मानव शारीरिकी एवं क्रिया विज्ञान (जीव विज्ञान)

Total Questions: 54

1. एक ऐसे जीव की पहचान कीजिए जिसमें सुपरिभाषित पेशीय ग्रसनी हो- [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) एस्केरिस
Solution:
  • एस्केरिस (Ascaris): एस्केरिस, जो कि एक गोलकृमि (Nematode) है
  • एक अत्यधिक विकसित और पेशीय ग्रसनी (pharynx) होती है।
  • यह ग्रसनी एक मजबूत, त्रिकोणीय लुमेन वाली नली होती है
  • जो भोजन को चूषण क्रिया द्वारा निगलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • इसकी पेशीय दीवारें भोजन को आंत में धकेलने में मदद करती हैं
  • जिससे यह परजीवी अपने मेजबान के शरीर से पोषक तत्वों को कुशलता से अवशोषित कर सके।
  • ग्रसनी की संरचना
    • जो लंबाई में लगभग 1-2 मिमी तक हो सकती है। यह तीन भागों में विभाजित होती है
    • केंद्रीय गोलाकार भाग, तीन पेशीय पत्तियाँ (valves) और एक संकुचन योग्य नली।
    • ये पेशियाँ संकुचन द्वारा भोजन (मेजबान की आंत का रस) को पीछे की ओर खींचती हैं
    • जिससे कृमि को पोषण प्राप्त होता है।
  • कार्य और महत्व
    • सुपरिभाषित पेशीय ग्रसनी एस्केरिस को मेजबान की तरल आंत सामग्री को सक्रिय रूप से निगलने में सक्षम बनाती है।
    • यह पेरिस्टाल्टिक गति की तरह कार्य करती है
    • जो कृमि को ऑक्सीजन-युक्त तरल और पोषक तत्व प्रदान करती है।
    • यह विशेषता नेमाटोडा को अन्य कृमियों से अलग करती है
    • क्योंकि एडम्सिया या गोर्गोनिया जैसे cnidarians में ऐसी ग्रसनी अनुपस्थित होती है।
  • जैविक वर्गीकरण
    • संघ: नेमाटोडा
    • वर्ग: सेकेर्नटिया
    • गण: अस्कैरिडिया
    • कुल: अस्कैरिडिडे
    • जाति: अस्केरिस
  • जीवन चक्र और प्रभाव
    • एस्केरिस का जीवन चक्र अप्रत्यक्ष होता है
    • अंडे मल से बाहर निकलते हैं, मिट्टी में परिपक्व होते हैं
    • फिर मानव द्वारा निगले जाते हैं। ग्रसनी लार्वा को तीसरी अवस्था तक विकसित होने में सहायता करती है।
    • मनुष्यों में यह आंतिक संक्रमण (अस्कैरियासिस) का कारण बनता है
    • जो पोषण असंतुलन, कुपोषण और कभी-कभी आंत अवरोध उत्पन्न करता है।
    • विश्व स्तर पर यह सबसे सामान्य हेल्मिन्थ संक्रमण है, विशेषकर विकासशील क्षेत्रों में।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजी ऊतक का एक प्रकार है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

I. रक्त

II. अस्थि

III. अस्थि-बंधन

Correct Answer: (a) I, II और III तीनों
Solution:
  • संयोजी ऊतक (Connective Tissue) शरीर में सबसे व्यापक और विविध प्रकार के ऊतकों में से एक है।
  • इसका मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न भागों को जोड़ना, समर्थन देना, सुरक्षा प्रदान करना और भरना है।
  • संयोजी ऊतक में कोशिकाएं एक बाहरी मैट्रिक्स (matrix) में बिखरी होती हैं।
  • रक्त (Blood)
    • रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसका मैट्रिक्स प्लाज्मा होता है
    • जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs), सफेद रक्त कोशिकाएं (WBCs) और प्लेटलेट्स तैरते रहते हैं।
    • यह ऑक्सीजन, पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट उत्पादों का परिवहन करता है।
  • अस्थि (Bone)
    • अस्थि एक कठोर या कंकाल संयोजी ऊतक है।
    • इसका मैट्रिक्स कैल्शियम और फास्फोरस लवणों द्वारा कड़ा होता है
    • जो इसे मजबूती और कठोरता प्रदान करता है। अस्थियां शरीर को सहारा देती हैं
    • अंगों की रक्षा करती हैं और मांसपेशियों के लिए अनुलग्नक बिंदु प्रदान करती हैं।
  • अस्थि-बंधन (Ligament)
    • अस्थि-बंधन एक सघन नियमित संयोजी ऊतक है।
    • यह मजबूत, लचीले रेशों से बना होता है, मुख्य रूप से कोलेजन से।
    • अस्थि-बंधन हड्डियों को हड्डियों से जोड़ते हैं
    • जोड़ों को स्थिर करते हैं और उनकी गति को नियंत्रित करते हैं।
  • संयोजी ऊतक की मुख्य विशेषताएँ
    • संयोजी ऊतक में कोशिकाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है
    • जबकि मैट्रिक्स अधिक मात्रा में उपस्थित रहता है
    • जो तरल, अर्ध-तरल, घना या कठोर हो सकता है।
    • इसमें फाइब्रोब्लास्ट (तंतु बनाने वाली कोशिकाएँ)
    • मैक्रोफेज (भक्षक कोशिकाएँ), मास्ट कोशिकाएँ (हिस्टामिन स्रावित करने वाली) और वसा कोशिकाएँ प्रमुख होती हैं।
    • तंतु दो प्रकार के होते हैं: श्वेत तंतु (कॉलेजन से बने, मजबूत) और पीले तंतु (एलास्टिन से बने, लचीले)।
  • संयोजी ऊतक के प्रमुख प्रकार
  • वास्तविक संयोजी ऊतक 
    • इसमें ढीला संयोजी ऊतक (जैसे अवकाशी ऊतक या एरियोलर ऊतक, जो त्वचा के नीचे पाया जाता है
    • अंगों को जोड़ता है) और घना संयोजी ऊतक (जैसे टेंडन और लिगामेंट, जहाँ तंतुओं की मात्रा अधिक होती है
    • शामिल हैं। वसीय ऊतक (एडिपोज ऊतक) भी इसी श्रेणी में आता है, जो ऊर्जा भंडारण करता है।
  • कंकाल ऊतक
    •  इसमें उपास्थि (कार्टिलेज, जैसे काचाभ, प्रत्यास्थ और श्वेत तंतुमय उपास्थि)
    • (हड्डी, जो कैल्शियम और कॉलेजन से बनी मजबूत संरचना प्रदान करती है) सम्मिलित हैं।
    • ये शरीर को आकार और समर्थन देते हैं।
    • तरल ऊतक (Fluid Tissue): रक्त और लसीका इसके उदाहरण हैं
    • जो पोषक तत्वों, ऑक्सीजन और प्रतिरक्षा कोशिकाओं का परिवहन करते हैं।
  • प्रत्येक प्रकार के कार्य
    • वास्तविक संयोजी ऊतक विभिन्न अंगों को आपस में जोड़ता है
    • संक्रमण से रक्षा करता है और आंतरिक स्थानों को भरता है।
    • कंकाल ऊतक शरीर को मजबूती प्रदान करता है, जैसे हड्डियाँ भार वहन करती हैं
    • उपास्थि जोड़ों पर घर्षण कम करती है।
    • तरल ऊतक पूरे शरीर में पदार्थों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है
    • जैसे रक्त हृदय से ऑक्सीजन ले जाकर कोशिकाओं तक पहुँचाता है।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • एरियोलर ऊतक: मांसपेशियों और त्वचा के बीच, एंटीबॉडी उत्पादन में सहायक।
    • श्वेत तंतुमय ऊतक: टेंडन (मांसपेशी से हड्डी जोड़ने वाला)।
    • रक्त: प्लाज्मा, श्वेत रक्त कणिकाएँ, लाल रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स से युक्त।

3. कॉर्निया के पीछे, एक गहरे रंग की पेशीय संरचना होती है जिसे ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) परिताः
Solution:
  • कॉर्निया के पीछे, एक गहरे रंग की पेशीय संरचना होती है, जिसे परितारिका (iris) कहा जाता है।
  • यह आंख की एक पतली कुंडलीकार संरचना है। परितारिका के मध्य में एक छिद्र पाया जाता है
  • जिसे पुतली या तारा कहते हैं। परितारिका (iris) पुतली के व्यास एवं आकार को नियंत्रित
  • आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • संरचना
    • परितारिका एक पतली, कुंडलाकार डायाफ्राम है जिसमें दो मुख्य परतें होती हैं
    • सामने की पिगमेंटेड फाइब्रोवैस्कुलर स्ट्रोमा परत और उसके नीचे रंजित उपकला कोशिकाओं की परत।
    • स्ट्रोमा स्फिंक्टर मांसपेशी से जुड़ी रहती है जो पुतली को संकुचित करती है।
    • यह स्क्लेरोटिक और कोरॉयड का हिस्सा है तथा प्यूपिलरी और सिलिअरी जोन में विभाजित होती है।
  • कार्य
    • परितारिका पुतली के व्यास को बदलकर आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश को नियंत्रित करती है
    • कम रोशनी में पुतली फैलती है और अधिक रोशनी में संकुचित होती है।
    • यह आंख के अग्र भाग को पीछे से अलग करती है
    • आंख का रंग मेलेनिन से निर्धारित करती है। सिलिअरी मांसपेशियां इसे सहारा देती हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • कॉर्निया पारदर्शी होती है जो परितारिका, पुतली और अग्र कक्ष को ढकती है
    • जबकि परितारिका अपारदर्शी और रंगीन होती है।
    • यह नेत्रगोलक में प्रकाश अपवर्तन में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाती है तथा दृष्टि की स्पष्टता बनाए रखती है।
    • विकार जैसे आइरिस की सूजन (इराइटिस) दृष्टि प्रभावित कर सकते हैं।

4. लड़कों में बढ़ता हुआ 'स्वरयंत्र' गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाई देता है, जिसे ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कंठमणि
Solution:
  • कंठमणि (Adam's Apple): यौवनारंभ (puberty) के दौरान, लड़कों में शारीरिक परिवर्तनों के हिस्से के रूप में, स्वरयंत्र का आकार बढ़ता है।
  • यह वृद्धि गले के सामने एक विशिष्ट उभार के रूप में दिखाई देती है
  • जिसे कंठमणि या एडम का सेब कहा जाता है।
  • यह वृद्धि आवाज के गहराने और भारी होने का कारण भी बनती है।
  • यह उपास्थि (cartilage) से बना होता है जो स्वरयंत्र की रक्षा करता है।
  • एडम्स एप्पल क्या है?
    • एडम्स एप्पल स्वरयंत्र (लैरिंक्स या वॉइस बॉक्स) का आगे का उभरा हुआ हिस्सा है
    • जो थायरॉयड कार्टिलेज (thyroid cartilage) से बना होता है।
    • यह मुख्य रूप से लड़कों में यौवनारंभ के समय टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के प्रभाव से बड़ा हो जाता है
    • जिससे गले पर यह स्पष्ट उभार दिखने लगता है। लड़कियों में भी स्वरयंत्र बढ़ता है
    • लेकिन कम आकार का होने से उभार कम या न के बराबर दिखता है।
  • यौवन में परिवर्तन का कारण
    • यौवन के दौरान पुरुष सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के बढ़ने से स्वरयंत्र का आकार बढ़ता है
    • जिससे स्वर तार (vocal cords) लंबे और मोटे हो जाते हैं। इससे आवाज गहरी हो जाती है
    • गले पर एडम्स एप्पल उभर आता है। यह परिवर्तन आमतौर पर 12-16 वर्ष की आयु में होता है
    • लड़कों की आवाज में क्रैकिंग (टूटना) भी इसी कारण से सुनाई देता है।
  • कार्य और महत्व
    • आवाज निर्माण: स्वरयंत्र हवा के कंपन से ध्वनि पैदा करता है; बड़ा स्वरयंत्र गहरी मर्दाना आवाज देता है।
    • संरक्षण: यह श्वास नली (ट्रेकिआ) की रक्षा करता है और निगलने में मदद करता है।
    • लिंग भेद: यह पुरुषों की द्वितीयक लैंगिक विशेषता है, जो लड़कियों में कम विकसित होती है।
  • अन्य तथ्य
    • कुछ मामलों में महिलाओं या ट्रांसजेंडर व्यक्तियों में भी हार्मोन थेरेपी से यह उभार दिख सकता है।
    • सर्जरी से इसे कम किया जा सकता है (ट्रेक्युलीनोप्लास्टी), लेकिन सामान्यतः यह हानिरहित है।
    • भारतीय पाठ्यक्रमों जैसे NCERT कक्षा 8 में इसे कंठमणि के रूप में पढ़ाया जाता है।

5. मानव मस्तिष्क का कौन-सा भाग सीधी रेखा में चलने के लिए उत्तरदायी है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सेरिबैलम
Solution:
  • मानव मस्तिष्क का वह भाग जो मुख्य रूप से एक सीधी रेखा में चलने के लिए उत्तरदायी होता है
  • सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) है। सेरिबैलम मस्तिष्क के पीछे प्रमस्तिष्क के नीचे स्थित होता है।
  • यह चलते समय संतुलन एवं समन्वय बनाए रखने सहित स्वैच्छिक गतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • अनुमस्तिष्क की संरचना
    • इसके ऊपरी सतह पर समानांतर क्रीड़ाएं (फोलिया) होती हैं
    • जो इसकी सिलवटदार संरचना प्रदान करती हैं। यह मस्तिष्क का दूसरा सबसे बड़ा भाग है
    • जो कुल मस्तिष्क भार का लगभग 10-15% रखता है
    • लेकिन न्यूरॉन्स की संख्या में प्रमस्तिष्क से भी अधिक होता है।
    • अनुमस्तिष्क में तीन मुख्य परतें होती हैं: आणविक परत, पुरकिन्जे कोशिका परत और ग्रेन्युलर परत
    • जो सूचनाओं को संसाधित करने में सहायक हैं।
  • सीधी रेखा में चलने में भूमिका
    • सीधी रेखा में चलना एक जटिल प्रक्रिया है
    • जिसमें संतुलन, मांसपेशियों का समन्वय और postural नियंत्रण शामिल होता है।
    • अनुमस्तिष्क कान के आंतरिक भाग (vestibular system) से आने वाली संतुलन संबंधी सूचनाओं
    • आंखों से दृष्टि संबंधी डेटा और मांसपेशियों-जोड़ों से प्रोप्रियोसेप्टिव फीडबैक को एकीकृत करता है।
    • यह प्रमस्तिष्क से प्राप्त गति निर्देशों को ठीक-ठीक समायोजित करके चिकनी और सीधी गति सुनिश्चित करता है
    • जैसे साइकिल चलाना या पेंसिल उठाना। यदि अनुमस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाए
    • तो व्यक्ति लहराते हुए या टेढ़ी-मेढ़ी चाल चलता है (ataxia), जो नशे की हालत जैसी दिखाई देती है।
    • प्रमस्तिष्क चलने की योजना बनाता है, लेकिन अनुमस्तिष्क वास्तविक निष्पादन में सुधार लाता है।
    • बेसल गैंग्लिया भी लयबद्ध गति में सहायता करते हैं, किंतु अनुमस्तिष्क का योगदान सबसे विशिष्ट है।
  • कार्यप्रणाली का विस्तार
    • अनुमस्तिष्क मॉसि कण्ठ (mossy fibers) और तुला कण्ठ (climbing fibers) के माध्यम से सूचनाएं ग्रहण करता है।
    • यह त्रुटि सुधार तंत्र (error correction) का उपयोग करके वास्तविक गति को नियोजित गति से तुलना करता है
    • तत्काल समायोजन करता है। उदाहरणस्वरूप, असमान सतह पर चलते
    • यह पैरों को समायोजित कर गिरने से बचाता है।
    • बच्चों में अनुमस्तिष्क चलना सीखने में महत्वपूर्ण है
    • जबकि वयस्कों में यह आदतन क्रियाओं को परिष्कृत रखता है।

6. निम्नलिखित में से किसमें पायरूवेट, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में लैक्टिक अम्ल और ऊर्जा में बदल जाता है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मानव पेशी कोशिकाएं
Solution:
  • मानव पेशी कोशिकाएं
    • जब हम तीव्र व्यायाम करते हैं
    • तो मांसपेशियों को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पाती है।
    • इस स्थिति में, मांसपेशी कोशिकाएं ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए अवायवीय श्वसन का सहारा लेती हैं।
    • ग्लूकोज को पायरूवेट में तोड़ा जाता है
    • (ग्लाइकोलाइसिस), और फिर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में, पायरूवेट को लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) और थोड़ी मात्रा में ऊर्जा (ATP) में परिवर्तित किया जाता है।
    • लैक्टिक अम्ल का जमाव मांसपेशियों में दर्द और थकान का कारण बन सकता है।
  • अवायवीय श्वसन क्या है?
    • अवायवीय श्वसन वह जैव रासायनिक प्रक्रिया है
    • जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या कमी में ग्लूकोज का अपघटन होता है।
    • ग्लाइकोलाइसिस के बाद प्राप्त पायरूवेट को लैक्टेट डिहाइड्रोजनेज़ एंजाइम की सहायता से लैक्टिक अम्ल (लैक्टेट) में बदल दिया जाता है
    • जिससे NAD+ पुनर्जनित होता है और ग्लाइकोलाइसिस चक्र चलता रहता है।
    • इस दौरान 2 ATP अणु ऊर्जा के रूप में प्राप्त होते हैं।
  • प्रक्रिया का चरणबद्ध विवरण
    • ग्लाइकोलाइसिस: साइटोप्लाज्म में ग्लूकोज 6-कार्बन से 2 पायरूवेट (3-कार्बन) में टूटता है
    • पायरूवेट का परिवर्तन: ऑक्सीजन न होने पर पायरूवेट + NADH → लैक्टिक अम्ल + NAD+।
    • यह साइटोप्लाज्म में ही होता है।
    • ऊर्जा उत्पादन: प्रत्येक ग्लूकोज से कुल 2 ATP प्राप्त होते हैं, जो मांसपेशियों को तत्काल ऊर्जा देते हैं।
  • मानव पेशी कोशिकाओं में महत्व
    • भारी व्यायाम, दौड़ या वजन उठाने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति अपर्याप्त हो जाती है।
    • तब पेशी कोशिकाएं अवायवीय मार्ग अपनाती हैं, जिससे लैक्टिक अम्ल जमा होता है
    • थकान या मांसपेशी दर्द (लैक्टिक एसिडोसिस) होता है।
    • बाद में ऑक्सीजन उपलब्ध होने पर लैक्टिक अम्ल को यकृत में ग्लूकोज में परिवर्तित कर लिया जाता है (कॉरि चक्र)।

7. मनुष्य के हाथ में कितनी हड्डियां (अस्थियां) होती हैं? [CHSL (T-I) 13 अप्रैल, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 27
Solution:
  • मनुष्य के एक हाथ (कलाई से उंगलियों तक) में कुल 27 हड्डियां होती हैं, जिन्हें इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:
  • कार्पल (Carpals): कलाई में 8 छोटी हड्डियां होती हैं।
  • मेटाकार्पल (Metacarpals): हथेली में 5 लंबी हड्डियां होती हैं, जो कार्पल को उंगलियों से जोड़ती हैं।
  • फलेंजेस (Phalanges): उंगलियों और अंगूठे में 14 हड्डियां होती हैं (अंगूठे में 2 और प्रत्येक अन्य उंगली में 3)।
  • इस प्रकार, कुल = 8 (कार्पल) + 5 (मेटाकार्पल) + 14 (फलेंजेस) = 27 हड्डियां
  • हड्डियों का वर्गीकरण
    • हाथ की हड्डियाँ तीन मुख्य भागों में विभाजित होती हैं।
    • कलाई (कार्पल हड्डियाँ) में 8 हड्डियाँ होती हैं, जो दो पंक्तियों में व्यवस्थित रहती हैं।
    • हथेली के मध्य भाग (मेटाकार्पल हड्डियाँ) में 5 हड्डियाँ पाई जाती हैं
    • प्रत्येक उंगली के आधार से जुड़ी हुई। उंगलियों (फलांज हड्डियाँ) में कुल 14 हड्डियाँ होती हैं
    • जहाँ अंगूठे में 2 और बाकी चार उंगलियों में प्रत्येक में 3-3 हड्डियाँ होती हैं।
    • कार्य और महत्व
    • ये हड्डियाँ हाथ को लचीलापन, गति और मजबूती प्रदान करती हैं।
    • कार्पल हड्डियाँ कलाई को स्थिरता देती हैं, जबकि मेटाकार्पल और फलांज गतिविधियों जैसे पकड़ना
    • लिखना या वस्तुओं को संभालना संभव बनाती हैं।
    • हाथ की मांसपेशियाँ, स्नायुबंधन और टेंडन इन हड्डियों के साथ मिलकर सूक्ष्म गतियों को नियंत्रित करते हैं।
  • सामान्य भ्रम
    • कुछ स्रोतों में हाथ के साथ कलाई से ऊपर की भुजा की हड्डियाँ (जैसे रेडियस और अल्ना) जोड़कर 30 बताते हैं
    • लेकिन शुद्ध रूप से "हाथ" में केवल 27 ही गिनी जाती हैं। दोनों हाथों में कुल 54 हड्डियाँ होती हैं।

8. निम्नलिखित में से कौन एक अरेखित पेशी का उदाहरण है? [JE मैकेनिकल परीक्षा 22 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) नेत्र में आइरिस (परितारिका) की मांसपेशियां
Solution:
  • आइरिस (परितारिका) की मांसपेशियां अरेखित पेशियों का उदाहरण हैं।
  • वस्तुतः अंतरंग पेशियां शरीर के अंतरंग अंगों जैसे- आहार नाल, जनन मार्ग आदि की भीतरी भित्ति में स्थित होती हैं
  • जो अरेखित व चिकनी दिखती हैं। अतः इन्हें चिकनी अथवा अरेखित पेशियां कहते हैं।
  • इन पेशियों की क्रिया तंत्रिका तंत्र के ऐच्छिक नियंत्रण में नहीं होती है, इसलिए इन्हें अनैच्छिक पेशियां भी कहते हैं।
  • अरेखित पेशियों की विशेषताएँ
    • अरेखित पेशियाँ एकल कोशिकीय (unicellular) होती हैं
    • जिनमें स्पष्ट धारियाँ (striations) नहीं होतीं। ये धीमी गति से संकुचित होती हैं
    • लेकिन लंबे समय तक संकुचन बनाए रख सकती हैं
    • जो आंतरिक अंगों की निरंतर गतिविधियों के लिए उपयुक्त है।
    • इनका नियंत्रण स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) द्वारा होता है, इसलिए ये स्वैच्छिक नहीं होतीं।
  • प्रमुख उदाहरण
    • पाचन तंत्र: ग्रेस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रेक्ट (आंतों) की पेशियाँ भोजन को आगे धकेलने (peristalsis) के लिए कार्य करती हैं।
    • रक्त वाहिकाएँ: धमनियों और शिराओं की दीवारों में पाई जाती हैं, जो रक्तचाप नियंत्रित करती हैं।
    • मूत्राशय: यूरीनरी ब्लैडर में मूत्र को संग्रहित करने और निकालने में सहायक।
    • जननांग: यूटरस (गर्भाशय) में प्रसव के दौरान संकुचन उत्पन्न करती हैं।
    • आँख: आइरिस और सिलियरी बॉडी में प्रकाश और फोकस समायोजन के लिए।
  • रेखित पेशियों से अंतर
    • रेखित पेशियाँ (striated muscles) बहुकोशिकीय, स्वैच्छिक और धारियों वाली होती हैं
    • जैसे कंकाल की मांसपेशियाँ, जबकि अरेखित पेशियाँ अनैच्छिक, चिकनी और आंतरिक अंगों तक सीमित रहती हैं।
    • यह अंतर इनकी संरचना (अलग थोकैमायोसिन फिलामेंट्स व्यवस्था) और कार्य से उत्पन्न होता है।
  • कार्य और महत्व
    • ये पेशियाँ हृदय की धड़कन (हृदय पेशि रेखित लेकिन विशेष प्रकार), रक्त परिसंचरण, भोजन पाचन और अपशिष्ट निष्कासन जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं को संचालित करती हैं।
    • इनकी थकान-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, जो निरंतर कार्य के लिए आदर्श बनाती है।

9. पाचन की प्रक्रिया में लाइपेज के कार्य की पहचान करें। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पायसीकृत वसा का विघटन करना
Solution:
  • लाइपेज एक एंजाइम है, जो वसा के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह वसा को वसीय अम्लों एवं मोनोग्लिसराइड्स में विखंडित करता है।
  • लाइपेज एंजाइम प्राकृतिक रूप से अग्न्याशय तथा आमाशय से स्रावित होने वाले रस में उपस्थित होता है।
  • इस प्रकार विकल्प (b) सही उत्तर है।
  • लाइपेज के प्रकार
    • पाचन तंत्र में विभिन्न प्रकार के लाइपेज पाए जाते हैं।
    • लार लाइपेज (सलिवरी लाइपेज) मुंह में थोड़ी मात्रा में वसा पचाना शुरू करता है
    • जबकि गैस्ट्रिक लाइपेज पेट में कार्य करता है।
    • मुख्य भूमिका अग्न्याशय लाइपेज (पैंक्रियाटिक लाइपेज) की होती है, जो छोटी आंत में सक्रिय होता है।
  • कार्य प्रक्रिया
    • लाइपेज वसा के पाचन के लिए पित्त लवणों के साथ मिलकर काम करता है।
    • पित्त लवण यकृत से आते हैं और वसा की बूंदों को सूक्ष्म कणों (माइसेल्स) में बदल देते हैं
    • जिसे इमल्सीकरण कहते हैं।
    • इसके बाद लाइपेज इन पायसीकृत वसा को हाइड्रोलिसिस द्वारा वसा अम्ल और मोनोग्लिसराइड्स में परिवर्तित कर देता है।
    • यह प्रक्रिया ड्यूओडेनम (छोटी आंत का प्रथम भाग) में होती है।
  • पाचन में चरणबद्ध भूमिका
    • मुंह गहन: लार लाइपेज न्यूनतम कार्य करता है, मुख्यतः लंबी चेन ट्राइग्लिसराइड्स पर।
    • पेट: गैस्ट्रिक लाइपेज लगभग 30% वसा पचाता है, विशेषकर छोटी चेन वसा पर।
    • छोटी आंत: अग्न्याशय लाइपेज 70-90% वसा पाचन करता है
    • कोलेसिस्टोकाइनिन हार्मोन द्वारा सक्रिय होकर।
    • परिणामी उत्पाद आंत की दीवार से अवशोषित होकर लिम्फ में जाते हैं।
  • महत्व और प्रभाव
    • लाइपेज के अभाव में वसा का अपचायित होना (स्टेटोरिया) होता है
    • जो दस्त, वजन घटना और विटामिन A, D, E, K की कमी का कारण बनता है।
    • अग्नाशय रोग जैसे पैंक्रियाटाइटिस में लाइपेज स्तर प्रभावित होता है।
    • यह ऊर्जा उत्पादन, कोशिका झिल्ली निर्माण और हार्मोन संश्लेषण के लिए आवश्यक फैटी एसिड उपलब्ध कराता है।

10. लार में कौन-सा एंजाइम मौजूद होता है? [CHSL (T-I) 06 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एमाइलेस
Solution:
  • लार एमाइलेस
    • यह एंजाइम कार्बोहाइड्रेट (starch) के पाचन की शुरुआत करता है।
    • यह जटिल स्टार्च को छोटे शुगर अणुओं (जैसे माल्टोस) में तोड़ना शुरू करता है।
    • यही कारण है कि यदि आप रोटी या चावल को लंबे समय तक चबाते हैं, तो वह मीठा लगने लगता है।
  • मुख्य एंजाइम
    • लार में मुख्य रूप से दो एंजाइम पाए जाते हैं
    • टायलिन (सलाइवरी एमाइलेज या प्टायलिन) और लाइसोजाइम. टायलिन स्टार्च को माल्टोज़ जैसे सरल शर्कराओं में तोड़ता है
    • जबकि लाइसोजाइम जीवाणुओं की कोशिका भित्ति को नष्ट कर संक्रमण से बचाव करता है.
  • टायलिन (Ptyalin) की विस्तृत जानकारी
    • टायलिन लार ग्रंथियों (जैसे उपकर्ण, अधोजिह्वा और अधोजंभ ग्रंथियाँ) से स्रावित होता है
    • यह एक α-एमाइलेज एंजाइम है जो स्टार्च (अमाइलोज़ और अमाइलोपेक्टिन) को डेक्सट्रिन और माल्टोज़ में परिवर्तित करता है
    • पाचन प्रक्रिया मुंह में चबाने के दौरान शुरू होती है
    • लेकिन पेट के अम्लीय pH (लगभग 2-3) में यह निष्क्रिय हो जाता है
    • इसलिए इसका अधिकांश कार्य ग्रासनली और छोटी आंत के प्रारंभिक भाग में होता है
    • यह कार्बोहाइड्रेट पाचन का पहला चरण है, जो कुल स्टार्च पाचन का 20-30% हिस्सा संभालता है.
  • लाइसोजाइम की भूमिका
    • लाइसोजाइम एक एंटीमाइक्रोबियल एंजाइम है
    • जो बैक्टीरिया (विशेषकर ग्राम-पॉजिटिव) की पेप्टिडोग्लाइकन भित्ति को हाइड्रोलाइज करता है
    • यह भोजन के साथ आने वाले हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करता है
    • जिससे मुंह स्वच्छ रहता है. इसके अलावा, लार में मौजूद इम्यूनोग्लोबुलिन A और हिालुरोनिडेज जैसे अन्य घटक भी सहायक होते हैं
    • लेकिन लाइसोजाइम सबसे प्रमुख रक्षात्मक एंजाइम है.
  • अन्य घटक और महत्व
    • लार में इलेक्ट्रोलाइट्स (Na⁺, K⁺, HCO₃⁻), म्यूसिन (चिकनाहट के लिए) और हल्के अम्लीय गुण भी होते हैं
    • जो pH को 6.2-7.6 बनाए रखते हैं—टायलिन के लिए आदर्श. ये एंजाइम पाचन तंत्र की पहली रक्षा रेखा हैं
    • प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, NEET) में अक्सर पूछे जाते हैं
    • कमी होने पर (जैसे शुष्क मुंह रोग में) पाचन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है.