मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-II)

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31. मुद्रा की पूर्ति की इन मापों में से किसे समस्त मौद्रिक संसाधन कहा जाता है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) M₃
Solution:
  • भारत में मुद्रा की पूर्ति का नियमन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है।
  • भारत में मुद्रा की पूर्ति का मापन चार मापकों के आधार पर किया जाता है।
  • जिसमें M2 को समस्त मौद्रिक संसाधन या वृहद मुद्रा या व्यापक मुद्रा कहा जाता है।
  • M3 की परिभाषा
    • M3 को समस्त मौद्रिक संसाधन (Aggregate Monetary Resources) कहा जाता है
    • क्योंकि यह अर्थव्यवस्था में उपलब्ध कुल मौद्रिक संपदा को दर्शाता है।
    • RBI इसे निम्नलिखित के योग के रूप में परिभाषित करता है:
    • प्रचलन में स्थित मुद्रा (नोट और सिक्के)।
    • RBI के पास बैंकों की शेष राशि।
    • RBI के पास अन्य जमाराशियां।​
    • यह M1 (संकीर्ण मुद्रा: नकद + मांग जमाराशियां) से अधिक व्यापक है और बैंकिंग प्रणाली के क्रेडिट निर्माण को समाहित करता है।
  • मुद्रा आपूर्ति के माप (M0 से M3)
    • RBI चार मुख्य मापों का उपयोग करता है:
    • M0 (आरक्षित निधि): उच्च शक्ति वाली मुद्रा, जिसमें नोट, सिक्के और बैंकों के RBI खाते शामिल। यह बैंकों के क्रेडिट सृजन का आधार है।
    • M1 (संकीर्ण मुद्रा): M0 + मांग जमाराशियां। दैनिक लेन-देन के लिए उपयोगी।
    • M2: M1 + बैंकों की अल्पकालिक समय जमाराशियां (1 वर्ष तक)।
    • M3 (समस्त मौद्रिक संसाधन): M1 + सभी समय जमाराशियां + कॉल/ट्रेड बिल। यह मौद्रिक नीति का प्रमुख सूचकांक है।​
  • महत्व और उपयोग
    • M3 मौद्रिक नीति निर्माण में केंद्रीय है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था की समग्र तरलता को मापता है।
    • RBI इसे नियंत्रित कर मुद्रास्फीति, विकास और ब्याज दरों को प्रभावित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि M3 तेजी से बढ़ता है, तो RBI CRR या repo rate बढ़ाकर इसे नियंत्रित करता है।​

32. मुद्रा गुणक (Money multiplier) की गणना के लिए निम्नलिखित में से किस मौद्रिक लिखत का उपयोग किया जाता है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) आरक्षित नकदी निधि अनुपात
Solution:
  • आरक्षित नकदी निधि अनुपात का उपयोग मुद्रा गुणक की गणना हेतु किया जाता है।
  • मुद्रा गुणक का सूत्र
    • मुद्रा गुणक का मूल सूत्र सरल है:
    • मुद्रा गुणक (m) = 1 / R
    • जहाँ R आरक्षित अनुपात (reserve ratio) है, जो बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का वह प्रतिशत है
    • जिसे वे नकद रूप में आरक्षित रखने या केंद्रीय बैंक में जमा करने के लिए बाध्य होते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि CRR 4% (0.04) है, तो मुद्रा गुणक = 1/0.04 = 25 होगा।
    • इसका अर्थ है कि प्रारंभिक जमा राशि 100 रुपये होने पर बैंकिंग प्रणाली कुल 2500 रुपये की मुद्रा आपूर्ति सृजित कर सकती है।​
  • गणना में प्रयुक्त मौद्रिक साधन
    • प्रश्न में "मौद्रिक लिखत" से तात्पर्य मौद्रिक नीति के साधनों से है।
    • मुद्रा गुणक की गणना के लिए नकद आरक्षित अनुपात (CRR) का ही उपयोग होता है, न कि अन्य साधनों जैसे बैंक दर, रेपो दर या रिवर्स रेपो दर का।
    • CRR: बैंकों की कुल नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज (NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद रखना अनिवार्य।
    • यह सीधे मुद्रा गुणक को नियंत्रित करता है। CRR बढ़ने पर गुणक घटता है (कम ऋण देने की क्षमता), और घटने पर गुणक बढ़ता है।​
    • अन्य विकल्प जैसे रेपो दर (केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों को ऋण देने की दर) या SLR (Statutory Liquidity Ratio) मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करते हैं
    • लेकिन गुणक की गणना में इनका प्रत्यक्ष उपयोग नहीं होता।​
  • कार्यप्रणाली और उदाहरण
    • बैंकिंग प्रणाली में मुद्रा गुणक जमा गुणन (deposit multiplication) प्रक्रिया से कार्य करता है।
    • मान लीजिए आरक्षित अनुपात 10% (R=0.10) है और प्रारंभिक जमा ₹1000 है:
    • बैंक ₹100 (10%) आरक्षित रखता है और ₹900 ऋण देता है।
    • यह ₹900 नए खाते में जमा होता है; बैंक ₹90 आरक्षित रखकर ₹810 ऋण देता है।
    • प्रक्रिया अनंत तक चलती है, कुल मुद्रा आपूर्ति = ₹1000 × (1/0.10) = ₹10,000।
    • यह श्रेणी योग (geometric series) पर आधारित है।
    • वास्तविकता में, करेंसी-डिपॉजिट अनुपात (C/D) और अतिरिक्त आरक्षण जैसे कारक गुणक को प्रभावित करते हैं
    • जिससे वास्तविक गुणक सूत्र: m = (1 + C/D) / (R + C/D) हो जाता है।​
  • प्रभावित करने वाले कारक
    • आरक्षित अनुपात (R): मुख्य निर्धारक; RBI इसे समायोजित कर मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित करता है।
    • करेंसी होल्डिंग: जनता द्वारा अधिक नकद रखने पर (उच्च C/D) गुणक घटता है।
    • SLR: अप्रत्यक्ष प्रभाव, क्योंकि यह बैंकों की ऋण योग्य राशि कम करता है।
    • भारत में जनवरी 2026 तक RBI CRR को मौद्रिक नीति का प्रमुख उपकरण मानता है, जो महंगाई नियंत्रण में सहायक है।​

33. नाबार्ड (NABARD), वर्ष 1982 में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष वित्त संस्थान है। NABARD में 'R' का क्या अर्थ है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) रूरल
Solution:
  • वर्ष 1982 में नाबार्ड (NABARD) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष वित्त संस्थान है, जिसमें R का अर्थ रूरल (RURAL) है।
  • NABARD का पूरा नाम National Bank for Agriculture and Rural Development है।
  • NABARD का 'R' 'Rural' (ग्रामीण) के लिए है।
    • NABARD का पूरा नाम National Bank for Agriculture and Rural Development (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) है
    • जो भारत सरकार द्वारा 12 जुलाई 1982 को स्थापित एक शीर्ष विकास वित्तीय संस्थान है।​
  • स्थापना का उद्देश्य
    • NABARD की स्थापना रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कृषि ऋण विभाग
    • कृषि रिफाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (ARDC) के कार्यों को समाहित करके की गई थी
    • ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत कृषि और विकास को बढ़ावा मिले।
    • यह ग्रामीण भारत की समृद्धि के लिए वित्तीय सहायता, पुनर्वित्त, पर्यवेक्षण और नीति निर्माण का प्रमुख केंद्र है।​
  • प्रमुख कार्य
    • पुनर्वित्त प्रदान करना: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB), सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों को ग्रामीण ऋणों के लिए कम लागत पर धन उपलब्ध कराना।
    • पर्यवेक्षण और नियमन: सहकारी बैंकों और RRBs के कार्यों की निगरानी करना
    • साथ ही ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे सिंचाई, सड़कें और गोदामों का विकास।
    • विकास पहल: स्वयं सहायता समूह (SHG), जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप्स (JLG), लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और किसान क्लबों को प्रोत्साहन देना।​
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • NABARD ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है
    • जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से संसाधन जुटाना, प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना और सतत विकास परियोजनाओं का समर्थन शामिल है।
    • यह भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समावेशन और गरीबी उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण है।​

34. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बैंक ऑफ बड़ौदा
Solution:
  • उपर्युक्त विकल्पों में विकल्प (c) अर्थात बैंक ऑफ बड़ौदा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र बैंक की परिभाषा
    • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकार के स्वामित्व वाले होते हैं, जो सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हैं
    • जैसे कृषि ऋण, गरीबी उन्मूलन योजनाएं और वित्तीय समावेशन।
    • 1969 में 14 बैंकों का पहला राष्ट्रीयकरण और 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण इनकी नींव रखता है।
    • वर्तमान में भारत में लगभग 12 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र बैंक सक्रिय हैं, जिनमें विलय प्रक्रियाओं के बाद संख्या घटी है।​
  • प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र बैंक
    • भारत के मुख्य सार्वजनिक क्षेत्र बैंक निम्नलिखित हैं:
    • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
    • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
    • बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)
    • बैंक ऑफ इंडिया
    • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
    • केनरा बैंक
    • इंडियन बैंक
    • इंडियन ओवरसीज बैंक
    • यूको बैंक
    • बैंक ऑफ महाराष्ट्र
    • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
    • पंजाब एंड सिंध बैंक
    • ये बैंक देश के कुल बैंकिंग व्यवसाय का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • ये बैंक आर्थिक नीतियों को लागू करते हैं, जैसे जन धन योजना और किसान क्रेडिट कार्ड।
    • हालांकि, एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) और पूंजी की कमी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
    • हाल के वर्षों में विलय (जैसे PNB ओरिएंटल बैंक के साथ) से मजबूती आई है।​

35. "भुगतान विजन 2025 (Payment Vision 2025)" नाम की एक रिपोर्ट किस संस्था द्वारा जारी की गई है? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भारतीय रिजर्व बैंक
Solution:
  • वर्ष 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रत्येक उपयोगकर्ता को सुरक्षित, तीव्र, सुविधाजनक, सुलभ और ई-भुगतान विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से भुगतान विजन 2025 रिपोर्ट जारी किया गया।
  • भुगतान विजन 2025 को जारी करने वाली संस्था
    • "भुगतान विजन 2025" (Payments Vision 2025) नामक रिपोर्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) द्वारा जारी की गई है।​
  • जारी करने का विवरण
    • यह दस्तावेज़ जनवरी 2020 में RBI ने प्रकाशित किया था
    • जो भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली के भविष्य के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करता है।
    • RBI के भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड  के मार्गदर्शन में तैयार किया गया।
    • इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतानों को हर व्यक्ति, हर जगह और हर समय उपलब्ध कराना है
    • जिसमें सुरक्षित, कुशल और किफायती विकल्प शामिल हैं।​
  • प्रमुख लक्ष्य और स्तंभ
    • रिपोर्ट पांच प्रमुख स्तंभों (Integrity, Inclusion, Innovation, Institutionalisation, Internationalisation) पर आधारित है।
    • वैकल्पिक प्रमाणीकरण तंत्र, LEI का विस्तार, और डिजिटल भुगतान सुरक्षा कोष (DPPF) की स्थापना।
    • भुगतान बुनियादी ढांचे का भू-टैगिंग, PPI दिशानिर्देशों की समीक्षा, और ग्राहक जागरूकता।
    • आधारित भुगतान, ISO 20022 मानक, UPI से क्रेडिट कार्ड लिंकिंग, और BNPL सेवाओं पर दिशानिर्देश।
    • एक्ट की समीक्षा, भुगतान सलाहकार परिषद (PAC) का गठन।
    • UPI, RuPay का वैश्विक विस्तार, CBDC से दक्षता।​
  • अपेक्षित परिणाम
    • रिपोर्ट 10 प्रमुख परिणाम निर्धारित करती है
    • जैसे UPI लेनदेन में 50% से अधिक वृद्धि, PPI लेनदेन में 150% वृद्धि, और मोबाइल भुगतान उपयोगकर्ताओं में 50% वार्षिक वृद्धि।
    • यह Payments Vision 2019-21 पर आधारित है और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है।​
  • पृष्ठभूमि और प्रभाव
    • RBI ने जून 2022 में इसकी प्रगति रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें डिजिटल भुगतानों में तीन गुना वृद्धि का लक्ष्य रखा गया।
    • यह UPI, Bharat QR जैसी पहलों को मजबूत करती है
    • भू-राजनीतिक जोखिमों से घरेलू प्रणालियों की रक्षा पर जोर देती है।
    • कुल मिलाकर, यह दस्तावेज़ भारत को वैश्विक भुगतान केंद्र बनाने की दिशा में RBI की प्रतिबद्धता दर्शाता है।​

36. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में नोट जारी करने वाला एकमात्र प्राधिकारी है? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) भारतीय रिजर्व बैंक
Solution:
  • भारतीय रिजर्व बैंक भारत में नोट जारी करने वाला एकमात्र प्राधिकारी है।
  • ध्यातव्य है कि भारत में सिक्के ढालने का एकमात्र अधिकार भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) के पास है।
  • कानूनी आधार
    • RBI अधिनियम, 1934 की धारा 22 स्पष्ट रूप से कहती है कि भारत में मुद्रा जारी करने या नोट छापने का एकमात्र अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है।
    • धारा 25 के अनुसार, नोटों का डिज़ाइन, रूप और सामग्री RBI के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिशों पर केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित होती है।
    • इसके अलावा, धारा 26 नोटों को कानूनी निविदा (legal tender) का दर्जा देती है।​
  • अपवाद: 1 रुपये का नोट
    • हालांकि RBI सभी नोट जारी करता है, लेकिन 1 रुपये का नोट एक अपवाद है।
    • RBI अधिनियम की धारा 22 के तहत RBI को 1 रुपये के नोट जारी करने का अधिकार नहीं है।
    • इसे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है, और इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।
    • 1 रुपये के सिक्के भी वित्त मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।​
  • RBI की भूमिका
    • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी, और यह भारत का केंद्रीय बैंक है।
    • यह मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित करता है, मौद्रिक नीति बनाता है, और नोटों का प्रबंधन करता है।
    • वर्तमान में शक्तिकांत दास इसके गवर्नर हैं। RBI सरकार का बैंकर और अन्य बैंकों का नियामक भी है।​
  • अन्य संस्थाओं की स्थिति
    • वाणिज्यिक बैंक, SBI या भारत सरकार सीधे नोट जारी नहीं कर सकती।
    • सरकार केवल नीतिगत प्रभाव डाल सकती है, लेकिन जारीकर्ता RBI ही है।
    • अधिकतम नोट मूल्य 10,000 रुपये निर्धारित है (धारा 24)।​

37. करेंसी नोट और सिक्कों को ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कागज़ी मुद्रा
Solution:
  • अर्थव्यवस्था में करेंसी नोट और सिक्कों से युक्त मुद्रा को कागजी मुद्रा (Fiat Money) कहते हैं।
  • ध्यातव्य है कि करेंसी नोट छापने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक को है।
  • मुद्रा का अर्थ
    • मुद्रा (Currency) वह साधन है जो वस्तुओं व सेवाओं की खरीद-बिक्री में स्वीकार्य होती है।
    • नोट और सिक्के कानूनी निविदा (Legal Tender) होते हैं, अर्थात इन्हें भुगतान के लिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
    • भारतीय संदर्भ में मुद्रा को भारतीय रुपया (INR) कहा जाता है, जो ₹ प्रतीक से दर्शाया जाता है। 1 रुपया = 100 पैसे।​
  • नोट और सिक्कों का भेद
    • बैंकनोट्स (Currency Notes): ₹10 से ₹2000 तक के नोट RBI द्वारा जारी।
    • ये प्रॉमिसरी नोट हैं, जिन पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। अपवाद: ₹1 का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है।​
    • सिक्के (Coins): ₹1 से ₹10 तक, वित्त मंत्रालय द्वारा। 50 पैसे तक को "छोटे सिक्के" और ऊपर को "रुपये सिक्के" कहते हैं।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारतीय मुद्रा का इतिहास प्राचीन है। पंचमार्क्ड सिक्के सबसे पुराने थे।
    • शेरशाह सूरी ने चाँदी का रुपया शुरू किया। ब्रिटिश काल में पेपर नोट आए। RBI की स्थापना 1935 में हुई
    • जिसने एकाधिकार प्राप्त किया (RBI Act, 1934 की धारा 22)। 2010 में ₹ प्रतीक जोड़ा गया।​
  • विशेषताएँ
    • सुरक्षा: नोटों में वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, इंटेग्लियो प्रिंटिंग।
    • मुद्रण: नोट नासिक, देवास आदि में; सिक्के कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, नोएडा में।
    • मूल्यवर्ग: नोट: ₹5,10,20,50,100,200,500,2000; सिक्के: 50p,₹1,2,5,10।​

38. अर्थशास्त्र का कौन-सा नियम कहता है कि "बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से निकाल बाहर करती है (Bad money drives out good money)"? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्रेशम का नियम
Solution:
  • ग्रेशम का नियम एक मौद्रिक सिद्धांत है, जो बताता है कि बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है।
  • अर्थात नई मुद्रा को लोग अपने पास रखना चाहते हैं तथा बुरी मुद्रा (खराब मुद्रा) को चलन में जारी रखते हैं।
  • नियम की व्याख्या
    • तो कम मूल्य वाली "बुरी" मुद्रा लेन-देन में इस्तेमाल होती रहती है
    • जबकि उच्च मूल्य वाली "अच्छी" मुद्रा को लोग संग्रह (hoarding) कर लेते हैं या पिघला देते हैं।
    • इससे अच्छी मुद्रा बाजार से गायब हो जाती है। उदाहरणस्वरूप, यदि सोने के सिक्के और चाँदी-मिश्रित सिक्के दोनों ₹10 के हैं
    • लेकिन सोने वाला अधिक मूल्यवान है, तो लोग सोने वाले को रख लेंगे और चाँदी वाले को खर्च करेंगे।​
  • इतिहास और प्रतिपादक
    • यह नियम 16वीं शताब्दी के अंग्रेजी वित्तीय सलाहकार थॉमस ग्रेशम (Thomas Gresham, 1519-1579) के नाम पर जाना जाता है
    • जिन्होंने 1558 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम को सलाह दी।
    • हालांकि, इसका सिद्धांत इससे पहले निकोलस कोपरनिकस (Copernicus Law के रूप में) और अन्य विद्वानों द्वारा भी व्यक्त किया गया था।
    • ग्रेशम ने इसे ब्रिटेन की मुद्रा संकट के संदर्भ में लोकप्रिय बनाया, जहाँ क्लिप्ड (कटे-घिसे) सिक्के प्रचलन में रहते थे।​
  • कारण और तर्क
    • मानव स्वभाव: लोग हमेशा उच्च मूल्य वाली मुद्रा को संभालकर रखते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि इसका वास्तविक मूल्य नाममात्र से अधिक है।
    • कानूनी निविदा: जब सरकार दोनों को समान रूप से स्वीकार्य घोषित करती है, तो बुरी मुद्रा प्रचलन में भरमार हो जाती है।
    • उदाहरण: अमेरिका में 1965 से पहले चाँदी के सिक्के पिघलाए जाते थे
    • क्योंकि उनका धातु मूल्य नाममात्र से अधिक था।
    • इसी तरह, कटे-फटे नोट बाजार में घूमते हैं, जबकि नये नोट घरों में रखे जाते हैं।​​
  • आधुनिक अनुप्रयोग और सीमाएँ
    • आज कागजी मुद्रा या डिजिटल मुद्रा में यह कम लागू होता है, लेकिन मुद्रास्फीति (inflation) या फर्जी नोटों के मामलों में दिखता है
    • जैसे हाइपरइन्फ्लेशन में लोग अच्छी विदेशी मुद्रा होर्ड करते हैं। सीमाएँ: यह केवल तभी लागू होता है
    • जब दोनों मुद्राएँ कानूनी निविदा हों; अन्यथा बाजार स्वयं समायोजित कर लेता है।
    • विकसित अर्थव्यवस्थाओं में एकसमान फिएट मनी से इसका प्रभाव न्यून है।​

39. एक बैंक के लिए, मुख्य देनदारी इसकी/इसके ....... हैं। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) जमाएं
Solution:
  • एक बैंक की मुख्य देनदारी उसकी जमाएं होती हैं, जो लोगों द्वारा उसके पास रखी होती हैं।
  • बैंक बैलेंस शीट का अवलोकन
    • बैंकों का बैलेंस शीट दो भागों में विभाजित होता है: संपत्ति (Assets) और देनदारियाँ (Liabilities)। देनदारियाँ वे राशियाँ हैं
    • जो बैंक को दूसरों को चुकानी पड़ती हैं, जबकि संपत्तियाँ वे राशियाँ हैं जो दूसरों से वसूलनी पड़ती हैं।
    • बैंकों के लिए जमाएँ सबसे बड़ी देनदारी होती हैं, जो कुल देनदारियों का 80-90% तक कवर कर सकती हैं।​
  • जमाओं के प्रकार
    • मांग जमा (Demand Deposits): ये चालू खाते (Current Accounts) की जमाएँ होती हैं
    • जिन्हें जमाकर्ता कभी भी निकाल सकते हैं। इन पर कोई ब्याज नहीं या बहुत कम ब्याज मिलता है।​
    • काल जमा (Time Deposits): ये बचत खाते (Savings Accounts) या सावधि जमा (Fixed Deposits) होती हैं
    • जिन पर निश्चित ब्याज मिलता है और इन्हें तय अवधि के बाद ही निकाला जा सकता है।​
    • अन्य जमाएँ: इसमें प्रमाणपत्र जमा (Certificates of Deposit) और विशेष जमाएँ शामिल हैं।
    • ये सभी प्रकार की जमाएँ बैंक को जनता से धन एकत्र करने का माध्यम प्रदान करती हैं, जिसे बैंक ऋण देकर लाभ कमाते हैं।​
  • क्यों हैं जमाएँ मुख्य देनदारी?
    • बैंकों का मूल कार्य वित्तीय मध्यस्थता (Financial Intermediation) है, जहाँ वे जनता से सस्ते धन पर जमाएँ स्वीकार करते हैं
    • महँगे ब्याज पर ऋण देते हैं। जमाएँ बैंक की देनदारी इसलिए हैं क्योंकि:
    • जमाकर्ता को कभी भी अपना धन वापस पाने का अधिकार है।
    • बैंक इन जमाओं पर ब्याज चुकाने के लिए बाध्य होते हैं।
    • यदि बैंक जमाएँ न चुका पाए, तो यह दिवालियापन का कारण बन सकता है।​
  • अन्य देनदारियाँ
    • जमाओं के अलावा बैंकों की अन्य देनदारियाँ हैं:
    • अन्य बैंकों में जमा।
    • आरबीआई के पास अनिवार्य निधि (CRR)।
    • उधार ली गई पूँजी या बॉन्ड।
      हालाँकि, ये जमाओं की तुलना में बहुत कम होती हैं।​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • जमाएँ ही बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ हैं, क्योंकि ये धन सृजन (Money Creation) का आधार बनती हैं।
    • जब बैंक ऋण देते हैं, तो नई जमाएँ बनती हैं, जो अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति बढ़ाती हैं।
    • आरबीआई जैसी केंद्रीय बैंक इन देनदारियों को नियंत्रित करती है।​

40. आरक्षित नगदी निधि अनुपात मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए एक ....... साधन है। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली)]

I. गुणात्मक

II. परिमाणात्मक

Correct Answer: (a) केवल II
Solution:
  • CRR का अर्थ और गणना
    • CRR वह प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय दायित्व (NDTL) की कुल जमा का RBI के पास जमा करना होता है
    • जिसका उपयोग ऋण देने या निवेश के लिए नहीं किया जा सकता। वर्तमान में भारत में CRR लगभग 4.50% है
    • हालांकि RBI इसे मौद्रिक नीति समीक्षा में बदलता रहता है। गणना सरल है
    • यदि किसी बैंक की जमा राशि 100 करोड़ रुपये है और CRR 4% है, तो बैंक को 4 करोड़ रुपये RBI के पास रखने पड़ेंगे
    • जिससे ऋण योग्य राशि घटकर 96 करोड़ रह जाती है।​
  • मुद्रा आपूर्ति पर प्रभाव
    • CRR बढ़ाने से बैंकों के पास ऋण के लिए उपलब्ध धन कम हो जाता है
    • जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति (M3 या व्यापक धन आपूर्ति) घटती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
    • इसके विपरीत, CRR घटाने से बैंकों को अधिक धन ऋण देने के लिए उपलब्ध होता है
    • जो आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है लेकिन मुद्रास्फीति बढ़ा सकता है।
    • यह धन गुणक (Money Multiplier) प्रभाव के माध्यम से कार्य करता है
    • जहां 1/CRR गुणक का आधार होता है—CRR जितना अधिक, गुणक उतना कम।
    • उदाहरणस्वरूप, COVID-19 महामारी के दौरान RBI ने CRR घटाकर तरलता बढ़ाई थी।​
  • RBI की मौद्रिक नीति में भूमिका
    • RBI के मात्रात्मक उपकरणों में CRR प्रमुख है, जो SLR (Statutory Liquidity Ratio), Repo Rate आदि के साथ मिलकर कार्य करता है।
    • CRR पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जबकि SLR में सरकारी प्रतिभूतियों पर ब्याज मिलता है
    • इसलिए CRR अधिक प्रत्यक्ष रूप से तरलता सोखता है। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना
    • निकासी मांगों को पूरा करना और समग्र अर्थव्यवस्था में धन प्रवाह को विनियमित करना है।