मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-III)

Total Questions: 41

11. भारत में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में एक प्रमुख प्रवृत्ति क्या है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण
Solution:
  • भारत में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में एक प्रमुख प्रवृत्ति मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण है
  • क्योंकि यह उन लोगों को ऋण प्रदान करती है, जो समाज के वंचित और कमजोर वर्ग से हैं
  • जिसके पास बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध नहीं है।
  • मोबाइल बैंकिंग का महत्व
    • मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का अपनाना माइक्रोफाइनेंस ग्राहकों के लिए पहुंच और सुविधा को काफी बढ़ा रहा है
    • खासकर जहां पारंपरिक बैंकिंग बुनियादी ढांचा सीमित है। यह संचालन को सुव्यवस्थित करता है
    • लागत घटाता है और लेनदेन की दक्षता सुधारता है।
    • मोबाइल वॉलेट, SMS बैंकिंग और ऐप्स के माध्यम से जमा, निकासी तथा धन हस्तांतरण आसान हो गया है।​
  • वित्तीय समावेशन पर प्रभाव
    • यह प्रवृत्ति वंचित आबादी, विशेष रूप से महिलाओं और छोटे उद्यमियों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ रही है
    • जिससे आय सृजन गतिविधियां बढ़ रही हैं। सरकार की पहलें और नियामक समर्थन ने इसे और गति दी है।
    • FY2024 तक 140 मिलियन से अधिक परिवारों को सेवाएं मिल रही हैं।​
  • अन्य उभरती प्रवृत्तियां
    • डिजिटल तकनीक का विस्तार: मशीन लर्निंग का उपयोग डिफॉल्ट जोखिम का पूर्वानुमान करने में हो रहा है, जिससे ऋण वितरण सुरक्षित बन रहा है।​
    • क्रेडिट ब्यूरो की भूमिका: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्रेडिट ब्यूरो एकीकरण मजबूत हो रहा है, जो उधारकर्ताओं की योग्यता जांचता है।​
    • SHG मॉडल की मजबूती: 17.8 करोड़ परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं, जो माइक्रोफाइनेंस का आधार बने हुए हैं।​
  • चुनौतियां और भविष्य
    • हालांकि, ऋण चुकौती में देरी (PAR) बढ़ रही है, जो 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
    • अधिकतम ऋण सीमा को 2 लाख रुपये करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं।
    • आने वाले समय में डिजिटल化 और विनियमन से क्षेत्र और मजबूत होगा।​

12. व्यावसायिक बैंकों की आय का मुख्य स्रोत क्या है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) ऋण और अग्रिम राशि पर अर्जित ब्याज
Solution:
  • व्यावसायिक बैंक एक वित्तीय संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों से जमा स्वीकार करना और ऋण और अन्य सुविधाएं प्रदान करना है।
  • ध्यातव्य है कि यह संस्था विभिन्न प्रकार के शुल्कों और ऋणों से ब्याज अर्जित कर लाभ कमाते हैं।
  • मुख्य स्रोत: ऋण पर ब्याज
    •  वे उद्योगों, व्यवसायों और व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के ऋण प्रदान करते हैं
    • जैसे कार्यशील पूंजी ऋण, आवास ऋण या वाहन ऋण।
    • इन ऋणों पर लगने वाला ब्याज बैंक की कुल आय का सबसे बड़ा हिस्सा (आमतौर पर 60-70%) बनाता है।
    • जमा पर भुगतान किया जाने वाला ब्याज दर से अधिक दर पर ऋण दिया जाता है, जो बैंकों को लाभ मार्जिन प्रदान करता है।​
  • अन्य आय स्रोत
    • बैंकों की आय केवल ऋण तक सीमित नहीं है। वे सरकारी प्रतिभूतियों, बॉन्ड्स और अन्य सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं
    • जिससे ब्याज और लाभांश प्राप्त होता है।
    • इसके अलावा, लोन सिंडिकेशन, चेक कलेक्शन, ड्राफ्ट जारी करना जैसी सेवाओं पर शुल्क और कमीशन भी महत्वपूर्ण आय देते हैं।
    • विदेशी मुद्रा लेनदेन, बीमा उत्पाद बेचना और म्यूचुअल फंड वितरण से भी कमीशन कमाई होती है।​
  • आय प्रबंधन का महत्व
    • बैंकों को ब्याज दरों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना पड़ता है
    • जोखिम कम रहे और लाभ सुनिश्चित हो। नियामक जैसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकों की निगरानी करते हैं।
    • ये विविध स्रोत बैंकों को स्थिरता प्रदान करते हैं, लेकिन ऋण ब्याज ही मूल आधार बना रहता है।​

13. एक व्यावसायिक बैंक का प्राथमिक कार्य क्या है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) ऋण देना और जमा स्वीकार करना
Solution:
  • एक व्यावसायिक बैंक का प्राथमिक कार्य है-ऋण देना और जमा स्वीकार करना।
  • प्राथमिक कार्य
    • जैसे चालू खाता (करंट अकाउंट), बचत खाता (सेविंग्स अकाउंट) और सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट)।
    • इन जमाओं पर बैंक ब्याज देता है या शुल्क वसूलता है
    • प्राप्त धन का अधिकांश भाग सुरक्षित आरक्षी रखने के बाद ऋण के रूप में वितरित करता है।
    • दूसरा प्रमुख प्राथमिक कार्य ऋण देना है, जिसमें नकद साख (कैश क्रेडिट), ओवरड्राफ्ट, मांग ऋण और बिल डिस्काउंटिंग शामिल हैं
    • जो उत्पादक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।​
  • द्वितीयक कार्य
    • बैंकों के गौण कार्यों में साख निर्माण (क्रेडिट क्रिएशन) प्रमुख है
    • जहाँ जमा का बहु गुणा ऋण देकर अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति बढ़ाई जाती है।
    • अन्य कार्यों में धन हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ फंड्स), चेक कलेक्शन, एजेंसी सेवाएँ जैसे शेयर खरीद-बिक्री, विदेशी मुद्रा विनिमय और लॉकर सुविधाएँ शामिल हैं।
    • ये कार्य ग्राहकों को सुविधा प्रदान करते हुए बैंक को अतिरिक्त आय देते हैं।​​
  • सामान्य उपयोगिता सेवाएँ
    • व्यावसायिक बैंक यात्रा चेक जारी करना, उपभोक्ता ऋण, शैक्षिक ऋण और साख पत्र (लेटर ऑफ क्रेडिट) जैसी सेवाएँ भी देते हैं।
    • ये सेवाएँ व्यापार और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
    • भारत में एसबीआई, एचडीएफसी जैसे बैंक इन कार्यों को निष्पादित करते हैं।​
  • आर्थिक महत्व
    • ये कार्य अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करते हैं, मुद्रास्फीति नियंत्रित रखते हैं
    • विकास को प्रोत्साहित करते हैं। प्राथमिक कार्यों से बैंक लाभ कमाते हैं, जबकि द्वितीयक कार्य विश्वास बढ़ाते हैं।​

14. भारत में कौन-सी नियामक संस्था सूक्ष्म वित्त संस्थानों (Micro Finance Institutions) की देखरेख और विनियमन के लिए जिम्मेदार है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
Solution:
  • सूक्ष्म वित्त संस्था (एमएफआई) उन कंपनियों को कहा जाता है
  • जो निम्न आय वर्ग के लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने हेतु सस्ती ब्याज दर पर कर कर्ज मुहैया कराते हैं।
  • ध्यातव्य है कि भारतीय रिजर्व बैंक इन संस्थानों की देख-रेख और विनियमन करती है।
  • RBI की भूमिका
    • RBI देश का केंद्रीय बैंक होने के नाते सभी वित्तीय संस्थानों पर नियंत्रण रखता है, जिसमें MFIs भी शामिल हैं।
    • यह NBFC-MFIs को पंजीकृत करने, उनके संचालन की निगरानी करने और ग्राहक संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
    • उदाहरणस्वरूप, RBI ब्याज दरों, ऋण सीमाओं और पारदर्शिता पर सख्त नियम लागू करता है ताकि गरीब उधारकर्ताओं का शोषण न हो।​
  • प्रमुख दिशानिर्देश
    • पंजीकरण आवश्यकता: MFIs को NBFC-MFI के रूप में RBI से पंजीकरण प्राप्त करना पड़ता है यदि वे बड़े पैमाने पर संचालित होते हैं।
    • ऋण सीमाएँ: प्रति उधारकर्ता को अधिकतम ₹3 लाख तक का ऋण, न्यूनतम 24 महीने की अवधि और ब्याज दर पर कैप (कम से कम 2 गुना आधार दर)।
    • 2022 के नियमों में इन प्रतिबंधों को सरल बनाया गया।​
    • ग्राहक संरक्षण: जबरन वसूली पर रोक, पारदर्शी ब्याज गणना और क्रेडिट सूचना ब्यूरो से जाँच अनिवार्य।
    • RBI एक समर्पित विभाग के माध्यम से नियमित ऑडिट करता है।​
  • अन्य संस्थाओं की भूमिका
    • नाबार्ड (NABARD) MFIs को रिफाइनेंस प्रदान करता है और SHG-BLP (Self Help Group-Bank Linkage Programme) के तहत सहायता देता है
    • लेकिन प्रत्यक्ष विनियमन RBI का है। सा-धन (Sa-Dhan) जैसे स्वैच्छिक संघ उद्योग मानदंड स्थापित करते हैं।
    • वित्त मंत्रालय नीतिगत समर्थन देता है, पर नियामक RBI ही रहता है।​
  • हालिया विकास
    • 2022 में RBI ने सूक्ष्मवित्त ऋणों के लिए एकीकृत नियामक ढांचा जारी किया, जो 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी हुआ।
    • इसमें मूल्य निर्धारण नीति, डिजिटल पारदर्शिता और रेकलेस लेंडिंग पर रोक शामिल है।
    • 2025 तक, MFIs का ऋण पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ा है, लेकिन RBI ने पारदर्शिता बढ़ाने के कदम उठाए।​

15. बैंकिंग में 'ऋणाधार' (Collateral) शब्द का अर्थ क्या है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में गिरवी रखी गई संपत्ति
Solution:
  • बैंकिंग में ऋणाधार (Collateral) शब्द का अर्थ है-'ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में गिरवी रखी गई संपत्ति'।
  • ऋणाधार का अर्थ और परिभाषा
    • ऋणाधार वह संपत्ति होती है जो उधारकर्ता ऋण प्राप्त करने के लिए गिरवी रखता है, जैसे घर, जमीन, वाहन, सोना या शेयर।
    • यह सिक्योर्ड लोन (secured loan) का आधार होता है, जहां डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक को संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिलता है।
    • अनसिक्योर्ड लोन के विपरीत, जहां कोई संपार्श्विक नहीं होता, यह लेंडर के जोखिम को काफी कम करता है।​
  • प्रकार
    • ऋणाधार के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
    • रियल एस्टेट: घर, प्लॉट या व्यावसायिक संपत्ति, जो होम लोन या मॉर्गेज में उपयोग होती है।​
    • मोबाइल संपत्ति: कार, बाइक या मशीनरी, जैसे वाहन लोन में।​
    • वित्तीय संपत्ति: शेयर, म्यूचुअल फंड, FD या बीमा पॉलिसी।​
    • सोना या आभूषण: गोल्ड लोन में आमतौर पर उपयोग।​
    • अन्य: चालान (इनवॉइस) या स्टॉक, विशेषकर व्यवसायिक लोन में।​
  • महत्व और लाभ
    • ऋणाधार लेंडर के लिए जोखिम प्रबंधन का साधन है
    • जो कम ब्याज दरें, बड़ी ऋण राशि और लंबी चुकौती अवधि प्रदान करने में मदद करता है।
    • उधारकर्ता को यह बेहतर शर्तें मिलती हैं, लेकिन डिफॉल्ट पर संपत्ति खोने का खतरा रहता है।
    • भारत में RBI के नियमों के तहत, अधिकांश लोन (जैसे होम लोन, कार लोन) में ऋणाधार अनिवार्य होता है।​
  • कार्यप्रणाली
    • उधारकर्ता ऋण आवेदन के साथ संपत्ति गिरवी रखता है और उसका मूल्यांकन (valuation) कराया जाता है।
    • लोन राशि संपत्ति मूल्य का 70-90% तक होती है (Loan-to-Value ratio)।
    • EMI चुकाने पर गिरवी समाप्त हो जाती है; चूक पर नोटिस के बाद नीलामी।​
  • जोखिम और सावधानियां
    • उधारकर्ता के लिए मुख्य जोखिम संपत्ति जब्ती है
    • जबकि लेंडर बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है।
    • हमेशा कानूनी दस्तावेज जांचें और LTV अनुपात समझें।​

16. निम्नलिखित में से कौन-सी सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली एक सामान्य वित्तीय सेवा है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) उद्यमशीलता गतिविधियों के लिए कम आय वाले व्यक्तियों को छोटे ऋण
Solution:
  • भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थान उन कंपनियों को कहा जाता है, जो कम आय वाले लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
  • अर्थात उद्यमशीलता गतिविधियों के लिए कम आय वाले व्यक्तियों को छोटे ऋण देना है। गौरतलब है इन संस्थाओं की देखरेख भारतीय रिजर्व बैंक करता है।
  • मुख्य सेवाएं
    • सूक्ष्म वित्त संस्थान मुख्य रूप से निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करते हैं:
    • सूक्ष्म ऋण: ये छोटे ऋण (आमतौर पर 1 लाख रुपये से कम) होते हैं
    • जो ग्रामीण महिलाओं, छोटे व्यवसायियों या स्वरोजगारियों को बिना संपार्श्विक के दिए जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, ये ऋण सब्जी बेचने, पशुपालन या छोटे दुकान शुरू करने के लिए उपयोग होते हैं।
    • भारत में SKS माइक्रोफाइनेंस, बंधन बैंक जैसी संस्थाएं इन्हें प्रमुखता से चलाती हैं।​
    • सूक्ष्म बचत: गरीब परिवार बचत खाते खोल सकते हैं, जहां छोटी-छोटी रकम जमा की जा सकती है।
    • इससे वित्तीय अनुशासन विकसित होता है और आपातकालीन जरूरतों के लिए फंड तैयार रहता है।​
    • सूक्ष्म बीमा: स्वास्थ्य, फसल या जीवन बीमा के सस्ते उत्पाद
    • जो निम्न आय वालों की जोखिम सुरक्षा करते हैं। ये पारंपरिक बीमा कंपनियों से सस्ते और आसान होते हैं।​
  • कार्यप्रणाली
    • MFIs अक्सर स्व-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से काम करते हैं
    • जहां 10-20 महिलाएं समूह बनाकर सामूहिक रूप से ऋण लेती और चुकाती हैं।
    • इससे डिफॉल्ट दर कम रहती है। NABARD जैसी संस्थाएं इन्हें समर्थन देती हैं।
    • ये सेवाएं वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती हैं, क्योंकि पारंपरिक बैंक गरीबों को ऋण नहीं देते।​
  • लाभ और चुनौतियां
    • लाभ: गरीबी कम होती है, महिलाओं का सशक्तिकरण, छोटे व्यवसाय बढ़ते हैं। भारत में लाखों परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।
    • चुनौतियां: ऊंची ब्याज दरें (20-30%), अधिक-ऋण का खतरा, तथा क्षेत्रीय असंतुलन। RBI इन पर नियमन करता है।​

17. किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा का मुख्य कार्य क्या है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) विनिमय को सुगम बनाना
Solution:
  • किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा का प्राथमिक कार्य विनिमय को सुगम बनाना है। इसका गौण कार्य है-मूल्य का संचय, मूल्य का हस्तांतरण आदि।
  • प्राथमिक कार्य
    • मुद्रा के प्राथमिक या मुख्य कार्य तीन हैं, जो अर्थव्यवस्था की आधारभूत जरूरतें पूरी करते हैं:
    • विनिमय का माध्यम: मुद्रा खरीद-बिक्री को आसान बनाती है।
    • वस्तु-विनिमय में 'दोहरे संयोग की समस्या' होती है, जहां विक्रेता और खरीदार दोनों को एक-दूसरे की जरूरत होनी चाहिए
    • लेकिन मुद्रा से कोई भी वस्तु किसी के बदले ली जा सकती है।
    • उदाहरणस्वरूप, किसान अपनी फसल बेचकर मुद्रा प्राप्त करता है और उसी से बीज या उपकरण खरीदता है।​
    • मूल्य का मापन: सभी वस्तुओं-सेवाओं का मूल्य मुद्रा में व्यक्त किया जाता है
    • जैसे एक सेब का मूल्य 10 रुपये। इससे तुलना आसान हो जाती है और कीमतें निर्धारित होती हैं।​
    • क्रय शक्ति का भंडारण: मुद्रा बचत के रूप में रखी जा सकती है
    • जो मूल्य स्थिरता के कारण भविष्य में उपयोगी रहती है। यह संपत्ति संचय को बढ़ावा देती है।​
  • गौण कार्य
    • ये कार्य अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाते हैं:
    • स्थगित भुगतान का मानक: ऋण, वेतन या किस्तों के लिए मुद्रा आधार प्रदान करती है, क्योंकि इसकी स्वीकार्यता सर्वत्र है।
    • सामाजिक आय का वितरण: मजदूरी, लाभांश आदि के माध्यम से धन वितरित होता है।
    • उत्पादकता समता: उत्पादक संसाधनों को उनकी सीमांत उत्पादकता के आधार पर आवंटित करते हैं।​
  • आकस्मिक कार्य
    • मुद्रा के अतिरिक्त कार्य अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाते हैं:
    • पूंजी निर्माण में सहायक, साख सृजन का आधार, तथा मूल्य स्थिरीकरण में भूमिका।
    • आधुनिक अर्थव्यवस्था में डिजिटल मुद्रा (जैसे UPI) ने इन कार्यों को और तेज किया है।​
    • वस्तु-विनिमय की कमियां जैसे अभावग्रस्तता, विभाज्यता की समस्या आदि मुद्रा ने दूर
    • जिससे बाजार अर्थव्यवस्था विकसित हुई। भारत जैसे देश में RBI मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित करता है।​

18. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFI) को सबसे अच्छी तरह परिभाषित करता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सूक्ष्म वित्त संगठन (MFIs) गैर-लाभकारी संगठन है, जो कम आय वाले व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं।
Solution:
  • सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFIs) एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो कम आय वाले व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं
  • अर्थात MFI उन कंपनियों को कहा जाता है जो निम्न आर्य वर्ग के लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध कराते हैं।
  • MFI की सर्वोत्तम परिभाषा
    • निम्नलिखित में से सबसे सटीक कथन है: MFI गैर-लाभकारी संगठन हैं
    • जो निम्न आय वाले व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं।
    • यह कथन MFI के मूल उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है
    • क्योंकि ये संस्थान गरीबों को बिना गारंटी के छोटे ऋण देकर उनके व्यवसाय शुरू करने या आय बढ़ाने में मदद करते हैं।
    • हालांकि सभी MFI गैर-लाभकारी नहीं होते (कुछ NBFC-MFI लाभकारी हैं), लेकिन प्रश्नों में यह विकल्प अक्सर सबसे उपयुक्त माना जाता है।​
  • MFI की विशेषताएं
    • ये संस्थान सूक्ष्म ऋण (भारत में 1.5 लाख रुपये तक), सूक्ष्म बचत, सूक्ष्म बीमा और कभी-कभी परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं।​
    • ग्राहक मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाएं, छोटे किसान और स्वरोजगार वाले होते हैं, जिन्हें पारंपरिक बैंक ऋण नहीं देते।​
    • भारत में RBI द्वारा विनियमित, 2011 के मालेगाम समिति की सिफारिशों पर NBFC-MFI श्रेणी बनी।​
  • कार्यप्रणाली
    • MFI दो मुख्य मॉडलों पर काम करते हैं: समूह-आधारित मॉडल (जैसे SHG-BLP, जहां 10-20 महिलाएं समूह बनाकर ऋण लेती हैं
    • व्यक्तिगत ऋण मॉडल। ब्याज दरें 18-24% तक होती हैं, लेकिन ये सस्ती मानी जाती हैं
    • क्योंकि कोई कोलैटरल नहीं चाहिए। उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन है।​
  • अन्य कथनों की तुलना
  • भारत में महत्व
    • भारत में 200 मिलियन से अधिक लोग MFI से जुड़े हैं, जो PMJDY और NRLM जैसी योजनाओं से जुड़े हैं।
    • ये संस्थान SKS Microfinance (अब Bharat Financial) या Bandhan Bank जैसे उदाहरण हैं।
    • चुनौतियां: उच्च ब्याज, अधिक-ऋण और AP 2010 संकट। फिर भी, ये वित्तीय समावेशन के प्रमुख साधन हैं।​

19. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों का एक प्रमुख उद्देश्य है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) वित्तीय समायोजन को बढ़ावा देना और निर्धनता निवारण
Solution:
  • भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFI) एक गैर-लाभकारी संगठन है
  • जिसका उद्देश्य वित्तीय समायोजन को बढ़ावा देना और निर्धनता का निवारण करना है।
  • मुख्य उद्देश्य
    • सूक्ष्म वित्त संस्थानों का प्राथमिक लक्ष्य निम्न आय वालों को छोटे ऋण (माइक्रोक्रेडिट), बचत, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराना है
    • वे स्वरोजगार शुरू कर सकें या अपने छोटे व्यवसायों को मजबूत बना सकें।
    • ये संस्थान ग्रामीण और शहरी गरीबों, खासकर महिलाओं को लक्षित करते हैं
    • जहां औपचारिक बैंकिंग की पहुंच सीमित होती है।
    • इससे आर्थिक सशक्तिकरण होता है और सामाजिक विकास को गति मिलती है।​
  • वित्तीय समावेशन की भूमिका
    • MFIs वित्तीय समावेशन को सुनिश्चित करते हैं
    • अर्थात् समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना।
    • वे बिना गारंटी के समूह-आधारित ऋण देते हैं
    • जो जोखिम कम करता है और पुनर्भुगतान दर बढ़ाता है।
    • भारत में NABARD और SIDBI जैसे संस्थान MFIs को पुनर्वित्त प्रदान कर इस उद्देश्य को मजबूत बनाते हैं।​
  • लाभ और प्रभाव
    • गरीबी में कमी: छोटे ऋण से परिवारों की आय बढ़ती है और रोजगार सृजन होता है।
    • महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को ऋण देकर उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता मिलती है।
    • उद्यमिता प्रोत्साहन: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से जमीनी स्तर पर व्यवसाय विकसित होते हैं।
    • ये प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं
    • बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण या शेयरधारक लाभ से अलग, सामाजिक कल्याण पर जोर देते हैं।​
  • चुनौतियां और नियमन
    • हालांकि उद्देश्य नेक है, पर उच्च ब्याज दरें और अतिऋणग्रस्तता जैसी समस्याएं रही हैं
    • जिन्हें RBI के नियमन से संबोधित किया जा रहा है।
    • SIDBI जैसी संस्थाएं MFIs को समर्थन देकर स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।
    • कुल मिलाकर, MFIs भारत के वित्तीय समावेशन अभियान का अभिन्न अंग हैं।​

20. मुद्रा की छपाई के माध्यम से केंद्रीय बैंक द्वारा जुटाए गए राजस्व को ....... कहा जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) टंकण प्रलाभ
Solution:
  • मुद्रा की छपाई के माध्यम से केंद्रीय बैंक द्वारा जुटाए गए राजस्व को टंकण प्रलाभ (Seigniorage) कहा जाता है।
  • टंकण प्रलाभ सरकार के लिए राजस्व के रूप में गिना जाता है, जब वह जो पैसा बनाती है
  • उसका मूल्य उसके उत्पादन की लागत से अधिक होता है। यह मुद्रा के अंकित मूल्य और इसे बनाने की लागत के बीच का अंतर है।
  • सीन्योरिज की परिभाषा
    • सीन्योरिज वह लाभ है जो केंद्रीय बैंक को मुद्रा नोटों या सिक्कों के अंकित मूल्य और उनकी उत्पादन लागत के बीच के अंतर से प्राप्त होता है
    • उदाहरणस्वरूप, यदि एक ₹100 के नोट को छापने में केवल ₹1 की लागत आती है
    • तो शेष ₹99 केंद्रीय बैंक का लाभ होता है। यह अवधारणा प्राचीन काल से चली आ रही है
    • जब राजा या सीन्योर (seigneur) धातु के सिक्कों पर अपनी मुहर लगाकर मूल्य सृजित करते थे ।​
  • केंद्रीय बैंक की भूमिका
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे केंद्रीय बैंक ही मुद्रा जारी करने का एकाधिकार रखते हैं
    • । RBI नोट छापता है, लेकिन वास्तविक उत्पादन भारत सरकार के स्वामित्व वाली मुद्रा नोट प्रेस (नासिक, देवास, मैसूर, सालबोनी) में होता है
    • RBI को प्राप्त सीन्योरिज का एक हिस्सा सरकारी खजाने में हस्तांतरित किया जाता है, जो सार्वजनिक व्यय को वित्तपोषित करता है बिना कर बढ़ाए ।​​
  • गणना और प्रकार
    • सीन्योरिज की गणना सूत्र से की जाती है:
    • सीन्योरिज = मुद्रा की आपूर्ति × (अंकित मूल्य - उत्पादन लागत) ।​
    • सिक्का सीन्योरिज: धातु की बाजार कीमत से कम मूल्य पर सिक्के जारी करना।
    • नोट सीन्योरिज: कागज-स्याही की न्यून लागत पर उच्च मूल्य के नोट।
    • मुद्रास्फीति सीन्योरिज: मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने से उत्पन्न अप्रत्यक्ष लाभ, जहाँ मुद्रास्फीति धारकों की क्रय शक्ति घटाती है ।​
  • आर्थिक प्रभाव
    • सीन्योरिज मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में सहायक है, लेकिन अत्यधिक मुद्रा छपाई से हाइपरइन्फ्लेशन हो सकता है
    • RBI न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) के तहत सोना और विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखता है
    • 2020-21 में नोट छपाई पर ₹412 करोड़ से ₹7,965 करोड़ तक खर्च हुआ, जो उत्पादन लागत दर्शाता है ।​​
  • भारत में प्रक्रिया
    • RBI मौद्रिक नीति के माध्यम से मुद्रा प्रबंधन करता है, जिसमें मात्रात्मक समायोजन (QE) भी शामिल है
    • सरकार 1 रुपये के नोट जारी करती है, बाकी RBI । यह राजस्व व्यय जैसे कर्मचारी वेतन, ब्याज भुगतान पर खर्च होता है ।​