मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-III)

Total Questions: 41

21. मुद्रा के आविष्कार से पहले कौन-सी प्रणाली प्रचलित थी ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) वस्तु विनिमय प्रणाली
Solution:
  • वह प्रणाली, जिसमें मुद्रा का उपयोग किए बिना लोग अपनी आवश्यकता की वस्तुओं की पूर्ति वस्तुओं के विनिमय के माध्यम से करते हैं
  • वस्तु विनिमय प्रणाली के नाम से जानी जाती है। यह उस समय प्रचलित थी, जब मुद्रा का प्रचलन प्रारंभ नहीं हुआ था।
  • वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है?
    • वस्तु विनिमय प्रणाली में एक व्यक्ति अपनी आवश्यकता की वस्तु प्राप्त करने के लिए अपनी उपलब्ध वस्तु या सेवा का सीधे आदान-प्रदान करता था।
    • उदाहरणस्वरूप, प्राचीन ग्रामीण समुदायों में एक किसान अपने अनाज के बदले जूते प्राप्त कर सकता था
    • मजदूर अनाज के लिए खेतों में काम करता था। यह व्यवस्था तब प्रभावी थी जब आवश्यकताएँ सीमित और समान होती थीं।​
  • इसकी विशेषताएँ
    • दोहरा संयोग की आवश्यकता: व्यापार तभी संभव था जब दोनों पक्षों की इच्छाएँ मेल खाती हों
    • यानी विक्रेता के पास खरीदार को चाहिए वाली वस्तु हो और खरीदार के पास विक्रेता को चाहिए वाली वस्तु।
    • मूल्य निर्धारण की कठिनाई: वस्तुओं का मूल्य आपसी सहमति पर निर्भर करता था, जो अक्सर विवादास्पद होता था।
    • भंडारण समस्या: सभी वस्तुएँ आसानी से संग्रहित नहीं की जा सकती थीं, जैसे कि पशु या खाद्य सामग्री।​
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • प्राचीन मेसोपोटामिया, फोनीशिया और भारत जैसे क्षेत्रों में यह प्रणाली हजारों वर्षों तक चली।
    • लगभग 6000 ईसा पूर्व से लोग अनाज, पशु, नमक, कौड़ी贝 (सीप) और धातुओं का आदान-प्रदान करते थे।
    • रोमन सैनिकों को कभी-कभी नमक में वेतन मिलता था, जिससे 'सैलरी' शब्द की उत्पत्ति हुई।
    • भारत में वैदिक काल में भी गौ (गाय) जैसी वस्तुएँ मूल्यवान मानी जाती थीं।​
  • कमियाँ जो मुद्रा का आविष्कार कराया
    • विविध आवश्यकताएँ: जैसे-जैसे समाज जटिल हुआ, वस्तुओं की विविधता बढ़ी और दोहरा संयोग दुर्लभ हो गया।
    • विभाज्यता की कमी: सभी वस्तुएँ छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटी नहीं जा सकती थीं।
    • परिवहन और गुणवत्ता: वस्तुओं को ले जाना कठिन और उनकी गुणवत्ता का आकलन मुश्किल था।
    • इन कमियों के कारण लगभग 600 ईसा पूर्व लिडिया (आधुनिक तुर्की) में प्रथम सिक्के (इलेक्ट्रम से बने) विकसित हुए।​
  • मुद्रा से संक्रमण
    • वस्तु विनिमय के बाद 'वस्तु मुद्रा' चरण आया, जहाँ कुछ वस्तुएँ (जैसे सोना, चाँदी, अनाज) सामान्य स्वीकृत माध्यम बनीं।
    • भारत में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से सिक्कों का प्रचलन शुरू हुआ
    • जो चाँदी के 'रूप्यक' से जुड़ा। यह प्रणाली आधुनिक कागजी और डिजिटल मुद्रा तक विकसित हुई।​

22. जब सरकार मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि करना चाहती है, तो वह : [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकारी बॉण्ड खरीदती है
Solution:
  • जब सरकार मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि करना चाहती है, तो वह बाजार से सरकारी बॉण्ड खरीदती है, जिसके कारण बाजार में अधिक धन का प्रवाह होता है।
  • प्रमुख तरीके
    • सरकार या केंद्रीय बैंक खुले बाजार संचालन (Open Market Operations - OMO) के जरिए सरकारी प्रतिभूतियां (Government Securities) खरीदती है।
    • इससे बैंकों और जनता को नकदी मिलती है, जो मुद्रा आपूर्ति बढ़ाती है। उदाहरण के लिए
    • RBI बाजार से बॉन्ड खरीदने पर भुगतान करता है, जिससे बैंकों के आरक्षित निधि में वृद्धि होती है और वे अधिक ऋण दे पाते हैं।​
    • केंद्रीय बैंक द्वारा बैंक दर (Bank Rate) या रेपो दर (Repo Rate) में कमी: इससे बैंकों के लिए उधार सस्ता हो जाता है, जिससे क्रेडिट सृजन बढ़ता है।
    • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) या वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में कमी: बैंकों को कम राशि आरक्षित रखनी पड़ती है
    • जिससे अधिक धन ऋण के रूप में वितरित होता है।​
    • मुद्रा छापना (Quantitative Easing): अत्यधिक मामलों में नई मुद्रा जारी की जाती है, हालांकि यह मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ाती है।​
  • भारत में प्रक्रिया
    • भारत में RBI मौद्रिक नीति समिति (MPC) के माध्यम से निर्णय लेता है।
    • सरकार बजट घाटा पूरा करने के लिए RBI से उधार ले सकती है, जो मुद्रा आपूर्ति बढ़ाता है।
    • वाणिज्यिक बैंक क्रेडिट सृजन से पूर्ति को और बढ़ाते हैं, जहां प्रारंभिक जमा से कई गुना ऋण बनाया जाता है।​
  • प्रभाव और जोखिम
    • मुद्रा आपूर्ति बढ़ने से उपभोग और निवेश बढ़ता है, लेकिन अत्यधिक वृद्धि महंगाई (Inflation) पैदा कर सकती है।
    • RBI M3 (व्यापक मुद्रा आपूर्ति) को नियंत्रित रखता है।
    • उदाहरणस्वरूप, COVID-19 के दौरान RBI ने OMO और दर कटौती से तरलता बढ़ाई।​

23. नाबार्ड (NABARD) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/ से कथन सत्य है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

I. नाबार्ड का गठन शिवरामन समिति की अनुशंसा पर किया गया था।

II. नाबार्ड 1980 में अस्तित्व में आया।

III. इसे 100 करोड़ रु. की प्रारंभिक पूंजी के साथ स्थापित किया गया था।

Correct Answer: (a) केवल I और III
Solution:
  • नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई, 1982 को बी. शिवरामन समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम 1981 को लागू करने के लिए की गई थी।
  • इसकी स्थापना 100 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ की गई। अतः विकल्प (a) सही उत्तर है।
  • स्थापना और इतिहास
    • नाबार्ड की स्थापना शिवरामन समिति की सिफारिशों पर 12 जुलाई 1982 को की गई थी, न कि 1980 में।
    • इसकी प्रारंभिक पूंजी 100 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 5000 करोड़ रुपये किया गया
    • जो भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित था।
    • शिवरामन समिति का गठन 1979 में कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए संस्थागत ऋण व्यवस्था की समीक्षा हेतु किया गया था।​
  • मुख्य उद्देश्य
    • नाबार्ड का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आर्थिक गतिविधियों को ऋण सुविधाएं प्रदान करना है।
    • यह सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और अन्य वित्तीय संस्थानों को पुनर्वित्त (रीफाइनेंसिंग) उपलब्ध कराता है
    • ग्रामीण विकास को गति मिले। इसके अलावा, यह नीति निर्माण, पर्यवेक्षण और क्षमता निर्माण में भी सक्रिय है।​
  • कार्य और जिम्मेदारियां
    • वित्तीय सहायता: किसानों, स्वयं सहायता समूहों महिला उद्यमियों, ग्रामीण कारीगरों और मार्जिनलाइज्ड समुदायों को ऋण, अनुदान और पुनर्वित्त प्रदान करता है।​
    • विकासात्मक पहल: ग्रामीण बुनियादी ढांचे (जैसे गोदाम, सिंचाई), पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देता है।​
    • नियामक भूमिका: सहकारी बैंकों और आरआरबी की निगरानी करता है, उन्हें कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) अपनाने में मदद करता है।​
    • साझेदारियां: सरकार, एनजीओ, वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर योजनाएं लागू करता है, जैसे ग्रामीण उद्योगों के लिए विपणन मंच।​
  • कथनों की सत्यता (सामान्य प्रश्नों के आधार पर)
    • प्रश्न में विशिष्ट कथन नहीं दिए गए हैं, लेकिन सामान्यतः पूछे जाने वाले कथनों पर विचार करें:
    • कथन I: नाबार्ड का गठन शिवरामन समिति की सिफारिश पर हुआ - सत्य।​
    • कथन II: नाबार्ड 1980 में अस्तित्व में आया - असत्य (यह 1982 में आया)।​
    • कथन III: स्थापना 100 करोड़ रुपये की पूंजी से हुई - सत्य।​
    • इस प्रकार, केवल I और III सत्य हैं।​
  • वर्तमान भूमिका (2026 तक)
    • नाबार्ड ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय समावेशन, सतत विकास और डिजिटल पहलों पर जोर देता है।
    • यह राज्य सरकारों के साथ समन्वय में कृषि ऋण और नवाचार कार्यक्रम चलाता है।​

24. नकदी पाश की परिघटना मुद्रा की मांग के निम्नलिखित में से किस पहलू पर आधारित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) लेन-देन
Solution:
  • प्रावैगिक दशाओं में मुद्रा की मांग से आशय उस नकद से है, जो व्यक्ति अपने पास रखना चाहता है।
  • कीन्स के अनुसार, कोई व्यक्ति अपने पास मुद्रा को तरल रूप में निम्न तीन उद्देश्यों के लिए रखता है
  • लेन-देन के उद्देश्य हेतु, (2) सतर्कता उद्देश्य हेतु, (3) सट्टा उद्देश्य हेतु।
  • नकदी पाश की परिघटना मुद्रा की मांग के कल्पित (Speculative) पर आधारित होता है।
  • मुद्रा की मांग उसकी क्रय शक्ति के कारण होती है, क्योंकि उसका स्वयं का कोई मूल्य नहीं होता
  • किंतु उसके द्वारा बाजार में उपलब्ध वस्तुओं को प्राप्त किया जा सकता है
  • मुद्रा की मांग के पहलू
    • मुद्रा की मांग तीन मुख्य पहलुओं पर आधारित होती है:
    • लेनदेन मोटिव (Transaction motive): दैनिक खरीद-फरोख्त के लिए नकदी की जरूरत, जो आय और मूल्य स्तर पर निर्भर करती है।​
    • सावधानी मोटिव (Precautionary motive): अप्रत्याशित खर्चों के लिए नकदी रखना, जो अनिश्चितता से प्रभावित होता है।​
    • सट्टा मोटिव (Speculative motive): ब्याज दरों के बदलाव की भविष्यवाणी कर नकदी या बॉन्ड चुनना। नकदी पाश इसी सट्टा पहलू से उत्पन्न होता है।​
  • सट्टा मांग और नकदी पाश का संबंध
    • सट्टा मांग ब्याज दर के साथ उल्टा संबंध रखती है—ब्याज दरें गिरने पर सट्टा मांग बढ़ती है।
    • जब ब्याज दरें न्यूनतम स्तर (zero lower bound) पर पहुंचती हैं, तो मुद्रा की सट्टा मांग अनंत हो जाती है
    • क्योंकि लोग ब्याज दरों में और गिरावट या स्थिरता की अपेक्षा करते हैं।
    • इस स्थिति में केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने से ब्याज दरें नहीं गिरतीं, क्योंकि अतिरिक्त नकदी केवल संचित हो जाती है।​
  • नकदी पाश के प्रभाव
    • मौद्रिक नीति का अप्रभावी होना: मात्रात्मक शिथिलीकरण (QE) भी अप्रभावी सिद्ध होता है, क्योंकि लोग खर्च या निवेश नहीं करते।​
    • मंदी का लंबा होना: जापान (1990s) और 2008 वैश्विक संकट में यह देखा गया, जहां निम्न ब्याज दरों के बावजूद मांग नहीं बढ़ी।
    • निकास की समस्या: इससे बाहर निकलने के लिए राजकोषीय नीति (सरकारी खर्च) या अपेक्षाओं में बदलाव जरूरी होता है।
  • उदाहरण और ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1930s की महामंदी में अमेरिका और हाल की कोविड-19 मंदी में कई देशों में नकदी पाश के लक्षण दिखे।
    • भारत में भी 2020-21 में निम्न ब्याज दरों के दौरान नकदी संचय बढ़ा।
    • सट्टा मांग के कारण ही यह परिघटना अन्य पहलुओं (जैसे लेनदेन) से अलग है।​

25. 1969 ई. में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दौरान निम्नलिखित में से किस बैंक का राष्ट्रीयकरण नहीं किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एसबीआई
Solution:
  • वर्ष 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का राष्ट्रीयकरण नहीं किया गया था।
  • एसबीआई का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1955 में ही हो चुका था
  • जबकि वर्ष 1969 में यूको बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कुल 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था।
  • राष्ट्रीयकरण की पृष्ठभूमि
    • जिसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को निजी हाथों से हटाकर आर्थिक समावेशन, कृषि और उद्योगों को प्राथमिकता देना था।
    • बैंकिंग कंपनियों अधिग्रहण अधिनियम, 1969 के तहत यह कार्रवाई की गई।
    • इससे पहले 1955 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण हो चुका था, जबकि RBI 1949 से ही पूर्ण रूप से सरकारी था।​
  • 1969 में राष्ट्रीयकृत बैंक
    • निम्नलिखित 14 बैंक 1 अप्रैल 1969 को जमा राशि के आधार पर चयनित होकर राष्ट्रीयकृत हुए:
    • इलाहाबाद बैंक
    • बैंक ऑफ बड़ौदा
    • बैंक ऑफ इंडिया
    • बैंक ऑफ महाराष्ट्र
    • केनरा बैंक
    • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
    • देना बैंक
    • इंडियन ओवरसीज बैंक
    • इंडियन बैंक
    • पंजाब नेशनल बैंक
    • सिंडिकेट बैंक
    • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
    • यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
    • यूनाइटेड कमर्शियल बैंक (यूको बैंक)​
  • राष्ट्रीयकरण होने वाले प्रमुख बैंक
    • प्रश्न के संदर्भ में, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का 1969 में राष्ट्रीयकरण नहीं हुआ
    • क्योंकि इसका राष्ट्रीयकरण 1955 के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम के तहत पहले ही हो चुका था।
    • इसी प्रकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केंद्रीय बैंक होने के नाते वाणिज्यिक बैंकिंग गतिविधियों में संलिप्त नहीं था और पहले से सरकारी था।
    • आंध्रा बैंक और विजया बैंक जैसे कुछ अन्य का राष्ट्रीयकरण बाद में 1980 में हुआ।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इस राष्ट्रीयकरण ने बैंकिंग को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया, जिसमें बैंकों की शाखाओं की संख्या तेजी से बढ़ी।
    • इससे गरीबी हटाओ अभियान को गति मिली, हालांकि कानूनी चुनौतियां भी आईं।
    • कुल मिलाकर, यह भारत की समाजवादी अर्थव्यवस्था की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।​

26. निम्नलिखित में से कौन-सा अवयव उदारीकरण मॉडल के तहत वित्तीय क्षेत्र के सुधारों का हिस्सा नहीं था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) बैंकों पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए आरबीआई (RBI) की भूमिका बढ़ाना
Solution:
  • उदारीकरण मॉडल के तहत वित्तीय क्षेत्र के सुधारों में विदेशी बैंकों में निवेश की सीमा 74% तक
  • भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बिना नई शाखाओं की स्थापना
  • निजी बैंकों को स्थापित करने की अनुमति आदि को शामिल किया गया था।
  • जबकि बैंकों पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए आरबीआई (RBI) की भूमिका बढ़ाना सुधारों का हिस्सा नहीं था।
  • वित्तीय क्षेत्र सुधारों के प्रमुख घटक
    • उदारीकरण के तहत वित्तीय सुधारों में निम्नलिखित मुख्य अवयव शामिल थे:
    • RBI की भूमिका में परिवर्तन: RBI को सख्त नियंत्रक से सलाहकार की भूमिका तक सीमित किया गया
    • जिससे बैंक ब्याज दरें, जमा सीमाएं और ऋण वितरण में स्वतंत्र निर्णय ले सकें।​
    • निजी और विदेशी बैंकों का प्रवेश: भारतीय और विदेशी निजी बैंकों को लाइसेंस दिए गए; विदेशी पूंजी भागीदारी की सीमा 74% तक बढ़ाई गई।​
    • शाखा विस्तार की स्वतंत्रता: कुछ शर्तों के साथ बैंकों को नई शाखाएं खोलने और पुरानी शाखाओं का पुनर्गठन करने की अनुमति मिली।​
    • पूंजी बाजार में विदेशी निवेश: FII (Foreign Institutional Investors), म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड को भारतीय बाजारों में निवेश की छूट दी गई।​
    • ये सुधार 1991 की नई आर्थिक नीति (NEP) का हिस्सा थे, जो IMF और विश्व बैंक की शर्तों पर आधारित थे
    • भुगतान संतुलन संकट को दूर करने के लिए स्थिरीकरण और संरचनात्मक उपायों के रूप में लागू हुए।​
  • असंबद्ध अवयव: रक्षा क्षेत्र में FDI
    • उदारीकरण मॉडल के वित्तीय क्षेत्र सुधारों का हिस्सा रक्षा क्षेत्र में FDI (Foreign Direct Investment) नहीं था।
    • रक्षा एक संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र रहा, जहां 1991 के सुधारों के समय FDI प्रतिबंधित था
    • बाद में भी (2016 तक) इसे उदारीकृत नहीं किया गया।
    • LPG नीति के तहत वित्तीय, औद्योगिक और व्यापार क्षेत्रों पर फोकस रहा, न कि रक्षा पर।​
  • सुधारों का व्यापक प्रभाव
    • ये सुधारों ने वित्तीय समावेशन बढ़ाया, NPAs (Non-Performing Assets) प्रबंधन में सुधार किया
    • बैंकिंग क्षेत्र को वैश्विक मानकों के निकट लाया।
    • हालांकि, RBI के पास खाता धारकों की सुरक्षा हेतु कुछ नियंत्रक शक्तियां बरकरार रहीं।
    • 1990 के दशक से ये बदलाव जारी हैं, जिनमें हालिया वर्षों में डिजिटल बैंकिंग और IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) जैसे कदम भी जुड़े।
    • कुल मिलाकर, वित्तीय उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति दी, लेकिन असमानताओं को भी बढ़ाया।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सा लीड बैंक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) एचडीएफसी बैंक
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में एचडीएफसी बैंक लीड बैंक नहीं है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक लीड बैंक की श्रेणी में आते हैं।
  • लीड बैंक योजना की प्रमुख विशेषताएं
    • लीड बैंक के रूप में चयनित बैंक को निम्नलिखित जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं:
    • जिले के आर्थिक सर्वेक्षण और क्षमता मूल्यांकन करना।
    • ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शाखा विस्तार की योजना बनाना।
    • सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण योजनाओं (जैसे PMJDY, MUDRA) का समन्वय।
    • डेटा संग्रह, निगरानी और रिपोर्टिंग।​
    • योजना के तहत मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (जैसे SBI, PNB, BoB) ही लीड बैंक नियुक्त किए जाते हैं
    • क्योंकि उनके पास ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक शाखा नेटवर्क और संसाधन होते हैं। निजी बैंक या सहकारी बैंक सामान्यतः इस भूमिका में नहीं आते।​
  • कौन-सा लीड बैंक नहीं है?
    • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks - RRBs) लीड बैंक नहीं हैं। RRBs स्वयं लीड बैंक योजना के तहत प्रायोजित संस्थान हैं
    • जिन्हें लीड बैंक द्वारा संचालित/समन्वित किया जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, प्राथमा ग्रामीण बैंक (PNB प्रायोजित) या सरस्वती ग्रामीण बैंक लीड बैंक नहीं बल्कि सहायक संस्थान हैं।
    • इसी प्रकार, निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC, ICICI या सहकारी बैंक (जैसे Saraswat Co-op Bank) भी लीड बैंक योजना का हिस्सा नहीं हैं
    • क्योंकि योजना सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों पर केंद्रित है।​
  • योजना का ऐतिहासिक विकास और प्रभाव
    • उत्पत्ति: 1969 में राष्ट्रीयकरण पूर्व शुरू, 1970 के दशक में 14 प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद विस्तार।
    • सुधार: 2004-05 में सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण (Service Area Approach) समाप्त कर ब्लॉक-स्तरीय समन्वय पर फोकस।
    • उषा थोराट समिति (2010) ने डिजिटलीकरण और निजी बैंकों की भूमिका बढ़ाने की सिफारिश की।​
    • प्रभाव: ग्रामीण क्रेडिट 1969 से 2025 तक 100 गुना बढ़ा, लेकिन चुनौतियां जैसे NPA और डुप्लिकेशन बनी रहीं। वर्तमान में 700+ जिलों में LBS सक्रिय है।​
    • कुल मिलाकर, LBS ने भारत के ग्रामीण बैंकिंग को मजबूत किया
    • लेकिन पूर्ण वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटल और माइक्रोफाइनेंस एकीकरण आवश्यक है।​​

28. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में माइक्रो फाइनेंस वितरण-तंत्र के कई दृष्टिकोणों में से एक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सस्ता सब्सिडी वाला क्रेडिट
Solution:
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं उन कंपनियों को कहा जाता है, जो कि निम्न आय वर्ग के लोगों को अपना व्यवसाय लगाने के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराती हैं।
  • इनमें उधार लेने वालों की अधिकतम संख्या कम आय वर्ग से होती है। भारत में माइक्रोफाइनेंस को दो प्रणाली के माध्यम से संचालित किया जाता है
  • स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज कार्यक्रम (SBLP), (2) माइक्रोफाइनेंस संस्थान (MFID)। इसमें सस्ता सब्सिडी वाला क्रेडिट को शामिल नहीं किया जाता है।
  • मुख्य दृष्टिकोण
    • भारत में माइक्रोफाइनेंस का वितरण मुख्य रूप से तीन संरचित मॉडलों पर आधारित है।
    • स्वयं सहायता समूह (SHG): NABARD के SHG-बैंक लिंकेज कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाओं के समूह बैंक ऋण प्राप्त करते हैं
    • जो सहकर्मी निगरानी पर आधारित होता है।​
    • संयुक्त दायित्व समूह (JLG): NBFC-MFI इन समूहों को सीधे छोटे ऋण देते हैं, जहाँ सदस्य सामूहिक रूप से दायित्व साझा करते हैं।​
    • माइक्रोफाइनेंस संस्थान (MFI): ये NBFC-MFI के रूप में कार्य करते हैं और कम आय वालों को ऋण, बचत व बीमा प्रदान करते हैं।​
    • ये मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हैं, विशेषकर ग्रामीण व असंगठित क्षेत्रों में। RBI के दिशानिर्देश इनकी निगरानी सुनिश्चित करते हैं।​
  • सस्ता रियायती ऋण क्यों बाहर?
    • सस्ता रियायती ऋण (सब्सिडाइज्ड लोन) माइक्रोफाइनेंस के बजाय प्राथमिकता क्षेत्र ऋण या सामान्य गरीबी उन्मूलन योजनाओं का हिस्सा है।
    • यह बैंकों द्वारा कमजोर वर्गों को दिया जाता है, लेकिन SHG/MFI/JLG जैसे समूह-आधारित वितरण पर निर्भर नहीं।​
    • माइक्रोफाइनेंस बाजार का 80% हिस्सा NBFC-MFI से आता है, जो बाजार-आधारित ब्याज पर काम करता है, न कि रियायत पर।​
    • रियायती ऋण व्यापक वित्तीय समावेशन में सहायक हैं, किंतु माइक्रोफाइनेंस के "वितरण-तंत्र" के आधिकारिक दृष्टिकोणों में शामिल नहीं।​
  • नियामक ढांचा
    • RBI NBFC-MFI को विनियमित करता है
    • जिसमें ऋण सीमा (₹3 लाख तक), आय के 50% तक EMI और 75% पोर्टफोलियो माइक्रोफाइनेंस में रखना शामिल है।
    • SHG-BLP दुनिया की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस पहल है, जो 12-14 करोड़ परिवारों को सेवा देती है।​
    • हालिया सुधार: आधार-KYC अनिवार्य, साप्ताहिक क्रेडिट ब्यूरो अपडेट और आवश्यकता-आधारित ऋण मॉडल।​
  • चुनौतियाँ सुधार
    • माइक्रोफाइनेंस में एनपीए, ऋण दोहराव और भौगोलिक सीमाएँ (250 जिलों तक) चुनौतियाँ हैं।
    • सुधार: डेटा-संचालित मूल्यांकन, प्रौद्योगिकी उपयोग और सभी ऋणदाताओं को क्रेडिट ब्यूरो में शामिल करना।

29. सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक से 'लघुवित्त बैंक' का लाइसेंस प्राप्त करने वाली ........ की कंपनी है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 03 दिसंबर, 2023 (III-पाली]

Correct Answer: (d) महाराष्ट्र
Solution:
  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक से 'लघु वित्त बैंक' का लाइसेंस प्राप्त करने वाली महाराष्ट्र की कंपनी है।
  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड ने 23 जनवरी, 2017 से एक लघु वित्त बैंक के रूप में अपना परिचालन शुरू किया।
  • बैंक का इतिहास
    • जिसकी स्थापना भास्कर बाबू रामचंद्रन, गणेश राव और वीएल रामकृष्णन ने की।
    • 2009 में RBI से माइक्रोफाइनेंस लाइसेंस मिलने के बाद इसने ऑपरेशन शुरू किए।
    • जून 2015 में इसका नाम सूर्योदय माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड हो गया
    • उसी साल RBI से स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त हुई।
    • जबकि मार्च 2021 में NSE और BSE पर लिस्टेड हुआ।​
  • RBI लाइसेंस और महत्व
    • RBI ने 2015 में 10 कंपनियों को स्मॉल फाइनेंस बैंक का लाइसेंस दिया
    • जिसमें सूर्योदय महाराष्ट्र की एकमात्र कंपनी थी।
    • ये बैंक असंगठित क्षेत्र, छोटे किसानों, MSME और लघु उद्योगों को ऋण व बचत सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से बने हैं।
    • सूर्योदय ने माइक्रोफाइनेंस से प्रारंभ कर अब व्यापक बैंकिंग सेवाएं दे रहा है।​​
  • सेवाएं और उत्पाद
    • बैंक विभिन्न सेवाएं प्रदान करता है:
    • डिपॉजिट और अकाउंट्स: सेविंग्स अकाउंट, करेंट अकाउंट, सैलरी अकाउंट, टर्म डिपॉजिट्स, डेबिट कार्ड।
    • लोन: माइक्रोफाइनेंस लोन, होम लोन, बिजनेस लोन, पर्सनल लोन, MSME लोन, टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल लोन।
    • अन्य: NRI बैंकिंग, निवेश और बीमा उत्पाद।​
    • मार्च 2020 तक बैंक के पास 477 ब्रांच, 1.46 मिलियन ग्राहक और 37,108 मिलियन का ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो था।​

30. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 03 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

I. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) की स्थापना 1977 ई. में हुई थी।

II. भारत सरकार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) की शेयर पूंजी में 50% का योगदान करती है।

III. नरसिम्हन समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के स्थापना की अनुशंसा की।

Correct Answer: (a) केवल II और III
Solution:
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) की स्थापना 26 सितंबर, 1975 को प्रख्यापित अध्यादेश और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत अक्टूबर, 1975 में की गई थी।
  • इसमें भारत सरकार का स्वामित्व 50% है, जबकि 35% स्वामित्व राष्ट्रीयकृत बैंक और 15% राज्य सरकार का है।
  • इंदिरा गांधी के शासनकाल के दौरान ग्रामीण ऋण पर नरसिम्हन समिति की सिफारिशों के पश्चात 2 अक्टूबर, 1975 को पांच क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गई।
  • स्वामित्व संरचना
    • भारत सरकार आरआरबी की शेयर पूंजी का 50% योगदान करती है
    • जबकि संबंधित राज्य सरकार 15% और प्रायोजक बैंक (जैसे एसबीआई या अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक) 35% हिस्सेदारी रखते हैं।
    • यह संरचना आरआरबी को सहकारी और वाणिज्यिक बैंक की विशेषताओं का मिश्रण बनाती है।
    • आरआरबी 100% केंद्र सरकार के स्वामित्व में नहीं हैं, जो एक सामान्य भ्रम है।​
  • उद्देश्य और कार्य
    • आरआरबी का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे एवं सीमांत किसानों, कारीगरों, कृषि मजदूरों और छोटे उद्यमियों को ऋण एवं बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
    • ये बैंक अपने कुल ऋण का 75% प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (जैसे कृषि, एमएसएमई) के रूप में प्रदान करने के बाध्य हैं।
    • इसके अलावा, ये ग्रामीण जमाओं के शहरी बहिर्वाह को रोकते हैं
    • क्षेत्रीय असंतुलन कम करते हैं और ग्रामीण रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हैं।​
  • नियामक और पर्यवेक्षण
    • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) आरआरबी का प्राथमिक नियामक है
    • जो उनके बैंकिंग परिचालन की निगरानी करता है।
    • नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) इनको कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करता है।
    • आरआरबी को न्यूनतम 9% पूंजी से जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (सीआरएआर) बनाए रखना आवश्यक है।​
  • महत्वपूर्ण कथनों की सत्यता
    • प्रश्न में विशिष्ट कथन न दिए जाने पर सामान्यतः देखें तो: (1) आरआरबी की स्थापना 1975 में हुई (सत्य, 1977 नहीं)
    • aकेंद्र सरकार 50% शेयर पूंजी देती है (सत्य); (3) नरसिम्हम समिति ने समामेलन की सिफारिश की (सत्य)।
    • ये बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और वित्तीय समावेशन में योगदान देते हैं।