Correct Answer: (b) भारत में सूक्ष्म वित्त (Microfinance) की शुरुआत मुख्य रूप से बैंकों के राष्ट्रीयकरण के कारण हुई।
Solution:- भारत में सूक्ष्म वित्त की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना था।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के विनियमन के लिए वाई.एच. मालेगाम समिति की स्थापना की थी।
- सूक्ष्म वित्त की अवधारणा औपचारिक बैंकिंग संस्थानों द्वारा बनाए गए अंतराल को दूर करने के लिए विकसित हुई।
- भारत में सूक्ष्म वित्त की पहल नाबार्ड द्वारा की गई थी।
- सूक्ष्म वित्त की परिभाषा
- सूक्ष्म वित्त निम्न आय वर्ग के लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और छोटे उद्यमियों को छोटे ऋण, बचत तथा बीमा जैसी सेवाएँ प्रदान करता है
- बिना किसी गारंटी या संपार्श्विक के। भारत में 1 लाख रुपये तक के ऋण को सूक्ष्म ऋण माना जाता है
- ये सेवाएँ पारंपरिक बैंकों से वंचित लोगों तक पहुँचाती हैं, लेकिन सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ (MFIs) स्वयं बैंक नहीं होतीं।
- गलत कथन की पहचान
- गलत कथन: "सूक्ष्म वित्त संगठन (MFI) वे बैंक हैं जो सूक्ष्म वित्तीय सेवाएँ प्रदान करते हैं।"
- यह कथन स्पष्ट रूप से गलत है क्योंकि MFIs बैंकिंग लाइसेंस वाली संस्थाएँ नहीं होतीं।
- ये गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC-MFIs), सोसाइटीज़, ट्रस्ट या कोऑपरेटिव हो सकती हैं
- जो RBI द्वारा अलग से विनियमित होती हैं । RBI MFIs को बैंकिंग सेवाएँ (जैसे जमा स्वीकारना) प्रदान करने की अनुमति नहीं देता
- बल्कि ये मुख्यतः ऋण वितरण पर केंद्रित रहती हैं।
- अन्य प्रचलित कथनों का मूल्यांकन
- सही कथन: MFIs सस्ती ब्याज दरों पर ऋण देती हैं। (यह आंशिक रूप से सही है
- लेकिन वास्तविकता में ब्याज दरें जोखिम के कारण ऊँची हो सकती हैं, फिर भी अनौपचारिक स्रोतों से कम।)
- सही कथन: MFIs आय-उत्पादक गतिविधियों के लिए ऋण देती हैं। (हाँ, लेकिन गैर-आय सृजन ऋणों का अनुपात 30% से अधिक नहीं होना चाहिए।)
- गलत धारणा: MFIs हमेशा गरीबी पूरी तरह समाप्त कर देती हैं। (वास्तव में, ये आंशिक रूप से सहायता करती हैं
- स्वास्थ्य या शिक्षा ऋण के लिए लोग अभी भी अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं।)
- MFIs की विशेषताएँ और चुनौतियाँ
- MFIs ग्रुप लेंडिंग मॉडल अपनाती हैं, जहाँ महिलाएँ (98% उधारकर्ता) समूह बनाकर पारस्परिक गारंटी देती हैं
- भारत में NABARD और SHG-BLP मॉडल प्रमुख हैं। चुनौतियाँ включают उच्च ब्याज दरें (जो ऋण जाल पैदा कर सकती हैं
- डिजिटल संक्रमण (90% ऋण अब DBT से), और विस्तार (शाखाएँ 2010 से दोगुनी हुईं) ।
- 2022 तक, MFIs ने 12 करोड़ लोगों को बीमा कवर प्रदान किया और 1.28 करोड़ रोजगार सृजित किए ।
- भारत में नियमन और प्रभाव
- RBI 2011 से MFIs को NBFC-MFI के रूप में विनियमित करता है
- जिसमें ब्याज कैप (36% प्रति वर्ष), उधारकर्ता आय सीमा (₹3 लाख वार्षिक) और एकाधिक ऋण प्रतिबंध शामिल हैं।
- 2026 तक, डिजिटलकरण से नकदी रहित लेन-देन बढ़ा है, लेकिन गरीबी दर अभी भी ~10% है
- MFIs ने वित्तीय समावेशन में योगदान दिया, लेकिन बैंक प्रतिस्थापन नहीं हैं।