मुस्लिम लीग का गठन (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 5

1. 1913 में ब्रिटिश भारत के निम्नलिखित मुस्लिम नेताओं में से कौन अखिल भारतीय मुस्लिम लीग में शामिल हुआ था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मुहम्मद अली जिन्ना
Solution:
  • मुहम्मद अली जिन्ना 1913 में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग में शामिल हुए थे।
  • इससे पहले, वह एक प्रमुख राष्ट्रवादी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे।
  • जिन्ना ने शुरुआत में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया, और उनकी शुरुआती कोशिशों के कारण ही 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच प्रसिद्ध लखनऊ समझौता हुआ था।
  •  अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ढाका में नवाब आगा खान III और अन्य मुस्लिम नेताओं के नेतृत्व में हुई थी
  • जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश भारत में मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना था।
  • मुहम्मद अली जिन्ना शुरुआत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों के सदस्य रहे, लेकिन 1913 में उन्होंने मुस्लिम लीग में शामिल होकर इसकी राजनीतिक भूमिका को मजबूत किया।
  • वह 1934 में मुस्लिम लीग के अध्यक्ष बने और उनके नेतृत्व में इस पार्टी ने मुसलमानों के लिए एक अलग राजनीतिक रुख अपनाया, जो अंततः भारत के विभाजन की दिशा में अग्रसर हुआ।
  • जिन्ना ने कांग्रेस के असहयोग आंदोलन से 1920 में अलगाव कर लिया था क्योंकि वे महसूस करते थे कि यह मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ था।
  • आगा खान III अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के पहले स्थायी अध्यक्ष थे, जिन्होंने इसके मुस्लिम अधिकारों के लिए काम को आगे बढ़ाया।
  • इस प्रकार, 1913 में अकिल भारतीय मुस्लिम लीग में शामिल प्रमुख मुस्लिम नेता मुहम्मद अली जिन्ना थे
  • जिन्होंने इसके नेतृत्व को प्रभावशाली बनाया और भारतीय मुसलमानों के लिए राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. ....... में मुस्लिम लीग ने देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए "स्वतंत्र राज्यों" की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया था। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (IV-पाली), MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 1940
Solution:
  • मुस्लिम लीग ने मार्च 1940 में अपने लाहौर अधिवेशन में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे आमतौर पर 'लाहौर प्रस्ताव' (या पाकिस्तान प्रस्ताव) के नाम से जाना जाता है।
  • इस प्रस्ताव में देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 'स्वतंत्र राज्यों' की मांग की गई थी।
  • इस प्रस्ताव ने भारत के विभाजन और पाकिस्तान नामक एक अलग मुस्लिम राष्ट्र की औपचारिक मांग को जन्म दिया।
  •  एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया था, जिसे लाहौर प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है। इस प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के उन क्षेत्रों, जहां मुसलमानों की संख्या अधिकांश है
  • उन्हें इसी आधार पर अलग-अलग स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता दी जाए। ये स्वतंत्र राज्य स्वायत्त और संप्रभु होने चाहिए
  • जिससे उनमें शामिल क्षेत्र अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मामलों में पूर्ण नियंत्रण रख सकें।
  • हालांकि इस समय "पाकिस्तान" शब्द का उपयोग नहीं किया गया था
  • लेकिन यह प्रस्ताव मुस्लिम लीग द्वारा मुसलमानों के लिए एक अलग और स्वायत्त राजनीतिक इकाई की मांग का पहला औपचारिक इशारा था।
  • इस प्रस्ताव में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों जैसे पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, तथा पूर्वी क्षेत्र जैसे बंगाल को मुसलमानों की एकजुट इकाइयों के रूप में माना गया था
  • जिन्हें स्वतंत्र राज्यों के रूप में बांटा जाना था। लक्षित था कि ये क्षेत्र अपनी कानून, प्रशासन, और आर्थिक नीतियों में स्वतंत्रता और संप्रभुता रखते हुए स्वशासन करेंगे।
  • यह प्रस्ताव ब्रिटिश भारत में मुस्लिम मत के लिए राजनीतिक सुरक्षा और अपने हितों की रक्षा के लिए था, क्योंकि उस समय बहुमत के अंतर्गत मुसलमानों की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका को सीमित समझा जाता था।
  • इस प्रस्ताव ने बाद में पाकिस्तान के निर्माण के लिए राजनीतिक आधार तैयार किया।
  • लाहौर प्रस्ताव एक धुरी बिंदु था जिसने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र के विचार को औपचारिक रखा और मुस्लिम लीग की उस वक्त की राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा था।
  • यह प्रस्ताव स्पष्ट रूप से संघवाद या सांझा भारत के विपरीत था, क्योंकि यह मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों को पूर्ण स्वायत्तता और संप्रभुता देने की मांग करता था।
  • हालांकि यह प्रस्ताव कुछ हद तक अस्पष्ट था, लेकिन इसे मुस्लिम लीग के लिए एक निर्णायक लक्ष्य के रूप में देखा गया जिसने स्वतंत्रता संग्राम के आखिरी चरण में मुसलमानों की मांगों को मजबूती दी।​

3. मुस्लिम लीग की स्थापना निम्नलिखित में से किस वर्ष में हुई थी ? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 1906
Solution:
  • अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसंबर 1906 को ढाका (तत्कालीन ब्रिटिश भारत) में हुई थी।
  • इसकी स्थापना नवाब सलीमुल्लाह खान, आगा खान III, और मोहसिन-उल-मुल्क जैसे नेताओं ने की थी।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीय मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके राजनीतिक हितों को बढ़ावा देना था।
  •  मुस्लिम लीग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उस समय भारतीय मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करना और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना था।
  • इसकी स्थापना का आंदोलन बंगाल विभाजन (1905) से जुड़ा था, जिसका मकसद मुस्लिम बहुल पूर्वी बंगाल को एक अलग राजनीतिक इकाई बनाना था।
  • मुस्लिम लीग के प्रमुख संस्थापकों में ढाका के नवाब सलीमुल्ला खान (सलीम उल्ला खान), नवाब आगा खान और नवाब मोहसिन-उल-मुल्क शामिल थे।
  • आगा खान मुस्लिम लीग के पहले अध्यक्ष थे। इस संगठन ने शुरू में अंग्रेजों का समर्थन प्राप्त किया, लेकिन बाद में स्वशासन और मुस्लिम समुदाय के विशेष राजनीतिक हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
  • 1913 में मुहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम लीग में प्रवेश किया और इसका नेतृत्व संभाला। 1940 में लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग की, जो बाद में 1947 में भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना का आधार बनी।
  • मुस्लिम लीग का गठन भारतीय मुसलमानों की राजनीतिक एकता और अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  •  इसके संस्थापक नेताओं ने इसे एक प्रभावशाली राजनीतिक दल के रूप में विकसित किया जो आगे चलकर भारत के विभाजन में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला बना.

4. अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना किस वर्ष हुई थी ? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 1906
Solution:
  • जैसा कि ऊपर बताया गया है, अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई थी।
  • इसकी स्थापना का कारण ब्रिटिश भारत में मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए एक समर्पित राजनीतिक मंच की आवश्यकता महसूस करना था
  • विशेष रूप से बंगाल विभाजन (1905) की पृष्ठभूमि में।
  • यह एक प्रमुख राजनीतिक संगठन था जिसका मुख्य उद्देश्य उस समय के भारतीय मुसलमानों के राजनीतिक और सामाजिक हितों की रक्षा करना था।
  • इसे ब्रिटिश भारत में मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों की सुरक्षा के लिए स्थापित किया गया था।
  • इस लीग का गठन ढाका के नवाब सलीम उल्ला खान के नेतृत्व में हुआ था, और इसके संस्थापक नेताओं में नवाब आगा खान, नवाब मोहसिन-उल-मुल्क इत्यादि प्रमुख थे।
  • आगा खान इस लीग के पहले राष्ट्रपति बने। लीग ने आरंभ में ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठा बढ़ाने और मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से काम किया।
  • यह संगठन ब्रिटिश सरकार से समर्थन भी प्राप्त करता था, लेकिन बाद में स्वशासन और मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करने लगा।
  • 1913 में मुहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम लीग में प्रवेश किया और इसे एक प्रभावशाली राजनीतिक दल बनाया। 1940 में लीग ने लाहौर अधिवेशन में पाकिस्तान की मांग को प्रस्तावित किया
  • जो भारतीय उपमहाद्वीप के 1947 के विभाजन और पाकिस्तान के गठन का आधार बना।
  • अखिल भारतीय मुस्लिम लीग भारतीय मुसलमानों की राजनीतिक एकता और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनके हितों का प्रतिनिधित्व करने वाला निर्णायक दल था।
  • इस प्रकार, अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ढाका में हुई थी और इसके गठन का उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था

5. अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने किस वर्ष देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 'स्वतंत्र राज्य' की मांग का प्रस्ताव पेश किया था? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 1940
Solution:
  • अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने 1940 में लाहौर प्रस्ताव के माध्यम से देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 'स्वतंत्र राज्य' की मांग का प्रस्ताव पेश किया था।
  • यह प्रस्ताव भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक जलविभाजन (watershed) साबित हुआ, जिसने अंततः 1947 में भारत के विभाजन को जन्म दिया।
  • इस प्रस्ताव में मुसलमानों के लिए एक अलग, स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की मांग की गई थी
  • जिसमें भारत के मुस्लिम बहुल क्षेत्र शामिल थे। यह प्रस्ताव मुसलमानों के अपने अलग राजनीतिक और सांस्कृतिक अस्तित्व की पहचान के लिए था और पाकिस्तान के भविष्य के निर्माण का बुनियादी दस्तावेज़ माना जाता है।
  • लाहौर प्रस्ताव के लेखक मोहम्मद जफरुल्लाह खान थे और इसे मुस्लिम लीग के नेता एके फजलुल हक ने प्रस्तुत किया था।
  • प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को एक अलग "स्वतंत्र राज्य" का दर्जा दिया जाना चाहिए
  • ताकि मुसलमानों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
  • इस प्रस्ताव ने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग को औपचारिक और व्यापक रूप दिया
  • जो बाद में 1947 में भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान के रूप में परिणित हुआ।
  • इससे पहले भी मुस्लिम समुदाय के कुछ विचारकों ने मुसलमानों के लिए अलग राजनीतिक पहचान की बात की थी
  • जैसे कि 1933 में चौधरी रहमत अली ने "पाकिस्तान" नाम का शब्द प्रयोग करते हुए भारत के कुछ उत्तरी इलाकों को गठित एक मुस्लिम राज्य की मांग की थी।
  • लेकिन मुस्लिम लीग का 1940 का प्रस्ताव ही पहला ऐसा राजनीतिक प्रस्ताव था जिसमें औपचारिक रूप से पूरे उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाके एक स्वतंत्र राज्य की मांग के लिए संगठित हुए।
  • इस प्रकार, अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने 1940 के लाहौर सत्र में यह प्रस्ताव पेश किया था
  • जो मुसलमानों के लिए एक अलग राजनीतिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की मांग और पदाधिकारीककरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
  • यह प्रस्ताव अंततः भारत के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को लेकर "पाकिस्तान" के निर्माण की नीव बना.​