Correct Answer: (a) जब बैंक अपना अधिशेष धन आरबीआई में जमा करता है, तो आरबीआई उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।
Solution:- वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों की RBI में जमाओं पर ब्याज देता है
- रिर्वस रेपो रेट (Reverse Repo Rate) कहलाता है।
- दूसरे शब्दों में, जब बैंक अपना अधिशेष धन RBI में जमा करता है
- तो RBI उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो दर के नाम से जाना जाता है।
- परिभाषा और कार्यप्रणाली
- रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक धन उधार लेता है।
- सरल शब्दों में, जब बैंकों के पास अतिरिक्त धन होता है
- तो वे इसे RBI के पास रिवर्स रेपो के माध्यम से जमा करते हैं और निर्धारित दर पर ब्याज अर्जित करते हैं।
- यह प्रक्रिया रेपो रेट के विपरीत है, जहां RBI बैंकों को धन उपलब्ध कराता है।
- अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- रिवर्स रेपो रेट बढ़ाने से बैंकों को RBI में धन पार्क करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है
- जिससे बाजार में चलन वाली मुद्रा की मात्रा कम होती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
- इसके विपरीत, दर घटाने से तरलता बढ़ती है
- जो ऋण सस्ते होने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
- यह शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों का फ्लोर भी निर्धारित करती है।
- वर्तमान दर और ऐतिहासिक संदर्भ
- 2022-2024 तक की जानकारी के अनुसार, रिवर्स रेपो रेट 3.35% के आसपास रही
- जबकि रेपो रेट 5.90% और MSF दर 6.15% थी।
- RBI मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा इसे समय-समय पर समायोजित किया जाता है
- मुद्रास्फीति लक्ष्य (4%) बनाए रखा जा सके।