महासागरीय धाराएं (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 13

1. दक्षिण चीन सागर निम्नलिखित में से किस महासागर का हिस्सा है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रशांत महासागर
Solution:
  • दक्षिणी चीन सागर चीन के दक्षिण में स्थित एक सीमांत सागर है, जो कि प्रशांत महासागर का एक भाग है।
  • भौगोलिक और आर्थिक रूप से, दक्षिण चीन सागर काफी महत्वपूर्ण है।
  • दक्षिण चीन सागर में 250 से अधिक छोटे द्वीप, प्रवाल द्वीप, खाड़ी, रेती, चट्टान और बालू रोधिका हैं।
  • विस्तृत विवरण
    • भौगोलिक स्थान: दक्षिण चीन सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक छोटा, लेकिन बड़ा समुद्री हिस्सा है।
    • यह चीन (मुख्यland और ताइवान), वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, Brunei, और कभी-कभी इंडोनेशिया से घिरा है।
    • क्षेत्रीय सीमाएं ऐसे निर्दिष्ट करती हैं कि पूर्व में फिलीपींस सागर, दक्षिण चीन सागर के दक्षिण-पश्चिमी भाग पर ब्रुनेई और मलेशिया के साथ लगती हैं
    • उत्तर में चीन/ताइवान तक पहुँचता है। यह सब मिलकर इसे प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से की एक प्रमुख शाखा बनाते हैं ।​
    • महासागर संबंधी वर्गीकरण: विश्व के महासागर संकल्पनाओं के अनुसार दक्षिण चीन सागर एक “सीमांत” या “खाड़ी-समुद्र” प्रकार का जल निकाय है
    • जो बड़ा प्रशांत महासागर के भीतर एक उपक्षेत्र के रूप में माना जाता है।
    • अधिक स्पष्टता के लिए इसे अक्सर प्रशांत महासागर का हिस्सा बताया जाता है, न कि स्वयं स्वतंत्र महासागर ।​
    • महत्व और भूमिका: यह जलपथ वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है
    • क्योंकि कई विविध देशों के नौवहन मार्ग इसी मार्ग से गुजरते हैं
    • इसका भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव भी व्यापक है
    • जहाँ क्षेत्रीय विवाद और प्रभुत्व के दावे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं।
    • उद्योग, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज़ से इसका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है ।​
    • सीमाओं और विवाद: दक्षिण चीन सागर पर अनेक देशों के बीच संप्रभुता के दावे रहते हैं
    • विशेषकर चीन, फिलीपींस, वियतनाम आदि—जो इस जल क्षेत्र को वैश्विक भू-राजनीति के केंद्रों में से एक बनाते हैं।
    • मिश्रित दावों के कारण प्रदर्शन और सुरक्षा गतिविधियाँ भी बढ़ी हैं, जबकि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण निर्णायक रहते हैं ।​
    • जलविज्ञान और संसाधन: यह जल निकाय समुद्री तेल/गैस के संभावित भंडारों और समुद्री संसाधनों के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
    • भौगोलिक और भौतिक विशेषताएँ इसे मरू-यौगिक (strategic chokepoint) बनाने में समर्थ हैं
    • जैसे मलक्का जलडमरूमध्य के साथ जुड़ाव के कारण इसके परिवहन मार्ग अत्यंत व्यस्त रहते हैं ।​
  • महत्वपूर्ण बिंदु
    • दक्षिण चीन सागर एक प्रशांत महासागर के भीतर का सीमांत जल निकाय है
    • इसीलिए यह “प्रशांत महासागर का हिस्सा” के रूप में जाना जाता है, न कि स्वतंत्र महासागर के रूप में ।​
    • वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर इसका आर्थिक, रणनीतिक और राजनयिक संदर्भ अत्यंत प्रबल है
    • क्योंकि यह बड़े व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों से जुड़ता है ।​
  • यदि चाहें, एक विस्तृत पैनल-वार विश्लेषण बना सकता हूँ जिसमें:
    • क्षेत्रीय देश-स्तर के दावे की क्रमबद्ध सूची
    • प्रमुख जल-मार्गों और शिपिंग ट्रैफिक के आँकड़े (हाल के वर्षों के)
    • विवादों के प्रमुख बिंदु और आर्थिक/ऊर्जागत प्रभाव
    • कानून के दृष्टिकोण से स्थिति का समझौता-या-समझौते की संभावनाएं

2. अरब सागर निम्नलिखित में से किस महासागर का विस्तार है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) हिंद महासागर
Solution:
  • अरब सागर, हिंद महासागर का विस्तार है। अरब सागर जिसका भारतीय नाम सिंधु सागर है
  • भारतीय उपमहाद्वीप और अरब क्षेत्र के बीच स्थित हिंद महासागर का हिस्सा है।
  • भौगोलिक सीमा
    • पूर्व सीमा: भारत के पश्चिमी तट, खासकर मलाबार/कर्नाटक–गोवा क्षेत्र से लेकर गुजरात के समुद्री किनारों तक।​
    • पश्चिम सीमा: अरब प्रायद्वीप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के सोमाली प्रायद्वीप के पास।​
    • उत्तर सीमा: ईरान एवं पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से से जुड़ाव; बहुधा फारस की खाड़ी के साथ एक जलडमरूमध्य के माध्यम से जुड़ता है।​
    • दक्षिण सीमा: हिन्द महासागर का शेष भाग; अरब सागर स्वयं हिन्द महासागर का एक क्षेत्रीय भाग माना जाता है।​
  • प्रमुख शाखाएँ
    • अदन की खाड़ी: अरब सागर को लाल सागर से connecting करने वाला जलमार्ग, बाब-अल-मान्देब जलडमरूमध्य के माध्यम से लाल सागर से जुड़ता है।​
    • ओमान की खाड़ी: अरब सागर को फारस की खाड़ी और अन्य भागों के साथ जोड़ती है, पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर फैला एक प्रमुख जलमार्ग।​
  • भौतिकी और जलविज्ञान
    • आकार: अरब सागर का क्षेत्रफल लगभग 3.86 मिलियन वर्ग किलोमीटर (लगभग 38 लाख) के आसपास है
    • आधुनिक स्रोतों में यही सामान्य संकीर्णता मिलती है।​
    • गहराई: औसत गहराई गहराई से धारणीय रूप से 2,000–4,000 मीटर के बीच होती है; अधिकतम गहराई जगह-जगह बढ़ जाती है।​
    • जल प्रवाह: मानसून और अरब सागर के जलवायु चक्र के कारण सोमाली धारा जैसे धाराओं का seasonal परिवर्तन होता है।​
  • ऐतिहासिक और व्यावहारिक महत्व
    • वैश्विक तेल एवं गैस मार्ग: अरब सागर से गुजरने वाले बहुत से पेमोडल मार्ग और तेल आपूर्ति रूट्स हिंद महासागर से मुख्य वैश्विक ट्रांज़िट रूट्स में से एक हैं।​
    • निष्कर्षण और तटवर्ती गतिविधियाँ: भारत, ईरान, ओमान, यूएई आदि देशों के साथ मरीन-इन्फ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट और शिपिंग के लिए महत्त्वपूर्ण।​
  • समानार्थी तथ्य (संक्षेप)
    • अरब सागर हिंद महासागर का पश्चिमी/उत्तर-पश्चिमी हिस्सा है और भारत-अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है।​
    • दो प्रमुख शाखाएँ: अदन की खाड़ी (लाल सागर से जुड़ती) और ओमान की खाड़ी (फारस की खाड़ी से जुड़ती)।

3. मध्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रशांत महासागर के नीचे की ओर स्थित एक अपेक्षाकृत छोटी, त्रिकोणीय आकार की लघु महासागरीय प्लेट को क्या कहते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कोकोस प्लेट
Solution:
  • मध्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रशांत महासागर के नीचे की ओर स्थित एक अपेक्षाकृत छोटी, त्रिकोणीय आकार की लघु महासागरीय प्लेट को कोकोस प्लेट कहते हैं।
  • कोकोस प्लेट मध्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रशांत महासागर के नीचे स्थित अपेक्षाकृत छोटी, त्रिकोणीय आकार की लघु महासागरीय प्लेट है।​
  • स्थिति और आकार
    • कोकोस प्लेट उत्तर अमेरिकी प्लेट (मुख्यतः कैरिबियन प्लेट के हिस्से के रूप में मध्य अमेरिका सहित) के पूर्व में, नाज़का प्लेट के उत्तर में तथा पूर्वी प्रशांत प्लेट के पूर्व में फैली हुई है।
    • यह लगभग 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली त्रिकोणाकार प्लेट है
    • जिसकी नोक दक्षिण की ओर इक्वाडोर के निकट है।​
  • सीमाएँ
    • इसकी पूर्वी सीमा सबडक्शन ज़ोन है जहाँ यह उत्तर अमेरिकी प्लेट के नीचे सरक रही है
    • जिससे मध्य अमेरिका में गर्त (जैसे कोकोस गर्त) और ज्वालामुखी चाप बनते हैं।
    • पश्चिमी सीमा पूर्वी प्रशांत राइज़ पर फैलाव केंद्र है
    • जबकि दक्षिणी सीमा नाज़का प्लेट से ट्रांसफॉर्म फॉल्ट द्वारा अलग होती है।​
  • गतिविधियाँ और प्रभाव
    • कोकोस प्लेट सालाना लगभग 8-10 सेमी की दर से पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रही है
    • जो मध्य अमेरिका (कोस्टा रिका, निकारागुआ, पनामा) में भूकंपों और ज्वालामुखियों का कारण बनती है।
    • कोकोस द्वीप इसी प्लेट पर स्थित हैं, और यह गलापागोस द्वीपसमूह के निकट प्रभाव डालती है।​

4. आर्कटिक महासागर के तटीय उपतटों (shelves) में से एक, साइबेरियाई उपतट (shelf), पृथ्वी पर सबसे बड़ा महाद्वीपीय उपतट है। इसका अपतटीय विस्तार कितने किलोमीटर है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1,500 किमी.
Solution:
  • आर्कटिक महासागर के तटीय उपतटों में से एक साइबेरिया उपतट, पृथ्वी पर सबसे बड़ा महाद्वीपीय उपतट है। इसका अपतटीय विस्तार 1500 किमी. है।
  • परिचय
    • साइबेरियाई शेल्फ (Siberian Shelf) आर्कटिक महासागर का सबसे बड़ा महाद्वीपीय शेल्फ है
    • यह यूरो-एशियाई महाद्वीप के उत्तरी किनारे से जुड़ा है।
    • इस शेल्फ की चौड़ाई समुद्रतट से ड्रॉप-ऑफ तक लगभग 1,500 किलोमीटर (लगभग 930 मील) मानी जाती है।
    • यह आंकड़ा आर्कटिक क्षेत्र के विशाल, उथले जल-स्तर वाले प्लेटफॉर्म को दर्शाता है
    • जो भू-विज्ञानिक रूप से महाद्वीपीय शेल्फ के भीतर आता है ।​
  • मुख्य विशेषताएं
    • क्षेत्रीय विस्तार: पश्चिम साइबेरिया के तटरेखा से आर्कटिक महासागर के किनारों तक का क्षेत्र इस शेल्फ को कवर करता है
    • यह विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीपीय शेल्फ है ।​
    • आकार और तेज़ गहराई परिवर्तन: शेल्फ उथला हो सकता है
    • (कुछ क्षेत्रों में लगभग 30 मीटर) और कुछ हिस्सों में गहराई 600 मीटर या इससे अधिक तक जा सकती है
    • परंतु किनारे से औसतन दूरी 1,500 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है ।​
    • महत्त्व: जलवायु नियमन, जैव विविधता और समुद्री संसाधनों के संदर्भ में साइबेरियाई शेल्फ का वैश्विक महत्त्व उल्लेखित है
    • यह आर्कटिक वातावरण के साथ जुड़ा हुआ एक बड़ा भू-आकृतिक तत्त्व है ।​
  • संभाव्य पूछे जाने वाले बिंदु (FAQs)
    • यह क्यों सबसे बड़ा है: आर्कटिक महासागर के भीतर फैला यह तटीय प्लेटफॉर्म विशाल उपस्थिति रखता है
    • जिनमें आइस-कवर्ड और उथले जल क्षेत्र शामिल हैं, जो इसे अन्य महाद्वीपीय शेल्फ़ों से बड़ा बनाते हैं ।​
    • दूरी माप कैसे निर्धारित होती है: “शेल्फ की चौड़ाई” सामान्यतः तटरेखा से गहराई ड्रॉप-ऑफ तक मापा गया औसत या क्षेत्रीय मान है
    • साइबेरियाई शेल्फ के लिए यह मान लगभग 1,500 किमी के बराबर माना जाता है ।​
  • उल्लेखित स्रोत (संदर्भ)
    • साइबेरियाई शेल्फ के आकार/विस्तार और वैश्विक महत्त्व पर विवरण: और संबंधित शिक्षा-स्रोतों में कहा गया है
    • साइबेरियाई शेल्फ आर्कटिक महासागर में 1,500 किलोमीटर तक फैला है ।​
    • महाद्वीपीय शेल्फ़ और साइबेरियाई शेल्फ की विशेषताएं: विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीपीय शेल्फ होने का दावा और उसका 1,500 किमी विस्तार पाठ में भी उद्धृत है ।​
    • भू-आकारिकी/गहराई प्रवाह के विविधतापूर्ण स्तर: कुछ हिस्सों में गहराई 600 मीटर तक पहुंचने का उल्लेख मिलता है
    • जबकि कुछ हिस्से उथले रहते हैं ।​

5. एलनीनो ....... के तट से लगे गर्म जलधारा के विकास को दिया गया नाम है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) पेरू
Solution:
  • एल नीनो, पूर्वी प्रशांत महासागर में पेरु के तट के निकट उष्ण समुद्री धारा के रूप में प्रकट होता है।
  • इसके कारण भारतीय मानसूनी वर्षा प्रभावित होती है, जिससे सूखे जैसी स्थितियों का जन्म होता है।
  • परिभाषा और नामकरण
    • यह घटना अब ENSO (El Niño–Southern Oscillation) चक्र का गर्म चरण माना जाता है
    • जिसकी अन्य अवस्थाएं La Niña (ठंडी धारा) और ENSO-तटस्थ होती हैं।​
  • मौसम-वैज्ञानिक प्रभाव
    • पूर्वी प्रशांत के सतही जल तापमान में बढ़ोतरी: समुद्र का सतही हिस्सा सामान्य से 3–4°C तक warmer हो सकता है
    • जिसके कारण वायुमंडलीय चक्र और वर्षा-नियोजन प्रभावित होते हैं।​
    • समुद्री पोषक तत्वों और उत्पादकता पर प्रभाव: गर्म सतह जल नीचे की ठंडी धारा के ऊपर से उथल-पुथल कर सकती है
    • जिससे फूटपथ जीव, प्लवक और मछलियों का वितरण और प्रचुरता घट-बढ़ सकती है।
    • यह कई बार स्थानीय मत्स्य पालन को नुकसान पहुँचा सकता है।​
    • वैश्विक वर्षा पैटर्न: एल-नीनो के दौरान कुछ क्षेत्रों में वर्षा कम हो सकती है
    • जबकि अन्य में अधिक, जिससे व्यापक भू-जल, फसल और तूफानी गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।​
  • प्रभाव के क्षेत्र और समय-सीमा
    • पेरू के तट के आसपास गहरे, गर्म धाराओं के विकसित होने से समुद्री जल-तापमान बढ़ता है
    • प्रसार का क्षेत्र पश्चिमी प्रशांत में विस्तृत रहता है।​
    • EL Niño आम तौर पर 2–7 वर्ष की आवृत्ति के चक्र पर आता है
    • प्रभावों की तीव्रता और अवधि समय के साथ भिन्न हो सकती है।
    • (उद्धरण स्रोतों में विस्तृत उपस्थिति के अनुसार ENSO चक्र के तीन चरणों में EL Niño शामिल है: El Niño, La Niña, एवं ENSO-neutral.)​
  • विश्व-स्तर पर प्रभाव
    • उष्णकटिबंधीय प्रशांत के बाहर भी वायुमंडलीय पवन-धाराओं और जलवायु वितरण पर प्रभाव पड़ता है
    • जिससे अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा के वितरण में असंतुलन आता है।​
    • तापमान-आधारित जलवायु पैटर्न (जैसे गर्मी के मौसम की स्थिति) में अस्थिरता तथा चरम मौसम की घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।​
  • अन्य ज्ञात तथ्य
    • एल-नीनो की पहचान और अध्ययन के लिए कई शैक्षणिक स्रोत उपलब्ध हैं
    • इसके प्रभावों के बारे में UPSC और भूगोल-शिक्षा सामग्री में विस्तृत अध्याय मिलते हैं।​
  • तालिका: एल-नीनो बनाम ला नीना (मुख्य अंतर)
    • तट-तापमान: EL Niño में पूर्वी प्रशांत सतही जल तापमान बढ़ता है; La Niña में तापमान घट सकता है।
    • धाराओं का प्रभाव: EL Niño में गर्म धाराओं का विस्तार और वितरण अधिक; La Niña में ठंडी धाराओं का प्रचार अधिक होता है।
    • वर्षा पैटर्न: EL Niño के दौरान कुछ क्षेत्र कम वर्षा, कुछ में अधिक बार बारिश; La Niña में पश्चिमी प्रशांत और आस-पास के क्षेत्र अधिक वर्षा या तूफानी अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
    • वैश्विक प्रभाव: दोनों स्थितियाँ वैश्विक व्यापार और मौसम-चक्र के वितरण को प्रभावित करती हैं, पर संकेत और क्षेत्रीय असर भिन्न होते हैं।
  • नोट्स और उपयोगी संदर्भ
    • एल-नीनो के बारे में सामान्य ज्ञान Wikipedia और UPSC/भूगोल साहित्य में विस्तृत वर्णन उपलब्ध है
    • विशेषकर पूर्वी प्रशांत में सतही जल तापमान की वृद्धि और वैश्विक प्रभावों के बारे में विवरण मिलता है।​
    • परीक्षा-सम्बन्धी प्रश्नों में EL Niño के तट के साथ गर्म धारा के आवधिक विकास को पेरू के तट से जोड़ा गया है।

6. महासागरीय धाराओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जिस स्थान पर गर्म एवं शीत जलधाराएं मिलती हैं, वह स्थान विश्वभर में सर्वोत्तम मत्स्ययन क्षेत्र माना जाता है।
Solution:
  • महासागरीय धाराएं निश्चित दिशाओं में समुद्र की सतह पर निरंतर बहने वाली जल की धाराएं हैं।
  • महासागरीय धाराएं गर्म या ठंडी हो सकती हैं। जिस स्थान पर गर्म एवं शीत जलधाराएं मिलती हैं
  • यह स्थान विश्वभर में सर्वोत्तम मत्स्यन क्षेत्र माना जाता है।
  • लेब्राडोर धारा अटलांटिक महासागर में बहने वाली एक ठंडी महासागरीय धारा है।
  • सामान्यतः गर्म धाराएं भूमध्य रेखा से और ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती हैं।
  • ठंडी धाराएं ध्रुवीय या उच्च अक्षांशों से निम्न अक्षांशों की ओर प्रवाहित होती हैं।
  • धाराओं की परिभाषा और प्रकार
    • इनके दो प्रमुख प्रकार होते हैं: गर्म धाराएं और ठंडी धाराएं।
    • गर्म धाराएं भूमध्यरेखा के निकट उत्पन्न होकर ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती हैं
    • ठंडी धाराएं ध्रुवीय या उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशों की ओर जाती हैं ।​
    • सम्विशेष परावर्तन के आधार पर प्रतिविषुवतीय धाराओं (जो उत्तर-झुकाव के विपरीत पश्चिम से पूर्व बहती हैं)
    • अन्य क्षेत्रीय धाराओं (जैसे ACC) भी मौजूद हैं ।​
  • धाराओं के उत्पत्ति के कारण
    • धाराओं की उत्पत्ति अनेक कारकों से होती है
    • जिनमें पृथ्वी के घूर्णन के कारण लगने वाला प्रभाव (कोरियोली प्रभाव) और जल के तापमान-घनत्व में भिन्नता शामिल है इससे विषुवत रेखा पर गर्म जल का प्रवाह और ठंडे जल का प्रवाह बनते हैं ।​
    • जल का तापमान, घनत्व तथा सतह के ऊपर-नीचे के स्तर पर दबाव-निर्भर बदलाव धाराओं के दिशा-निर्णय में मुख्य भूमिका निभाते हैं
    • उच्च घनत्व वाला जल नीचे की ओर और कम घनत्त्व वाला ऊपर की ओर गतिशील रहता है।
    • यह ऊर्ध्वाधर आंदोलन (अपवेलिंग/डाउनवेलिंग) के साथ मिलकर धाराओं के निर्माण में योगदान देता है ।​
  • प्रमुख धाराओं के उदाहरण और प्रभाव
    • गाल्फ स्ट्रीम जैसी गर्म धाराएं भूमध्यरेखा के समीप बनकर ध्रुवों की ओर बढ़ती हैं
    • जिससे उन क्षेत्रों का जलज विषमतापूर्ण नमी और तापमान प्रभावित होता है ।​
    • लेब्राडोर धाराएं ठंडी जलधाराएं हैं जो उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशों की ओर बहती हैं
    • इसके कारण उन क्षेत्रों के जलवायु और समुद्री जीव विविधता पर प्रभाव पड़ता है ।​
    • अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट (ACC) दक्षिण ध्रुव के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की दिशा में बहने वाली एक प्रमुख ठंडी-घनत्व धार है ।​
  • जलवायु और जैव-विविधता पर प्रभाव
    • धाराओं के कारण तापमान वितरण में व्यवस्थित बदलाव होते हैं
    • जिससे समुद्री जीवों के प्रवास के मार्ग, मछली पकड़ने के मैदान और मौसम-जलवायु में स्थायित्व बनता है या अस्थिरता बढ़ती है ।​
    • गर्म धाराओं के मार्ग से तापमान बढ़ता है और स्थानीय जलवायु के साथ उपयुक्त पोषक तत्वों की उपलब्धता बदलती है
    • जो जीवों के जीवनचक्र को प्रभावित कर सकती है ।​
  • शिक्षण या परीक्षा के संदर्भ में सामान्य त्रुटियाँ
    • अक्सर धाराओं को सिर्फ “जल का बड़ा प्रवाह” समझ लिया जाता है; सही समझ तब आती है
    • जब यह देखा जाए कि धाराएं जल का सतही बनाम गहराई-आधारित प्रवाह भी हो सकता है
    • इनका निर्माण कई बार विभिन्न कारकों के संयुक्त प्रभाव से होता है ।​
    • गर्म और ठंडी धाराओं के सामान्य मार्ग अक्सर भूगोल के अनुसार बताये जाते हैं
    • परंतु वास्तविक दुनिया में धाराओं की दिशा-प्रवाह अस्थिर और मौसमी परिवर्तन के कारण बदलती रहती है।
    • इसलिए दिए गए सामान्य नियमों को संदिग्ध परिस्थितियों में क्रॉस-चेक करना चाहिए ।​
  • क्या सही कथन है? (क्लियर निष्कर्ष)
    • महासागरीय धाराएं सतह या नीचे के जल-स्तर में एक निर्धारित दिशा में नियमित प्रवाह बनाती हैं
    • जिनमें गर्म धाराएं भूमध्यरेखा के पास बनकर ध्रुवों की ओर बढ़ती हैं
    • ठंडी धाराएं ध्रुवीय/उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय की ओर जाती हैं
    • इन धाराओं के उत्पत्ति के पीछे घूर्णन (कोरियोली प्रभाव) और ताप-घनत्व के अंतर जैसे कारक प्रमुख भूमिका निभाते हैं ।​
    • उदाहरण स्वरूप, गल्फ स्ट्रीम एक गर्म धारा है जो भूमध्यरेखा के निकट बनकर उत्तरी अटलांटिक में तापमान बढ़ाती है
    • लेब्राडोर औरACC जैसी धाराएं ठंडी धाराओं के प्रमुख उदाहरण हैं जिनके मार्ग जलवायु और समुद्री जीवन को प्रभावित करते हैं ।​
  • महत्वपूर्ण स्रोत (उद्धरण)
    • महासागरीय धाराएं, उत्पत्ति, प्रकार और प्रभाव: Drishti IAS हिंदी लेख, महासागरीय धाराएं और प्रभाव, Drishti IAS समकक्ष सामग्री में धाराओं के प्रकार और प्रतिविषुवतीय धाराओं का उल्लेख भी मिलता है ।​
    • गर्म-ठंडी धाराओं के सामान्य विवरण और उदाहरण: पन्ने और अन्य हिंदी स्रोतों में Gulf Stream, Labrador Current, ACC आदि के बारे में जानकारी मिलती है ।​
    • सामान्य परिभाषा और धाराओं का भूगणितीय वितरण: Wikipedia (हिंदी), और अन्य शैक्षिक संसाधनों में धाराओं की परिभाषा और प्रकार का सारांश मिलता है ।​

7. निम्नलिखित में से कौन-सी जलीय धारा एक शीतल धारा नहीं है? [C.P.O.S.I. (T-I) 5 जुलाई, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) ब्राजील धारा
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से ब्राजील धारा शीतल धारा नहीं है। यह एक गर्म जलधारा है
  • जो दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के पूर्वी तट पर अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होती है।
  • विस्तार सहित विवरण
    • जलीय धाराओं की वर्गीकरण: समुद्री धाराओं को उनके तापमान के अनुसार गर्म धाराएं (warm currents) और ठंडी धाराएं (cold currents) में बाँटा जाता है
    • गर्म धाराएं भूमध्यरेखा के पास बनने/प्रवाहित होने के कारण अक्सर गर्म पानी को गर्म क्षेत्रों से ले जाकर अन्य क्षेत्र तक पहुंचाती हैं
    • जबकि ठंडी धाराएं ध्रुवीय क्षेत्रों से गर्म जल को कम तापमान वाले क्षेत्र की ओर लाकर जलवायु पर प्रभाव डालती हैं
    • (उच्च-स्तर का संकल्पना) [आमतौर पर आयोगित शैक्षणिक स्रोत]।
    • ब्राज़ील धारा: ब्राज़ील धारा एक गर्म जलधारा है जो अटलांटिक महासागर के दक्षिणपूर्वी क्षेत्र में ब्राज़ील की ओर से पूर्व की ओर बहती है
    • यह धारा गर्म पानी लेकर उत्तरी अर्धगोलार्ध के ऊष्णकटिबंधीय जल को दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र तक पहुँचाती है
    • इसलिए यह शीतल धारा नहीं है. इस तथ्य को कई शिक्षण मंचों और पाठ्यपुस्तकों में स्पष्ट किया गया है
    • शीतल धारा की अन्य उदाहरण: पेरू धारा (हम्बोल्ट धारा) ठंडी धारा है
    • जो पश्चिमी दक्षिण अमेरिका के किनारों से उत्तर की ओर बहती है
    • कनारी धारा और ओयाशियो धारा जैसी धाराएं भी ठंडी धाराओं में गिनी जाती हैं
    • इन धाराओं के तापमान और मार्ग में स्पष्ट अंतर होता है
    • वे सामान्यतः महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर पाई जाती हैं स्तर के सार]।​
  • मानक प्रश्न के विश्लेषण के साथ तुलना
    • प्रश्न में पूछे गए चार विकल्प हैं: Hamburg (Humboldt) धारा, ब्राज़ील धारा, ओयाशियो (Oyashio) धारा, कनारी (Canning?) धारा
    • इन चारों में Humbolt, Oyashio और कनारी धाराएं ठंडी धाराओं मानी जाती हैं
    • ब्राज़ील धारा गर्म धाराओं में गिनी जाती है। इसलिए सही उत्तर ब्राज़ील धारा है ।​
  • महत्वपूर्ण नोट
    • ब्राज़ील धारा एक गर्म जलधारा है, जो दक्षिणी अटलांटिक के पूर्वी भाग में प्रवाहित होती है
    • जबकि Humbolt/Oyashio/Cana­ri (कनारी) धाराएँ सामान्यतः ठंडी धाराओं के रूप में जानी जाती हैं
    • वे ठंडे पानी को उन्नत क्षेत्रों में लाती हैं ।​

8. निम्नलिखित में से कौन-सा उत्तरी भारत में अधिक ठंड पड़ने का एक कारण नहीं है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) भूमध्यरेखीय धारा
Solution:
  • उत्तर भारत में अत्यधिक ठंड का कारण विषुवतरेखीय अथवा भूमध्यरेखीय धारा नहीं है।
  • हिमालय उत्तर भारत की जलवायु को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कैस्पियन सागर से आने वाली ठंडी हवाएं उत्तर भारत में अत्यधिक ठंड की कारण हैं, जिससे तापमान में गिरावट आती है।
  • उत्तर भारत में ठंड बढ़ने के प्रमुख कारण:
    • हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी और हिमपात: ऊँचे पहाड़ों पर बर्फ की परत से सूर्य की रोशनी का प्रतिफलन बढ़ता है
    • जिससे नीचे के क्षेत्र ठंडे रहते हैं और ठंडी पश्चिमी हवाओं का लाभ मिलता है.​
    • पश्चिमी विक्षोभ: पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर पश्चिमी भारत में ठंडी, शुष्क हवाओं की প্রবाह होनी है
    • जो तापमान कम करती हैं और कोहरे/pala (पाला) बनाते हैं.​
    • कैस्पियन सागर और तुर्कमेनिस्तान से आने वाली ठंडी हवाओं का प्रभाव: इन ठंडी हवाओं से उत्तर-पश्चिमी भारत में ठंड बढ़ती है.​
    • समुद्री प्रभाव का अभाव: दीप समुद्री प्रभाव (maritime influence) के अभाव में भूमि क्षेत्र तेजी से ठंडा होता है
    • इन क्षेत्रों में ठंड तेज और दीर्घ होती है.​
  • गलत कथन (जो कारण नहीं है या कम प्राथमिक माना जाता है):
    • विषुवतरेखीय धारा (Equatorial/thermally influenced current): यह प्रचलित रूप से गर्म जल धाराओं से जुड़ी है
    • उत्तर भारत की ठंड के प्रमुख कारण के रूप में मान्य नहीं मानी जाती। इस धारणा के अनुसार यह क्षेत्र उष्ण रहता है
    • कम ठंड का कारण हो सकता है
    • जबकि ठंड अधिकतर ठंडी हवाओं, हिमपात और भूगोलिक संरचना से जुड़ा होता है.​
  • मॉडल वैकल्पिक दृष्टिकोण
    • हिमालयी भू-आबद्धता: हिमालय के कारण उत्तर भारत के ऊपरी भागों में ठंडी हवा नीचे की ओर प्रवाहित होती है, जिससे तापमान गिरता है.​
    • राज्‍य-स्तरीय भूगोल: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे क्षेत्र समुद्र के मध्यम प्रभाव से दूर रहने के कारण महाद्वीपीय जलवायु का अनुभव करते हैं
    • जिससे ठंड गहरी रहती है; वहीं तटीय क्षेत्र अपेक्षाकृत हल्की ठंड महसूस करते हैं.​
  • उल्लेखित स्रोतों के साथ निष्कर्ष
    • ठंड के प्रमुख कारणों में हिमपात, पश्चिमी विक्षोभ, कैस्पियन सागर/तुर्कमेनिस्तान से आने वाली ठंडी हवाएँ और समुद्री प्रभाव की कमी प्रमुख हैं
    • जबकि विषुवतरेखीय धारा जैसी गर्म धाराएँ सामान्यतः उत्तर भारत की ठंड के साथ प्रत्यक्ष रूप से नहीं जुड़ी मानी जातीं.​

9. प्रशांत महासागर के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रशांत महासागर का आकार पूर्णतः अंडाकार है।
Solution:
  • प्रशांत महासागर विश्व का सबसे बड़ा और गहरा महासागर है।
  • इस महासागर का आकार लगभग गोलाकार है। मारियाना गर्त/खाई प्रशांत महासागर में स्थित है।
  • एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर और दक्षिण अमेरिका इस महासागर से घिरे हुए हैं।
  • प्रशांत महासागर की विशेषताएं:
    • यह पृथ्वी का सबसे बड़ा महासागर है और आकार के मामले में अंडाकार-आकार के करीब है, न कि पूर्ण गोल।
    • इसका दायरा और क्षेत्रफल विशाल है लेकिन मानकीकृत गोल आकार नहीं माने जाते।
    • इस तथ्य के आधार पर अंडाकार कहना सही है, गोल कहना गलत।
    • पृथ्वी के लगभग 70% हिस्से पर महासागरों का फैलाव है
    • प्रशांत महासागर इस हिस्से में सबसे बड़ा और गहरा है।
    • प्रशांत के किनारे भू-भाग में जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया आदि क्षेत्र आते हैं
    • इसके उत्तर-पूर्व से बेरिंग जलडमर्या जुड़ा है।
  • FAQ/टिप्पणियाँ:
    • कुछ स्रोत “गोलाकार” शब्द से आकार की सामान्य कल्पना दे सकते हैं
    • वास्तविक भूगोलिक आकलन में यह सख्त түрде सही नहीं माना जाता है।
    • अन्य कथनों जैसे “सबसे बड़ा/गहरा महासागर”, “Marianas Trench सबसे गहरी खाई” आदि आमतौर पर सही माने जाते हैं
    • जहां कथन आकार के दायरे में आते हैं
    • वहाँ गोल-गोल नहीं बल्कि अंडाकार या अन्य आयामिक वर्णन अधिक उपयुक्त होते हैं।

10. पृथ्वी पर सबसे बड़ा महासागर ....... है। [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रशांत महासागर
Solution:
  • सबसे बड़ा एवं सबसे गहरा महासागर प्रशांत महासागर है।
  • विश्व का सबसे गहरा समुद्री खाई प्रशांत महासागर में स्थित मारियाना या चैलेंजर ट्रेंच है। इसकी अनुमानित गहराई 11033 मीटर है।
  • पूरा विवरण:
    • परिचय: पृथ्वी के चारों ओर फैले महासागर मिलकर एक ही वैश्विक महासागर बनाते हैं
    • लेकिन दिशा-निर्देशों के अनुसार सबसे बड़ा एकल महासागर प्रशांत है।
    • यह क्षेत्रफल के हिसाब से लगभग 165 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक फैला है
    • जो कुल सतही क्षेत्रफल का करीब एक-तिहाई हिस्सा है ।​
    • आकार और गहराई: प्रशांत महासागर जमीन की सतह पर सबसे बड़ा और सबसे गहरा है
    • इसकी औसत गहराई और गहराई स्तर मारियाना गर्त जैसे गहरे भागों में अत्यधिक अधिक होती है ।​
    • भौगोलिक सीमा: पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया, पूर्व में अमेरिका (उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका) के बीच स्थित है
    • उत्तर में आर्कटिक महासागर से शुरू होकर दक्षिण में दक्षिणी महासागर तक फैला हुआ है ।​
    • ऐतिहासिक और संदर्भ तथ्यों: प्रशांत महासागर के विशाल आकार के कारण इसकी धारियों, द्वीप, और प्रवाल-उत्पन्न चिह्न कई जलवायु और समुद्री-जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं
    • मारियाना गर्त पृथ्वी की सबसे गहरी खाई है जो इसी महासागर के भीतर स्थित है ।​
  • यदि चाहें, इस विषय पर मैं एक विस्तृत व्याख्या के साथ निम्न बिंदुओं में गहराई से विस्तार कर सकता/सकती हूँ:
    • आकार-आयाम और क्षेत्रफल का तुलनात्मक विश्लेषण
    • महासागर-जीवन और समुद्री जैव विविधता
    • जलवायु-आवृत्ति पर प्रभाव और मानव गतिविधियों का प्रभाव
    • इतिहास में महासागर के नामकरण और पुराण/पौराणिक संदर्भ
  • संदर्भ उद्धरण (उद्धृत सूचना के साथ):
    • प्रशांत महासागर विश्व के सबसे बड़े और गहरे महासागर के रूप में (आकार और गहराई),​
    • भूगोलिक सीमा और विस्तृत विवरण (एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बीच)​
    • मारियाना गर्त और महासागर की गहराई संबंधी तथ्य​