मानव शारीरिकी एवं क्रिया विज्ञान (जीव विज्ञान)

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31. स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली, कम प्रकाश में देखने की क्षमता (low-light vision) और स्वस्थ त्वचा के लिए कौन-सा विटामिन आवश्यक है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) विटामिन A
Solution:
  • स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली, कम प्रकाश में देखने की क्षमता (low-light-vision) और स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन A आवश्यक है।
  • यह आंख की रेटिना में रंगद्रव्य उत्पन्न करता है एवं अच्छी दृष्टि को बढ़ावा देता है
  • विशेषकर कम रोशनी में। यह विटामिन प्रतिरक्षा प्रणाली के नियमन में सहायता प्रदान करता है।
  • विटामिन A की भूमिका
    • विटामिन A (रेटिनॉल के रूप में जाना जाता है) आंखों के रेटिना में प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं के लिए जरूरी है
    • जो रात में या कम रोशनी में बेहतर दृष्टि प्रदान करता है। इसकी कमी से रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) होती है
    • जहां अंधेरे में वस्तुओं को देखना मुश्किल हो जाता है। यह त्वचा की बाहरी परत को स्वस्थ रखता है
    • फेफड़े, आंत तथा मूत्र मार्ग की आंतरिक सतहों को संक्रमणों से बचाता है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव
    • विटामिन A सफेद रक्त कोशिकाओं के कार्य को बढ़ावा देता है, जो संक्रमणों से लड़ती हैं
    • इम्यून सिस्टम को संतुलित रखता है। इसकी कमी से श्वसन संक्रमण, खसरा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है
    • खासकर बच्चों में। यह सूजन को नियंत्रित कर कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है।
  • त्वचा स्वास्थ्य में योगदान
    • विटामिन A त्वचा कोशिकाओं के विकास और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है
    • कमी होने पर त्वचा शुष्क, पपड़ीदार और संवेदनशील हो जाती है।
    • यह मुंहासों और सोरायसिस के उपचार में रेटिनोइड दवाओं के रूप में उपयोग होता है
    • कुछ त्वचा कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है। स्वस्थ त्वचा बैरियर के रूप में संक्रमण रोकता है।
  • स्रोत और कमी के लक्षण
    • प्राकृतिक स्रोतों में गाजर, पालक, शकरकंद, आम, दूध उत्पाद, लीवर और अंडे शामिल हैं
    • बीटा-कैरोटीन (पौधों से) शरीर में विटामिन A में बदल जाता है।
    • कमी के लक्षण: रतौंधी, आंखों का सूखापन (ज़ेरोफ्थैल्मिया), त्वचा का खुरदुरापन, बार-बार संक्रमण और बच्चों में विकास रुकना।
    • गंभीर मामलों में अंधापन या मृत्यु हो सकती है।
  • दैनिक आवश्यकता और सावधानियां
    • वयस्कों के लिए दैनिक अनुशंसित मात्रा 700-900 माइक्रोग्राम है
    • (पुरुषों के लिए अधिक); गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहना चाहिए
    • क्योंकि अधिकता जन्म दोष पैदा कर सकती है।
    • संतुलित आहार से कमी रोकी जा सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लें।

32. मानव शरीर द्वारा कार्बोहाइड्रेट का उपयोग ....... के रूप में किया जाता है। [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्लूकोज
Solution:
  • मानव शरीर द्वारा कार्बोहाइड्रेट का उपयोग ग्लूकोज के रूप में किया जाता है।
  • ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं, ऊतकों एवं अंगों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
  • जब शरीर को ऊर्जा हेतु ग्लूकोज का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती है
  • तो यह ग्लाइकोजन के रूप में संगृहीत होता है।
  • पाचन प्रक्रिया
    • कार्बोहाइड्रेट मुंह से ही पाचन प्रारंभ हो जाता है
    • जहां लार में मौजूद सैलिवरी एमाइलेज स्टार्च को माल्टोज में तोड़ता है।
    • छोटी आंत में पैंक्रियाटिक एमाइलेज और अन्य एंजाइम्स द्वारा इन्हें ग्लूकोज, फ्रक्टोज और गैलेक्टोज
    • जैसे मोनोसैकेराइड्स में परिवर्तित कर दिया जाता है, जो रक्त में अवशोषित हो जाते हैं।
  • ऊर्जा उत्पादन
    • ग्लूकोज कोशिकाओं में प्रवेश कर ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट चेन के माध्यम से ATP में रूपांतरित होता है।
    • प्रत्येक ग्राम कार्बोहाइड्रेट लगभग 4 कैलोरी ऊर्जा देता है
    • जो मस्तिष्क, मांसपेशियों और हृदय जैसी अंगों के लिए आवश्यक है। मस्तिष्क पूरी तरह ग्लूकोज पर निर्भर रहता है।
  • भंडारण का तरीका
    • अतिरिक्त ग्लूकोज यकृत और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहीत होता है।
    • आवश्यकता पड़ने पर ग्लाइकोजनोलिसिस द्वारा इसे वापस ग्लूकोज में बदला जाता है।
    • यह प्रक्रिया इंसुलिन और ग्लूकागन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है।
  • अन्य कार्य
    • कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग होने से बचाते हैं
    • जिससे प्रोटीन ऊतक निर्माण के लिए उपलब्ध रहता है।
    • ये वसा चयापचय में सहायक होते हैं
    • कोशिका झिल्ली, न्यूक्लिक अम्ल (राइबोज/डिऑक्सीराइबोज) तथा संरचनात्मक घटकों का निर्माण करते हैं।
    • फाइबर युक्त कार्बोहाइड्रेट पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं।

33. निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन/पोषक तत्व नवजात शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के प्रमुख जन्म दोषों को रोकता है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) फोलिक अम्ल
Solution:
  • फोलिक अम्ल नामक पोषक तत्व नवजात शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के प्रमुख जन्म दोषों को रोकता है।
  • यह ऊतक विकास एवं कोशिका कार्य में भी सहायता करता है
  • यह आवश्यकता पड़ने पर भूख बढ़ाने में और पाचन अम्ल के निर्माण को उत्तेजित करता है।
  • न्यूरल ट्यूब दोष क्या हैं?
    •  जो मस्तिष्क (एनेंसेफली) या रीढ़ की हड्डी (स्पाइना बिफिडा) को प्रभावित करते हैं।
    • स्पाइना बिफिडा में रीढ़ की हड्डी का पिछला भाग खुला रह जाता है
    • जिससे तंत्रिका क्षति, पैरों में कमजोरी, मूत्राशय नियंत्रण की समस्या और कभी-कभी बौद्धिक अक्षमता हो सकती है।
    • ये दोष आजीवन विकलांगता का कारण बनते हैं।
  • फोलिक अम्ल की भूमिका
    • फोलिक अम्ल डीएनए संश्लेषण और कोशिका विभाजन में सहायक होता है
    • जो भ्रूण के न्यूरल ट्यूब के तेज विकास के दौरान महत्वपूर्ण है।
    • यह होमोसिस्टीन को मेथियोनीन में परिवर्तित करता है
    • न्यूरल ट्यूब के सही बंद होने को सुनिश्चित करता है।
    • अध्ययनों से पता चलता है कि यह 50-70% मामलों में NTDs को रोक सकता है।
  • अनुशंसित मात्रा और समय
    • गर्भधारण से 1-3 महीने पहले से 400-800 माइक्रोग्राम प्रतिदिन लें।
    • उच्च जोखिम वाली महिलाओं (पिछला NTD प्रभावित शिशु) के लिए 4 मिलीग्राम प्रतिदिन।
    • प्राकृतिक स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, संतरा; लेकिन सप्लीमेंट अधिक प्रभावी।
    • गर्भावस्था की पहली तिमाही में विशेष महत्वपूर्ण।

34. विटामिन B का कौन-सा प्राकृतिक रूप बच्चे के मस्तिष्क (अमस्तिष्कता) और द्विमेरुता (spina bifida) के कुछ प्रमुख जन्म दोषों को रोकने में मदद करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) फोलेट
Solution:
  • फोलेट विटामिन B का प्राकृतिक रूप है जो पानी में घुलनशील विटामिन है
  • फोलिक एसिड के रूप में पूरक के रूप में बेचा जाता है।
  • यह बच्चों के मस्तिष्क (अमस्तिष्कता) और द्विमेरुता (Spina bifida) के कुछ प्रमुख जन्म दोषों को रोकने में मदद करता है।
  • फोलिक एसिड विटामिन B₁₂ के साथ मिलकर काम करती है।
  • लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने एवं शरीर में आयरन को ठीक से काम करने में सहायता करती है।
  • इन जन्म दोषों का विवरण
    • एनेसेफली एक गंभीर न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (NTD) है
    • जिसमें भ्रूण के मस्तिष्क और खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा विकसित नहीं होता
    • जिससे बच्चा जन्म के बाद जीवित नहीं रह पाता
    • स्पाइना बिफिडा रीढ़ की हड्डी से जुड़ा दोष है
    • जहां रीढ़ का निचला हिस्सा पूरी तरह बंद नहीं होता
    • जो पक्षाघात, मूत्राशय/आंत नियंत्रण की समस्या या अन्य विकलांगताओं का कारण बन सकता है
    • यह हल्के से गंभीर रूपों (जैसे मायलोमेनिन्जोसील) तक हो सकता है.
  • फोलेट की भूमिका
    • फोलेट भ्रूण के शुरुआती विकास में डीएनए संश्लेषण और सेल डिवीजन को समर्थन देता है
    • जो गर्भधारण के पहले 28 दिनों में न्यूरल ट्यूब के सही बंद होने के लिए आवश्यक है
    • अध्ययनों से पता चलता है कि गर्भावस्था से पहले और शुरुआती चरणों में पर्याप्त फोलेट सेवन NTDs के जोखिम को 70% तक कम कर सकता है
    • यह प्राकृतिक रूप खाद्य स्रोतों से प्राप्त होता है, जबकि फोलिक एसिड इसका सिंथेटिक रूप है
    • जो सप्लीमेंट्स में उपयोग होता है।
  • प्राकृतिक स्रोत और अनुशंसित मात्रा
    • फोलेट हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकोली, दालें, मटर, संतरा, एवोकाडो, अंडे और साबुत अनाज में भरपूर पाया जाता है
    • गर्भवती महिलाओं के लिए दैनिक 400-600 माइक्रोग्राम फोलेट की सलाह दी जाती है
    • गर्भधारण से कम से कम 1-3 महीने पहले शुरू करना आदर्श है ताकि दोषों की रोकथाम सुनिश्चित हो.
  • अन्य विटामिन B का संबंध
    • हालांकि फोलेट मुख्य है, विटामिन B12 की कमी भी अप्रत्यक्ष रूप से NTDs के जोखिम को बढ़ा सकती है
    • क्योंकि यह फोलेट चयापचय के लिए जरूरी है
    • लेकिन B12 का प्राथमिक फोकस रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका स्वास्थ्य पर रहता है
    • B6 मस्तिष्क विकास में सहायक है, लेकिन NTD रोकथाम में फोलेट जैसा प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलता.

35. निम्नलिखित में से कौन-सा भोजन आयरन से भरपूर नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) नींबू
Solution:
  • भोजन में आयरन दो प्रकार का होता है
  • हीम और नॉन-हीम आयरन। हीम आयरन (Haem Iron) मांस, मछली, मुर्गा आदि में पाया जाता है।
  • नॉन-हीम (Non-haem Iron) पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों, जैसे फलों, सब्जियों (पालक, मटर आदि) में पाया जाता है।
  • नींबू में विटामिन सी पाया जाता है। आयरन नहीं पाया जाता है।
  • आयरन की कमी के प्रभाव
    • आयरन की कमी से एनीमिया, थकान और कमजोरी हो सकती है।
    • शाकाहारी आहार में पालक, मटर जैसे स्रोत महत्वपूर्ण हैं
    • लेकिन नींबू जैसे फल केवल सहायक हैं। विटामिन सी से भरपूर नींबू आयरन अवशोषण सुधारता है
    • परंतु सीधे आयरन नहीं देता।
  • अन्य आयरन स्रोत
    • शाकाहारी विकल्प: टोफू (3.4 mg/आधा कप), बीज (कद्दू, तिल),干果 (किशमिश)।
    • मांसाहारी: चिकन लिवर (13 mg/सर्विंग), गोमांस।
    • टिप्स: चाय/कॉफी से परहेज करें, क्योंकि ये अवशोषण रोकते हैं

36. विटामिन A के बारे में दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

कथन A: बीटा कैरोटीन विटामिन A का पूर्ववर्ती (precursor) है।

कथन B: पत्तेदार हरी सब्जियां और पीलेफल विटामिन A के अच्छे स्रोत हैं।

Correct Answer: (a) A और B दोनों कथन
Solution:
  • बीटा कैरोटिन विटामिन A (रेटिनॉल) का पूर्ववर्ती (Precursor) है
  • पत्तेदार हरी सब्जियां और पीले फल विटामिन A के अच्छे स्रोत हैं।
  • अतः कथन A और B दोनों सत्य हैं।
  • विटामिन A की कमी से रतौंधी (Nightblindness) तथा जीरोफ्यैलमिया (Xeropthalmia) नामक रोग होता है।
  • स्रोत और रूप
    • विटामिन A दो मुख्य रूपों में पाया जाता है
    • प्राकृतिक रूप से रेटिनॉल (मांस, अंडे, दूध उत्पादों में) और प्रोविटामिन A जैसे बीटा-कैरोटीन (गाजर, पपीता, पालक जैसी हरी सब्जियों में)।
    • शरीर बीटा-कैरोटीन को आवश्यकतानुसार विटामिन A में बदलता है
    • लेकिन वसा के साथ सेवन से इसका अवशोषण बेहतर होता है।
  • कार्य और महत्व
    • विटामिन A आंखों के रेटिना में प्रकाश संवेदी कोशिकाओं के लिए जरूरी है
    • जो रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) रोकता है। यह त्वचा, श्लेष्म झिल्ली (फेफड़े, आंत) को स्वस्थ रखता है
    • संक्रमण प्रतिरोध बढ़ाता है और कोशिका विकास में सहायक है।
  • कमी के लक्षण
    • कमी से शुरुआत में रतौंधी होती है
    • फिर ज़ेरोफ्थैल्मिया (आंखों का सूखापन), बिटोट स्पॉट्स, कोर्निया क्षति और अंधापन हो सकता है।
    • बच्चों में विकास रुकना, संक्रमण संवेदनशीलता (खसरा जटिलताएं) और मृत्यु दर बढ़ती है
    • विश्व स्तर पर यह प्रमुख समस्या है।
  • अनुशंसित मात्रा
    • वयस्क पुरुषों के लिए 900 mcg RAE (लगभग 3000 IU), महिलाओं के लिए 700 mcg प्रतिदिन।
    • गर्भवती महिलाओं को अधिक चाहिए, लेकिन अतिरिक्त सप्लीमेंट्स सावधानी से लें।
  • अधिकता के जोखिम
    • अधिक रेटिनॉल से विषाक्तता (हाइपरविटामिनोसिस A) हो सकती है
    • जिसमें सिरदर्द, मतली, यकृत क्षति शामिल है
    • सप्लीमेंट्स से अमेरिका जैसे देशों में आम। बीटा-कैरोटीन से विषाक्तता कम जोखिम वाली।
  • उपचार और रोकथाम
    • कमी पर उच्च खुराक वाले सप्लीमेंट्स (मुंह से) दिए जाते हैं
    • खसरा वाले बच्चों को विशेष रूप से। रोकथाम के लिए विविध आहार: हरी सब्जियां, पीले फल, दूध उत्पाद लें।
    • गोल्डन राइस जैसी तकनीकें विकासशील देशों में सहायक।

37. यकृत के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) यह उद के ऊपरी भाग में बाईं ओर स्थित होता है।
Solution:
  • यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, यह लाल भूरे रंग की होती है
  • यह उदर गुहा के दाहिने ऊपरी चतुर्थांश में स्थित होता है
  • यह डायाफ्राम के ठीक नीचे और पित्ताशय के ऊपर स्थित होता है।
  • यह पित्त रस को स्रावित करता है, जो पित्ताशय नामक थैली में जमा होता है।
  • इस प्रकार विकल्प (c) यकृत के बारे में गलत कथन है।
  • यकृत के प्रमुख तथ्य
    • यकृत लगभग 500 से अधिक कार्य करता है
    • जिसमें रक्त से विषाक्त पदार्थों को हटाना, पित्त का उत्पादन, ग्लूकोज और वसा का भंडारण, प्रोटीन संश्लेषण (जैसे एल्ब्यूमिन और क्लॉटिंग फैक्टर), और इंसुलिन-जैसे हार्मोनों का विघटन शामिल है।
    • यह शरीर के रक्त का 13% (लगभग 1 पिंट) धारण करता है
    • प्रतिमिनट 1.5 लीटर रक्त से होकर गुजरता है।
    • यकृत स्वयं पुनर्जनन (regeneration) की अद्भुत क्षमता रखता है
    • अर्थात क्षतिग्रस्त होने पर भी यह नए ऊतकों का निर्माण कर सकता है।
  • सामान्य कथन और उनका विश्लेषण
    • इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों में निम्नलिखित कथन दिए जाते हैं:
    • कथन 1: यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। (सही - यकृत वजन तथा आकार में सबसे बड़ा ग्रंथी ऊतक है।)
    • कथन 2: यकृत इंसुलिन और अन्य हार्मोनों के टूटने के लिए उत्तरदायी है। (सही - यह हार्मोन चयापचय करता है।)
    • कथन 3: हेपेटाइटिस यकृत की सूजन की सामान्य स्थिति है।
    • सही - हेपेटाइटिस वायरसजन्य या अन्य कारणों से यकृत की सूजन है।
    • कथन 4: यह पित्त अर्क को संग्रहीत करता है
    • जो छोटी आंतों में वसा, कोलेस्ट्रॉल आदि को तोड़ने में सहायता करता है।
    • (गलत - यकृत पित्त का उत्पादन तो करता है, किंतु संग्रहण पित्ताशय (gallbladder) में होता है।
  • गलत कथन का कारण
    • पित्त (bile) यकृत कोशिकाओं (hepatocytes) द्वारा निर्मित होता है
    • जो वसा के इमल्सीकरण (emulsification) और अवशोषण में सहायक होता है।
    • किंतु यकृत इसे तत्काल उपयोग के लिए छोटी आंत (दुडबहुल) में नहीं भेजता, बल्कि पित्त नलिकाओं के माध्यम से पित्ताशय में संग्रहीत किया जाता है।
    • भोजन आने पर पित्ताशय संकुचित होकर इसे मुक्त करता है।
    • अतः "यकृत पित्त को संग्रहीत करता है" यह कथन असत्य है।
  • यकृत की अन्य विशेषताएँ
    • यकृत दो मुख्य लोबों (दक्षिण और वाम) में विभाजित होता है
    • जिसमें आठ खंड (lobules) होते हैं। यह पोर्टल शिरा (75%) और यकृत धमनी (25%) से रक्त प्राप्त करता है।
    • क्षति होने पर भी यह कार्यक्षम रहता है, किंतु शराब, हेपेटाइटिस या फैटी लिवर से स्थायी क्षति हो सकती है।
    • स्वस्थ यकृत रखने हेतु संतुलित आहार, व्यायाम और अल्कोहल से परहेज आवश्यक है।

38. ....... एक ऐसे वातावरण को संदर्भित करता है, जिसमें ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध हो। [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) वायवीय
Solution:
  • वायवीय (Aerobic) वातावरण ऐसे वातावरण को संदर्भित करता है
  • जिसमें ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध हो। वायवीय श्वसन उच्च जीवधारियों में पाई जाती है।
  • जैसे-ज्यादातर पौधों तथा जंतुओं (मानव, हिरण, पक्षी आदि) में।
  • ऑक्सीजन का स्रोत
    • विशेषकर समुद्री फाइटोप्लांकटन और हरित शैवाल।
    • ये सूक्ष्म जीव समुद्र में सूर्य प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके ऑक्सीजन मुक्त करते हैं
    • जो वैश्विक ऑक्सीजन उत्पादन का 50% से अधिक प्रदान करते हैं।
    • भूमि पर वनस्पतियाँ जैसे पेड़ और घास भी योगदान देते हैं, लेकिन उनका हिस्सा समुद्री स्रोतों से कम है।
  • वायुमंडल में मात्रा और संतुलन
    • वर्तमान वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा स्थिर 20.95% है
    • जिसमें नाइट्रोजन 78% और अन्य गैसें थोड़ी मात्रा में हैं।
    • ऑक्सीजन चक्र के माध्यम से यह संतुलित रहती है—प्रकाश संश्लेषण से उत्पादन होता है
    • जबकि श्वसन, क्षरण और दहन से उपभोग। स्थलमंडल में ऑक्सीजन का सबसे बड़ा भंडार (99.5%) खनिजों के रूप में है।
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • ऑक्सीजन जीवों के लिए श्वसन का आधार है
    • आग जलाने और ऊर्जा उत्पादन में सहायक।
    • उच्च ऊँचाई या जलमंडल में इसकी कमी से हाइपॉक्सिया हो सकती है।
    • मानवीय गतिविधियाँ जैसे वनों की कटाई ऑक्सीजन संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।
  • ऐतिहासिक विकास
    • पृथ्वी के प्रारंभिक वायुमंडल में ऑक्सीजन नगण्य थी
    • सायनोबैक्टीरिया ने बिलियन वर्षों में इसे बढ़ाया।
    • आज भी समुद्री जीव इसकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।

39. तृप्ति की अनुभूति, भूख से जुड़े एक केंद्र के कारण होती है, जो ....... के एक अलग हिस्से में होता है। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अग्र-मस्तिष्क
Solution:
  • तृप्ति की अनुभूति, भूख से जुड़े एक केंद्र के कारण होती है
  • जो अग्र-मस्तिष्क के एक अलग हिस्से में होता है। मस्तिष्क हमारे शरीर का केंद्रीय सूचना प्रसंस्करण अंग है
  • यह आदेश एवं नियंत्रण प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
  • हाइपोथैलेमस अग्र मस्तिष्क के डाएनसिफैलान का एक भाग है।
  • यह एक तंत्रिकीय अंतःस्रावी भाग है। इसके कई महत्वपूर्ण तंत्रिकीय कार्य हैं
  • जैसे शरीर के तापमान का नियंत्रण केंद्र, भूख व प्यास का नियंत्रण केंद्र आदि।
  • हाइपोथैलेमस की संरचना
    • हाइपोथैलेमस मस्तिष्क के आधार पर स्थित एक छोटा सा क्षेत्र है
    • जो थैलेमस के नीचे और पिट्यूटरी ग्रंथि के ऊपर अवस्थित होता है।
    • इसमें दो मुख्य केंद्र होते हैं: लेटरल हाइपोथैलेमस (भूख केंद्र, जो भोजन की इच्छा उत्पन्न करता है)
    • वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस (सैटिएटी या तृप्ति केंद्र, जो भोजन के बाद तृप्ति का संकेत देता है)।
    • जब पेट भोजन से भर जाता है, तो यह तंत्रिकाओं के माध्यम से तृप्ति केंद्र को सक्रिय करता है, जो भूख को दबा देता है।
  • कार्यप्रणाली
    • तृप्ति केंद्र हार्मोन जैसे लेप्टिन (वसा कोशिकाओं से) और कोलेसिस्टोकाइनिन (आंत से) के संकेतों पर प्रतिक्रिया करता है।
    • ये रसायन रक्तप्रवाह से हाइपोथैलेमस तक पहुँचते हैं
    • न्यूरॉन्स को उत्तेजित कर तृप्ति की भावना पैदा करते हैं।
    • इसके विपरीत, भूख केंद्र घ्रेलिन हार्मोन से सक्रिय होता है।
    • इस प्रक्रिया से ऊर्जा संतुलन बना रहता है, जो मोटापा या कुपोषण को रोकता है।
  • संबंधित विकार
    • यदि वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस क्षतिग्रस्त हो जाए (जैसे चूहों में प्रयोगों से देखा गया
    • तो अत्यधिक भोजन और मोटापा हो जाता है।
    • मानव में तनाव, नींद की कमी या हार्मोनल असंतुलन से तृप्ति केंद्र प्रभावित होता है
    • जिससे भोजन नियंत्रण बिगड़ जाता है।
    • दवाएँ जैसे GLP-1 एगोनिस्ट्स (सेमाग्लूटाइड) इसी केंद्र को लक्षित कर वजन घटाने में सहायक हैं।
  • अन्य प्रभावित कारक
    • तृप्ति केवल हाइपोथैलेमस तक सीमित नहीं
    • ब्रेनस्टेम (न्यूक्लियस ट्रैक्टस सोलिटैरियस) और प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स भी इसमें योगदान देते हैं।
    • आनुवंशिकता, पर्यावरण और आदतें इसकी संवेदनशीलता बदल सकती हैं।
    • स्वस्थ जीवनशैली से इन केंद्रों का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

40. निम्नलिखित में से क्या आमाशय से आने वाले अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाने में सहायक होता है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) पित्त रस
Solution:
  • पित्त रस आमाशय से आने वाले अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाने में सहायक होता है।
  • यह यकृत द्वारा स्रावित होता है, जो कि पित्ताशय में संग्रहित होता है।
  • पित्त काइम में अम्ल को निष्क्रिय कर देता है तथा इसका pH बढ़ा देता है
  • जिससे आंतों के वातावरण को अधिक क्षारीय बना देता है।
  • यह वसा के पायसीकरण में भी सहायता करता है, जो पाचन में सहायता करता है।
  • पित्त रस की भूमिका
    • तब पित्त रस उत्सर्जित हो जाता है। इसमें बाइकार्बोनेट्स और अन्य क्षारीय पदार्थ होते हैं
    • जो अम्लता को निष्क्रिय कर pH को 7-8 के आसपास ले जाते हैं।
    • इससे आंतों के एंजाइम जैसे एमाइलेज, लाइपेज और ट्रिप्सिन बेहतर काम कर पाते हैं।
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • पेप्सिन: यह प्रोटीन पचाने वाला एंजाइम है जो अम्लीय माध्यम (pH 1.5-3.5) में ही सक्रिय होता है।
    • यह भोजन को क्षारीय बनाने में कोई भूमिका नहीं निभाता, बल्कि प्रोटीन को पेप्टाइड्स में तोड़ता है।
    • आमाशय रस (गैस्ट्रिक जूस): इसमें HCl, पेप्सिन और म्यूकस होते हैं
    • जो भोजन को अम्लीय बनाते हैं। यह pH को कम करता है, न कि बढ़ाता।
    • इसका कार्य बैक्टीरिया मारना और प्रारंभिक पाचन है।
    • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): यह आमाशय रस का हिस्सा है जो अम्लता बढ़ाता है।
    • यह काइम को क्षारीय बनाने के बजाय अधिक अम्लीय बनाता है।
  • पाचन प्रक्रिया में संतुलन
    • पेट में भोजन अम्लीय हो जाता है ताकि पेप्सिन कार्य करे, लेकिन छोटी आंत में क्षारीय वातावरण जरूरी है।
    • पित्त रस के अलावा अग्नाशयी रस (पैनक्रियाटिक जूस) भी बाइकार्बोनेट्स प्रदान करता है
    • जो अम्लता बेअसर करता है।
    • यह संयुक्त रूप से वसा के पायसीकरण और कार्बोहाइड्रेट-प्रोटीन पाचन सुनिश्चित करता है।
    • असंतुलन से अल्सर या अपच हो सकती है।
  • अतिरिक्त लाभ
    • पित्त रस वसा को इमल्सीफाई करता है, जिससे लाइपेज आसानी से कार्य करे।
    • यह विटामिन A, D, E, K के अवशोषण में मदद करता है।
    • अधिक पित्त से पित्ताशय की पथरी या रिफ्लक्स हो सकता है।