Correct Answer: (c) राज्य सभा और लोक सभा, दोनों
Solution:- संसद की स्थायी समितियाँ (Standing Committees) वे समितियाँ होती हैं जो स्थायी प्रकृति की होती हैं और निरंतर कार्य करती हैं।
- ये समितियाँ आमतौर पर लोक सभा और राज्य सभा दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनी होती हैं।
- उदाहरण के लिए, वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समितियाँ (जैसे अनुमान समिति, लोक लेखा समिति) दोनों सदनों के सदस्यों को शामिल करती हैं
- जो संसद के व्यापक पर्यवेक्षण कार्य को सुनिश्चित करता है।
- लेकिन अधिकांश मामलों में ये सदन-विशिष्ट होती हैं, अर्थात् प्रत्येक सदन अपनी अलग स्थायी समितियाँ गठित करता है।
- ये समितियाँ संसद के नियमों के अनुसार स्थायी रूप से कार्य करती रहती हैं
- विधायी कार्यों, वित्तीय अनुमानों तथा सरकारी नीतियों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- स्थायी समितियों के प्रकार
- स्थायी समितियाँ मुख्यतः वित्तीय, विभागीय स्थायी समितियाँ, नियमित समितियाँ आदि श्रेणियों में विभाजित होती हैं।
- उदाहरणस्वरूप, लोकसभा में सार्वजनिक खाते समिति (22 सदस्य, सभी लोकसभा से), अनुमान समिति (30 सदस्य, सभी लोकसभा से) जैसी समितियाँ केवल निचले सदन के सदस्यों से बनती हैं।
- वहीं, याचिका समिति, विशेषाधिकार समिति और कार्य मंत्रणा समिति जैसी समितियाँ दोनों सदनों में अलग-अलग गठित होती हैं
- लोकसभा में 15 सदस्य और राज्यसभा में 10 सदस्य।
- विभागीय स्थायी समितियाँ (24 समितियाँ) दोनों सदनों के सदस्यों का मिश्रण होती हैं
- जिसमें प्रत्येक समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य होते हैं, जो मंत्रालयों के कार्यों की निगरानी करती हैं।
- ये समितियाँ विधेयकों की जांच, बजट अनुमानों पर विचार तथा नीतिगत मुद्दों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं।
- गठन की प्रक्रिया
- स्थायी समितियों का गठन संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अनुच्छेद 118(1) के तहत नियमावली के अनुसार किया जाता है।
- लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति इनके अध्यक्ष नियुक्त करते हैं, तथा सदस्यता दलीय अनुपात के आधार पर तय होती है।
- ये समितियाँ वर्ष भर कार्य करती रहती हैं और सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करती हैं।
- महत्वपूर्ण उदाहरण
- लोकसभा-विशिष्ट: अनुमान समिति—सरकारी व्यय की अर्थवत्ता जांचती है।
- दोनों सदनों में: विशेषाधिकार समिति—सदन एवं सदस्यों के अधिकारों की रक्षा।
ये समितियाँ संसद के जटिल कार्यभार को सुगम बनाती हैं - क्योंकि पूर्ण सदन में हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं।