मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 50

11. मुद्रा की पूर्ति के उपाय, अर्थात, M₁, M₂, M₃ और M₄ इस क्रम में क्या दर्शाते हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) तरलता का घटता क्रम
Solution:
  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत में मुद्रा की पूर्ति का नियमन किया जाता है। ध्यातव्य है कि मुद्राओं का तरलता क्रम है-
  • M₁ (संकीर्ण मुद्रा)
    • M₁ अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक तरल मुद्रा का प्रतिनिधित्व करता है
    • जो तत्काल लेन-देन के लिए उपलब्ध होती है।
    • यह जनता के पास मौजूद मुद्रा (करेन्सी नोट्स और सिक्के) + बैंकों की मांग जमाएं (Demand Deposits जैसे चालू खाते और बचत खाते) + RBI के पास अन्य जमाओं से मिलकर बनता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई व्यक्ति अपने वॉलेट में 500 रुपये का नोट रखता है
    • अपने बचत खाते में तुरंत निकालने योग्य राशि रखता है
    • तो यह M₁ का हिस्सा है, क्योंकि यह उच्चतम तरलता प्रदान करता है।​
  • M₂ का स्वरूप
    • M₂, M₁ से थोड़ा कम तरल लेकिन व्यापक है, जो M₁ + डाकघर बचत बैंक जमाओं को जोड़कर बनता है।
    • डाकघर बचत खाते की जमाएं वाणिज्यिक बैंकों की बचत जमाओं के समान मानी जाती हैं
    • हालांकि इनकी तरलता थोड़ी कम होती है।
    • यह उपाय ग्रामीण और छोटे क्षेत्रों में डाकघरों के माध्यम से जमा होने वाली बचत को शामिल करता है
    • जो अर्थव्यवस्था की कुल तरलता को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करता है।​
  • M₃ (व्यापक मुद्रा)
    • M₃ मुद्रा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला माप है
    • जिसे RBI द्वारा समग्र मौद्रिक संसाधन (Broad Money) कहा जाता है।
    • सूत्र: M₃ = M₁ + बैंकों और सहकारी बैंकों की सावधि जमाएं (Time Deposits)। वैकल्पिक रूप
    • यह जनता के पास चलन + बैंकों की चालू एवं बचत जमाएं + सावधि जमाएं + RBI के पास अन्य जमाएं के योग से बनता है।
    • सावधि जमाएं (जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट) कम तरल होती हैं
    • लेकिन अर्थव्यवस्था में निवेश को प्रोत्साहित करती हैं।​
  • M₄ की परिभाषा
    • M₄ सबसे व्यापक मुद्रा आपूर्ति उपाय है
    • जो M₃ + डाकघर की कुल जमाराशियों (Total Post Office Deposits) को शामिल करता है।
    • इसमें डाकघरों की सावधि जमाएं भी आ जाती हैं, जो M₂ में केवल बचत जमाओं तक सीमित थीं।
    • हालांकि, RBI अब मुख्य रूप से M₃ पर ध्यान केंद्रित करता है
    • लेकिन M₄ पूरे डाकघर क्षेत्र की जमाराशियों को कवर करके मुद्रा पूर्ति का सबसे बड़ा चित्र प्रस्तुत करता है।​
  • तरलता क्रम और महत्व
    • ये उपाय M₁ से M₄ तक तरलता में क्रमिक कमी दर्शाते हैं
    • M₁ सबसे अधिक तरल, उसके बाद M₂ (डाकघर बचत जोड़कर), M₃ (सावधि जमाएं जोड़कर) और M₄ सबसे कम तरल लेकिन सबसे व्यापक।
    • RBI इन आंकड़ों का उपयोग मुद्रास्फीति नियंत्रण, ब्याज दरें तय करने और आर्थिक स्थिरता के लिए करता है
    • उदाहरण के लिए, M₃ में वृद्धि महंगाई का संकेत हो सकती है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), RBI ने नए माप जैसे M0 (आरक्षित मुद्रा) को भी अपनाया है
    • लेकिन पुराने M₁-M₄ अभी भी विश्लेषण में प्रासंगिक हैं।​

12. डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएं मुद्रा पूर्ति की किस माप में शामिल की जाती हैं? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) M₂
Solution:
  • भारत में मुद्रा की पूर्ति को चार मापकों के आधार पर मापा जाता है
  • M1, M2, M3 तथा M4 । इन चार मापकों में से डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएं
  • मुद्रा पूर्ति की माप M_{2} में शामिल की जाती हैं।
  • M2 = M 1 + डाकघर की बचत जमाएं
  • मुद्रा पूर्ति के माप
    •  M1 सबसे संकीर्ण और तरल माप है, जिसमें जनता के पास मुद्रा, मांग जमा और RBI के पास अन्य जमा शामिल होते हैं।
    • M2 में M1 के साथ-साथ डाकघर बचत बैंकों की बचत जमाएं जोड़ी जाती हैं
    • जबकि M3 में M1 के अतिरिक्त वाणिज्यिक बैंकों की शुद्ध सावधि जमा आती हैं।
    • M4 सबसे व्यापक है, जिसमें M3 के साथ डाकघर की सभी जमाएं (राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर) शामिल होती हैं।​​
  • डाकघर बचत का स्थान
    • डाकघर बचत खाते खुदरा बैंकों के बचत खातों के समकक्ष होते हैं
    • जिनमें न्यूनतम जमा 500 रुपये और 4% ब्याज दर होती है।
    • ये जमाएं M1 में शामिल नहीं होतीं क्योंकि वे तत्काल लेन-देन के लिए कम तरल होती हैं
    • लेकिन M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमाएं सूत्र के अनुसार M2 का हिस्सा बनती हैं।
    • इसी तरह M4 में भी ये आती हैं, जो इन्हें व्यापक मुद्रा पूर्ति का भाग बनाती हैं।
    • ये माप 1977 से 1998 तक RBI द्वारा उपयोग किए गए थे
    • लेकिन अवधारणा आज भी मौद्रिक नीति विश्लेषण में प्रासंगिक है।​​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • डाकघर बचत जमाओं का M2 और M4 में शामिल होना अर्थव्यवस्था की कुल तरलता को प्रभावित करता है
    • क्योंकि ये सरकारी समर्थित योजनाएं हैं
    • जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लाखों खाताधारकों द्वारा उपयोग की जाती हैं।
    • RBI इन आंकड़ों से मुद्रास्फीति नियंत्रण और मौद्रिक नीति निर्धारित करता है
    • जहां M3 मुख्य संकेतक होता है लेकिन डाकघर जमा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालती हैं।
    • वर्तमान में डाकघर बचत खाते पर 4% ब्याज और सुविधाएं जैसे चेकबुक, ATM कार्ड उपलब्ध हैं।​​

13. M₂ मुद्रा आपूर्ति का एक मापक है। M₂ =M₁ +? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) डाकघर में जमा बचत
Solution:
  • भारत में मुद्रा की पूर्ति का नियमन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है।
  • मुद्रा आपूर्ति का तात्पर्य अर्थव्यवस्था में लोगों द्वारा विभिन्न रूपों में अपने पास रखी गई मुद्रा से है।
  • भारत में मुद्रा की पूर्ति को चार मापकों के आधार पर मापा जाता है।
  • जो हैं- M1, M2 और M3 तथा M4
  • अतः M2 =M1 + डाकखाने की जमाएं
  • M₁ क्या है?
    • M₁ सबसे संकीर्ण मुद्रा आपूर्ति माप है
    • जिसमें जनता के पास भौतिक मुद्रा (नोट और सिक्के), बैंकों में मांग जमा (चालू और बचत खाते)
    • RBI के पास अन्य जमा शामिल होते हैं।
    • यह उच्चतम तरलता वाली मुद्रा को दर्शाता है जो तुरंत खर्च की जा सकती है।​
  • M₂ का सूत्र
    • भारतीय संदर्भ में M₂ स्पष्ट रूप से M₁ + डाकघर बचत बैंक जमा के रूप में गणना होता है।
    • डाकघर जमा को "नियर मनी" माना जाता है
    • क्योंकि इन्हें अपेक्षाकृत आसानी से नकदी में बदला जा सकता है।
    • अमेरिकी संदर्भ में यह M₁ + बचत जमा
    • छोटी सावधि जमा (1 लाख डॉलर से कम) और खुदरा मनी मार्केट फंड को शामिल करता है।​
  • अन्य मुद्रा आपूर्ति मापक
    • M₀ (आरक्षित मुद्रा): मूलभूत मुद्रा, जिसमें चलन में मुद्रा, बैंकों के RBI जमा और अन्य शामिल। यह M₁-M₄ का आधार है।​
    • M₃: M₁ + बैंकों/सहकारी बैंकों की सावधि जमा; सबसे व्यापक माप, जिसे समष्टि मौद्रिक संसाधन (AMR) कहते हैं।​
    • M₄: M₃ + डाकघर की कुल जमाराशि। तरलता क्रम: M₁ > M₂ > M₃ > M₄।​
  • महत्व और उपयोग
    • RBI मुद्रा आपूर्ति मापकों का उपयोग मौद्रिक नीति निर्धारण, मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता के लिए करता है।
    • M₂ में डाकघर जमा जोड़ना बचत पैटर्न को प्रतिबिंबित करता है
    • जो अर्थव्यवस्था की तरलता दर्शाता है। ये मापक NCERT और UPSC जैसी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण हैं।​

14. मुद्रा आपूर्ति के निम्नलिखित उपायों में से किस उपाय को 'समाज के कुल मौद्रिक संसाधनों' के रूप में भी जाना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) M₃
Solution:
  • M3 मुद्रा आपूर्ति की मापों में से एक है
  • जिसमें M2 के सभी घटक (मुद्रा, मांग जमा और सावधि जमा) के साथसाथ बड़े समय की जमा, पुनर्खरीद समझौते और संस्थागत मुद्रा बाजार निधि भी शामिल हैं।
  • M3 को समग्र मौद्रिक संसाधन के रूप में भी जाना जाता है
  • क्योंकि यह धन आपूर्ति के व्यापक माप का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • मुद्रा आपूर्ति के उपाय
    • मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय पर उपलब्ध कुल मुद्रा की मात्रा को दर्शाती है
    • जिसका मापन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा चार मुख्य उपायों—M1, M2, M3 और M4—के माध्यम से किया जाता है।
    • इनमें से M3 को 'समाज के कुल मौद्रिक संसाधनों के रूप में जाना जाता है
    • क्योंकि यह मुद्रा के सबसे व्यापक रूप को समेटता है
    • जिसमें नकद मुद्रा से लेकर बैंकिंग प्रणाली की समय जमाराशियां तक शामिल होती हैं।​
  • M3 की परिभाषा और गणना
    • M3 को व्यापक मुद्रा (Broad Money) कहा जाता है और इसकी गणना इस प्रकार होती है
    • M3 = M1 + नेट समय जमाराशियां (Net Time Deposits)।
    • जहां M1 (संकीर्ण मुद्रा) में चलन में मुद्रा (नोट और सिक्के), मांग जमाराशियां
    • RBI के पास अन्य जमाराशियां शामिल हैं।
    • M3 बैंकिंग प्रणाली के कुल मौद्रिक संसाधनों का प्रतिनिधित्व करता है
    • जो अर्थव्यवस्था की समग्र तरलता को मापता है।​
  • M3 का महत्व
    • M3 RBI द्वारा मुद्रास्फीति नियंत्रण, मौद्रिक नीति निर्धारण और आर्थिक स्थिरता के मूल्यांकन के लिए सबसे अधिक उपयोग किया
    • जाने वाला उपाय है। यह अर्थव्यवस्था में मुद्रा के कुल स्टॉक को दर्शाता है
    • जो क्रेडिट सृजन, निवेश और बचत को प्रभावित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि M3 में वृद्धि होती है, तो यह मुद्रास्फीति का संकेत दे सकता है।​

15. निम्नलिखित में से किसे 'अंतिम ऋणदाता' के रूप में भी जाना जाता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) आरबीआई (RBI)
Solution:
  • भारतीय रिजर्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है।
  • देश में मौद्रिक नीति का निर्धारण RBI के तहत स्थापित मौद्रिक नीति समिति द्वारा किया जाता है।
  • यह देश के समस्त बैंकिंग कार्यकलापों के नियंत्रण, नियमन और निरीक्षण का कार्य करता है
  • इसलिए इसे अंतिम ऋणदाता के रूप में भी जाना जाता है।
  • अवधारणा का परिचय
    • अंतिम ऋणदाता' (Lender of Last Resort) वह संस्था है
    • जो वित्तीय संकट के दौरान बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को अंतिम रूप से ऋण प्रदान करती है
    • जब वे बाजार या अन्य स्रोतों से धन प्राप्त नहीं कर पातीं।
    • भारत में यह भूमिका भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) निभाता है
    • जो वाणिज्यिक बैंकों के लिए बैंकर के रूप में कार्य करता है।
    • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत हुई थी।​
  • RBI की भूमिका क्यों?
    • RBI तब सहायता करता है जब कोई solvent (ऋणशोधक) बैंक अस्थायी तरलता संकट का सामना करता है
    • अन्य बैंक उसे ऋण देने से इनकार कर देते हैं।
    • यह प्रतिभूतियों (जैसे सरकारी सिक्योरिटीज) के बदले आवश्यक नकदी प्रदान करता है।
    • इसका उद्देश्य जमाकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना, बैंक विफलता रोकना और वित्तीय प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना है
    • जो अन्य बैंकों पर दुष्प्रभाव डाल सकती है।​
  • कार्यप्रणाली
    • RBI बैंकों को repo, reverse repo या सीधे ऋण के माध्यम से तरलता देता है।
    • यह मुद्रा जारीकर्ता, सरकार का बैंकर और वित्तीय नियामक के रूप में भी कार्य करता है।
    • ऐतिहासिक रूप से, वैश्विक केंद्रीय बैंक (जैसे फेडरल रिज़र्व) भी यही भूमिका निभाते हैं
    • लेकिन भारत में RBI विशेष रूप से इसका प्रतीक है।​
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • यह सुविधा बैंक रन (जमाकर्ताओं का भगदड़) रोकती है
    • अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाती है। हालांकि, इसका दुरुपयोग नैतिक खतरे (moral hazard) पैदा कर सकता है
    • इसलिए RBI सख्त शर्तें लगाता है।​

16. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में अनुसूचित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक नहीं है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बंधन बैंक
Solution:
  • अनुसूचित बैंक वे होते हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित हों।
  • उपर्युक्त विकल्पों में विकल्प (c) अर्थात बंधन बैंक अनुसूचित निजी क्षेत्र का बैंक है, न कि सार्वजनिक क्षेत्र का।
  • अनुसूचित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक क्या हैं?
    • जिससे वे RBI से विशेष सुविधाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
    • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) उनमें से हैं जहाँ सरकार की हिस्सेदारी 51% से अधिक है।
    • वर्तमान में भारत में 12 PSBs हैं, जिनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि शामिल हैं।​
  • विकल्पों का विश्लेषण
    • प्रश्न संभवतः केनरा बैंक, यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और बंधन बैंक जैसे विकल्पों पर आधारित है।​
    • केनरा बैंक: 1906 में स्थापित, सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, 10,000+ शाखाएँ।​
    • यूको बैंक: 1943 में स्थापित, सार्वजनिक क्षेत्र का, पूर्वी भारत में मजबूत।​
    • इंडियन ओवरसीज बैंक: 1937 में स्थापित, सार्वजनिक क्षेत्र का, 3,400+ शाखाएँ।​
      बंधन बैंक इनमें से अलग है क्योंकि यह निजी क्षेत्र का बैंक है।​
  • बंधन बैंक क्यों बाहर है?
    • बंधन बैंक की स्थापना 2015 में माइक्रोफाइनेंस संस्था से बैंक के रूप में हुई
    • लेकिन यह निजी क्षेत्र का अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक है।
    • इसमें सरकार की बहुमत हिस्सेदारी नहीं है, इसलिए PSB नहीं माना जाता।
    • यह अनुसूचित तो है, पर सार्वजनिक क्षेत्र का नहीं।​
  • वर्तमान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
    • भारत में मुख्य PSBs:
    • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और सहयोगी (बीकानेर एंड जयपुर, हैदराबाद आदि)।​
    • बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक।​
    • कुछ पुराने विलय हो चुके हैं, जैसे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और विजया बैंक।​

17. निम्नलिखित में से किस संस्था की स्थापना 1982 में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के लिए ऋण सुविधा को सुव्यवस्थित करने के लिए की गई? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) नाबार्ड
Solution:
  • 12 जुलाई, 1982 को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की गई थी।
  • ध्यातव्य है कि इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्तर पर किसानों हेतु ऋण सुविधा को सुव्यवस्थित करने हेतु की गई थी।
  • स्थापना का उद्देश्य
    • NABARD का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत में कृषि, छोटे उद्योगों, कुटीर उद्योगों और ग्रामीण परियोजनाओं के विकास को बढ़ावा देना था।
    • यह रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कृषि ऋण विभाग और कृषि रिफाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (ARDC) के कार्यों को मिलाकर गठित किया गया ।
    • योजना आयोग के पूर्व सदस्य श्री बी. शिवरामन की समिति की सिफारिशों पर आधारित यह संस्था ग्रामीण आधारभूत अवसंरचना के लिए पुनर्वित्त सहायता प्रदान करती है
    • जिला स्तर पर ऋण योजनाएँ तैयार कर बैंकिंग उद्योग को मार्गदर्शन देती है
    • किसानों को फसल खेती, पोस्ट-हार्वेस्ट व्यय
    • कृषि परिसंपत्तियों के रखरखाव और संबद्ध गतिविधियों के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में यह अग्रणी भूमिका निभाती है ।​
  • संगठनात्मक संरचना
    • NABARD का मुख्यालय मुंबई में स्थित है और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
    • इसके 32 क्षेत्रीय कार्यालय पूरे देश में फैले हैं
    • जो ग्रामीण ऋण नीति निर्माण, योजना और संचालन सुनिश्चित करते हैं ।
    • पहले अध्यक्ष डॉ. ए.पीजेएब्दुल कलाम के समकालीन एम. नरसिम्हन थे ।
    • यह सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) और वाणिज्यिक बैंकों को लघु एवं दीर्घकालिक पुनर्वित्त प्रदान करता है ।​
  • प्रमुख कार्य और योगदान
    • ऋण सुविधाएँ: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं के माध्यम से 3 लाख रुपये तक के ऋण
    • जिसमें आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं।
    • 2022 तक 3.46 करोड़ किसानों को 3.95 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा प्रदान की गई ।​
    • विकास परियोजनाएँ: सूक्ष्म उद्योग, ग्रामीण अवसंरचना, वित्तीय समावेशन और धारणीय कृषि को प्रोत्साहन ।​
    • नीति निर्माण: ग्रामीण भारत की कृषि एवं आर्थिक गतिविधियों के लिए सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय ।​
    • NABARD ने ग्रामीण ऋण व्यवस्था को एकीकृत कर किसानों की वित्तीय पहुँच मजबूत की है
    • जिससे ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित हुई ।​
  • अन्य संस्थाओं से भेद
    • NABARD को SEBI (1988, प्रतिभूति नियामक
    • SIDBI (लखनऊ स्थित MSME ऋण) या RBI (केंद्रीय बैंक) से अलग पहचानें
    • क्योंकि ये 1982 में स्थापित नहीं हुए । यह विशेष रूप से ग्रामीण ऋण पर केंद्रित है ।​

18. वैधानिक तरलता अनुपात के तहत, वाणिज्यिक बैंकों को तरल संपत्ति (Liquid Assets) के रूप में ....... का एक अंश रखना आवश्यक है। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कुल मांग और सावधि जमा
Solution:
  • वैधानिक/सांविधिक तरलता अनुपात के तहत वाणिज्यिक बैंकों को तरल संपत्ति के रूप में कुल मांग और सावधि का एक अंश रखना आवश्यक होता है।
  • दूसरे शब्दों में, व्यापारिक बैंकों को अपने कुल जमा का एक निश्चित प्रतिशत अपने पास नकद
  • स्वर्ण एवं अल्पकालीन अभारित सरकारी प्रतिभूति के रूप में संरक्षित रखना होता है।
  • तरल संपत्तियों के प्रकार
    • वाणिज्यिक बैंकों को SLR के तहत नकदी, सोना, सरकारी प्रतिभूतियाँ या RBI द्वारा अनुमोदित अन्य उच्च-गुणवत्ता वाली तरल प्रतिभूतियाँ रखनी पड़ती हैं।
    • इनमें कैश, गोल्ड रिजर्व, सेंट्रल गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और कुछ अन्य स्वीकृत बॉन्ड्स शामिल होते हैं
    • जो तुरंत नकदी में परिवर्तित हो सकें।​
  • उद्देश्य और महत्व
    • SLR का मुख्य उद्देश्य बैंकों की तरलता सुनिश्चित करना
    • ग्राहकों की अचानक निकासी को पूरा करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।
    • यह मौद्रिक नीति का हिस्सा है जो अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करता है
    • SLR बढ़ाने से ऋण देने की क्षमता कम होती है, जबकि घटाने से अर्थव्यवस्था में धन प्रवाह बढ़ता है।​
  • वर्तमान दर और गणना
    • जून 2021 तक SLR 18% था, जो NDTL का 18% हिस्सा बैंकों को तरल संपत्तियों में निवेश करना पड़ता है।
    • गणना सूत्र: SLR = (बैंक की तरल संपत्तियाँ / NDTL) × 100; RBI को इसे 40% तक बढ़ाने का अधिकार है।
    • हर पखवाड़े बैंकों को RBI को SLR रिपोर्ट जमा करनी होती है।​
  • SLR बनाम CRR
    • SLR तरल संपत्तियों (जैसे सोना, बॉन्ड्स) पर लागू होता है जो बैंक अपने पास रखते हैं
    • जबकि CRR केवल नकद आरक्षितों पर है जो RBI के पास जमा होते हैं।
    • SLR में बैंकों को ब्याज मिल सकता है (सरकारी सिक्योरिटीज से), लेकिन CRR पर नहीं।​
  • दंड और अनुपालन
    • SLR में चूक पर बैंक को बैंक रेट से 3% अधिक दंडात्मक ब्याज देना पड़ता है।
    • भारतीय बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 24 के तहत यह अनिवार्य है
    • जो मूल रूप से 20% से शुरू होकर समय के साथ बढ़ा।
    • वर्तमान संदर्भ में (जनवरी 2026 तक), RBI मौद्रिक नीति के आधार पर इसे समायोजित करता रहता है।​

19. अर्थव्यवस्था में ऋण/उधार को हतोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंक ....... I [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) बैंक दर बढ़ा सकता है
Solution:
  • बैंक दर वह दर है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालीन ऋण देता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में ऋण/उधार को हतोत्साहित करने हेतु बैंक दर बढ़ा देता है
  • जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा स्फीति में कमी लाया जा सके।
  • प्रमुख उपकरण
    • केंद्रीय बैंक (भारत में RBI) रेपो दर बढ़ाकर बैंकों को महंगा उधार उपलब्ध कराता है
    • जिससे ऋण ब्याज दरें ऊंची हो जाती हैं।
    • इसी तरह, रिवर्स रेपो दर बढ़ाने से बैंकों को RBI में अतिरिक्त निधि जमा करने पर अधिक ब्याज मिलता है
    • जिससे बाजार में ऋण प्रवाह घटता है।
    • CRR या SLR बढ़ाने से बैंकों को अपनी देनदारियों का बड़ा हिस्सा आरक्षित रखना पड़ता है
    • जिससे ऋण योग्य धनराशि कम हो जाती है। [conversation_history]​
  • कार्यप्रणाली
    • ये कदम संकुचनकारी (Contractionary) मौद्रिक नीति के तहत उठाए जाते हैं
    • जहां मुद्रास्फीति नियंत्रण मुख्य लक्ष्य होता है। उदाहरणस्वरूप, यदि महंगाई बढ़ रही हो
    • RBI रेपो दर को 25-50 आधार अंकों से ऊपर ले जाता है, जिससे उपभोक्ता और व्यावसायिक ऋण महंगे हो जाते हैं।
    • चयनात्मक ऋण नियंत्रण (Selective Credit Control) जैसे मार्जिन आवश्यकताएं बढ़ाना या रियल एस्टेट
    • जैसे क्षेत्रों पर ऋण सीमा लगाना भी ऋण को सीमित करता है।​​
  • प्रभाव अर्थव्यवस्था पर
    • ऋण हतोत्साहन रोकने से मुद्रास्फीति घटती है, लेकिन विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
    • क्योंकि निवेश और खपत कम हो जाती है।
    • नैतिक अनुनय (Moral Suasion) या प्रत्यक्ष कार्रवाई जैसे जुर्माना लगाकर भी RBI बैंकों को अत्यधिक ऋण देने से रोकता है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), RBI ने हालिया नीतियों में दरें समायोजित की हैं
    • लेकिन संकुचन के लिए ये उपकरण प्रमुख हैं।​​
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • 2022-23 में RBI ने मुद्रास्फीति के खिलाफ रेपो दर को 6.5% तक बढ़ाया था
    • जिससे ऋण वृद्धि धीमी हुई।
    • उपभोक्ता ऋण नियंत्रण में EMI अवधि सीमित या अग्रिम भुगतान बढ़ाकर भी ऋण हतोत्साहित किया जाता है।
    • कुल मिलाकर, ये उपाय वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।​

20. रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जब बैंक अपना अधिशेष धन आरबीआई में जमा करता है, तो आरबीआई उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।
Solution:
  • वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों की RBI में जमाओं पर ब्याज देता है
  • रिर्वस रेपो रेट (Reverse Repo Rate) कहलाता है।
  • दूसरे शब्दों में, जब बैंक अपना अधिशेष धन RBI में जमा करता है
  • तो RBI उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो दर के नाम से जाना जाता है।
  • परिभाषा और कार्यप्रणाली
    • रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक धन उधार लेता है।
    • सरल शब्दों में, जब बैंकों के पास अतिरिक्त धन होता है
    • तो वे इसे RBI के पास रिवर्स रेपो के माध्यम से जमा करते हैं और निर्धारित दर पर ब्याज अर्जित करते हैं।
    • यह प्रक्रिया रेपो रेट के विपरीत है, जहां RBI बैंकों को धन उपलब्ध कराता है।​
  • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • रिवर्स रेपो रेट बढ़ाने से बैंकों को RBI में धन पार्क करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है
    • जिससे बाजार में चलन वाली मुद्रा की मात्रा कम होती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
    • इसके विपरीत, दर घटाने से तरलता बढ़ती है
    • जो ऋण सस्ते होने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
    • यह शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों का फ्लोर भी निर्धारित करती है।​
  • वर्तमान दर और ऐतिहासिक संदर्भ
    • 2022-2024 तक की जानकारी के अनुसार, रिवर्स रेपो रेट 3.35% के आसपास रही
    • जबकि रेपो रेट 5.90% और MSF दर 6.15% थी।
    • RBI मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा इसे समय-समय पर समायोजित किया जाता है
    • मुद्रास्फीति लक्ष्य (4%) बनाए रखा जा सके।​