1. वे प्रधानमंत्री की मर्जी तक पद पर बने रहते हैं।
2. वे संसद सदस्य के विशेषाधिकार के हकदार नहीं हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
Correct Answer: (b) न तो 1 नाही 2
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार, महान्यायवादी (अटार्नी जनरल) भारत सरकार को विधिक विषयों पर परामर्श देता है। यह भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी होता है तथा राष्ट्रपति के द्वारा न केवल नियुक्त किया जाता है, बल्कि राष्ट्रपति के ही प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है। इस तरह कथन 1 असत्य है। विदित हो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 88 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को संसद के सदनों की बैठकों में तथा संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, भाग लेने तथा बोलने का अधिकार है, परंतु वह मत देने का अधिकारी नहीं है। अनुच्छेद 105 (4) के अनुसार, जिन व्यक्तियों को इस संविधान के आधार पर संसद के किसी सदन या उसकी किसी समिति में बोलने का और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार है, उनके संबंध में संसद सदस्यों के विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियों संबंधी उपबंध समान रूप से लागू होते हैं। अतः कथन 2 भी असत्य है।