Solution:साख नियंत्रण के लिए खुला बाजार परिचालन (Open Market Operation) प्रक्रिया अपनाई जाती है।खुला बाजार परिचालन धन की कुल मात्रा को विनियमित या नियंत्रित करने के लिए मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है
जो केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नियोजित की गई है।
साख नियंत्रण क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे केंद्रीय बैंक दो मुख्य प्रकार के उपाय अपनाते हैं
परिमाणात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative)। परिमाणात्मक उपाय कुल मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करते हैं
जबकि गुणात्मक विशिष्ट क्षेत्रों पर केंद्रित होते हैं।
मुक्त बाजार संचालन (OMO) क्यों आवश्यकता रखता है सुविकसित मुद्रा बाजार की?
मुक्त बाजार संचालन में केंद्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे बॉन्ड्स) को खुले बाजार में खरीदता या बेचता है
जिससे मुद्रा आपूर्ति बढ़ती या घटती है। यह उपाय तभी प्रभावी होता है जब मुद्रा बाजार सुविकसित हो
क्योंकि इसमें व्यावसायिक बैंक, वित्तीय संस्थाएं और निवेशक सक्रिय रूप से प्रतिभूतियों का कारोबार करते हैं।
विकासशील बाजारों में कम गहराई के कारण OMO का प्रभाव सीमित रहता है
जबकि विकसित बाजार (जैसे अमेरिका का) में यह तुरंत मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करता है।
अन्य उपायों से तुलना
साख नियंत्रण के अन्य परिमाणात्मक उपाय जैसे नकद आरक्षित अनुपात (CRR), वैधानिक तरलता अनुपात (SLR), बैंक दर, रेपो दर या रिवर्स रेपो दर सीधे बैंकों पर लागू होते हैं और मुद्रा बाजार की परिपक्वता पर निर्भर नहीं करते।
OMO की सफलता मुद्रा बाजार की तरलता, प्रतिभूतियों की उपलब्धता और बाजार सहभागियों की भागीदारी पर निर्भर करती है।
OMO का व्यावहारिक महत्व और उदाहरण
अर्थव्यवस्था में मुद्रा अधिक होने पर (मुद्रास्फीति) केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियां बेचकर मुद्रा सोख लेता है
कमी पर खरीदकर मुद्रा注入 करता है। भारत में RBI OMO का उपयोग करता है
लेकिन मुद्रा बाजार के अपेक्षाकृत कम विकास के कारण इसका प्रभाव सीमित रहता है
जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह प्रमुख उपकरण है। इससे आर्थिक स्थिरता, ब्याज दरों का नियंत्रण और निवेश को बढ़ावा मिलता है।