भेड़।
    • भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से बनी यह श्रेणी अभी भी ऊँची हो रही है।​

29. निम्नलिखित में से क्या पश्चिमी घाट का एक हिस्सा नहीं है? [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) महादेव पहाड़ियां
Solution:
  • अन्नामलाई, नीलगिरि एवं इलायची पहाड़ियां पश्चिमी घाट का हिस्सा हैं।
  • अन्नामलाई तथा इलायची पहाड़ियां दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट के अंतर्गत तमिलनाडु और केरल में स्थित हैं
  • जबकि नीलगिरि पहाड़ियां तमिलनाडु, केरल तथा कर्नाटक में स्थित हैं।
  • महादेव पहाड़ियां, मध्य भारत के मध्य प्रदेश राज्य में पहाड़ियों की एक श्रेणी है। ये सतपुड़ा पर्वतमाला के उत्तरी भाग में स्थित हैं।
  • पश्चिमी घाट की मुख्य श्रेणियाँ
    • पश्चिमी घाट को सामान्यत: सह्याद्रि पर्वतमाला भी कहा जाता है
    • यह ताप्ती नदी के दक्षिण से लेकर कन्याकुमारी तक लगभग 1,600 किमी तक फैली एक निरंतर पर्वत श्रृंखला है।
    • इसमें उत्तर से दक्षिण की ओर कई प्रमुख उप-पर्वत मालाएँ और खंड शामिल माने जाते हैं, जैसे:
    • सतपुड़ा क्षेत्र से जुड़ी सतमाला, अजंता, बालाघाट, ग्वालिगढ़ जैसी श्रेणियाँ (अक्सर सह्याद्रि के विस्तार के रूप में पढ़ाई जाती हैं)
    • महाबलेश्वर आदि के आसपास की सह्याद्रि श्रृंखला
    • नीलगिरि पर्वतमाला, अन्नामलाई, पलनी, कार्डमम (एलगिरि/अगस्थ्यमाला के आस-पास की पहाड़ियाँ) आदि, जो दक्षिण में केरल–तमिलनाडु तक फैली हैं।
  • जो सामान्यत: पश्चिमी घाट का भाग नहीं
    • सिविल‑सेवा या प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः वे पर्वत या क्षेत्र “पश्चिमी घाट का भाग नहीं” कहे जाते हैं
    • जो या तो पूर्वी घाट में आते हैं या पूरी तरह अलग पर्वत प्रणाली के हैं।
    • उदाहरण के तौर पर (जब इन्हें विकल्पों में दिया जाता है, तो प्रायः सही उत्तर यही होते हैं):
    • अरावली पर्वतमाला – यह उत्तर‑पश्चिम भारत (राजस्थान आदि) की प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, पश्चिमी घाट से जुड़ी नहीं मानी जाती।
    • विंध्याचल/विंध्य पर्वत – यह मध्य भारत में पूर्व‑पश्चिम दिशा में फैली है, दक्कन के पठार का उत्तर किनारा बनाती है, पश्चिमी घाट का भाग नहीं।
    • राजमहल पहाड़ियाँ – झारखंड‑बिहार क्षेत्र की ये पहाड़ियाँ पूर्वी भारत में हैं, न पश्चिमी तट से जुड़ी हैं, न सह्याद्रि से।
    • शेवरॉय, जवादु, नल्लमला आदि – ये तमिलनाडु‑आंध्रप्रदेश आदि के पूर्वी घाट की श्रृंखलाएँ हैं, इसलिए “पश्चिमी घाट का हिस्सा नहीं” वाले प्रश्नों में अक्सर सही उत्तर बनती हैं।
  • ऐसे प्रश्न कैसे हल करें
    • जब प्रश्न में विकल्प हों, तो उत्तर निकालने के लिए यह तरीका अपनाया जा सकता है:
    • जो पर्वत श्रृंखला “अरब सागर के समानान्तर” महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु की ओर चलती है, उसे पश्चिमी घाट का भाग मानें।
  • जो पर्वत श्रृंखला
    • उत्तर‑पश्चिम (जैसे अरावली),
    • या मध्य भारत की “उत्तर सीमा” (जैसे विंध्य),
    • या पूर्वी तट/पूर्वी घाट (जैसे शेवरॉय, नल्लमला, पूर्वी घाट की अन्य श्रेणियाँ) से सम्बंधित हो, उसे पश्चिमी घाट से अलग मानें।
  • आप क्या कर सकते हैं
    • अगर प्रश्न आपके पास विकल्पों के साथ है (जैसे A, B, C, D), तो वे विकल्प यहाँ लिख दें।
    • तब ठीक‑ठीक बताया जा सकता है कि उन चार में से कौन‑सा “पश्चिमी घाट का हिस्सा नहीं है”
    •  साथ ही प्रत्येक विकल्प का संक्षिप्त भूगोल भी समझाया जा सकता है।

30. निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वत श्रृंखला भारत में सबसे पुरानी है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (I-पाली), स्टेनोग्राफर 14 सितंबर, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अरावली पर्वतमाला
Solution:
  • अरावली भारत की भौगोलिक संरचना में सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जो करीब 600-570 मिलियन वर्ष प्राचीन है। इसका निर्माण प्री कैम्ब्रियन काल में हुआ था।
  • भारत में सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली पर्वत श्रृंखला मानी जाती है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में भी “भारत की प्राचीनतम/सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला” का उत्तर अरावली ही दिया जाता है।​
  • सही विकल्प और मूल तथ्य
    • प्रश्न “निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वत श्रृंखला भारत में सबसे पुरानी है?” का सही उत्तर: अरावली पर्वत श्रृंखला।​
    • अरावली को न केवल भारत की, बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रेणियों में से एक माना जाता है।​​
  • अरावली का विस्तार और अवस्थिति
    • अरावली पर्वतमाला भारत के पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसका विस्तार मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैला हुआ है।​​
    • यह श्रृंखला सामान्य रूप से दक्षिण-पश्चिम (गुजरात/दक्षिण राजस्थान) से शुरू होकर उत्तर-पूर्व दिशा में दिल्ली के निकट तक जाती है
    • राजस्थान को लगभग उत्तर से दक्षिण दो भागों में बाँटती है।​​
  • ऊँचाई, प्रमुख शिखर और लंबाई
    • अरावली पर्वतमाला की कुल लंबाई लगभग 600–700 किलोमीटर के बीच मानी जाती है; कई स्रोत इसे लगभग 692 किलोमीटर के आसपास बताते हैं।​
    • अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है, जो माउंट आबू (सिरोही ज़िला, राजस्थान) में स्थित है
    • इसकी ऊँचाई लगभग 1722–1727 मीटर के आसपास बताई जाती है।​​
  • भूवैज्ञानिक दृष्टि से प्राचीनता
    • भूविज्ञान के अनुसार, अरावली प्राचीन काल में बने वलित पर्वत हैं
    • जो बाद में अत्यधिक क्षरण के कारण आज अवशिष्ट (Residual) या अवशिष्ट वलित पर्वत के रूप में दिखते हैं।​​
    • हिमालय जैसी नई पर्वत श्रृंखलाओं की तुलना में अरावली करोड़ों वर्ष अधिक पुरानी मानी जाती है
    • इसलिए भारत की “प्राचीनतम पर्वत श्रृंखला” के रूप में इसका उल्लेख किया जाता है, जबकि हिमालय को “सबसे नवीन” पर्वत श्रृंखला माना जाता है।​​
  • अन्य विकल्प क्यों नहीं
    • अक्सर इस प्रकार के प्रश्नों में अरावली के साथ सतपुड़ा, नीलगिरि, विन्ध्य, हिमालय आदि विकल्प दिए जाते हैं।​
    • हिमालय – यह प्लेट टकराव से अपेक्षाकृत हाल में बनी नव्य वलित पर्वत श्रेणी है, इसलिए इसे सबसे नया माना जाता है, न कि सबसे पुराना।​
    • सतपुड़ा, विन्ध्य, नीलगिरि – ये भी प्राचीन हैं, लेकिन भूवैज्ञानिक अध्ययन और सामान्य स्वीकृति के अनुसार “भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला” विशेष रूप से अरावली को ही कहा जाता है।​
    • यदि यह प्रश्न किसी परीक्षा के लिए है, तो निष्कर्ष स्पष्ट है: