मानव शारीरिकी एवं क्रिया विज्ञान (जीव विज्ञान)

Total Questions: 54

41. ....... वे रक्त वाहिनियां हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड समृद्ध रक्त को वापस हृदय में ले जाती हैं। [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) शिराएं
Solution:
  • शिराएं (Veins) वे रक्त वाहिनियां हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) समृद्ध रक्त (अशुद्ध रक्त) को वापस हृदय में ले जाती हैं।
  • अपवाद रूप में फुफ्फुसीय शिराएं (Pulmonary veins) फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त (शुद्ध रक्त) को हृदय तक पहुंचाती हैं।
  • शिराओं की संरचना
    • शिराएँ पतली दीवारों वाली रक्त वाहिकाएँ होती हैं
    • जिनमें धमनियों की तुलना में कम मांसपेशीय ऊतक होता है
    • क्योंकि इन्हें हृदय की ओर रक्त धकेलने के लिए उच्च दबाव की आवश्यकता नहीं पड़ती।
    • इनमें वाल्व होते हैं जो रक्त को एक ही दिशा में बहने देते हैं
    • गुरुत्वाकर्षण के कारण पीछे बहने से रोकते हैं।
    • मुख्य शिराएँ जैसे सुपीरियर वेना कावा (ऊपरी शरीर से) और इन्फीरियर वेना कावा (निचले शरीर से) रक्त को हृदय के दाहिने आलिंद में पहुँचाती हैं।
  • कार्य और महत्व
    • शिराएँ ऑक्सीजन-युक्त रक्त के विपरीत, ऊतकों से अपशिष्ट जैसे CO₂ और अन्य पदार्थों को हृदय तक लाती हैं
    • जहाँ से यह फेफड़ों की ओर जाता है गैसों के आदान-प्रदान के लिए। ये रक्त संचार प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं
    • जो पूरे शरीर से अपकृत्य एकत्रित कर हृदय को भेजती हैं।
    • फुफ्फुसीय शिराएँ (पल्मोनरी वीन्स) एक अपवाद हैं, जो फेफड़ों से ऑक्सीजनयुक्त रक्त हृदय तक लाती हैं।
  • शिराओं से संबंधित तथ्य
    • रक्तचाप: शिराओं में दबाव कम होता है (0-15 mmHg), इसलिए रक्त
    • मुख्यतः मांसपेशियों के संकुचन और श्वास से आगे बढ़ता है।
    • रोग: वैरिकोज वेन्स या थ्रोम्बोसिस जैसी समस्याएँ शिराओं को प्रभावित करती हैं, जो रक्त प्रवाह बाधित कर सकती हैं।
    • मात्रा: मानव शरीर में धमनियों से दोगुनी शिराएँ होती हैं, जो कुल रक्त का 60-70% रखती हैं।

42. ....... वे वाहिकाएं हैं, जो रक्त को हृदय से दूर शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती हैं। [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) धमनियां
Solution:
  • धमनियां (Arteries) वे वाहिकाएं हैं, जो ऑक्सीजन युक्त रक्त (शुद्ध रक्त) को हृदय से दूर शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती हैं।
  • अपवाद के रूप में फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary arteries) हृदय से फेफड़ों तक ऑक्सीजन रहित रक्त (अशुद्ध रक्त) पहुंचाती है।
  • धमनियों की संरचना
    • बाहरी संयोजी ऊतक परत। यह संरचना उच्च रक्तचाप सहने और प्रतिप्रवाह रोकने में सहायक होती है।
    • महाधमनी सबसे बड़ी धमनी है, जो बाएँ निलय से निकलती है।
  • धमनियों के कार्य
    • धमनियाँ ऑक्सीजनयुक्त रक्त को हृदय से फेफड़ों को छोड़कर सभी ऊतकों तक पहुँचाती हैं।
    • ये रक्त के दाब को बनाए रखती हैं तथा हृदय की धड़कनों के साथ प्रत्यास्थता से विस्तार-संकोच करती रहती हैं।
    • प्रमुख धमनियाँ जैसे कारोटिड (मस्तिष्क के लिए), सबक्लेवियन (हाथों के लिए) तथा फीमोरल (जाँघों के लिए) विशिष्ट अंगों को रक्त आपूर्ति करती हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • धमनियों में रक्त झटकेदार बहता है, जबकि शिराओं में सुचारु रूप से।
    • धमनी विकार जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस से हृदय रोग हो सकते हैं।
    • केशिकाएँ धमनियों से जुड़कर ऊतक स्तर पर रक्त विनिमय सुनिश्चित करती हैं।

43. यकृत ग्रंथि ....... स्रावित करती है, जो पित्ताशय नामक एक थैली में संगृहित होता है। [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) पित्त रस
Solution:
  • यकृत ग्रंथि पित्त रस (Bile juice) स्रावित करती है, जो पित्ताशय (Gallbladder) नामक एक थैली में संगृहीत होता है।
  • पित्त रस पीले-हरे या हरे-नीले से रंग का क्षारीय (PH-7.6 से 8.6) तरल होता है।
  • इसकी प्रकृति क्षारीय होती है, इसमें लगभग 92% जल होता है।
  • पित्त में कोई एंजाइम नहीं होता, लेकिन लिपिड के पाचन एवं अवशोषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • यकृत की संरचना
    • यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो उदर गुहा के दाहिनी ओर स्थित होती है
    • लाल-भूरा रंग लिए रहती है। यह हेपेटोसाइट कोशिकाओं से बनी होती है
    • जो लगभग यकृत के भार का 80% हिस्सा बनाती हैं। यकृत लगातार पित्त रस का उत्पादन करती है
    • जो पित्त नलिकाओं के माध्यम से पित्ताशय तक पहुंचता है।
  • पित्त रस का स्राव और संग्रहण
    • पित्त रस एक हरा-पीला या भूरा तरल पदार्थ है, जिसमें बिलीरुबिन और बिलीवरडीन जैसे वर्णक मौजूद होते हैं।
    • यकृत की कोशिकाएं इसे निरंतर स्रावित करती हैं, और यह पित्ताशय में जमा हो जाता है
    • जो यकृत के नीचे नाशपाती के आकार की थैली होती है।
    • भोजन करने पर पित्ताशय संकुचित होकर पित्त को ग्रहणी (छोटी आंत का प्रारंभिक भाग) में सामान्य हेपेटो-अग्नाशयी वाहिनी के जरिए छोड़ देता है।
  • पित्त रस के कार्य
    • पित्त मुख्य रूप से वसा को वसायुक्त अम्लों में तोड़ने या पायसीकरण (emulsification) में सहायता करता है
    • जिससे वसा का पाचन और अवशोषण आसान हो जाता है।
    • यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल और अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
    • पित्त विटामिन D, E, K जैसे वसा-घुलनशील विटामिनों के अवशोषण को बढ़ावा देता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • पित्त रस का स्राव यकृत द्वारा होने के कारण यह पाचन तंत्र का अभिन्न अंग है
    • लेकिन पित्ताशय के विकार जैसे पथरी से समस्या हो सकती है।
    • श्लेष्मा, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या एस्ट्रोजन जैसे अन्य पदार्थ यकृत द्वारा स्रावित नहीं होते।
    • यकृत के ये कार्य इसे चयापचय और विषहरण के प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

44. निम्नलिखित में से क्या वाहित मल की एक कार्बनिक अशुद्धि है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मानव मल
Solution:
  • वाहित मल अनेक अशुद्धियों से युक्त एक जटिल मिश्रण होता है
  • जिसमें कार्बनिक अशुद्धियां; जैसे-मानव मल, जैविक अपशिष्ट पदार्थ, फल-सब्जी का कचरा आदि अकार्बनिक अशुद्धियां
  • जैसे-नाइट्रेट, फॉस्फेट, धातुएं तथा जीवाणु अन्य सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं।
  • वाहित मल क्या है?
    • जिसमें मनुष्य का मल-मूत्र मुख्य घटक होता है।
    • यह निलंबित ठोस पदार्थों, सूक्ष्मजीवों, रोगजनक जीवाणुओं और रासायनिक पदार्थों से युक्त होता है।
    • इसमें कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों प्रकार की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं।
  • कार्बनिक अशुद्धियों की विशेषताएँ
    • कार्बनिक अशुद्धियाँ वे पदार्थ हैं जो कार्बन-आधारित होते हैं और मुख्यतः जैविक स्रोतों से आते हैं
    • जैसे कि घुलित कार्बनिक पदार्थ, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा।
    • वाहित मल में ये अशुद्धियाँ मल-मूत्र, खाद्य अवशेषों, तेल, यूरिया और कागज के टुकड़ों के रूप में मौजूद रहती हैं।
    • ये सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो सकती हैं
    • लेकिन अधिक मात्रा में होने पर जल प्रदूषण का कारण बनती हैं।
  • अन्य अशुद्धियाँ
    • अकार्बनिक अशुद्धियाँ: फॉस्फेट, नाइट्रेट, धातु लवण और खनिज पदार्थ, जो C-H बंधन रहित होते हैं।
    • निलंबित ठोस: सब्जियों के टुकड़े, कागज आदि मोटे कण।
    • सूक्ष्मजीव: मृत जीवी, रोगवाहक बैक्टीरिया जैसे हैजा और टाइफाइड के कारण균।
  • पर्यावरणीय प्रभाव
    • वाहित मल में कार्बनिक अशुद्धियाँ BOD (जैविक ऑक्सीजन मांग) बढ़ाती हैं
    • जिससे जलाशयों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और जलीय जीवन प्रभावित होता है।
    • इससे जलजनित रोग जैसे डायरिया, हैजा और पीलिया फैलते हैं।
    • वाहित मल उपचार संयंत्रों में प्राथमिक, द्वितीयक (जैविक विघटन) और तृतीयक उपचार से इन अशुद्धियों को हटाया जाता है।

45. निम्नलिखित में से कौन-सा श्वसन के संबंध में सही है ? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

I. नियमित रूप से पारंपरिक, प्राणायाम करने से फेफड़ों की अधिक हवा लेने की क्षमता बढ़ सकती है।

II. सांस लेने के दौरान पसलियां ऊपर की ओर बाहर की ओर गति करती है और डायाफ्राम नीचे की ओर।

Correct Answer: (b) दोनों I और II
Solution:
  • नियमित रूप से पारंपरिक प्राणायाम करने से फेफड़ों की अधिक हवा लेने की क्षमता बढ़ जाती है
  • कथन (1) सत्य है; क्योंकि इसमें फेफड़ों के रिक्त स्थान का उपयोग शामिल है।
  • सांस लेने के दौरान पसलियां ऊपर की ओर और बाहर की ओर गति करती हैं
  • डायाफ्राम नीचे की ओर। अतः कथन (II) सत्य है।
  • इससे फेफड़ों को पूरी तरह से फैलने और सिकुड़ने में मदद मिलती है
  • जिससे अच्छी मात्रा में ऑक्सीजन अंदर जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलता है।
  • श्वसन के मुख्य चरण
    • श्वसन प्रक्रिया को निम्न चरणों में विभाजित किया जाता है:
    • फुफ्फुसीय श्वसन: वायुमंडलीय वायु फेफड़ों में खींची जाती है और CO₂ युक्त वायु बाहर निकाली जाती है।
    • कूपिका झिल्ली पर गैस विनिमय: ऑक्सीजन रक्त में और CO₂ कूपिका में विसरण द्वारा स्थानांतरित होती है।
    • रक्त परिवहन: हीमोग्लोबिन द्वारा O₂ ऊतकों तक और CO₂ फेफड़ों तक ले जाया जाता है।
    • ऊतक स्तर पर विसरण: रक्त और कोशिकाओं के बीच गैसों का आदान-प्रदान।
    • कोशिकीय श्वसन: माइटोकॉन्ड्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण, ATP उत्पादन के साथ।
  • कोशिकीय श्वसन के उप-चरण
    • कोशिकीय श्वसन तीन मुख्य उप-चरणों में होता है:
    • ग्लाइकोलाइसिस: कोशिका द्रव्य में ग्लूकोज से पाइरूवेट बनता है (नेट 2 ATP)।
    • क्रेब्स चक्र (TCA चक्र): माइटोकॉन्ड्रिया मैट्रिक्स में पाइरूवेट का आंशिक ऑक्सीकरण (2 ATP)।
    • इलेक्ट्रॉन परिवहन प्रणाली (ETC): आंतरिक कला पर NADH/FADH₂ से 34 ATP उत्पादन।
    • कुल 38 ATP प्राप्त होते हैं।
  • श्वसन का महत्व
    • यह ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ pH संतुलन बनाए रखता है।
    • मनुष्यों में प्रति मिनट 12-20 श्वास चक्र होते हैं।
    • असामान्यताएँ जैसे अस्थमा या COPD श्वसन को प्रभावित करती हैं।

46. जनन की वह प्रक्रिया जिसमें केवल एक ही जीव भाग लेता है, ....... कहलाता है। [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अलैंगिक जनन
Solution:
  • जनन की वह प्रक्रिया जिसमें केवल एक ही जीव भाग लेता है, अलैंगिक जनन कहलाता है।
  • अलैंगिक जनन में जीवधारी प्रायः अपने समान अर्थात जनक (parent) के एकदम समान संतान उत्पन्न करता है।
  • अलैंगिक जनन की परिभाषा
    • अलैंगिक जनन वह विधि है जिसमें एकल जनक जीव ही संतान उत्पन्न करता है
    • बिना नर और मादा युग्मकों के संलयन के। संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है
    • जिसे क्लोन कहा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्यतः समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) पर आधारित होती है।
  • अलैंगिक जनन के प्रकार
    • अलैंगिक जनन विभिन्न तरीकों से होता है:
    • विखंडन (Fission): एककोशिकीय जीव जैसे अमीबा, पैरामीशियम और बैक्टीरिया में कोशिका द्विगुणन के बाद दो बराबर भागों में विभाजित हो जाती है।
    • अनुकूल परिस्थितियों में बैक्टीरिया 20 मिनट में दो संतानें उत्पन्न कर लेते हैं।
    • मुकुलन (Budding): जनक शरीर पर छोटा उभार (मुकुल) बनता है जो बढ़कर अलग हो जाता है
    • जैसे यीस्ट और हाइड्रा में। हाइड्रा में मुकुल 2-4 दिनों में स्वतंत्र जीव बन जाता है।
    • खंडन (Fragmentation): जीव के टुकड़े टूटकर प्रत्येक वृद्धि पाकर नया जीव बनाते हैं, जैसे स्पाइरोगायरा शैवाल में।
    • पुनरुद्भवन (Regeneration): कटे भाग पुनः विकसित हो जाते हैं, जैसे प्लैनैरिया में पूरा शरीर या स्टारफिश में भुजा।
    • बीजाणुजनन (Sporulation): बीजाणु बनते हैं जो अंकुरित होकर नए जीव देते हैं
    • जैसे कवक में कोनिडिया या क्लैमाइडोस्पोर। चल बीजाणु (जूलोस्पोर) ध्वजाणुओं से चलते हैं।
  • महत्व और लाभ
    • अलैंगिक जनन स्थिर वातावरण में लाभदायक है
    • क्योंकि यह तेज प्रजनन और नए क्षेत्रों में तेजी से फैलाव की अनुमति देता है।
    • हालांकि, विविधता की कमी से पर्यावरणीय परिवर्तनों में अनुकूलन कठिन हो सकता है।
    • पौधों में कटिंग या ग्राफ्टिंग भी इसी का रूप है।

47. रक्त पट्टिकाणु (प्लेटलेट्स) को ....... के नाम से भी जाना जाता है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) थ्रोम्बोसाइट
Solution:
  • रक्त पट्टिकाणु (प्लेटलेट्स) को थ्रोम्बोसाइट (Thrombocytes) के नाम से भी जाना जाता है।
  • ये केवल स्तनियों (Mammals) के रुधिर में होता है।
  • मनुष्यों में इनकी संख्या लगभग 2 से 5 लाख प्रतिक्यूबिक मिमी. रुधिर में होती है।
  • ये केंद्रकविहीन, संकुचनशील, गोल या अंडाकार-सी उभयोत्तल, तश्तरीनुमा होती हैं।
  • प्लेटलेट्स की संरचना
    • प्लेटलेट्स वास्तव में पूर्ण कोशिकाएँ नहीं, बल्कि अस्थि मज्जा में मेगाकारियोसाइट्स नामक बड़ी कोशिकाओं के टुकड़े होते हैं।
    • ये बिना नाभिक वाली, चपटी डिस्क के आकार की सूक्ष्म संरचनाएँ होती है
    • जिनका व्यास लगभग 2-4 माइक्रोमीटर होता है।
    • इनकी जीवन अवधि 7-10 दिनों की होती है, और ये निरंतर अस्थि मज्जा में बनती रहती हैं।
  • मुख्य कार्य
    • प्लेटलेट्स का प्राथमिक कार्य रक्त का थक्कीकरण (क्लॉटिंग) है।
    • चोट लगने पर ये क्षतिग्रस्त रक्त वाहिका की सतह पर चिपक जाती हैं
    • आकार बदल लेती हैं और थ्रोम्बोप्लास्टिन एंजाइम छोड़ती हैं
    • जो थक्का बनाने की प्रक्रिया शुरू करता है।
    • इसके अलावा, ये घाव भरने और ऊतकों की मरम्मत में भी सहायता करती हैं।
  • सामान्य संख्या
    • एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में प्रति माइक्रोलीटर 1,50,000 से 4,50,000 प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।
    • इससे कम संख्या को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहते हैं, जो रक्तस्राव का खतरा बढ़ाती है
    • जबकि अधिक संख्या थ्रोम्बोसाइटोसिस कहलाती है, जो थक्के बनने का जोखिम पैदा करती है।
  • स्वास्थ्य संबंधी महत्व
    • प्लेटलेट्स की कमी वायरल संक्रमण, दवाओं या कैंसर जैसी स्थितियों से हो सकती है
    • जबकि अधिकता सूजन या कैंसर से जुड़ी होती है। इन्हें मापने के लिए प्लेटलेट काउंट टेस्ट किया जाता है
    • जो CBC रिपोर्ट का हिस्सा होता है।

48. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज थायरॉइड हॉर्मोन (थायरॉक्सिन) के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) आयोडीन
Solution:
  • आयोडीन नामक खनिज थायरॉइड हॉर्मोन (थायरॉक्सिन) के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है।
  • वयस्क मानव के शरीर में लगभग 15-20 मिलीग्राम आयोडीन होता है
  • इसकी अधिकांश मात्रा थायरॉइड ग्रंथि में रहती है।
  • एक स्वस्थ्य मनुष्य के लिए सामान्यतया प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता पड़ती है।
  • थायरॉक्सिन क्या है?
    • थायरॉक्सिन (T4) थायरॉइड ग्रंथि द्वारा निर्मित मुख्य हार्मोन है
    • जो गर्दन में स्थित होता है। यह हार्मोन चयापचय दर, विकास, तापमान नियंत्रण और ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करता है।
    • थायरॉक्सिन की रासायनिक संरचना में चार आयोडीन परमाणु होते हैं
    • इसलिए आयोडीन इसके निर्माण का मूलभूत घटक है।
  • आयोडीन की भूमिका
    • थायरॉयड ग्रंथि रक्त से आयोडीन ग्रहण करती है
    • इसे थायरोग्लोबुलिन नामक प्रोटीन के साथ जोड़कर थायरॉक्सिन बनाती है।
    • आयोडीन की कमी से थायरॉक्सिन उत्पादन बाधित होता है
    • जिससे गॉयटर (गंडमाला), हाइपोथायरॉइडिज्म और मानसिक मंदता जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक इसका प्रमुख स्रोत है।
  • संश्लेषण प्रक्रिया
    • थायरॉयड फॉलिकल्स में कोलाइड आयोडीन को ऑक्सीडाइज कर आयोडाइड आयन बनाता है।
    • यह टायरोसिन अमीनो एसिड से जुड़कर मोनो- और डाई-आयोडोटायरोसिन बनाता है
    • जो मिलकर T4 (थायरॉक्सिन) का निर्माण करते हैं।
    • सक्रिय रूप T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) में परिवर्तन यकृत में होता है।

49. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [MTS (T-I) 11 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सजीव श्वसन के दौरान धातुओं को अंदर खींचते हैं।
Solution:
  • सजीव श्वसन के दौरान धातुओं को अंदर नहीं खींचते हैं
  • बल्कि जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन को श्वसन के दौरान अंदर खींचते हैं।
  • अतः कथन (c) गलत है। अन्य तीनों कथन सही हैं
  • क्योंकि धातुओं का उपयोग मशीनें, मोटर गाड़ियां, वायुयान, रेलगाड़ियां, उपग्रह, औद्योगिक साजो-सामान, खाना बनाने के पात्र और आभूषण बनाने में किया जाता है।
  • सामान्य पैटर्न
    • ऐसे प्रश्न ज्यादातर रीजनिंग, सामान्य ज्ञान, विज्ञान या तर्क पर आधारित होते हैं। उदाहरण के लिए:
    • रीजनिंग उदाहरण: सात व्यक्ति A से G एक पंक्ति में खड़े हैं।
    • कथन जैसे "B और D के बीच तीन व्यक्ति हैं" या "C सबसे पहले है" में से एक गलत साबित होता है।
    • विज्ञान उदाहरण: सौर ऊर्जा पर कथन जैसे "सोलर सेल क्रोमियम से बनते हैं
    • गलत होता है, क्योंकि वे सिलिकॉन या जर्मेनियम से बनते हैं।
    • जीवविज्ञान उदाहरण: विषाणु पर "विषाणु स्वतंत्र जीव हैं" गलत होता है, क्योंकि वे परजीवी होते हैं।
  • सलाह
    • पूर्ण प्रश्न (विकल्प सहित) प्रदान करें ताकि पूर्ण विस्तृत उत्तर दिया जा सके।
    • ऐसे प्रश्नों में डायग्राम या तालिका बनाकर हल करें।

50. शर्करा को एथिल अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित करने के लिए यीस्ट, कुछ प्रकार के जीवाणुओं या किसी अन्य सूक्ष्मजीव द्वारा पूरी की जाने वाली जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रिया क्या है? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अल्कोहलिक किण्वन
Solution:
  • शर्करा को एथिल अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित करने हेतु यीस्ट, कुछ प्रकार के जीवाणुओं
  • किसी अन्य सूक्ष्मजीव द्वारा पूरी की जाने वाली जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रिया  अल्कोहलिक किण्वन कहलाती है।
  • यह एक अवायवीय प्रक्रिया है, अर्थात यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।
  • रासायनिक समीकरण
    • अल्कोहलिक किण्वन का सरल समीकरण निम्नलिखित है:
    • ग्लूकोज (शर्करा) यीस्ट के एंजाइमों द्वारा पाइरूवेट में बदलता है
    • जो आगे एथिल अल्कोहल और CO2 में परिवर्तित हो जाता है।
    • इस प्रक्रिया से ऊर्जा (ATP) भी उत्पन्न होती है, जो सूक्ष्मजीवों के लिए आवश्यक होती है।
    • ग्लाइकोलाइसिस पहले चरण के रूप में कार्य करता है
    • जहां ग्लूकोज दो पाइरूवेट अणुओं में टूटता है ।
  • सूक्ष्मजीवों की भूमिका
    • यीस्ट (Yeast): सबसे सामान्य, जैसे बेकर's यीस्ट या ब्रूअर's यीस्ट, जो बीयर, वाइन और ब्रेड बनाने में उपयोग होते हैं।
    • यीस्ट में ज़ाइमेज एंजाइम शर्करा को ग्लूकोज और फ्रक्टोज में तोड़ता है।
    • जीवाणु: कुछ प्रकार जैसे Zymomonas mobilis या Clostridium भी इस प्रक्रिया को करते हैं
    • लेकिन यीस्ट अधिक कुशल होते हैं।
    • अन्य सूक्ष्मजीव: जंगली यीस्ट या इंजीनियर्ड बैक्टीरिया आधुनिक बायोटेक में बायोएथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • प्रक्रिया 25-35°C तापमान और अम्लीय pH (4-6) में इष्टतम होती है ।
  • चरणबद्ध प्रक्रिया
    • अल्कोहलिक किण्वन दो मुख्य चरणों में होता है:
    • ग्लाइकोलाइसिस: ग्लूकोज को दो पाइरूवेट में तोड़ना, जिसमें 2 ATP और 2 NADH प्राप्त होते हैं।
    • पाइरूवेट डिकार्बोक्सिलेशन और रिडक्शन: पाइरूवेट पाइरूविक एल्डिहाइड में बदलता है
    • (CO2 निकलता है), फिर अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज द्वारा एथेनॉल में। NADH ऑक्सीकृत हो जाता है।
    • कुल मिलाकर, 2 ATP ऊर्जा मिलती है ।
  • औद्योगिक अनुप्रयोग
    • शराब और बीयर उत्पादन: अंगूर या जौ के शर्करा से इथेनॉल (8-15% तक) बनता है।
    • बायोएथेनॉल: गन्ना, मक्का या सेल्यूलोजिक बायोमास से ईंधन (बायोफ्यूल) उत्पादन; ब्राजील और अमेरिका में प्रमुख।
    • बेकरी: CO2 से आटा फूलता है, अल्कोहल वाष्पित हो जाता है।
    • आधुनिक बायोटेक: जेनेटिक इंजीनियरिंग से उच्च उपज वाले यीस्ट विकसित, जैसे सेकंड जनरेशन बायोएथेनॉल सेल्यूलोज से
  • लाभ और सीमाएं
    • लाभ: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, CO2 न्यूट्रल (किण्वन में निकला CO2 पौधों द्वारा अवशोषित), कम प्रदूषण।
    • सीमाएं: अल्कोहल सहनशीलता सीमित (12-15% पर यीस्ट मर जाता है)
    • ऊर्जा निवेश अधिक, अपशिष्ट प्रबंधन। आनुवंशिक इंजीनियरिंग से सुधार हो रहा है ।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • यह प्रक्रिया प्राचीन काल से ज्ञात है (6000 वर्ष पूर्व मिस्र में बीयर)।
    • लुई पाश्चर ने 1857 में सिद्ध किया कि यीस्ट इस प्रक्रिया का जिम्मेदार है।
    • आधुनिक बायोटेक में यह जैव ईंधन का आधार है