महान्यायवादी, महाधिवक्ता और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

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11. भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? [U.P.P.C.S. (Pre) 2023]

1. महान्यायवादी के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति होगी, जो कि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो।

2. महान्यायवादी को उनके पद से उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को । नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए -

Correct Answer: (d) केवल 1
Solution:संविधान के अनुच्छेद 76 के खंड (1) के अनुसार राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित किसी व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा। इस प्रकार कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 76 के खंड (4) के तहत महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, अतः राष्ट्रपति को ही उसे पदच्युत करने का अधिकार है। इस प्रकार कथन 2 सही नहीं है।

12. भारत के महान्यायवादी (Attorney General) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- [I.A.S. (Pre) 2000 U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2014]

1. वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।

2. उसमें वही योग्यताएं होनी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की होती हैं।

3. उसे संसद के किसी भी एक सदन का सदस्य होना चाहिए।

4. संसद द्वारा महाभियोग लगाकर उसे हटाया जा सकता है। निम्न कूट से उत्तर दीजिए-

Correct Answer: (a) 1 और 2
Solution:राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाने वाले महान्यायवादी में वही योग्यताएं होनी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए आवश्यक हैं। भारत का महान्यायवादी संसद का सदस्य नहीं होता है परंतु वह किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है बोल सकता है, भाग ले सकता है, किंतु अपना मत नहीं दे सकता (अनुच्छेद 88)। महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है [अनुच्छेद 76(4)], अतः राष्ट्रपति को उसे पदच्युत करने का अधिकार है। इस प्रकार कथन 1 एवं 2 सही हैं, जबकि कथन 3 एवं 4 गलत हैं।

13. भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [U.P.P.C.S. (Pre) 2020]

1. राष्ट्रपति किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करेगा, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अर्ह होगा।

2. महान्यायवादी इतना पारिश्रमिक प्राप्त करेगा, जो संसद अवधारित करे।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।

Correct Answer: (a) केवल 1 सही है।
Solution:भारत का महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। संविधान के अनुच्छेद 76(1) के अनुसार, राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित किसी व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा। अनुच्छेद 76(4) के अनुसार, महान्यायवादी, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा, जो राष्ट्रपति अवधारित करे।

14. भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- [U.P. R.O./A.R.O. (Pre) 2023]

1. वे प्रधानमंत्री की मर्जी तक पद पर बने रहते हैं।

2. वे संसद सदस्य के विशेषाधिकार के हकदार नहीं हैं।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :

Correct Answer: (b) न तो 1 नाही 2
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार, महान्यायवादी (अटार्नी जनरल) भारत सरकार को विधिक विषयों पर परामर्श देता है। यह भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी होता है तथा राष्ट्रपति के द्वारा न केवल नियुक्त किया जाता है, बल्कि राष्ट्रपति के ही प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है। इस तरह कथन 1 असत्य है। विदित हो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 88 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को संसद के सदनों की बैठकों में तथा संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, भाग लेने तथा बोलने का अधिकार है, परंतु वह मत देने का अधिकारी नहीं है। अनुच्छेद 105 (4) के अनुसार, जिन व्यक्तियों को इस संविधान के आधार पर संसद के किसी सदन या उसकी किसी समिति में बोलने का और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार है, उनके संबंध में संसद सदस्यों के विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियों संबंधी उपबंध समान रूप से लागू होते हैं। अतः कथन 2 भी असत्य है।

15. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - [I.A.S. (Pre) 2022]

1. भारत का महान्यायवादी और भारत का सॉलिसिटर जनरल ही सरकार के एकमात्र अधिकारी हैं, जिन्हें भारत की संसद की बैठकों में भाग लेने की अनुमति है।

2. भारत के संविधान के अनुसार, भारत का महान्यायवादी अपना त्यागपत्र दे देता है, जब वह सरकार जिसने उसको नियुक्त किया था इस्तीफा देती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct Answer: (d) न तो 1, न ही 2
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 के अंतर्गत भारत के महान्यायवादी को संसद की बैठकों में भाग लेने तथा बोलने का अधिकार है, किंतु उसे मत देने का अधिकार नहीं है। जबकि सॉलिसिटर जनरल को संसद की बैठकों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त नहीं है। अतः कथन 1 असत्य है। संविधान के अनुच्छेद 76 में वर्णित उपबंधों के अनुसार, महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है। हालांकि परंपरा के अनुसार, सामान्यतः सरकार (मंत्रिपरिषद) के इस्तीफा देने पर महान्यायवादी भी इस्तीफा दे देता है (क्योंकि वह उसी मंत्रिपरिषद की सलाह पर नियुक्त होता है), तथापि यह संविधान में उल्लिखित नहीं है। अतः कथन 2 भी असत्य है।

16. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [I.A.S. (Pre) 2013]

भारत का महान्यायवादी

1. लोक सभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है।

2. लोक सभा की किसी समिति का सदस्य हो सकता है।

3. लोक सभा में बोल सकता है।

4. लोक सभा में मतदान कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सही है / हैं?

Correct Answer: (c) 1,2 एवं 3
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।" इस प्रकार कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है।

17. निम्न में से किसे संसद की कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है? [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (a) भारत के महान्यायवादी
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।" इस प्रकार कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है।

18. निम्नलिखित में से किसे संसद को संबोधित करने का अधिकार प्राप्त है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (a) भारत के महान्यायवादी को
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।" इस प्रकार कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है।

19. पार्लियामेंट (संसद) के किसी सदन के सदस्य न होने पर भी सदन की बैठक में कौन भाग ले सकता है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003]

Correct Answer: (b) भारत का अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी)
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।" इस प्रकार कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है।

20. निम्नलिखित में से किसे संसद के दोनों सदनों में बोलने, अन्य कार्यवाहियों में सम्मिलित होने एवं किसी भी संसदीय कमेटी का सदस्य होने का अधिकार तो है, परंतु उसे वोट देने का अधिकार नहीं है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2003]

Correct Answer: (d) भारत के अटॉर्नी जनरल
Solution:संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।" इस प्रकार कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है।