मानव शारीरिकी एवं क्रिया विज्ञान (जीव विज्ञान)

Total Questions: 54

51. छोटी आंत के कम कार्यात्मक होने से कुअवशोषण विकार (malabsorption disorder) हो सकता है, जिससे दस्त, कुपोषण, वजन घटना आदि हो सकता है। इस विशेष स्थिति को ....... के नाम से जाना जाता है। [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) लघु आंत्र संलक्षण
Solution:
  • छोटी आंत के कम कार्यात्मक होने से कुअवशोषण विकार (Malabsorption disorder) हो सकता है
  • जिससे दस्त, कुपोषण, वजन घटना आदि हो सकता है।
  • इस विशेष स्थिति को लघु आंत्र संलक्षण (short bowel syndrome) के नाम से जाना जाता है।
  • इस रोग का उपचार पोषण सहायता, तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स, दवाएं और सर्जरी द्वारा किया जा सकता है।
  • कारण
    • जन्मजात दोष (जैसे आंतों की असामान्य लंबाई) या अन्य रोग जैसे रेडिएशन की क्षति भी इसका कारण बन सकते हैं।
    • कार्यशील छोटी आंत की कमी से भोजन के पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया बाधित हो जाती है
    • क्योंकि छोटी आंत ही वसा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का मुख्य स्थल है ।
  • लक्षण
    • इस स्थिति के प्रमुख लक्षणों में लगातार दस्त (विशेषकर चिकना और बदबूदार मल या स्टीटोरिया), महत्वपूर्ण वजन घटना, थकान, पेट फूलना, गैस और निर्जलीकरण शामिल हैं।
    • कुपोषण के कारण विटामिन की कमी (जैसे B12, D, K), एनीमिया, हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस) और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
    • बच्चों में यह विकास में बाधा और वृद्धि रुकना पैदा करता है ।
  • निदान
    • निदान के लिए चिकित्सक मल परीक्षण (वसा की मात्रा जांचने के लिए), रक्त परीक्षण (पोषक तत्वों की कमी के लिए)
    • इमेजिंग जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई, और कभी-कभी एंडोस्कोपी का उपयोग करते हैं।
    • छोटी आंत की लंबाई मापने के लिए विशेष जांच जैसे छोटी आंत का एंटेरोस्कोपी भी की जाती है।
    • यह पुष्टि करता है कि अवशोषण की कमी कार्यशील छोटी आंत की अपर्याप्तता से है ।
  • उपचार
    • उपचार आहार प्रबंधन पर केंद्रित होता है
    • जिसमें छोटे-छोटे भोजन, उच्च कैलोरी आहार, वसा-कम भोजन और तरल पदार्थों का नियंत्रित सेवन शामिल है।
    • विटामिन, खनिज और इलेक्ट्रोलाइट्स के पूरक दिए जाते हैं।
    • गंभीर मामलों में पैरेंटेरल न्यूट्रिशन (शिरा मार्ग से पोषण) या होम पैरेंटेरल न्यूट्रिशन की आवश्यकता पड़ती है।
    • कभी-कभी दवाएं जैसे एंटी-डायरियल, टेडुग्लूटाइड (जो आंत की वृद्धि बढ़ाता है)
    • आंत प्रत्यारोपण भी विकल्प हैं। जीवनशैली में बदलाव जैसे धूम्रपान छोड़ना और संक्रमण से बचाव महत्वपूर्ण हैं ।

52. ...................दाहिने अलिंद से रक्त प्राप्त करता है और इसे फेफड़ों में पंप करता है, जहां यह ऑक्सीजन से भरा होता है। [JE मैकेनिकल परीक्षा 22 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) दायां निलय
Solution:
  • मानव हृदय चार कक्षों में बंटा होता है। ऊपरी दो कक्ष अलि (Atrium) कहलाते हैं
  • निचले दो कक्ष निलय (Ventricle) कहलाते हैं। दायां निलय (RV) दाहिने अलिंद (RA) से ही रक्त प्राप्त करता है
  • फिर इसे (रक्त को) फेफड़ों में पंप करता है, जहां यह ऑक्सीजन से भर जाता है।
  • इसके बाद ऑक्सीजन युक्त रक्त बाएं अलिंद (LA) में आता है
  • इसके बाद बाएं निलय (LV) से होकर शरीर के अन्य अंगों में जाता है।
  • हृदय की संरचना
    • हृदय चार कक्षों वाला पेशीय अंग है: दायां अलिंद, दायां निलय, बायां अलिंद और बायां निलय।
    • दायां अलिंद शरीर के ऊपरी (सुपीरियर वेना कावा) और निचले (इनफीरियर वेना कावा) हिस्सों से ऑक्सीजन-रहित रक्त एकत्र करता है।
    • ट्राइकस्पिड वाल्व के माध्यम से यह रक्त दाएं निलय में पहुंचता है
    • जहां संकुचन (सिस्टोल) के दौरान फुफ्फुसीय वाल्व खुलने पर रक्त फुफ्फुसीय धमनी (pulmonary artery) के जरिए फेफड़ों में चला जाता है।
  • रक्त परिसंचरण प्रक्रिया
    • शरीर के ऊतकों से ऑक्सीजन की कमी वाला रक्त शिराओं द्वारा दाएं अलिंद में आता है।
    • दायां अलिंद रक्त को दाएं निलय में धकेलता है, जो इसे कम दबाव पर फेफड़ों की ओर पंप करता है।
    • फेफड़ों की केशिकाओं में रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है
    • फिर फुफ्फुसीय शिराओं से बाएं अलिंद पहुंचता है।
  • वाल्वों की भूमिका
    • ट्राइकस्पिड वाल्व दाएं अलिंद और निलय के बीच रक्त के पीछे बहने से रोकता है
    • जबकि फुफ्फुसीय वाल्व निलय से धमनी की ओर एकतरफा प्रवाह सुनिश्चित करता है।
    • ये वाल्व हृदय चक्र (कार्डियक साइकिल) के डायस्टोल (विस्तार) और सिस्टोल चरणों में समन्वय करते हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • दायां निलय बाएं निलय से पतला होता है क्योंकि फेफड़ों तक रक्त कम दबाव पर जाता है।
    • यह प्रक्रिया प्रति मिनट 70-80 बार दोहराई जाती है, लगभग 5 लीटर रक्त फेफड़ों को भेजती है।
    • कोई खराबी (जैसे वाल्व रोग) से फेफ्फुसीय उच्च रक्तचाप हो सकता है।

53. मानव शरीर में निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रंथि/अंग पित्त रस स्रावित करती/करता है? [MTS (T-I) 06 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) यकृत
Solution:
  • यकृत या जिगर (Liver) रासायनिक कारखाना व मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है।
  • इसे मानव शरीर की जैव रसायन प्रयोगशाला भी कहा जाता है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य होते हैं-
  • 1. पित्त का स्रावण
  • 2. कार्बोहाइड्रेट का उपापचय
  • 3. वसा का उपापचय
  • 4. एमीनो अम्ल का नियमन
  • 5. यूरिया का संश्लेषण
  • 6. विषैले पदार्थों का विषहरण
  • 7. रुधिर में प्रोटीन का संश्लेषण
  • 8. हिपैरिन का संश्लेषण
  • 9. जीवाणुओं का भक्षण
  • 10. विटामिन A का संश्लेषण तथा अल्प समय के लिए विटामिन A, B12, D, E तथा K का संचय।
  • यकृत की संरचना और स्थान
    • यकृत कोशिकाएँ (hepatocytes) पित्त का उत्पादन करती हैं
    • जो छोटी नलिकाओं (bile canaliculi) से होकर यकृत के अंदर ही बहता है
    • अंततः सामान्य पित्त नली (common hepatic duct) से बाहर निकलता है।
    • पित्ताशय में पहुँचकर यह संग्रहीत हो जाता है।
    • पित्त लवण (bile salts): जैसे सोडियम टॉरोकोलेट और सोडियम ग्लाइकोकोलेट
    • जो वसा के पायसीकरण (emulsification) में सहायक होते हैं।
    • बिलीरुबिन और बिलीवरडिन: पुराने लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से प्राप्त पित्त वर्णक
    • जो मल को भूरा रंग देते हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल, वसा, इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी
    • ये पित्त को उसके कार्य के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
    • यकृत कोलेस्ट्रॉल से पित्त अम्लों का संश्लेषण करता है, जो पित्त का मूल आधार होते हैं।
    • यह वसा के बड़े कणों को छोटे-छोटे मिश्रण (micelles) में तोड़ता है
    • ताकि अग्न्याशय के लाइपेज़ एंजाइम आसानी से कार्य कर सकें।
    • भोजन करने पर हार्मोन कोलेसिस्टोकाइनिन (CCK) पित्ताशय को संकुचित कर पित्त को सामान्य पित्त नली (common bile duct) से ग्रहणी में पहुँचाता है।
    • यकृत निरंतर पित्त बनाता रहता है, जबकि पित्ताशय इसे भोजन के समय ही मुक्त करता है
  • अन्य संबंधित तथ्य
    • पित्ताशय की भूमिका: यह पित्त को 5-10 गुना सांद्र करता है
    • लेकिन स्राव नहीं करता। पित्त पथरी (gallstones) मुख्यतः कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन से बनती है।
    • यकृत के अन्य कार्य: विषाक्त पदार्थों का विघटन, प्रोटीन संश्लेषण, ग्लूकोज संग्रहण आदि।
    • समस्याएँ: यकृत रोग (जैसे हेपेटाइटिस) से पित्त उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे पीलिया (jaundice) हो सकता है।

54. भोजन के किस भाग से शौच बनकर निकलता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (1-पाली)]

Correct Answer: (a) भोजन में पोषक तत्व
Solution:
  • भोजन के पश्चात, मल में कुछ जल, अपचे पदार्थ, रंगा पदार्थ, मृत जीवाणु और इनकी क्रियाओं के फलस्वरूप बने पदार्थ, श्लेष्म, कोलेस्ट्राल
  • कुछ लवण जिन्हें संयुक्त रूप से अप्रयुक्त भोजन कहते हैं, शौच बनकर बाहर निकलते हैं।
  • पाचन प्रक्रिया का अवलोकन
    • भोजन मुँह से शुरू होकर ग्रासनली, पेट, छोटी आंत और फिर बड़ी आंत तक पहुँचता है।
    • छोटी आंत में 90% पोषक तत्व अवशोषित हो जाते हैं
    • जबकि बड़ी आंत में केवल पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और कुछ विटामिन (जैसे विटामिन K) अवशोषित होते हैं।
    • बचा हुआ अपचित पदार्थ, जो मुख्यतः आहार फाइबर (सेलुलोज आदि) होता है, मल बनाता है।
  • बड़ी आंत की भूमिका
    • बड़ी आंत (कोलन) में अपचित भोजन चyme के रूप में पहुँचता है, जो तरल होता है।
    • यहाँ कोलन की दीवारें पानी सोख लेती हैं, जिससे सामग्री गाढ़ी हो जाती है।
    • आंतों के बैक्टीरिया अपचित कार्बोहाइड्रेट को किण्वित कर गैस और छोटे फैटी एसिड बनाते हैं
    • लेकिन मुख्य अपशिष्ट फाइबर ही रहता है।
    • अंत में, मलाशय में यह अर्ध-ठोस मल जमा होकर गुदा मार्ग से बाहर निकलता है।
  • मल के घटक
    • रेशेदार पदार्थ: भोजन के अपचायित भाग जैसे सब्जियों, फलों और अनाज का फाइबर, जो पच नहीं पाता।
    • मृत कोशिकाएँ और बैक्टीरिया: आंत की मृत कोशिकाएँ और 30% तक बैक्टीरिया।
    • पानी: 75% मल पानी होता है, जो बड़ी आंत द्वारा नियंत्रित होता है।
    • अन्य: थोड़ी बिलीरुबिन (पित्त से) जो मल को भूरा रंग देती है।