मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-III)

Total Questions: 41

1. निम्नलिखित में से कौन-सा NBFC-MFI ग्रामीण के संयुक्त दायित्व समूह में संचालित होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड
Solution:
  • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, ग्रामीण के संयुक्त दायित्व समूह में संचालित होता है।
  • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में कार्य करती है।
  • यह समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित वर्ग से संबंधित महिला उद्यमियों को फाइनेंशियल सर्विस प्रदान करता है।
  • JLG मॉडल क्या है?
    • संयुक्त दायित्व समूह (JLG) मॉडल सूक्ष्म वित्त का एक लोकप्रिय दृष्टिकोण है
    • जिसमें 5-10 सदस्यों का छोटा समूह बनता है जो बिना पारंपरिक संपार्श्विक के ऋण लेते हैं।
    • समूह के सदस्य एक-दूसरे के प्रति संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं
    • जो सहकर्मी दबाव के माध्यम से उच्च चुकौती दर सुनिश्चित करता है।
    • यह मॉडल ग्रामीण भारत में विशेष रूप से प्रभावी है, जहां पारंपरिक बैंकिंग पहुंच सीमित होती है।​
  • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस का संचालन
    • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ग्रामीण क्षेत्रों में JLG ऋण मॉडल का उपयोग करके महिला उद्यमियों को सशक्त बनाती है।
    • कंपनी का फोकस छोटे ऋणों पर है जो समूह आधारित होते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन बढ़ता है
    • जोखिम कम होता है। RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार, NBFC-MFIs को न्यूनतम 15% पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना पड़ता है
    • जो फ्यूजन जैसी संस्थाओं पर लागू होता है।​
  • अन्य NBFC-MFIs और JLG का महत्व
    • भारत में कई NBFC-MFIs JLG मॉडल अपनाती हैं, लेकिन फ्यूजन विशेष रूप से ग्रामीण JLG पर केंद्रित है।
    • RBI ने NBFC-MFIs के लिए JLG या SHG सदस्यों को व्यक्तिगत ऋण भी देने की अनुमति दी है
    • लेकिन समूह मॉडल चुकौती को मजबूत बनाता है।
    • यह मॉडल बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से प्रेरित है, जहां मुहम्मद यूनुस ने इसे विकसित किया।​

2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से वित्तीय क्षेत्र का हिस्सा नहीं है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
Solution:
  • वित्तीय क्षेत्र अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा है, जो वाणिज्यिक और खुदरा ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली फर्मों और संस्थानों से बना है।
  • इस क्षेत्र में बैंकों, निवेश कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंज संचालन, निवेश बैंक, वाणिज्यिक बैंक आदि शामिल होते हैं।
  • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वित्तीय क्षेत्र का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक विभाग है।
  • JLG मॉडल क्या है?
    • संयुक्त दायित्व समूह (JLG) मॉडल सूक्ष्म वित्त का एक लोकप्रिय दृष्टिकोण है
    • जिसमें 5-10 सदस्यों का छोटा समूह बनता है जो बिना पारंपरिक संपार्श्विक के ऋण लेते हैं।
    • समूह के सदस्य एक-दूसरे के प्रति संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं
    • जो सहकर्मी दबाव के माध्यम से उच्च चुकौती दर सुनिश्चित करता है।
    • यह मॉडल ग्रामीण भारत में विशेष रूप से प्रभावी है, जहां पारंपरिक बैंकिंग पहुंच सीमित होती है।​
  • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस का संचालन
    • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ग्रामीण क्षेत्रों में JLG ऋण मॉडल का उपयोग करके महिला उद्यमियों को सशक्त बनाती है।
    • कंपनी का फोकस छोटे ऋणों पर है जो समूह आधारित होते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन बढ़ता है
    • जोखिम कम होता है। RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार, NBFC-MFIs को न्यूनतम 15% पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना पड़ता है
    • जो फ्यूजन जैसी संस्थाओं पर लागू होता है।​
  • अन्य NBFC-MFIs और JLG का महत्व
    • भारत में कई NBFC-MFIs JLG मॉडल अपनाती हैं, लेकिन फ्यूजन विशेष रूप से ग्रामीण JLG पर केंद्रित है।
    • RBI ने NBFC-MFIs के लिए JLG या SHG सदस्यों को व्यक्तिगत ऋण भी देने की अनुमति दी है
    • लेकिन समूह मॉडल चुकौती को मजबूत बनाता है।
    • यह मॉडल बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से प्रेरित है, जहां मुहम्मद यूनुस ने इसे विकसित किया।​

3. किस कार्यक्रम को पुनर्संरचित करके उसका नाम बदलकर 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम' (National Rural Employment Programme) कर दिया गया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) काम के बदले अनाज कार्यक्रम
Solution:
  • काम के बदले अनाज कार्यक्रम (FWP) को वर्ष 1977-78 में प्रारंभ किया गया था।
  • वर्ष 1980 में इसे पुनर्संरचित करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम कर दिया गया।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य
    • NREP का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे गरीब वर्गों को उत्पादक रोजगार प्रदान करना था
    • जिसमें सड़कें, सिंचाई सुविधाएं, स्कूल भवन जैसी स्थायी संपत्तियों का निर्माण शामिल था।
    • यह योजना ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और जीवन स्तर सुधारने पर केंद्रित थी
    • असंगठित श्रमिक परिवारों को कम से कम मजदूरी पर काम उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
    • योजना ने ग्रामीण गरीबी उन्मूलन की व्यापक रणनीति को मजबूत किया।​
  • पुनर्संरचना और विलय
    • 1989 में NREP को पुनर्संरचित कर जवाहर रोजगार योजना (Jawahar Rozgar Yojana - JRY) में विलय कर दिया गया
    • जो ग्रामीण रोजगार योजनाओं को एकीकृत करने का प्रयास था।
    • JRY के तहत NREP के साथ ही ग्रामीण विकास कार्यक्रम (RDP) को भी मिलाया गया
    • जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर अधिक फोकस हुआ।
    • बाद में JRY को 1999 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) और अन्य योजनाओं में परिवर्तित किया गया।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • NREP से पहले पांचवीं पंचवर्षीय योजना में न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम शुरू हुआ था
    • लेकिन NREP का जन्म विशेष रूप से रोजगार सृजन के लिए हुआ। सातवीं योजना में IRDP का विस्तार हुआ
    • जबकि आठवीं योजना तक NREP पूरी तरह JRY में समाहित हो चुका था।
    • यह कार्यक्रम भारत की ग्रामीण विकास यात्रा का महत्वपूर्ण चरण था।​

4. किस कार्यक्रम को पुनर्संरचित करके उसका नाम बदलकर 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम' (National Rural Employment Programme) कर दिया गया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) काम के बदले अनाज कार्यक्रम
Solution:
  • काम के बदले अनाज कार्यक्रम (FWP) को वर्ष 1977-78 में प्रारंभ किया गया था।
  • वर्ष 1980 में इसे पुनर्संरचित करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम कर दिया गया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) को पुनर्संरचित करके इसका नाम बदलकर जवाहर रोजगार योजना (JRY) नहीं किया गया
  • बल्कि NREP स्वयं एक पुनर्संरचित कार्यक्रम था जो ग्रामीण रोजगार योजनाओं को एकीकृत करने के लिए बनाया गया।
  • जो इससे पहले की योजनाओं जैसे ग्रामीण विकास योजनाओं को पुनर्गठित करके अस्तित्व में आया।​
  • NREP का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
    • NREP का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी को कम करना और गरीबी उन्मूलन था।
    • यह कार्यक्रम रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था
    • जिसमें सड़कें, सिंचाई सुविधाएं और स्कूल भवन जैसी टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण शामिल था।
    • सबसे गरीब वर्गों को लक्षित करते हुए, इसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 50:50 के अनुपात में वित्त पोषित किया जाता था।​
  • पुनर्संरचना का इतिहास
    • NREP 6वीं पंचवर्षीय योजना (1980-85) में शुरू हुआ
    • जो 5वीं योजना के न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रमों और अन्य ग्रामीण रोजगार पहलों को पुनर्संरचित रूप से आगे बढ़ाने का परिणाम था।
    • बाद में, 1989 में NREP को राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रम (RURAL) के साथ मिलाकर जवाहर रोजगार योजना (JRY) में परिवर्तित कर दिया गया
    • जो ग्रामीण रोजगार योजनाओं को सुव्यवस्थित करने का प्रयास था।​
  • बाद की प्रगति
    • JRY के बाद ग्रामीण रोजगार योजनाओं का विकास जारी रहा, जैसे 1999 में समग्र ग्रामीण रोजगार योजना
    • हाल ही में मनरेगा (MGNREGA) को पुनर्नामित करने की चर्चाएं जैसे विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025।
    • हालांकि, मूल प्रश्न के संदर्भ में NREP ही वह कार्यक्रम है जिसे पुनर्संरचना द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम नाम दिया गया।​

5. निम्नलिखित में से कौन-सा आर.बी.आई. (RBI)-पंजीकृत एन.बी.एफ.सी.-एम.एफ.आई. (NBFC-MFI) है, जो ग्रामीण के संयुक्त देयता समूह उधार मॉडल पर काम करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड
Solution:
  • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस प्राइवेट लिमिटड, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पंजीकृत एन.बी.एफ.सी.-एम.एफ.आई. (NBFC-MFI) है
  • जो ग्रामीण के संयुक्त देयता समूह उधार मॉडल पर काम करता है।
  • जेएलजी मॉडल की विशेषताएं
    • संयुक्त देयता समूह (JLG) मॉडल में 5-10 सदस्यों का छोटा समूह (आमतौर पर महिलाएं) एक साथ ऋण लेता है
    • जहां सभी सदस्य एक-दूसरे के ऋण की पारस्परिक गारंटी देते हैं। इससे डिफॉल्ट जोखिम कम होता है
    • चुकौती दर 95% से अधिक रहती है, क्योंकि सामाजिक दबाव और विश्वास पर आधारित होता है।
    • यह मॉडल पारंपरिक कोलैटरल की कमी वाले ग्रामीण उधारकर्ताओं के लिए आदर्श है।​
  • फ्यूजन की कार्यप्रणाली
    • फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस ग्रामीण भारत में JLG के माध्यम से सूक्ष्म ऋण वितरित करती है
    • जहां पहला ऋण चक्र छोटी राशि (जैसे ₹10,000-₹50,000) से शुरू होता है
    • अच्छी चुकौती पर बढ़ाया जाता है। कंपनी का फोकस महिला सशक्तिकरण पर है
    • जो छोटे उद्यमों जैसे किराना दुकान, पशुपालन या हस्तशिल्प को सपोर्ट करता है।
    • यह आर.बी.आई. के NBFC-MFI नियमों का पालन करती है
    • जिसमें अधिकतम ऋण सीमा ₹1,25,000 और ब्याज दर कैप शामिल हैं।​
  • आर.बी.आई. विनियमन का महत्व
    • आर.बी.आई. ने 2011 से NBFC-MFI के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं
    • जिसमें 75% संपत्ति सूक्ष्म ऋणों में होनी चाहिए और कोई एक उधारकर्ता को ₹1,25,000 से अधिक न दें।
    • फ्यूजन जैसी संस्थाएं ग्रामीण प्राथमिकता क्षेत्र उधार (PSL) लक्ष्यों में योगदान देती हैं
    • जो बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाती हैं। ये नियम मालेगाम समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं।​
  • अन्य संदर्भ और प्रभाव
    • ग्रामीण JLG मॉडल की शुरुआत बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से प्रेरित है
    • जो मुहम्मद यूनुस ने विकसित किया। भारत में फ्यूजन जैसी MFI ने लाखों महिलाओं को सशक्त बनाया है
    • लेकिन चुनौतियां जैसे उच्च परिचालन लागत और डिफॉल्ट जोखिम बनी रहती हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी बैंकें इन्हें रिफाइनेंस प्रदान करती हैं।​

6. निम्नलिखित में से कौन माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में एक प्रमुख घटक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) आईडीबीआई
Solution:
  • माइक्रोफाइनेंस वित्तीय सेवाओं का एक समूह है, जो ऐसे व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को लक्षित करता है
  • जिनकी पारंपरिक बैंकिंग और संबंधित सेवाओं तक पहुंच नहीं है।
  • इसके क्षेत्र में लघु वित्त बैंक, वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आदि शामिल होते हैं, जबकि आई.डी.बी.आई. इसमें शामिल नहीं है।
  • प्रमुख घटक
    • माइक्रोफाइनेंस के मूल घटक निम्नलिखित हैं:
    • सूक्ष्म ऋण (माइक्रो क्रेडिट): कम आय वाले व्यक्तियों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को छोटे ऋण प्रदान करना
    • जो स्वयं सहायता समूह (SHG) या संयुक्त दायित्व समूह (JLG) के माध्यम से वितरित होते हैं।
    • ये ऋण छोटे व्यवसाय शुरू करने या दैनिक जरूरतों के लिए होते हैं।​
    • सूक्ष्म बचत (माइक्रो सेविंग): सदस्यों द्वारा नियमित बचत जमा करना
    • जो SHG-BLP (स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज प्रोग्राम) के तहत NABARD द्वारा समर्थित होता है। इससे वित्तीय अनुशासन विकसित होता है।​
    • सूक्ष्म बीमा: स्वास्थ्य, जीवन या फसल बीमा जैसी सेवाएँ
    • जो जोखिमों से बचाव करती हैं और ऋण चुकाने की क्षमता बढ़ाती हैं।​
  • संस्थागत ढाँचा
    • माइक्रोफाइनेंस की डिलीवरी के लिए प्रमुख संस्थाएँ हैं:
    • स्वयं सहायता समूह (SHG): 10-20 महिलाओं के समूह जो अपनी बचत से ऋण देते हैं और बैंकों से लिंक होते हैं।​
    • माइक्रोफाइनेंस संस्थान (MFI): NBFC-MFI के रूप में RBI द्वारा विनियमित
    • जो JLG मॉडल पर काम करते हैं। उदाहरण: बंधन बैंक, स्पंदना स्फूर्ति।​
    • NBFC-MFI: बाजार का 80% हिस्सा, जो बैंकों से उधार लेकर ऋण वितरित करते हैं।​
  • गैर-प्रमुख घटक
    • माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में घरेलू आय को कम करना एक प्रमुख घटक नहीं है, क्योंकि इसका उद्देश्य विपरीत है
    • आय बढ़ाना और सशक्तीकरण। यह कभी भी लक्ष्य सूची में शामिल नहीं होता।
    • अन्य संभावित विकल्प जैसे बड़े उद्योग ऋण या कॉर्पोरेट फाइनेंस भी माइक्रोफाइनेंस के दायरे से बाहर हैं, क्योंकि ये बड़े पैमाने के होते हैं।​
  • चुनौतियाँ और नियमन
    • RBI का NBFC-MFI ढाँचा (2014) ग्राहक संरक्षण और ऋण मूल्यांकन सुनिश्चित करता है।
    • हालाँकि, अति-ऋणग्रस्तता जैसी समस्याएँ बनी रहती हैं। क्षेत्र का ऋण पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ रहा है
    • लेकिन विविधीकरण (बीमा, बचत) पर जोर दिया जा रहा है।​

7. साख नियंत्रण के निम्नलिखित में से किस उपाय के लिए सुविकसित मुद्रा बाजार की आवश्यकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) खुला बाजार परिचालन
Solution:साख नियंत्रण के लिए खुला बाजार परिचालन (Open Market Operation) प्रक्रिया अपनाई जाती है।

खुला बाजार परिचालन धन की कुल मात्रा को विनियमित या नियंत्रित करने के लिए मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है

जो केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नियोजित की गई है।

साख नियंत्रण क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे केंद्रीय बैंक दो मुख्य प्रकार के उपाय अपनाते हैं

परिमाणात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative)। परिमाणात्मक उपाय कुल मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करते हैं

जबकि गुणात्मक विशिष्ट क्षेत्रों पर केंद्रित होते हैं।​​

मुक्त बाजार संचालन (OMO) क्यों आवश्यकता रखता है सुविकसित मुद्रा बाजार की?

मुक्त बाजार संचालन में केंद्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे बॉन्ड्स) को खुले बाजार में खरीदता या बेचता है

जिससे मुद्रा आपूर्ति बढ़ती या घटती है। यह उपाय तभी प्रभावी होता है जब मुद्रा बाजार सुविकसित हो

क्योंकि इसमें व्यावसायिक बैंक, वित्तीय संस्थाएं और निवेशक सक्रिय रूप से प्रतिभूतियों का कारोबार करते हैं।

विकासशील बाजारों में कम गहराई के कारण OMO का प्रभाव सीमित रहता है

जबकि विकसित बाजार (जैसे अमेरिका का) में यह तुरंत मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करता है।​

अन्य उपायों से तुलना

साख नियंत्रण के अन्य परिमाणात्मक उपाय जैसे नकद आरक्षित अनुपात (CRR), वैधानिक तरलता अनुपात (SLR), बैंक दर, रेपो दर या रिवर्स रेपो दर सीधे बैंकों पर लागू होते हैं और मुद्रा बाजार की परिपक्वता पर निर्भर नहीं करते।​​

OMO की सफलता मुद्रा बाजार की तरलता, प्रतिभूतियों की उपलब्धता और बाजार सहभागियों की भागीदारी पर निर्भर करती है।​

OMO का व्यावहारिक महत्व और उदाहरण

अर्थव्यवस्था में मुद्रा अधिक होने पर (मुद्रास्फीति) केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियां बेचकर मुद्रा सोख लेता है

कमी पर खरीदकर मुद्रा注入 करता है। भारत में RBI OMO का उपयोग करता है

लेकिन मुद्रा बाजार के अपेक्षाकृत कम विकास के कारण इसका प्रभाव सीमित रहता है

जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह प्रमुख उपकरण है। इससे आर्थिक स्थिरता, ब्याज दरों का नियंत्रण और निवेश को बढ़ावा मिलता है।​​

8. भारतीय मुद्रा का अंतरराष्ट्रीय समायोजन करने के लिए वर्ष 1991 में रुपये के अवमूल्यन (devaluation) का निम्नलिखित में से कौन-सा प्रभाव नहीं था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) आयात बढ़ा
Solution:
  • भारतीय मुद्रा का अंतरराष्ट्रीय समायोजन करने के लिए वर्ष 1991 में रुपये का अवमूल्यन किया गया।
  • इसके परिणामस्वरूप भारत में आयात हतोत्साहित हुआ और निर्यात को बढ़ावा मिला। साथ ही साथ विदेशी पूंजी का अंतर्प्रवाह बढ़ा।
  • जब किसी मुद्रा का अवमूल्यन होता है, तो उसकी विनिमय दर अन्य मुद्राओं के सापेक्ष कम हो जाती है।
  • अवमूल्यन के प्रमुख कारण
    • 1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जहां विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो सप्ताह के आयात के बराबर रह गया था।
    • खाड़ी युद्ध से तेल कीमतें बढ़ीं, प्रेषण घटे और सोवियत संघ का विघटन होने से व्यापार प्रभावित हुआ।
    • अवमूल्यन ने रुपये को प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर कर अंतरराष्ट्रीय समायोजन सुनिश्चित किया, जिससे निर्यात सस्ता और आयात महंगा हुआ।​
  • सकारात्मक प्रभाव
    • निर्यात वृद्धि: भारतीय वस्तुएं विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनीं, जिससे निर्यात में उछाल आया।
    • विदेशी निवेश आकर्षण: सुधारों के साथ मिलकर यह FDI और FII को प्रोत्साहित करने वाला कदम था।
    • भुगतान संतुलन सुधार: IMF ऋण प्राप्ति आसान हुई और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ा।​
  • नकारात्मक प्रभाव
    • आयात महंगा: तेल और पूंजीगत वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, जिससे मुद्रास्फीति दबाव पड़ा।
    • घरेलू कीमतें वृद्धि: आयात निर्भर वस्तुओं पर प्रभाव से आम आदमी प्रभावित हुआ।
    • ऋण बोझ: विदेशी मुद्रा में लिया गया कर्ज महंगा हो गया।​
  • कौन-सा प्रभाव नहीं था
    • 1991 के अवमूल्यन का घरेलू मुद्रा को विदेशी मुद्राओं के लिए स्थिर करना प्रभाव नहीं था
    • क्योंकि अवमूल्यन का मूल उद्देश्य मुद्रा को कमजोर करना था, न कि स्थिर रखना। यह विकल्प गलत है
    • क्योंकि अवमूल्यन ने विनिमय दर को अस्थिर बाजार दरों की ओर खोला।
    • अन्य विकल्प जैसे निर्यात बढ़ावा, आयात घाटा कम करना आदि वास्तविक प्रभाव थे।​

9. निम्नलिखित कथन किसने कहा? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

"मुद्रा वही है जो मुद्रा का काम करे" (Money is what money does)

Correct Answer: (b) प्रो. वाकर
Solution:
  • "मुद्रा वही है जो मुद्रा का कार्य करे" यह कथन प्रो. वाकर का है।
  • कोई विशिष्ट कथन प्रदान नहीं किया गया है
  • इसलिए निम्नलिखित कथन किसने कहा, इसका सटीक उत्तर देना संभव नहीं।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में यह एक सामान्य प्रारूप है जहां कोई प्रसिद्ध उद्धरण दिया जाता है।
  • सामान्य उदाहरण
    • हिंदी परीक्षाओं में अक्सर "हम भारतीयों के बहुत ऋणी हैं
    • जिन्होंने हमें गणना करना सिखाया, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं थी
    • अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा बताया जाता है।
    • यह प्राचीन भारतीय गणितीय योगदान (जैसे शून्य और दशमलव प्रणाली) की प्रशंसा करता है।
  • आइंस्टीन का संदर्भ
    • अल्बर्ट आइंस्टीन (1879-1955), भौतिक विज्ञानी, जिन्होंने सापेक्षता सिद्धांत प्रतिपादित किया।
    • उन्होंने भारतीय अंकों के यूरोपीय विज्ञान पर प्रभाव को स्वीकार किया।
  • परीक्षा संदर्भ
    • टेस्टबुक जैसी साइट्स पर RRB NTPC आदि परीक्षाओं में यह आता है।
    • पूर्ण कथन बताएं तो विस्तृत जानकारी दूंगा।

10. बैंकिंग में ओवरड्राफ्ट शब्द का क्या अर्थ है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अल्पकालिक वित्तपोषण सुविधा
Solution:
  • ओवरड्राफ्ट एक फाइनेंशियल सुविधा है, जो बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को दी जाती है।
  • ध्यातव्य है कि इसके तहत उपभोक्ता अल्पकालिक वित्त के लिए अपने बैंक खाता से तब भी पैसा निकाल सकते हैं, जब उस खाते में पैसा न हो।
  • ओवरड्राफ्ट का अर्थ
    • ओवरड्राफ्ट (Overdraft) हिंदी में "अधिक निकासी" या "अधिविकर्षण" कहलाता है
    • जहां बैंक खाताधारक को अपनी निर्धारित सीमा तक खाते के शेष धन से अधिक राशि खर्च करने की छूट देता है।
    • यह सुविधा मुख्य रूप से करेंट अकाउंट या सैलरी अकाउंट धारकों को मिलती है
    • लेकिन अब कई बैंक सेविंग्स अकाउंट पर भी इसे उपलब्ध करा रहे हैं। जब खाता शून्य या ऋणात्मक बैलेंस में चला जाता है
    • तब भी लेन-देन जारी रहता है, और बैंक इस अतिरिक्त राशि को उधार के रूप में प्रदान करता है।​
  • ओवरड्राफ्ट कैसे काम करता है
    • बैंक खाताधारक की क्रेडिट योग्यता, खाता इतिहास और आय के आधार पर एक ओवरड्राफ्ट लिमिट निर्धारित करता है
    • जैसे 10,000 से 5 लाख रुपये तक। यदि खाते में 5,000 रुपये हैं और आप 15,000 रुपये का चेक जारी करते हैं
    • तो बैंक 10,000 रुपये अतिरिक्त उपलब्ध कराता है, जिससे खाता -5,000 रुपये पर चला जाता है।
    • इस ऋण पर दैनिक या मासिक ब्याज लगता है, जो उपयोग की गई राशि पर ही गणना होता है, न कि पूरी लिमिट पर।
    • लिमिट पार करने पर दंडात्मक ब्याज या शुल्क लग सकता है।​
  • प्रकार
    • नियमित ओवरड्राफ्ट (Regular Overdraft): विश्वसनीय ग्राहकों को स्वतः मिलता है, जैसे व्यापारियों को।​
    • अस्थायी ओवरड्राफ्ट (Temporary Overdraft): विशेष परिस्थितियों में, जैसे वेतन विलंब पर।​
    • ओवरड्राफ्ट लोन: व्यक्तिगत ऋण के खिलाफ, जहां कोलेटरल (जमानत) की आवश्यकता हो सकती है।​
      यह सुविधा मुख्य रूप से व्यवसायों के लिए उपयोगी है, लेकिन व्यक्तिगत उपयोग में भी प्रचलित हो रही है।​
  • फायदे
    • ओवरड्राफ्ट अप्रत्याशित खर्चों, जैसे बिल भुगतान या आपातकालीन जरूरतों के लिए त्वरित नकदी प्रदान करता है
    • बिना नए ऋण आवेदन की प्रक्रिया के। केवल उपयोगित राशि पर ब्याज लगता है
    • जो इसे क्रेडिट कार्ड से सस्ता बनाता है। यह चेक बाउंस से बचाता है और नकदी प्रवाह प्रबंधन में सहायक होता है।​
  • नुकसान और सावधानियां
    • ब्याज दरें अन्य ऋणों से ऊंची (15-25% सालाना) हो सकती हैं, साथ ही प्रति ओवरड्राफ्ट शुल्क (जैसे 35 डॉलर तक) लगता है।
    • लिमिट लांघने पर दंड बढ़ जाता है, और लंबे समय तक उपयोग से कर्ज का जाल बन सकता है। हमेशा लिमिट के अंदर रहें और जल्दी भुगतान करें।​