मानव शारीरिकी एवं क्रिया विज्ञान (जीव विज्ञान)

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11. स्टिऐप्सिन (Steapsin) एंजाइम जो वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है, ....... से स्रावित होता है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अग्न्याशय
Solution:
  • स्टिऐप्सिन (Steapsin) एंजाइम जो वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है
  • अग्न्याशय से स्रावित होता है। सामान्यतया भोजन की 90 से 95% वसा का पाचन यहीं पर होता है
  • शेष वसा बिना पचे मल के साथ बाहर निकल जाता है।
  • यह एंजाइम पित्त द्वारा पायसीकृत वसाओं के बिंदुकों से प्रतिक्रिया करके वसा अणुओं को मोनोग्लिसराइड्स एवं वसीय अम्लों में विखंडित करता है।
  • स्राव का स्रोत
    • स्टेआप्सिन अग्न्याशय की बहिःस्रावी कोशिकाओं (exocrine cells) द्वारा उत्पन्न होता है
    • अग्न्याशयी रस (pancreatic juice) के रूप में छोटी आंत के प्रथम भाग, ड्यूओडेनम में स्रावित किया जाता है।
    • यह रस पेट के अम्लीय चाइम को उदासीन बनाता है
    • वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के पाचन हेतु आवश्यक एंजाइम प्रदान करता है।
    • अग्न्याशय एक द्वैत ग्रंथि है जो पाचन एंजाइमों के साथ-साथ इंसुलिन जैसे हार्मोन भी रक्त में छोड़ता है।
  • क्रिया तंत्र
    • स्टेआप्सिन वास्तव में अग्न्याशयी लाइपेज (pancreatic lipase) का पुराना नाम है
    • जो पित्त लवणों (bile salts) द्वारा पायसीकृत (emulsified) वसा पर जल-विघटन (hydrolysis) करता है।
    • यह ट्राइग्लिसराइड्स को मोनोग्लिसराइड्स, वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है
    • जिन्हें आंत्र कोशिकाएँ अवशोषित कर चाइलोमाइक्रॉन्स बनाती हैं।
    • कोलाइपेज (colipase) नामक सह-एंजाइम स्टेआप्सिन को वसा बूंदों पर बाँधने में सहायता करता है।
  • शारीरिक महत्व
    • यह एंजाइम आहार वसा के लगभग 90% पाचन का दायित्व निभाता है
    • क्योंकि वसा मूल रूप में अवशोषित नहीं हो सकती।
    • इसकी कमी (जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस में) स्टेटोरिया (वसा युक्त मल) और कुपोषण का कारण बनती है।
    • ट्रिप्सिन जैसे अवरोधक इसे अग्न्याशय में समय से पूर्व सक्रिय होने से रोकते हैं।
  • संबंधित एंजाइम
    • गैस्ट्रिक लाइपेज: पेट द्वारा स्रावित, सीमित वसा पाचन।
    • कोलाइपेज: अग्न्याशय से, स्टेआप्सिन का सहायक।
    • अग्न्याशयी एमाइलेज और प्रोटीज: कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन पाचन हेतु।

12. कौन-से कोशिका अंगक अंतःकोशिकीय पाचन में सहायता करते हैं और कोशिका की 'आत्मघाती थैली' (suicidal bags) के नाम से जाने जाते हैं? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) लाइसोसोम
Solution:
  • 'लाइसोसोम' कोशिका द्वारा अंतर्गृहीत पदार्थों का पाचन करते हैं, जिन्हें अंतःकोशिकीय पाचन कहते हैं।
  • लाइसोसोम में जल अपघटनीय एंजाइम (hydrolytic enzyme) पाए जाते हैं
  • जिसमें एसिड फॉस्फेटेज की बाहुल्यता होती है।
  • ये एंजाइम लाइसोसोम की आवरण कला के फट जाने या किसी अन्य कारण से बाहर आ जाते हैं
  • तो कोशिका के सभी घटकों को जल अपघटन क्रिया द्वारा पचा देते हैं
  • जिससे कोशिका विखंडित हो जाती है
  • जिसके कारण इसे कोशिका की 'आत्मघाती थैली (suicidal bag of cells) कहा जाता है।
  • इसकी खोज डी दुवे (De Duve) द्वारा की गई थी।
  • संरचना
    • लाइसोसोम एकल इकाई झिल्ली से घिरी थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं
    • जिनका आकार 0.1 से 1.2 माइक्रोमीटर तक होता है।
    • इनमें 50 से अधिक प्रकार के हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेज, प्रोटीज, न्यूक्लीज) होते हैं
    • जो अम्लीय pH (लगभग 5) में सक्रिय रहते हैं।
    • गोल्गी उपकरण इन्हें बनाता है, और ये प्राइमरी तथा सेकेंडरी लाइसोसोम के रूप में वर्गीकृत होते हैं।
  • अंतःकोशिकीय पाचन में भूमिका
    • लाइसोसोम कोशिका के अंदर पाचन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
    • एंडोसाइटोसिस से प्राप्त सामग्री एंडोसोम के माध्यम से लाइसोसोम से विलीन होकर पच जाती है।
    • ऑटोफैगी द्वारा पुराने अंगकों (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया) को भी वे विघटित करते हैं।
    • विदेशी कणों (बैक्टीरिया, वायरस) का पाचन फागोलाइसोसोम बनाकर।
    • अपशिष्ट पदार्थों और मैक्रोमॉलेक्यूल्स का हाइड्रोलिसिस।
    • एपोप्टोसिस (प्रोग्राम्ड सेल डेथ) में सहायता।
  • आत्मघाती थैली क्यों
    • कोशिका क्षतिग्रस्त होने पर लाइसोसोम की झिल्ली फट जाती है
    • जिससे एंजाइम बाहर निकलकर स्वयं कोशिका को पचा लेते हैं
    • इसे ऑटोलिसिस कहते हैं। संक्रमण या उम्र के कारण यह प्रक्रिया कोशिका मृत्यु का कारण बनती है।
    • इस गुण के कारण इन्हें 'सुसाइडल बैग्स' कहा जाता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण कार्य
    • कोशिका विभाजन के दौरान पुरानी संरचनाओं का निपटान।
    • हड्डी पुनर्जनन में ऑस्टियोक्लास्ट कोशिकाओं में सक्रियता।
    • प्लांट कोशिकाओं में वैक्यूओल के समान भूमिका, लेकिन जंतु कोशिकाओं में प्रमुख।
  • लाइसोसोम संबंधी विकार
    • लाइसोसोमल स्टोरेज डिजीज (जैसे टेय-सेक्स रोग) में एंजाइम की कमी से अपघटन बाधित होता है।

13. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पेप्सिन की क्रिया को सुगम बनाने में किस प्रकार सहायता करता है? [CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक अम्लीय माध्यम बनाता है, जो एंजाइम पेप्सिन की क्रिया को सुविधाजनक बनाता है।
Solution:
  • प्रोएंजाइम पेप्सिनोजेन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के संपर्क में आने से सक्रिय एंजाइम पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है
  • जो आमाशय का प्रोटीन-अपघटनीय एंजाइम है। पेप्सिन प्रोटीनों को प्रोटियोज तथा पेप्टोंस (पेप्टाइडों) में बदल देता है।
  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पेप्सिनों के लिए उचित अम्लीय माध्यम तैयार करता है, जो एंजाइम पेप्सिन की क्रिया को सुगम बनाता है।
  • अम्लीय माध्यम का निर्माण
    • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पेट के अंदर pH को लगभग 1.8 तक कम कर देता है
    • जो पेप्सिन के लिए इष्टतम अम्लीय वातावरण प्रदान करता है।
    • पेप्सिन एक प्रोटियोलाइटिक एंजाइम है जो न्यूट्रल या क्षारीय pH में निष्क्रिय रहता है
    • लेकिन इस अम्लीय स्थिति में यह सक्रिय होकर प्रोटीन अणुओं को पेप्टाइड्स में विघटित करने लगता है।
    • यह प्रक्रिया प्रोटीन के बड़े टुकड़ों को छोटे-छोटे भागों में तोड़ने में सहायक होती है
    • जिससे आगे की आंतों में पाचन आसान हो जाता है।
  • पेप्सिनोजेन का सक्रियण
    • आमाशय की मुख्य कोशिकाएं पेप्सिनोजेन नामक असक्रिय एंजाइम (प्रोएंजाइम) स्रावित करती हैं।
    • HCl इस पेप्सिनोजेन को हाइड्रोलिसिस द्वारा सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित कर देता है
    • क्योंकि अम्ल के H+ आयन प्रोटीन संरचना के पीप्टाइड बंधनों को तोड़ने में मदद करते हैं।
    • एक बार सक्रिय हो जाने पर, पेप्सिन स्वयं अन्य पेप्सिनोजेन अणुओं को भी पेप्सिन में बदल सकता है
    • जिससे एक श्रृंखला प्रतिक्रिया (autocatalysis) शुरू हो जाती है। यह तंत्र पाचन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाता है।
  • अतिरिक्त सहायक भूमिकाएं
    • HCl न केवल पेप्सिन की क्रिया सुगम बनाता है
    • बल्कि भोजन के साथ आने वाले हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं को मारकर संक्रमण से बचाव भी करता है।
    • यह प्रोटीनों को आंशिक रूप से डिनेचर (संरचना बिगाड़) भी करता है
    • जिससे पेप्सिन को उनके आंतरिक भागों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
    • यदि HCl की मात्रा अपर्याप्त हो, तो प्रोटीन पाचन अपूर्ण रह जाता है
    • बड़े प्रोटीन टुकड़े छोटी आंत में चले जाते हैं, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करता है।
  • जैव रासायनिक प्रक्रिया का विवरण
    • पेप्सिन प्रोटीन के पीप्टाइड बंधनों (विशेषकर हाइड्रोफोबिक अमीनो एसिड वाले) को तोड़ता है
    • जिससे पॉलीपेप्टाइड्स और पेप्टोन्स बनते हैं। HCl इस एंजाइम की कैटेलिटिक साइट को सक्रिय रखता है
    • सब्सट्रेट (प्रोटीन) को उसके आकार में बदलने में सहायता करता है।
    • सामान्यतः, पेट का pH 1.5-3.5 के बीच रहता है
    • जो पेप्सिन की अधिकतम गतिविधि (optimum activity) के लिए आवश्यक है।
    • इस प्रक्रिया के बाद, ग्रहणी में पहुंचने पर पित्त रस और अग्न्याशयी रस pH को क्षारीय बनाते हैं
    • जहां ट्रिप्सिन जैसे अन्य एंजाइम आगे पाचन करते हैं।

14. निम्नलिखित में से कौन-सा किण्वक (एंजाइम) वसा को तोड़ने में मदद करता है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) लाइपेज
Solution:
  • हमारे भोजन सामग्री में लिपिड्स सरल वसाओं अर्थात ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में होते हैं।
  • वसा को तोड़ने में लाइपेज नामक एंजाइम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • यह वसा को वसीय अम्ल तथा मोनोग्लिसराइड्स में विखंडित करती है।
  • इस प्रकार लाइपेज एंजाइम वसा को तोड़ने में सहायता करती है।
  • लाइपेज़ का कार्य
    • लाइपेज़ मुख्य रूप से अग्न्याशय द्वारा निर्मित होता है
    • छोटी आंत में सक्रिय रहता है। यह वसा के बड़े कणों को जल-विघटन (हाइड्रोलिसिस) द्वारा तोड़ता है।
    • पित्त लवण वसा को पहले पायसीकृत (इमल्सीफाई) करते हैं, जिससे लाइपेज़ का कार्य कुशल बनता है।
  • वसा पाचन प्रक्रिया
    • वसा पाचन मुंह से शुरू होता है, लेकिन मुख्यतः छोटी आंत में होता है।
    • पित्त वसा को छोटे मिसेल्स में बदलता है, लाइपेज़ इन्हें विघटित करता है।
    • परिणामस्वरूप फैटी अम्ल आंत की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो जाते हैं
    • ऊर्जा के लिए उपयोग होते हैं। यह प्रक्रिया पोषण अवशोषण के लिए आवश्यक है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • मानव शरीर में तीन मुख्य प्रकार: अग्न्याशयी लाइपेज़ (प्रमुख), पेटीय लाइपेज़, भाषीय लाइपेज़।
    • कमी से वसा मल त्याग (स्टेटोरिया) हो सकती है।
    • औद्योगिक उपयोग: डिटर्जेंट, खाद्य प्रसंस्करण में।

15. मनुष्यों में, स्टार्च जैसे कार्बोहाइड्रेट का पाचन निम्नलिखित में से किस भाग में शुरू होता है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मुख गुहिका
Solution:
  • मनुष्य में स्टार्च का पाचन मुख गुहिका से शुरू होता है। लार एमाइलेज नामक एक एंजाइम छोड़ती है
  • जो आपके द्वारा खाए जा रहे कार्बोहाइड्रेट में शर्करा के टूटने की प्रक्रिया शुरू करती है।
  • पाचन का प्रारंभिक चरण
    • मुख गुहा में चबाने की क्रिया से भोजन छोटे कणों में टूटता है
    • जिससे लार भोजन से मिश्रित हो जाती है। लार में मौजूद सलाइवरी एमाइलेज (प्टायलिन भी कहलाता है
    • स्टार्च को माल्टोज (एक डिसैकेराइड) और डेक्सट्रिन जैसे सरल कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करने लगता है।
    • यह प्रक्रिया मुंह में भोजन के थोड़े समय रहने के कारण आंशिक रूप से होती है, लगभग 30% स्टार्च यहां टूट सकता है।
  • आगे की प्रक्रिया
    • ग्रासनली में कोई पाचन नहीं होता, भोजन पेरिस्टालसिस द्वारा पेट पहुंचता है
    • जहां अम्लीय वातावरण के कारण एमाइलेज निष्क्रिय हो जाता है।
    • वास्तविक पूर्ण पाचन छोटी आंत (ग्रहणी) में होता है
    • जहां अग्न्याशयी एमाइलेज स्टार्च के बचे हुए भाग को माल्टोज में तोड़ता है।
    • फिर आंत्रिक एंजाइम जैसे माल्टेज माल्टोज को ग्लूकोज में बदल देते हैं, जो रक्त में अवशोषित हो जाता है।
  • एंजाइम और स्रोत
    • सलाइवरी एमाइलेज: लार ग्रंथियों से, स्टार्च को माल्टोज में तोड़ता है
    • पैंक्रियाटिक एमाइलेज: अग्न्याशय से, क्षारीय माध्यम में सक्रिय।
    • माल्टेज, सुक्रेज: छोटी आंत की कोशिकाओं से, डिसैकेराइड को मोनोसैकेराइड में।

16. पेट की अम्लता को उदासीन करने के लिए निम्नलिखित में से किसका उपयोग प्रतिअम्ल (antacid) के रूप में किया जाता है? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड
Solution:
  • पेट की अम्लता को उदासीन करने के लिए मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH),]
  • प्रतिअम्ल के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • यह एक अकार्बनिक यौगिक है। यह जल में विलयित होने पर दूध जैसा दिखता है
  • इसलिए इसे 'मिल्क ऑफ मैग्नीशिया' भी कहा जाता है।
  • प्रतिअम्ल क्या हैं?
    • प्रतिअम्ल वे क्षारीय पदार्थ हैं जो पेट में अतिरिक्त अम्ल उत्पादन को बेअसर करते हैं।
    • इनमें सामान्यतः एल्यूमिनियम हाइड्रॉक्साइड (Al(OH)₃), कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड या सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) जैसे तत्व शामिल होते हैं।
    • ये अम्ल के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके पानी और लवण बनाते हैं
    • जैसे: Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O।
  • मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का कार्य
    • यह दवा पेट की अम्लता के कारण होने वाले दर्द और अल्सर को कम करती है।
    • ओवर-द-काउंटर उपलब्ध होने से बिना प्रिस्क्रिप्शन के ली जा सकती है
    • लेकिन कब्ज का कारण भी बन सकती है क्योंकि यह रेचक के रूप में भी कार्य करती है।
    • उपयोग से 30 मिनट से 6 घंटे में राहत मिल सकती है।
  • अन्य सामान्य प्रतिअम्ल
    • बेकिंग सोडा (NaHCO₃): घरेलू उपाय के रूप में अम्लता दूर करता है।
    • मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड: सीधे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का मुख्य घटक।
    • प्राकृतिक विकल्प: अदरक का पानी, आंवला या मुरब्बा।
  • सावधानियां
    • लंबे समय तक उपयोग से किडनी प्रभावित हो सकती है
    • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। डॉक्टर की सलाह से ही
    • खासकर गर्भावस्था या अन्य दवाओं के साथ।

17. निम्नलिखित में से किस विटामिन को नियासिन (Niacin) के नाम से जाना जाता है? [CHSL (T-I) 11 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) विटामिन B3
Solution:
  • विटामिन B3 को नियासिन के नाम से जाना जाता है।
  • इसे पेलाग्रा प्रिवेंटिव विटामिन के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसकी कमी से पेलाग्रा रोग हो जाता है।
  • कार्बोहाइड्रेट, वसा एवं प्रोटीन को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए नियासिन आवश्यक है।
  • नियासिन दो रूपों में पाया जाता है, निकोटिनिक एसिड एवं निकोटिनमाइड।
  • कार्य और लाभ
    • नियासिन कोलेस्ट्रॉल कम करने, गठिया नियंत्रित करने और मस्तिष्क कार्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
    • यह त्वचा, पाचन तंत्र और तंत्रिका स्वास्थ्य को बनाए रखता है
    • 200 से अधिक एंजाइमों के सुचारू संचालन में भूमिका निभाता है।
    • इसके दो मुख्य रूप हैं: निकोटिनिक एसिड और नियासिनमाइड (निकोटिनामाइड), जो आसानी से अवशोषित हो जाते हैं।
  • स्रोत
    • नियासिन पशु उत्पादों जैसे मांस, मछली, दूध और अंडे से तथा पौधों से जैसे मूंगफली, दालें और साबुत अनाज से प्राप्त होता है।
    • ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड भी शरीर में नियासिन में परिवर्तित हो सकता है।
  • कमी के प्रभाव
    • इसकी कमी से पेलाग्रा रोग होता है
    • जिसमें त्वचा पर घाव, दस्त, मुंह के छाले, एनीमिया, सिरदर्द और मानसिक विकार जैसे लक्षण दिखते हैं।
    • गंभीर मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है।
  • दैनिक आवश्यकता
    • वयस्कों के लिए अनुशंसित दैनिक मात्रा उम्र, लिंग और स्थिति पर निर्भर करती है
    • सामान्यतः 14-16 मिलीग्राम। अधिक मात्रा से दुष्प्रभाव जैसे त्वचा पर लालिमा या पेट की समस्या हो सकती है।

18. विटामिन ए की कमी से ....... होता हैं। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली), CGL (T-I) 09 मार्च, 2020 (I-पाली), स्टेनोग्राफर 14 सितंबर, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) रतौंधी
Solution:
  • आंखों से संबंधित कई बीमारियां; जैसे रतौंधी, जीरोप्यैलमिया तथा आंख के सफेद हिस्से में धब्बे आदि सभी मुख्य रूप से विटामिन 'A' की कमी के कारण होती हैं।
  • विटामिन A को रेटिनॉल कहा जाता है। विटामिन 'A' दो रूपों में पाया जाता है
  • रेटिनॉल एवं कैरोटिन। विटामिन 'A' नेत्र, त्वचा, नाखून तथा बाल आदि के लिए आवश्यक होता है।
  • विटामिन 'A' को संक्रमणरोधी विटामिन (Anti Infection Vitamin) भी कहा जाता है।
  • गाजर, हरी सब्जियां, दूध तथा अंडे की जर्दी आदि सभी विटामिन A के प्रमुख स्रोत हैं।
  • कारण
    • जैसे दक्षिणी और पूर्वी एशिया में। वसा अवशोषण बाधित करने वाले रोग जैसे सीलिएक रोग, सिस्टिक फाइब्रोसिस, पुरानी दस्त, लिवर विकार या प्रोटीन-कैलोरी अल्पपोषण भी इसका जोखिम बढ़ाते हैं।
    • शरीर का अधिकांश विटामिन ए लिवर में संग्रहित होता है
    • इसलिए इन स्थितियों में कमी तेजी से विकसित हो सकती है।
  • लक्षण
    • प्रारंभिक लक्षण रतौंधी है, जिसमें अंधेरे में दिखना मुश्किल हो जाता है।
    • इसके बाद आंखों का सफेद भाग (कॉन्जंक्टिवा) और कॉर्निया सूखकर मोटा हो जाता है
    • जिसे ज़ेरोफ्थैल्मिया कहते हैं, और बिटोट स्पॉट्स दिखाई दे सकते हैं।
    • त्वचा शुष्क-पपड़ीदार हो जाती है, श्वसन तंत्र, आंत और मूत्र मार्ग की परतें सख्त होकर संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं
    • खासकर बच्चों में खसरा की जटिलताएं। विकास रुक सकता है और गंभीर मामलों में मृत्यु दर 50% तक हो सकती है।
  • निदान
    • डॉक्टर लक्षणों जैसे रतौंधी के आधार पर संदेह करते हैं
    • रक्त जांच से विटामिन ए स्तर की पुष्टि करते हैं। अंधेरे में दृष्टि जांच या इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी की जाती है।
    • सप्लीमेंट देने पर सुधार से पुष्टि होती है।
  • उपचार और रोकथाम
    • उच्च खुराक वाले विटामिन ए सप्लीमेंट तुरंत दिए जाते हैं, विशेषकर खसरे वाले बच्चों को।
    • आहार में लीवर, मछली, अंडे, दूध, गाजर, शकरकंद और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।
    • विकासशील देशों में WHO सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम चलते हैं।
    • प्रोटीन-ऊर्जा अल्पपोषण को संबोधित करना जरूरी है।

19. निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन देखने की क्षमता में एक अहम भूमिका निभाता है? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) A
Solution:
  • आंखों से संबंधित कई बीमारियां; जैसे रतौंधी, जीरोप्यैलमिया तथा आंख के सफेद हिस्से में धब्बे आदि सभी मुख्य रूप से विटामिन 'A' की कमी के कारण होती हैं।
  • विटामिन A को रेटिनॉल कहा जाता है। विटामिन 'A' दो रूपों में पाया जाता है
  • रेटिनॉल एवं कैरोटिन। विटामिन 'A' नेत्र, त्वचा, नाखून तथा बाल आदि के लिए आवश्यक होता है।
  • विटामिन 'A' को संक्रमणरोधी विटामिन (Anti Infection Vitamin) भी कहा जाता है।
  • गाजर, हरी सब्जियां, दूध तथा अंडे की जर्दी आदि सभी विटामिन A के प्रमुख स्रोत हैं।
  • विटामिन A की भूमिका
    • विटामिन A (रेटिनॉल के रूप में जाना जाता है) आंखों की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन है।
    • यह रेटिना की कोशिकाओं (रोड्स और कोन्स) में प्रकाश संवेदनशील पिगमेंट्स का हिस्सा होता है
    • जो दृष्टि प्रक्रिया को संभव बनाता है। कमी होने पर रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) जैसी समस्या होती है
    • जहां अंधेरे में दिखना मुश्किल हो जाता है।
  • कमी के प्रभाव
    • विटामिन A की कमी से xerophthalmia नामक स्थिति हो सकती है, जिसमें आंखें सूख जाती हैं
    • बिटोट स्पॉट्स (सफेद धब्बे) दिखाई देते हैं। लंबे समय तक कमी से स्थायी अंधापन भी हो सकता है।
    • बच्चों में यह विकास रुकावट और संक्रमणों की संवेदनशीलता बढ़ाती है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विकासशील देशों में विटामिन A की कमी आंखों की बीमारियों का प्रमुख कारण है।
  • स्रोत और सेवन
    • प्राकृतिक स्रोतों में गाजर, पालक, शकरकंद, आम, दूध, अंडे और लीवर शामिल हैं।
    • शाकाहारी लोगों के लिए बीटा-कैरोटीन (गाजर में पाया जाने वाला) शरीर में विटामिन A में बदल जाता है।
    • वयस्कों के लिए दैनिक आवश्यकता 700-900 माइक्रोग्राम है।
    • अधिक मात्रा विषाक्त हो सकती है, इसलिए सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह से लें।
    • संतुलित आहार से कमी को रोका जा सकता है।

20. रिकेट्स और रतौंधी क्रमशः ....... और ....... की कमी के कारण होते हैं। [CHSL (T-I) 12 अगस्त, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) विटामिन D, विटामिन A
Solution:
  • विटामिन D तथा विटामिन A वसा में घुलनशील विटामिन हैं। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में सहायक होता है
  • जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है। विटामिन D की कमी से शरीर का अस्थि तंत्र (Bone Structure) प्रभावित होता है
  • व्यक्ति को रिकेट्स हो जाता है। विटामिन A की कमी से व्यक्ति को रतौंधी (Night blindness) हो जाती है।
  • रिकेट्स के कारण
    • इसकी कमी से हड्डियां ठीक से मजबूत नहीं बन पातीं।
    • अन्य कारणों में कैल्शियम या फॉस्फोरस की कमी, अपर्याप्त धूप का संपर्क (क्योंकि त्वचा सूर्य की किरणों से विटामिन D बनाती है)
    • किडनी या लीवर रोग, या आनुवंशिक कारक शामिल हैं।
  • रिकेट्स के लक्षण
    • इस रोग के प्रमुख लक्षणों में पैरों का झुक जाना (बाउ लेग्स)
    • छाती का आगे को निकल आना, सिर के पिछले भाग का चपटा होना
    • दांत निकलने में देरी, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और बार-बार फ्रैक्चर शामिल हैं।
    • छोटे बच्चों में विकास रुक जाना या छोटा कद भी आम है।
    • अगर समय पर इलाज न हो तो स्थायी विकृति हो सकती है।
  • रतौंधी के कारण
    • रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) आंखों की वह स्थिति है जिसमें कम रोशनी में देखने की क्षमता प्रभावित होती है
    • यह विटामिन A की कमी से होती है। विटामिन A रेटिना में रोड सेल्स के लिए जरूरी रोडोप्सिन नामक पिगमेंट बनाता है।
    • कमी के कारणों में असंतुलित आहार (जैसे हरी सब्जियां, गाजर, दूध उत्पादों की कमी), कुपोषण, आंतों के रोग या लंबे समय तक भूखमरी शामिल हैं।
    • गंभीर कमी से जीरोफथैल्मिया (आंखों का सूखना) भी हो सकता है।
  • रतौंधी के लक्षण
    • प्रमुख लक्षण रात या धुंधले अंधेरे में दिखाई न देना, आंखों में सूखापन, जलन, धुंधला दिखना और कोर्निया का क्षतिग्रस्त होना है।
    • प्रारंभिक अवस्था में केवल रात की अंधता होती है
    • लेकिन अनुपचारित रहने पर स्थायी अंधापन भी हो सकता है।
    • यह विशेष रूप से विकासशील देशों के कुपोषित बच्चों में आम है।
  • निदान और उपचार
    • रिकेट्स का निदान ब्लड टेस्ट (विटामिन D, कैल्शियम स्तर), एक्स-रे और हड्डी डेंसिटी टेस्ट से होता है
    • जबकि रतौंधी के लिए विटामिन A स्तर की जांच और आंखों की जांच पर्याप्त है।
    • उपचार में विटामिन D सप्लीमेंट्स, कैल्शियम युक्त आहार, धूप सेंकना (रिकेट्स के लिए) और विटामिन A सप्लीमेंट्स (रतौंधी के लिए) दिए जाते हैं।