मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-III)

Total Questions: 41

31. निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक 'धन के तरल रूप (नकदी रूप)' का उदाहरण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मुद्रा नोट
Solution:
  • 'मुद्रा नोट' सर्वाधिक 'धन के तरल रूप (नकदी रूप)' का उदाहरण है।
  • तरलता किसी परिसंपत्ति या सुरक्षा को नकदी में बदलने की गारंटी है, जिसमें नकदी ही सभी परिसंपत्तियों में सबसे अधिक तरल है।
  • तरलता की अवधारणा
    • तरलता संपत्ति की वह विशेषता है जो बताती है कि उसे कितनी आसानी से नकद में बदला जा सकता है
    • बिना मूल्य हानि के। मुद्रा नोट इसकी उच्चतम श्रेणी में आते हैं क्योंकि इन्हें कहीं भी
    • किसी भी दुकान या व्यक्ति द्वारा स्वीकार किया जाता है।
    • अन्य रूप जैसे बैंक जमा या बॉन्ड पहले निकासी या बिक्री प्रक्रिया से गुजरते हैं।​
  • धन के प्रमुख रूप
    • धन विभिन्न रूपों में मौजूद होता है, जिनकी तरलता अलग-अलग होती है:
    • मुद्रा नोट और सिक्के: सबसे तरल, केंद्रीय बैंक द्वारा जारी, तत्काल उपयोग योग्य।​
    • बचत खाता जमा: उच्च तरल लेकिन एटीएम या चेक के माध्यम से ही उपलब्ध।​
    • सावधि जमा: कम तरल, निश्चित अवधि के बाद ही निकासी संभव, जुर्माना लग सकता है।​
    • बॉन्ड: सबसे कम तरल, बाजार में बिक्री की आवश्यकता।​
  • अन्य उदाहरणों से तुलना
    • राष्ट्रीय बचत जमा ब्याज देते हैं लेकिन डाकघर या बैंक से प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है।
    • चालू खाता जमा लेन-देन के लिए सुविधाजनक हैं पर नकदी रूपांतरण में देरी हो सकती है।
    • वस्तु मुद्रा जैसे सोना पुरानी प्रणाली है लेकिन आधुनिक संदर्भ में कम प्रासंगिक।​
  • आर्थिक महत्व
    • धन की तरलता अर्थव्यवस्था में लेन-देन को सुगम बनाती है।
    • M1 जैसी संकीर्ण मुद्रा (नोट, सिक्के) सबसे अधिक तरल होती है।
    • भारत में रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोट कानूनी निविदा हैं।​

32. निम्नलिखित में से कौन-सा, केंद्रीय बैंक (Central Bank) का कार्य नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) जनता के लिए बैंकिंग सुविधाएं
Solution:
  • केंद्रीय बैंक किसी देश या क्षेत्र का मौद्रिक प्राधिकरण होता है। केंद्रीय बैंक के कई कार्य होते हैं
  • जिनमें से कुछ प्रमुख कार्य हैं-सरकार के लिए वित्तीय सेवाएं प्रदान करना
  • सरकार और अन्य बैंकरों के लिए बैंक के रूप में काम करना, वाणिज्यिक बैंकों के ऋणदाता के रूप में कार्य करना
  • विदेशी मुद्रा का प्रबंधन करना आदि। जबकि जनता के लिए बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना केंद्रीय बैंक का कार्य नहीं है।
  • केंद्रीय बैंक के प्रमुख कार्य
    • मुद्रा निर्गमन: केंद्रीय बैंक को ही नोट छापने और मुद्रा जारी करने का एकाधिकार प्राप्त होता है, जैसे RBI भारत में करेंसी नोट जारी करता है ।​
    • सरकार का बैंकर: यह सरकार के खातों का प्रबंधन करता है, ऋण प्रदान करता है और वित्तीय सलाह देता है ।​​
    • बैंकों का बैंक: वाणिज्यिक बैंकों के लिए यह बैंकर की भूमिका निभाता है, उनके जमा स्वीकार करता है
    • ऋण देता है और समाशोधन गृह (क्लीयरिंग हाउस) का कार्य करता है ।​
    • मौद्रिक नीति नियंत्रण: मुद्रा आपूर्ति और साख को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें
    • कैश रिज़र्व रेशियो (CRR), स्टेट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) और खुले बाजार संचालन जैसे उपकरणों का उपयोग करता है ।​
    • अंतिम ऋणदाता: वित्तीय संकट में बैंकों को आपातकालीन ऋण प्रदान करता है ताकि बैंकिंग प्रणाली स्थिर रहे ।​
    • विदेशी मुद्रा प्रबंधन: देश के विदेशी मुद्रा भंडार को संभालता है और विनिमय दर स्थिर रखता है ।​
  • जो कार्य केंद्रीय बैंक का नहीं है
    • केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना या व्यावसायिक बैंकिंग नहीं होता। निम्नलिखित कार्य स्पष्ट रूप से केंद्रीय बैंक के दायरे से बाहर हैं:
    • सामान्य जनता को ऋण देना या जमा स्वीकारना: यह वाणिज्यिक बैंकों का कार्य है; केंद्रीय बैंक आम लोगों से सीधे जमा नहीं लेता और न ही उन्हें ऋण देता है ।​
    • सरकारी खर्च पर प्रत्यक्ष नियंत्रण: सरकारी व्यय का नियंत्रण राजकोषीय नीति का हिस्सा है
    • जो वित्त मंत्रालय या सरकार का कार्य होता है, न कि केंद्रीय बैंक का ।​
    • ये कार्य केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अलग रखे जाते हैं, क्योंकि केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति पर केंद्रित रहता है।
  • भारत में RBI के अतिरिक्त कार्य
    • भारतीय संदर्भ में RBI के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना, भुगतान प्रणाली का नियमन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
    • उदाहरणस्वरूप, RBI डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे UPI का पर्यवेक्षण करता है
    • महंगाई नियंत्रण के लिए रेपो रेट तय करता है । विश्व स्तर पर फेडरल रिज़र्व (USA) या ECB (यूरोप) भी इसी प्रकार कार्य करते हैं
    • लेकिन प्रत्येक देश की आवश्यकतानुसार भिन्नताएं होती हैं ।​
    • केंद्रीय बैंक की भूमिका आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण है
    • लेकिन यह व्यावसायिक लाभ या प्रत्यक्ष सरकारी खर्च प्रबंधन से दूर रहता है
    • निष्पक्ष नीतियां बना सके। यदि विशिष्ट विकल्प दिए जाते
    • तो सरकारी खर्च नियंत्रण या जनता को ऋण देना जैसा विकल्प गलत सिद्ध होता ।​​

33. दिए गए कथनों को पढ़ें और 'उच्च शक्तिशाली मुद्रा' के संबंध में सही विकल्प का चयन करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

(i) उच्च शक्तिशाली मुद्रा में बैंक के पास मुद्रा और आरक्षित नकदी होते हैं।

(ii) उच्च शक्तिशाली मुद्रा में बैंकों की डिमांड डिपॉजिट शामिल हैं।

Correct Answer: (a) केवल (i) सत्य है
Solution:
  • उच्च शक्तिशाली मुद्रा वह है, जो जनता के पास करेंसी के रूप में, बैंकों के सुरक्षित कोष के रूप में तथा केंद्रीय बैंक के पास अन्य जमाओं के रूप में सुरक्षित होती है।
  • उच्च शक्तिशाली मुद्रा में बैंक के पास मुद्रा और आरक्षित नकदी होते हैं।
  • जबकि उच्च शक्तिशाली मुद्रा में बैंकों की डिमांड डिपॉजिट को शामिल नहीं किया जाता। अतः केवल विकल्प (a) सत्य है।
  • उच्च शक्तिशाली मुद्रा की परिभाषा
    • इसे H या M0 के रूप में चिह्नित किया जाता है। यह मुद्रा गुणक (Money Multiplier) के माध्यम से व्यापक मुद्रा आपूर्ति (जैसे M1, M3) को प्रभावित करती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि RBI नई मुद्रा जारी करता है
    • तो यह उच्च शक्तिशाली मुद्रा को बढ़ाती है, जिससे बैंकों द्वारा ऋण सृजन की क्षमता बढ़ जाती है ।​
  • घटक और सूत्र
    • उच्च शक्तिशाली मुद्रा के प्रमुख घटक निम्न हैं:
    • जनता के पास मुद्रा (C): परिचालन में नोट, सिक्के और अन्य करेंसी जो जनता के हाथों में होती है।
    • बैंकों के नकद भंडार (R): वाणिज्यिक बैंकों द्वारा RBI के पास रखे गए आरक्षित नकद भंडार, जिसमें कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) शामिल है।
    • कभी-कभी अन्य जमाराशियां (OD): RBI के पास बैंकों या सरकार की अन्य मांग जमाराशियां।
    • सूत्र: H = C + R (या पूर्ण रूप से H = C + CR + OD), जहां CR बैंकों के पास कैश रिज़र्व और OD अन्य जमाराशियां हैं।
    • यह सूत्र दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित यह आधारभूत मुद्रा समस्त मुद्रा आपूर्ति को गुणित करता है ।​
  • सृजन के स्रोत और महत्व
    • यह मुद्रा केंद्रीय बैंक द्वारा सोना/विदेशी मुद्रा खरीदने, सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने या बैंकों को ऋण देने से सृजित होती है। महत्वपूर्ण बिंदु:
    • मुद्रा नियंत्रण: RBI उच्च शक्तिशाली मुद्रा को समायोजित कर मुद्रास्फीति या मंदी को नियंत्रित करता है।
    • मुद्रा गुणक से संबंध: मुद्रा आपूर्ति (M) = उच्च शक्तिशाली मुद्रा (H) × मुद्रा गुणक (m), जहां m = 1 / (CRR + अन्य आरक्षित अनुपात)।
    • M1 से अंतर: M1 = C + डिमांड डिपॉजिट (DD), लेकिन उच्च शक्तिशाली मुद्रा M1 का आधार है, न कि इसके बराबर ।​​
  • सही विकल्प संबंधी सामान्य कथन विश्लेषण
    • प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर निम्न कथन दिए जाते हैं, जिनमें सही विकल्प चुनना होता है:
    • सही कथन: "उच्च शक्तिशाली मुद्रा = जनता के साथ मुद्रा + बैंकों का नकद भंडार" – यह पूर्णतः सटीक है ।​
    • गलत कथन: "यह M1 के बराबर है" – नहीं, M1 इससे व्यापक है क्योंकि इसमें बैंक जमाराशियां शामिल हैं।
    • सही: "केवल केंद्रीय बैंक द्वारा सृजित" – जनता या व्यावसायिक बैंक इसे सृजित नहीं कर सकते।
    • गलत: "सभी मुद्रा आपूर्ति का हिस्सा" – यह आधार है, लेकिन स्वयं M3 आदि नहीं।
    • यदि कथन "जनता के साथ मुद्रा + बैंकों का नकद भंडार" है, तो वह सही विकल्प है। यह RBI की बैलेंस शीट के दायीं ओर (देयताएं) दिखाई देती है
    • आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है ।​
    • उच्च शक्तिशाली मुद्रा मौद्रिक नीति का मूल तत्व है, जो RBI को अर्थव्यवस्था में तरलता नियंत्रित करने की शक्ति देती है।
    • वर्तमान संदर्भ में (जनवरी 2026), RBI इसे डिजिटल करेंसी और मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के साथ समन्वित करता है ।​

34. भारत में एक सूक्ष्म वित्त संस्था, सेवा (SEWA) बैंक की स्थापना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

(i) सेवा (SEWA) बैंक की स्थापना 1974 ई. में हुई थी।

(ii) सेवा (SEWA) बैंक की स्थापना गुजरात में हुई थी। (iii) सेवा (SEWA) बैंक की स्थापना स्वरोजगार महिला संघ द्वारा की गई थी।

(iii) सेवा (SEWA) बैंक की स्थापना स्वरोजगार महिला संघ द्वारा की गई थी।

सही उत्तर का चयन करें।

Correct Answer: (d) (i), (ii) और (iii) सत्य हैं
Solution:
  • सेवा बैंक की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी। इसकी स्थापना 4000 स्वरोजगार महिलाओं ने एक सहकारी बैंक के रूप में गुजरात में की थी।
  • इसका उद्देश्य स्वरोजगार महिलाओं को ऋण देकर उन्हे आत्मनिर्भर बनाना और धन-संकटमोचनों पर उनकी निर्भरता कम करना था।
  • स्वरोजगार वाली महिलाएं बैंक की शेयरधारक भी थीं
  • स्थापना का वर्ष
    • स्व-रोजगार महिला संघ (SEWA) द्वारा इसकी शुरुआत की गई
    • जो अनौपचारिक क्षेत्र की महिला श्रमिकों का ट्रेड यूनियन है।​
  • संस्थापक और पृष्ठभूमि
    • SEWA का गठन 1972 में एला भट्ट द्वारा किया गया था
    • जिन्होंने गरीब महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर दिया।
    • SEWA बैंक सहकारी बैंक के रूप में कार्य करता है
    • जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राज्य सरकारों द्वारा विनियमित है।
    • इसका प्राथमिक उद्देश्य उन महिलाओं को ऋण, बचत, बीमा और पेंशन जैसी सेवाएं देना है, जिन्हें पारंपरिक बैंक संपर्क नहीं कर पाते।​
  • सेवाएं और कार्यप्रणाली
    • बैंक सूक्ष्म ऋण के साथ-साथ वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण प्रदान करता है।
    • यह सहकर्मी-उधार (peer-lending) और समुदाय-निगरानी तकनीकों का उपयोग करता है
    • जो नैतिक खतरे और प्रतिकूल चयन की समस्याओं को कम करती हैं।
    • इसके उत्पाद महिलाओं की जरूरतों के अनुरूप अनुकूलित होते हैं
    • जैसे छोटे व्यवसायों के लिए सस्ता क्रेडिट।​
  • प्रभाव और उपलब्धियां
    • SEWA बैंक ने हजारों महिलाओं को वित्तीय समावेशन प्रदान किया है और विश्व स्तर पर महिला-केंद्रित मॉडल का प्रतीक है।
    • 2024 में इसने 50 वर्ष पूरे किए, जो भारत में माइक्रोफाइनेंस के विकास को दर्शाता है।
    • इसने पुरस्कार जैसे 2019 का बिजनेस टुडे-KPMG बेस्ट बैंक अवॉर्ड भी जीता।​​

35. एलईआरएमएस (LERMS) प्रणाली के तहत, विदेशी मुद्रा आय का कितना प्रतिशत आधिकारिक दर पर परिवर्तित किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 40
Solution:
  • उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली (LERMS) के तहत विदेशी मुद्रा आय का 40 प्रतिशत आधिकारिक दर पर परिवर्तित किया जा सकता है।
  • सी. रंगराजन समिति की सिफारिशों के बाद, बाइनरी विनिमय दर के साथ उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली को मार्च, 1992 में लागू किया गया था।
  • LERMS का परिचय
    • LERMS भारत की 1991 की आर्थिक संकट के बाद उदारीकरण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था
    • जिसकी शुरुआत मार्च 1992 में हुई। तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने 1992-93 के बजट में इसकी घोषणा की।
    • यह प्रणाली निश्चित विनिमय दर व्यवस्था से दोहरी विनिमय दर प्रणाली की ओर संक्रमण का माध्यम बनी
    • जिससे रुपये की आंशिक परिवर्तनीयता सुनिश्चित हुई।​
  • कार्यप्रणाली
    • दोहरी दर व्यवस्था: कुल विदेशी मुद्रा आय का 40% आधिकारिक दर (RBI द्वारा निर्धारित
    • जो सामान्यतः बाजार दर से कम होती थी) पर RBI को बेचना पड़ता था।
    • यह सरकारी आवश्यकताओं (जैसे आयात सब्सिडी या आवश्यक वस्तुओं के आयात) के लिए आरक्षित था।
    • 60% बाजार दर पर: शेष हिस्सा विदेशी मुद्रा डीलरों या बाजार में बाजार दर पर बेचा जा सकता था
    • जो निर्यातकों को अधिक लाभ पहुँचाता था क्योंकि बाजार दर अधिक आकर्षक होती थी।
    • लागू क्षेत्र: मुख्य रूप से निर्यात आय, धन प्रेषण (remittances) और कुछ पूंजी खाता लेनदेन पर लागू।
    • इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और भुगतान संतुलन संकट को कम करने में मदद मिली।​
  • उद्देश्य और प्रभाव
    • LERMS का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की कमी को दूर करना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और बाजार-आधारित विनिमय दर की ओर धीरे-धीरे बढ़ना था।
    • C. रंगराजन समिति की सिफारिशों पर आधारित यह प्रणाली 1993 तक चली
    • जब इसे पूर्ण बाजार-निर्धारित एकल दर प्रणाली में बदल दिया गया।
    • इससे भारत का विदेशी व्यापार बढ़ा और रुपये की वर्तमान खाता परिवर्तनीयता (current account convertibility) की नींव पड़ी।​
  • बाद के बदलाव
    • 1992 के अंत में LERMS को संशोधित किया गया, जिसमें आधिकारिक और बाजार दरों के बीच अंतर कम किया गया।
    • 1993 से रुपये को पूर्ण रूप से बाजार दर पर परिवर्तनीय बना दिया गया।
    • यह भारत की समग्र आर्थिक सुधारों (LPG - Liberalisation, Privatisation, Globalisation) का प्रारंभिक चरण था।​

36. वर्ष 1991 में भारत एक आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जिस समय ....... भंडार इतना कम हो गया था कि वह एक ....... के लिए भी पर्याप्त नहीं था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) विदेशी मुद्रा; पखवाड़े
Solution:
  • वर्ष 1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट के दौर से जूझ रहा था, उस समय विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था
  • वह एक पखवाड़े के लिए भी पर्याप्त नहीं था। यह संकट भुगतान संतुलन में घाटे की वजह से पैदा हुआ था।
  • आयात पर बहुत ज्यादा निर्भरता और सोवियत संघ का विघटन भी इसकी मुख्य वजह थी।
  • संकट के कारण
    • उच्च राजकोषीय घाटा, बढ़ती मुद्रास्फीति और 1980 के दशक में जमा हुए भारी बाहरी ऋण मुख्य कारण थे
    • जिससे भुगतान संतुलन संकट गहरा गया। खाड़ी युद्ध से तेल कीमतें दोगुनी हो गईं
    • निर्यात घटा और विदेशी निवेशक पूंजी निकालने लगे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 1.2 बिलियन डॉलर रह गया
    • केवल 2-3 सप्ताह के आयात के बराबर। चंद्रशेखर सरकार के समय यह स्थिति इतनी खराब हो गई
    • भारत दुनिया का तीसरा सबसे कर्जदार देश बन गया था।​
  • सोने की गिरवी और तत्काल उपाय
    • डिफ़ॉल्ट टालने के लिए सरकार ने 47-67 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड में गिरवी रखा
    • जिससे IMF से 2.2 बिलियन डॉलर का आपात ऋण मिला।
    • जून 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया
    • जिन्होंने IMF की शर्तों पर आर्थिक उदारीकरण शुरू किया।​​
  • प्रमुख सुधार
    • लाइसेंस राज समाप्ति: औद्योगिक लाइसेंसिंग हटाई गई, निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिला।
    • व्यापार उदारीकरण: आयात शुल्क घटाए गए, निर्यात प्रोत्साहन दिया गया।
    • निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र की एकाधिकार समाप्त, विदेशी निवेश खोला गया।​​
    • ये सुधारों ने भारत को 'हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ' से बाहर निकाला और 1990 के दशक में 6-7% की वृद्धि दर हासिल की।​

37. वर्ष 1991 में उदारीकरण के तहत, कई विदेशी मुद्रा विनिमय सुधार शुरू किए गए थे। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन के लिए सही है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) विदेशी मुद्रा के सापेक्ष घरेलू मुद्रा के मूल्य को कम करना
Solution:
  • वर्ष 1991 में उदारीकरण के तहत, कई विदेशी मुद्रा विनियम सुधार किए गए
  • जिसमें निर्यात को बढ़ावा देने और आयात को हतोत्साहित करने के लिए जानबूझकर रुपये का अवमूल्यन किया गया।
  • विदेशी मुद्रा के सापेक्ष घरेलू मुद्रा के मूल्य को कम किया गया। इन उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिली।
  • अवमूल्यन का अर्थ
    • घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्राओं (जैसे अमेरिकी डॉलर) के मुकाबले घरेलू मुद्रा के मूल्य में नियोजित कमी को दर्शाता है।
    • यह बाजार बलों से प्रेरित मूल्यह्रास (depreciation) से भिन्न है, क्योंकि अवमूल्यन एक सक्रिय नीतिगत निर्णय होता है।
    • उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना और व्यापार घाटे को कम करना होता है
    • जैसा कि 1991 के संकट में हुआ जब विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो सप्ताह के आयात के बराबर रह गया था।​
  • 1991 के संदर्भ में घटनाक्रम
    • जुलाई 1991 में, वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली नरसिम्हा राव सरकार ने पहले दिन 9% और दो दिन बाद 11% का कुल लगभग 20% अवमूल्यन किया।
    • इससे रुपया विदेशी मुद्राओं के सापेक्ष कमजोर हुआ, जिसने भारतीय वस्तुओं को वैश्विक बाजारों में सस्ता बनाया।
    • यह IMF से सहायता प्राप्त करने और आर्थिक स्थिरता बहाल करने का हिस्सा था
    • जिसके बाद विनिमय दर को बाजार-निर्धारित प्रणाली (market-determined exchange rate) में बदला गया।
  • अन्य विकल्पों से तुलना
    • सभी विदेशी मुद्राओं के लिए घरेलू मुद्रा को स्थिर करना (pegging) स्थिर विनिमय दर प्रणाली है
    • जो अवमूल्यन के विपरीत स्थिरता पर जोर देती है, जैसे चीन का डॉलर से जुड़ाव।​
    • विदेशी मुद्रा के संबंध में घरेलू मुद्रा का मूल्य बढ़ाना (appreciation) अवमूल्यन का उल्टा है, जो निर्यात को हानि पहुंचाता।​
    • इस प्रकार, सही कथन स्पष्ट रूप से "विदेशी मुद्रा के संबंध में घरेलू मुद्रा का मूल्य कम करना" है।​
  • प्रभाव और महत्व
    • अवमूल्यन ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाया, निर्यात में उछाल लाया (जैसे वस्त्र, चमड़ा), और बाद के सुधारों उदारीकरण, औद्योगिक डीलिसेंसिंग) का आधार तैयार किया।
    • हालांकि, अल्पकाल में आयात महंगे होने से महंगाई बढ़ी, लेकिन दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को वैश्विक एकीकरण की दिशा मिली।
    • कुल मिलाकर, यह LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधारों का प्रारंभिक स्तंभ साबित हुआ।​

38. निम्नलिखित में से कौन सी एक बाहरी एजेंसी है जिसके साथ नाबार्ड (NABARD) ने वर्ष 2005-06 में सूक्ष्म वित्त को बढ़ावा देने के लिए सहयोग किया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट को-ऑपरेशन
Solution:
  • स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड को-ऑपरेशन ने नाबार्ड (NABARD) के साथ वर्ष 2005-06 में सूक्ष्म वित्त को बढ़ावा देने के लिए सहयोग किया।
  • स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड को-ऑपरेशन स्विट्जरलैंड की संघीय सरकार की एक एजेंसी है।
  • सहयोग का विवरण
    •  जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के वित्तीय समावेशन को मजबूत करना था।
    • एसडीसी ने गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और आर्थिक सहयोग पर वैश्विक स्तर पर कई परियोजनाओं का समर्थन किया है।
    • यह सहयोग स्वयं सहायता समूहों (SHG) और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित था।​
  • एसडीसी की भूमिका
    • एसडीसी स्विट्जरलैंड सरकार की विकास एजेंसी है
    • जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास परियोजनाओं को सहायता प्रदान करती है।
    • नाबार्ड के साथ इस साझेदारी से सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिला
    • विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण पहुंच बढ़ाने के लिए।
    • यह बाहरी एजेंसी अन्य भारतीय संस्थाओं से अलग है क्योंकि यह विदेशी सहयोग पर आधारित थी।​

39. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सुविकसित वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण और प्रत्यक्ष योगदान नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कृषि बाजार की स्थापना
Solution:
  • वाणिज्यिक बैंक भारत में बैंकिंग प्रणाली के तहत उन बैंकों को संदर्भित करते हैं, जो वाणिज्यिक आधार पर संचालित होते हैं।
  • इनमें मौद्रिक नीति के सफल क्रियान्वयन की सुविधा, पूंजी निर्माण, बजट जुटाव आदि का महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष योगदान होता है
  • जबकि कृषि बाजार की स्थापना करने में वाणिज्यिक बैंकों का योगदान नहीं होता है।
  • वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख योगदान
    •  ये बैंक केंद्रीय बैंक की मुद्रा नीति को लागू करने में सहायक होते हैं
    • जैसे कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) और स्टेट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) के माध्यम से।
    • बचत का संचलन उनकी प्राथमिक प्रक्रिया है, जो आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है।​
  • प्रत्यक्ष योगदानों का विस्तार
    • मुद्रा नीति का कार्यान्वयन: वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार ब्याज दरों और ऋण वितरण को नियंत्रित करते हैं
    • जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
    • बचत का संचलन: जनता से जमा स्वीकार कर उसे व्यवसायों, उद्योगों और व्यक्तियों को ऋण देकर संसाधनों का कुशल उपयोग करते हैं।
    • पूँजी निर्माण: जमा पर ब्याज देकर बचत को प्रोत्साहित करते हैं और ऋण से निवेश बढ़ाते हैं, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देता है।​
  • कृषि बाजार क्यों नहीं है प्रत्यक्ष योगदान?
    • कृषि बाजार की स्थापना कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारों या विशेष संस्थाओं जैसे एपीएमसी (Agricultural Produce Market Committee) का कार्य है
    • वाणिज्यिक बैंक कृषि ऋण प्रदान कर सकते हैं, लेकिन बाजार स्थापना उनका प्रत्यक्ष दायित्व नहीं।
    • यह अप्रत्यक्ष रूप से उनका योगदान हो सकता है, परंतु महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष श्रेणी में नहीं आता।​
  • अन्य विकल्पों की पुष्टि
    • विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में, जैसे भारत में, वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र पूँजी संचय, उद्योगीकरण और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है।
    • ये भुगतान प्रणाली, विदेशी मुद्रा लेनदेन और धन प्रबंधन जैसी सेवाएँ भी प्रदान करते हैं, जो समग्र आर्थिक प्रगति को मजबूत बनाते हैं।​

40. एक सशक्त बैंकिंग प्रणाली का प्रचार और विकास ....... का कार्य है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) केंद्रीय बैंक
Solution:
  • बैंक राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढ़ता को सुनिश्चित करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने
  • इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
  • साथ ही वह एक सशक्त बैंकिंग प्रणाली के विकास और प्रचार हेतु भी कार्य करता है।
  • केंद्रीय बैंक की भूमिका
    • केंद्रीय बैंक अन्य सभी बैंकों को नियंत्रित, पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली मजबूत बने।
    • उदाहरण के लिए, RBI वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) और अन्य वित्तीय संस्थानों का लाइसेंस जारी करता है
    • उनके प्रदर्शन की निगरानी करता है तथा वित्तीय स्थिरता के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करता है।
    • इससे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित होता है, जो समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है।​
  • अन्य संस्थाओं से अंतर
    • वाणिज्यिक बैंक जैसे SBI या HDFC मुख्य रूप से जमा स्वीकार करने और ऋण प्रदान करने पर केंद्रित रहते हैं
    • लेकिन वे स्वयं बैंकिंग प्रणाली का नियमन नहीं करते। इसी प्रकार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण विकास पर ध्यान देते हैं
    • परंतु संपूर्ण प्रणाली की देखरेख उनका कार्य नहीं है। विदेशी बैंक विशिष्ट सेवाएं प्रदान करते हैं
    • लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर प्रणाली के विकास की जिम्मेदारी उनके ऊपर नहीं है।​
  • विकास के प्रमुख उपाय
    • RBI ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बेसल-III मानदंडों का पालन, जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करना और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का विस्तार जैसे कदम उठाए हैं।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और वित्तीय समावेशन योजनाओं (जैसे प्रत्येक गांव में 5 किमी दायरे में बैंकिंग आउटलेट) से 99.97% गांवों का कवरेज सुनिश्चित हुआ है।
    • हाल के संशोधनों जैसे बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 ने शासन, जमाकर्ता सुरक्षा और प्रौद्योगिकी एकीकरण को बढ़ावा दिया है।​
  • चुनौतियाँ और भविष्य
    • बैंकिंग क्षेत्र में पूँजी भंडार बढ़ाना, शासन सुधार और कॉर्पोरेट बॉण्ड बाजार का विकास आवश्यक है
    • बैंक-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ा जा सके।
    • ये प्रयास भारत की आर्थिक वृद्धि के स्तंभ के रूप में बैंकिंग को और सशक्त बनाएंगे, विशेषकर 2026 में डिजिटल और समावेशी विकास के दौर में।​