मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-II)

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11. वर्तमान नियामक ढांचे के तहत, भारत में सूक्ष्म-वित्त या माइक्रोफाइनेंस ऋण की अधिकतम अवधि क्या है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 36 महीने
Solution:
  • वर्तमान नियामक ढांचे के तहत भारत में सूक्ष्म वित्त या माइक्रोफाइनेंस ऋण की अधिकतम अवधि तीन वर्ष या 36 माह है।
  • अधिकतम ऋण अवधि
    • सूक्ष्म-वित्त ऋणों की अधिकतम अवधि 36 महीने (3 वर्ष) तक सीमित है।
    • RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी माइक्रोफाइनेंस ऋणों (व्यक्तिगत या संयुक्त दायित्व समूह ऋण) की परिपक्वता अवधि अधिकतम 36 महीने होनी चाहिए।
    • यदि ऋण की अवधि 36 महीने से अधिक हो जाती है, तो उसे पुनर्निर्धारित (reschedule) नहीं किया जा सकता
    • जब तक कि विशेष परिस्थितियों में RBI की पूर्व अनुमति न हो।
    • यह प्रावधान उधारकर्ताओं पर अत्यधिक कर्ज के बोझ को रोकने के लिए बनाया गया है।​
  • नियामक ढांचे का आधार
    • RBI ने 2021-22 में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों (जैसे अंधाधुंध उधार और एकाधिक ऋण) को देखते हुए नया ढांचा लागू किया। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
    • ऋण राशि सीमा: सामान्य उधारकर्ता के लिए प्रति ऋणदाता अधिकतम ₹3 लाख, कुल सभी ऋणदाताओं से ₹4 लाख तक।
    • अवधि और EMI: कुल EMI/मासिक दायित्व वार्षिक आय का 50% से अधिक नहीं होना चाहिए।
    • अवधि 36 महीने तक सुनिश्चित करती है कि छोटे ऋण जल्दी चुकाए जाएं।
    • ब्याज दर: औसत आधार दर + 10-12% तक, पारदर्शी तरीके से।​
  • अपवाद और विशेष योजनाएं
    • कुछ सरकारी योजनाओं में भिन्नताएं हो सकती हैं, जैसे:
    • नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSKFDC)
    • यहां सूक्ष्म ऋण की अदायगी 4 महीने कार्यान्वयन + 6 महीने मोरेटोरियम के बाद 3 वर्ष (36 महीने) के भीतर करनी होती है, जो RBI मानकों से मेल खाता है।
    • SBI या अन्य बैंकों की योजनाएं: कृषि-संबंधित सूक्ष्म ऋणों में कभी-कभी लंबी अवधि (जैसे 5 वर्ष तक) हो सकती है
    • लेकिन शुद्ध माइक्रोफाइनेंस NBFC के लिए 36 महीने बाध्यकारी है।
    • RBI की 2025-26 की हालिया अधिसूचनाओं में भी कोई विस्तार नहीं किया गया।​
  • महत्वपूर्ण कारण और प्रभाव
    • यह सीमा ग्रामीण/शहरी गरीबों को संरक्षित करने के लिए है
    • जहां पहले केरल जैसे राज्यों में माइक्रोफाइनेंस संकट (22-60% ब्याज दरें) देखे गए।
    • 36 महीने की सीमा से ऋण चुकाने की क्षमता बढ़ती है
    • डिफॉल्ट दर घटती है। 2026 में बाजार ₹3.40 लाख करोड़ तक सिकुड़ गया है
    • जो नियामक सख्ती का परिणाम है। उल्लंघन पर RBI जुर्माना लगाता है।​
  • अनुपालन और हालिया अपडेट
    • 1 जून 2025 से RBI ने MFIs के लिए संशोधित आचार संहिता लागू की, जिसमें 60 दिन डिफॉल्टर पर नया ऋण प्रतिबंधित है।
    • लेकिन अवधि 36 महीने ही बनी हुई है।
    • व्यवसायों/व्यक्तियों को ऋण लेते समय RBI की वेबसाइट या MFIN (माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्रीज नेटवर्क) से सत्यापित करना चाहिए।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा व्यावसायिक बैंकों का प्राथमिक कार्य नहीं है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) निधि अंतरण
Solution:
  • व्यावसायिक बैंकों का प्राथमिक कार्य जनता से जमा स्वीकार करना
  • जनता को ऋण देना तथा ऋण का सृजन करना है, जबकि निधि का अंतरण इसका कार्य नहीं है।
  • प्राथमिक कार्य
    • ये बैंक जनता से बचत खाते, चालू खाते तथा सावधि जमा के रूप में धन एकत्र करते हैं
    • फिर इस धन का उपयोग व्यक्तिगत, व्यावसायिक या उत्पादक ऋण प्रदान करने में करते हैं।
    • इससे अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति बढ़ती है और बैंक ब्याज आय के माध्यम से लाभ कमाते हैं।​
  • माध्यमिक कार्य
    • निधि अंतरण व्यावसायिक बैंकों का प्राथमिक कार्य नहीं है, बल्कि यह एक माध्यमिक या एजेंसी कार्य है।
    • इसमें एक खाते से दूसरे खाते में धन हस्तांतरित करना शामिल होता है, जो सुविधा प्रदान करता है
    • लेकिन बैंक के मूल उद्देश्य—जमा और ऋण—from भिन्न है। अन्य माध्यमिक कार्यों में साख पत्र जारी करना
    • वस्तुओं की अभिरक्षा और विदेशी मुद्रा सेवाएँ आती हैं।​
  • अन्य गैर-प्राथमिक उदाहरण
    • मर्चेंट बैंकिंग या विदेशी विनिमय का संरक्षण भी व्यावसायिक बैंकों का प्राथमिक कार्य नहीं माना जाता।
    • ये विशेषीकृत गतिविधियाँ हैं जो निवेश बैंकिंग या केंद्रीय बैंक के दायरे में अधिक आती हैं।
    • व्यावसायिक बैंक मुख्यतः खुदरा और व्यावसायिक ग्राहकों के लिए जमा-ऋण चक्र पर केंद्रित रहते हैं।

13. मुद्रा की पूर्ति ....... द्रव्य का परिणाम है। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) किसी भी निर्दिष्ट अवधि के दौरान
Solution:
  • किसी देश की अर्थव्यवस्था में किसी विशेष समय में उपलब्ध धन की कुल राशि मुद्रा की पूर्ति है।
  • दूसरे शब्दों में, मुद्रा की पूर्ति किसी भी निर्दिष्ट अवधि के दौरान द्रव्य का परिणाम है।
  • उच्च शक्ति मुद्रा का अर्थ
    • उच्च शक्ति मुद्रा वह आधारभूत मुद्रा है जो केंद्रीय बैंक (जैसे भारत में RBI) नियंत्रित करता है।
    • इसमें दो मुख्य घटक होते हैं: जनता द्वारा धारित करेंसी और व्यावसायिक बैंकों के पास केंद्रीय बैंक में जमा आरक्षितियां।
    • जब केंद्रीय बैंक मुद्रा जारी करता है, तो यह बैंकों के आरक्षित कोष बढ़ाता है
    • जिससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ती है और कुल मुद्रा आपूर्ति विस्तारित होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि आरबीआई अधिक नोट छापता है या ओपन मार्केट ऑपरेशंस के माध्यम से बांड खरीदता है
    • तो उच्च शक्ति मुद्रा बढ़ती है, फलस्वरूप समग्र मुद्रा पूर्ति में वृद्धि होती है।​​
  • मुद्रा पूर्ति के निर्धारक तत्व
    • मुद्रा पूर्ति केवल उच्च शक्ति मुद्रा पर निर्भर नहीं, बल्कि कई कारकों से प्रभावित होती है:
    • प्रारक्षित निधि अनुपात (CRR): केंद्रीय बैंक द्वारा बढ़ाए जाने पर बैंकों के पास ऋण योग्य कोष कम हो जाते हैं, जिससे मुद्रा पूर्ति घटती है। कमी पर पूर्ति बढ़ती है।​
    • तरल कोष अनुपात (SLR): बैंकों को जमाओं का एक हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में रखना पड़ता है; उच्च SLR से ऋण क्षमता घटती है।​
    • जनता की नकद रखने की प्रवृत्ति: यदि लोग नकद अधिक रखते हैं, तो बैंक जमा कम होते हैं और साख सृजन सीमित रहता है।​
    • बैंकों का ऋण व्यवहार: बैंकों द्वारा अधिक ऋण देने से साख मुद्रा (डिपॉजिट्स) बढ़ती है, जो कुल पूर्ति का बड़ा हिस्सा है।​
  • गुणक प्रभाव और समीकरण
    • मुद्रा पूर्ति (Ms) का सरल समीकरण है: Ms = H × m, जहां H उच्च शक्ति मुद्रा है
    • m गुणक (1 / (CRR + जनता का नकद अनुपात))। यदि CRR घटे या जनता जमा अधिक रखे, तो m बढ़ता है
    • Ms विस्तारित होती है। यह प्रक्रिया बैंकों के साख सृजन से चलती है—एक जमा कई गुना ऋण बन जाता है।
    • मुद्रा का वेग (Velocity) भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता है, क्योंकि तेजी से हाथ बदलने पर प्रभावी पूर्ति बढ़ती है।​​
    • यह अवधारणा मौद्रिक नीति का आधार है, जहां केंद्रीय बैंक उच्च शक्ति मुद्रा नियंत्रित कर मुद्रास्फीति या मंदी को संतुलित करता है।​

14. ....... कुल उपयोगिता में वह परिवर्तन है, जो वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपयोग से होता है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सीमांत उपयोगिता
Solution:
  • सीमांत उपयोगिता (MU) कुल उपयोगिता में वह परिवर्तन है जो वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से होता है।
  • उदाहरण के लिए 4 आम से हमें 28 इकाई कुल उपयोगिता प्राप्त होती है
  • 5 आम से कुल उपयोगिता 30 इकाई मिलती है, अतः पांचवें आम के उपभोग से कुल उपयोगिता 2 इकाई बढ़ गई
  • इसलिए पांचवें आम की सीमांत उपयोगिता 2 इकाई है।
  • सीमांत उपयोगिता की परिभाषा
    •  सामान्य रूप से, , जहां  मात्रा में परिवर्तन (आमतौर पर 1 इकाई) है।
    • यह अवधारणा हर्मन हाइनरिच गोसेन द्वारा प्रतिपादित गोसेन के प्रथम नियम पर आधारित है
    • जो कहता है कि उपयोगिता की सीमांत घटती जाती है।​
  • कुल उपयोगिता से संबंध
    • कुल उपयोगिता सभी उपभोग की गई इकाइयों से प्राप्त संपूर्ण संतोष है
    • जबकि सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता में होने वाला क्रमिक परिवर्तन दर्शाती है।
    • कुल उपयोगिता सभी सीमांत उपयोगिताओं का योग होती है: .
    • जब तक MU धनात्मक रहती है, TU बढ़ती जाती है।
    • जब MU शून्य हो जाती है, TU अधिकतम (संतुलन बिंदु) होती है।
    • जब MU ऋणात्मक हो जाती है, TU घटने लगती है।​
  • सीमांत उपयोगिता का व्यवहार
    • बढ़ती अवस्था: प्रारंभिक इकाइयों में MU बढ़ सकती है (जैसे भूख लगने पर पहला निवाला)।
    • घटती अवस्था: सामान्यतः MU घटती जाती है
    • कानून ऑफ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी), क्योंकि प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से संतोष की तीव्रता कम होती जाती है।
    • शून्य और ऋणात्मक: अधिक उपभोग से असंतोष हो सकता है।​
  • महत्वपूर्ण अनुप्रयोग
    • यह अवधारणा मांग वक्र को समझाने में सहायक है—MU के बराबर कीमत पर उपभोक्ता संतुलन प्राप्त करता है।
    • उत्पाद उपयोगिता (Product Utility) से भिन्न, यह उपभोक्ता-केंद्रित है।
    • आधुनिक अर्थशास्त्र में ऑर्डिनल उपयोगिता से इसका महत्व कम हुआ, लेकिन सूक्ष्म अर्थशास्त्र की आधारशिला बनी हुई है।​

15. ....... रुपये में लेन-देन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की स्वीकृति प्राप्त करने वाली पहली बैंक बन गई है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) यूको बैंक
Solution:
  • सितंबर, 2022 में यूको बैंक रुपये में लेन-देन करने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक की स्वीकृति प्राप्त करने वाला पहला बैंक बन गया है।
  • यूको बैंक पहली बैंक बनी
    • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से रुपये में लेन-देन करने की स्वीकृति प्राप्त करने वाली पहली बैंक यूको बैंक है।​
  • स्वीकृति का विवरण
    • यूको बैंक को रूस के गज़प्रॉमबैंक के साथ विशेष वोस्ट्रो खाता खोलने की अनुमति मिली
    • जिससे भारतीय रुपये (INR) में व्यापार निपटान संभव हुआ।
    • यह स्वीकृति 11 जुलाई 2022 को आरबीआई के परिपत्र के बाद प्राप्त हुई
    • जिसमें भारत और अन्य देशों (जैसे रूस, श्रीलंका) के बीच रुपये व्यापार की अनुमति दी गई।
    • यूको बैंक इस सुविधा का पहला लाभ उठाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बना।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • वोस्ट्रो खाता: यह विदेशी बैंक में भारतीय बैंक का खाता होता है
    • जो रुपये व्यापार को आसान बनाता है और डॉलर पर निर्भरता कम करता है।​
    • गज़प्रॉमबैंक: रूस का प्रमुख बैंक, जो गैस उद्योग से जुड़ा है और 1990 से सक्रिय है।​
    • आरबीआई का उद्देश्य: वैश्विक व्यापार में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देना, विनिमय दर बाजार-निर्धारित रखना।​

16. बिक्री के XXI चरण में चुनावी बॉण्ड की निम्नलिखित में से किस संस्था से केवल खरीद की जा सकती है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली]

Correct Answer: (c) एसबीआई
Solution:
  • भारतीय स्टेट बैंक से बिक्री के XXI चरण में चुनावी बॉण्ड की खरीद की जा सकती है।
  • यह जारी होने की तिथि से 15 कैलेंडर दिवसों हेतु वैध होता है।
  • वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।
  • चुनावी बॉन्ड योजना का अवलोकन
    • चुनावी बॉन्ड एक वित्तीय साधन है
    • जो राजनीतिक दलों को दान देने के लिए 2018 में पेश किया गया था।
    • कोई भी भारतीय नागरिक, कंपनी या संस्था इन्हें खरीदकर पसंदीदा राजनीतिक दल को दान कर सकती है।
    • खरीद केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अधिकृत शाखाओं से ही संभव है
    • क्योंकि सरकार ने विशेष रूप से SBI को इसकी बिक्री का एकमात्र अधिकृत प्राधिकारी नियुक्त किया था।
    • बॉन्ड 15 दिनों, 30 दिनों, 90 दिनों या 1 वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होते थे, बिना ब्याज के।​​
  • XXI चरण के विशेष विवरण
    • तिथि: यह चरण जनवरी 2023 के पहले 10 दिनों (10-19 जनवरी 2023) में आयोजित हुआ
    • जैसा कि वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की।​
    • खरीद स्थान: केवल SBI की 11 निर्दिष्ट शाखाओं (जैसे कोलकाता, नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल, बेंगलुरु, लखनऊ, चंडीगढ़, पटना और गुवाहाटी) से खरीद संभव थी।​
    • खरीदार: केवल वे व्यक्ति या संस्थाएं जिनका KYC (Know Your Customer) पूरा हो।
    • बॉन्ड कैश में नहीं, केवल डिजिटल या चेक मोड से खरीदे जा सकते थे। न्यूनतम मूल्य ₹1,000 से शुरू, अधिकतम ₹1 करोड़ तक।​
    • दान प्रक्रिया: खरीदने के बाद बॉन्ड को 15 दिनों के अंदर किसी राजनीतिक दल की SBI खाता में जमा करना होता था।
    • दानकर्ता का नाम गुमनाम रहता था।
  • अन्य संस्थाओं की भूमिका क्यों नहीं?
    • RBI: भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय बैंक है, लेकिन चुनावी बॉन्ड बेचने का अधिकार नहीं।​
    • SEBI: प्रतिभूति बाजार नियामक, बॉन्ड बिक्री से असंबंधित।​
    • नीति आयोग: नीति थिंक टैंक, वित्तीय लेन-देन में कोई भूमिका नहीं।​
    • SBI को चुना गया क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है
    • सुरक्षित लेन-देन सुनिश्चित करता है।
    • कुल 30 चरणों में बिक्री हुई, XXI चरण गुजरात-हिमाचल चुनावों से पहले महत्वपूर्ण था।​
  • योजना का उद्देश्य और प्रभाव
    • यह योजना काले धन को रोकने और पारदर्शी दान को बढ़ावा देने के लिए लाई गई थी।
    • कुल ₹16,000 करोड़ से अधिक के बॉन्ड बिके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।
    • फिर भी, ऐतिहासिक संदर्भ में SBI एकमात्र संस्था थी।​

17. वर्ष 2022 तक की स्थिति के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर कौन हैं? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) शक्तिकांत दास
Solution:
  • वर्ष 2022 तक की स्थिति के अनुसार (वर्तमान में भी) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास हैं।
  • प्रारंभिक जीवन
    • शक्तिकांत दास का जन्म 26 फरवरी 1957 को भुवनेश्वर, ओडिशा में हुआ।
    • उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में बीए और एमए किया
    • साथ ही बर्मिंघम विश्वविद्यालय से सार्वजनिक प्रशासन में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की ।
    • आईआईएम बैंगलोर और अहमदाबाद से वित्तीय प्रबंधन प्रशिक्षण भी लिया।​
  • प्रशासनिक करियर
    • 1980 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी दास ने तमिलनाडु सरकार में जिला मजिस्ट्रेट, राजस्व सचिव जैसे पद संभाले।
    • केंद्र में आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव रहे, जीएसटी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
    • विश्व बैंक, एडीबी, आईएमएफ, जी20 जैसे मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।​
  • RBI गवर्नर के रूप में नियुक्ति
    • 3 दिसंबर 2018 को घोषणा हुई, 12 दिसंबर 2018 से 25वें गवर्नर बने।
    • उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद आए, 2022 तक अर्थव्यवस्था को कोविड चुनौतियों से निपटने में सहायता की ।
    • कार्यकाल में मौद्रिक नीति स्थिरता बनाए रखी।​
  • उपलब्धियां
    • आरबीआई में डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन, मुद्रास्फीति नियंत्रण प्रमुख रहा।
    • 2021 में उत्तकाल विश्वविद्यालय से डी.लिट. सम्मान मिला । 2024 तक 6 वर्ष सेवा दी, उसके बाद संजय मल्होत्रा ने पद संभाला 。​

18. भारत में वाणिज्यिक बैंकों को अपने ग्राहकों को ऋण देने से पहले नकदी, सोना और अन्य प्रतिभूतियों का न्यूनतम प्रतिशत बनाए रखना होता है। इसे कहा जाता है - [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सांविधिक तरलता अनुपात
Solution:
  • बैंकों की समग्र जमाओं का वह अनुपात जो उन्हें सरकारी प्रतिभूतियों स्वर्ण, नकदी जैसी चल एवं सुरक्षित संपत्तियों के रूप में रखना होता है
  • सांविधिक तरलता अनुपात कहलाता है।
  • SLR क्या है?
    • SLR भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित एक अनिवार्य आरक्षित अनुपात है
    • जिसमें वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित न्यूनतम प्रतिशत तरल संपत्तियों जैसे नकदी
    • सोना या अनुमोदित सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे सरकारी बॉन्ड्स, ट्रेजरी बिल) के रूप में अपने पास रखना होता है।
    • यह अनुपात बैंकों की सॉल्वेंसी (दायित्व निभाने की क्षमता) और तरलता सुनिश्चित करता है
    • वे अचानक निकासी या संकट की स्थिति में ग्राहकों को भुगतान कर सकें।
    • वर्तमान में (2022-2025 के आंकड़ों के अनुसार) SLR की दर लगभग 18% है
    • हालांकि RBI मौद्रिक नीति समीक्षा में इसे समायोजित करता रहता है।​
  • SLR का उद्देश्य
    • SLR का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में स्थिरता बनाए रखना है।
    • यह बैंकों को अत्यधिक ऋण वितरण से रोकता है, जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहती है।
    • इसके अलावा, यह सरकार को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने में मदद करता है
    • क्योंकि बैंक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने को बाध्य होते हैं। यदि SLR में कमी आती है
    • तो बैंकों के पास अधिक धन ऋण के लिए उपलब्ध होता है
    • जो अर्थव्यवस्था को गति देता है; वहीं वृद्धि से तरलता कम होती है।​​
  • SLR का प्रभाव और विनियमन
    • RBI अधिनियम की धारा 24(2)(A) के तहत SLR न्यूनतम 0% और अधिकतम 40% तक हो सकता है।
    • मौद्रिक नीति में RBI इसे समायोजित कर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है
    • कोविड जैसी महामारी में इसे कम किया गया था ताकि ऋण वितरण बढ़े।
    • उल्लंघन पर RBI जुर्माना लगाता है, जो बैंक की प्रतिष्ठा प्रभावित करता है।
    • वर्तमान संदर्भ (जनवरी 2026) में, SLR स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं
    • खासकर डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक के बढ़ते प्रभाव में।​

19. मौद्रिक नीति लिखत/साधन (instrument) जिसे "बैंक दर" कहा जाता है, ....... के अनुरूप है। [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सीमांत स्थायी सुविधा दर
Solution:
  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी अति अल्पकालीन तरलता आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अपनी स्वीकृत तरलता अनुपात के बदले भारतीय रिजर्व बैंक से जिस दर पर ऋण लेते हैं
  • उसे सीमांत स्थायी सुविधा दर कहा जाता है। ध्यान रहे कि मौद्रिक नीति लिखत/साधन जिसे बैंक दर कहा जाता है
  • सीमांत स्थायी सुविधा दर के अनुरूप होता है।
  • बैंक दर की परिभाषा
    • बैंक दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को बिना पर्याप्त संपार्श्विक के दीर्घकालिक निधियाँ उपलब्ध कराता है
    • विनिमय विपत्रों (बिल्स ऑफ एक्सचेंज) को पुनर्छूटक (रिडिस्काउंट) करता है।
    • यह मौद्रिक नीति का पारंपरिक साधन है, जो अर्थव्यवस्था में तरलता नियंत्रण और मुद्रास्फीति प्रबंधन के लिए प्रयुक्त होता है।
    • आधुनिक संदर्भ में, यह MSF के साथ जुड़ गया है
    • जहाँ बैंक अपनी नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटी (NDTL) का 1% तक उधार ले सकते हैं।​
  • MSF से अनुरूपता
    • मौद्रिक नीति साधन "बैंक दर" सीमांत स्थायी सुविधा दर (MSF) के अनुरूप है
    • क्योंकि दोनों का उद्देश्य बैंकों को रात्रि-समाप्ति (overnight) आधार पर अतिरिक्त तरलता प्रदान करना है
    • जब अंतर-बैंक बाजार में तरलता समाप्त हो जाती है।
    • RBI की लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) ढांचे के तहत MSF को बैंक दर के रूप में परिभाषित किया जाता है
    • जो रेपो दर से 25-100 आधार अंक ऊपर रहती है।
    • उदाहरणस्वरूप, अप्रैल 2025 की नीति में रेपो दर 6% होने पर बैंक दर/MSF संबंधित स्तर पर स्थिर रही।​
  • कार्यप्रणाली और प्रभाव
    • उपयोग: आपात स्थिति में बैंकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों को संपार्श्विक रखकर उधार लिया जाता है
    • जो तरलता दबाव को कम करता है।​
    • नीति प्रभाव: मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए बैंक दर बढ़ाने पर बैंकों की उधार लागत बढ़ती है
    • जिससे साख संकुचन होता है और उपभोग-निवेश घटता है।​
    • अन्य दरों से अंतर: रेपो दर अल्पकालिक तरलता के लिए है
    • संपार्श्विक सहित), जबकि बैंक दर/MSF बिना पर्याप्त संपार्श्विक के दीर्घकालिक है।​
  • RBI की मौद्रिक नीति में भूमिका
    • मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा 4% CPI मुद्रास्फीति (±2%) लक्ष्य बनाए रखने के लिए
    • बैंक दर सहित उपकरणों (रेपो, रिवर्स रेपो, CRR, SLR) का उपयोग होता है।
    • नरसिम्हम समिति (1998) की सिफारिशों से LAF शुरू हुआ
    • जिसमें MSF/बैंक दर स्थिरता सुनिश्चित करती है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026), यह विकास और मूल्य स्थिरता के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।​

20. मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दरों पर हॉकिश स्टैंड (hawkish stand) बनाए रखा। इस संदर्भ में, हॉकिश स्टैंड का अर्थ है- [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ब्याज दरों में वृद्धि की गई
Solution:
  • हॉकिश स्टैंड का मतलब है-मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की अनुमति प्रदान करना।
  • हॉकिश नीति' एक सख्त मौद्रिक नीति को संदर्भित करती है।
  • हॉकिश स्टैंड की परिभाषा
    • जहां केंद्रीय बैंक जैसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देता है।
    • इसमें ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं ताकि उधार महंगा हो जाए
    • जिससे उपभोक्ता और व्यवसाय कम खर्च करें और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगे।
    • यह शब्द "हॉक" (बाज) से लिया गया है, जो आक्रामकता का प्रतीक है।​
  • हॉकिश बनाम डोविश स्टैंड
    • हॉकिश: मुद्रास्फीति नियंत्रण पर फोकस, ब्याज दरें ऊंची, आर्थिक विकास धीमा। उदाहरण: RBI द्वारा repo rate बढ़ाना।​
    • डोविश: विकास को बढ़ावा, ब्याज दरें कम, मुद्रास्फीति को थोड़ा सहन करना। यह "डोव" (कबूतर) से प्रेरित है, जो शांति का प्रतीक है।​
  • प्रभाव और कारण
    • हॉकिश स्टैंड से ऋण महंगे होते हैं, निवेश घटता है, शेयर बाजार पर दबाव पड़ता है
    • लेकिन महंगाई नियंत्रित रहती है। MPC ऐसा तब अपनाती है
    • जब मुद्रास्फीति लक्ष्य (भारत में 4% ±2%) से ऊपर हो या अर्थव्यवस्था गरम हो।
    • हाल के संदर्भ में, RBI ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाया।​
  • भारतीय संदर्भ में उदाहरण
    • भारत की MPC, जो 2016 से कार्यरत है, ने अतीत में मुद्रास्फीति दबावों के कारण हॉकिश रुख लिया
    • जैसे 2022-23 में repo rate को 6.5% तक बढ़ाया। वर्तमान में (जनवरी 2026 तक
    • यह स्टैंड मुद्रास्फीति जोखिमों के कारण बरकरार है, जो आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।​