Correct Answer: (d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक अम्लीय माध्यम बनाता है, जो एंजाइम पेप्सिन की क्रिया को सुविधाजनक बनाता है।
Solution:- प्रोएंजाइम पेप्सिनोजेन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के संपर्क में आने से सक्रिय एंजाइम पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है
- जो आमाशय का प्रोटीन-अपघटनीय एंजाइम है। पेप्सिन प्रोटीनों को प्रोटियोज तथा पेप्टोंस (पेप्टाइडों) में बदल देता है।
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पेप्सिनों के लिए उचित अम्लीय माध्यम तैयार करता है, जो एंजाइम पेप्सिन की क्रिया को सुगम बनाता है।
- अम्लीय माध्यम का निर्माण
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पेट के अंदर pH को लगभग 1.8 तक कम कर देता है
- जो पेप्सिन के लिए इष्टतम अम्लीय वातावरण प्रदान करता है।
- पेप्सिन एक प्रोटियोलाइटिक एंजाइम है जो न्यूट्रल या क्षारीय pH में निष्क्रिय रहता है
- लेकिन इस अम्लीय स्थिति में यह सक्रिय होकर प्रोटीन अणुओं को पेप्टाइड्स में विघटित करने लगता है।
- यह प्रक्रिया प्रोटीन के बड़े टुकड़ों को छोटे-छोटे भागों में तोड़ने में सहायक होती है
- जिससे आगे की आंतों में पाचन आसान हो जाता है।
- पेप्सिनोजेन का सक्रियण
- आमाशय की मुख्य कोशिकाएं पेप्सिनोजेन नामक असक्रिय एंजाइम (प्रोएंजाइम) स्रावित करती हैं।
- HCl इस पेप्सिनोजेन को हाइड्रोलिसिस द्वारा सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित कर देता है
- क्योंकि अम्ल के H+ आयन प्रोटीन संरचना के पीप्टाइड बंधनों को तोड़ने में मदद करते हैं।
- एक बार सक्रिय हो जाने पर, पेप्सिन स्वयं अन्य पेप्सिनोजेन अणुओं को भी पेप्सिन में बदल सकता है
- जिससे एक श्रृंखला प्रतिक्रिया (autocatalysis) शुरू हो जाती है। यह तंत्र पाचन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाता है।
- अतिरिक्त सहायक भूमिकाएं
- HCl न केवल पेप्सिन की क्रिया सुगम बनाता है
- बल्कि भोजन के साथ आने वाले हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं को मारकर संक्रमण से बचाव भी करता है।
- यह प्रोटीनों को आंशिक रूप से डिनेचर (संरचना बिगाड़) भी करता है
- जिससे पेप्सिन को उनके आंतरिक भागों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
- यदि HCl की मात्रा अपर्याप्त हो, तो प्रोटीन पाचन अपूर्ण रह जाता है
- बड़े प्रोटीन टुकड़े छोटी आंत में चले जाते हैं, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करता है।
- जैव रासायनिक प्रक्रिया का विवरण
- पेप्सिन प्रोटीन के पीप्टाइड बंधनों (विशेषकर हाइड्रोफोबिक अमीनो एसिड वाले) को तोड़ता है
- जिससे पॉलीपेप्टाइड्स और पेप्टोन्स बनते हैं। HCl इस एंजाइम की कैटेलिटिक साइट को सक्रिय रखता है
- सब्सट्रेट (प्रोटीन) को उसके आकार में बदलने में सहायता करता है।
- सामान्यतः, पेट का pH 1.5-3.5 के बीच रहता है
- जो पेप्सिन की अधिकतम गतिविधि (optimum activity) के लिए आवश्यक है।
- इस प्रक्रिया के बाद, ग्रहणी में पहुंचने पर पित्त रस और अग्न्याशयी रस pH को क्षारीय बनाते हैं
- जहां ट्रिप्सिन जैसे अन्य एंजाइम आगे पाचन करते हैं।