मूल अधिकार (भारतीय राजव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 30

1. चूंकि पूर्ण समानता असंभव है। इसलिए भारतीय संविधान का ....... समानता के अधिकार से संबंधित है और कानून की समान सुरक्षा उचित वर्गीकरण के अधीन है। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 14
Solution:
  • चूंकि पूर्ण समानता असंभव है। इसलिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार से संबंधित है
  • कानून की समान सुरक्षा उचित वर्गीकरण के अधीन है।
  • अनुच्छेद 14 में दो भाग हैं: "कानून के समक्ष समानता" (Equality before Law) और "कानूनों का समान संरक्षण" (Equal Protection of Laws)।
  • "कानूनों का समान संरक्षण" का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि राज्य समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करे।
  • यह राज्य को वैध आधारों पर लोगों को वर्गीकृत करने की अनुमति देता है, जिसे उचित वर्गीकरण कहा जाता है
  • जिससे समाज में वास्तविक समानता स्थापित की जा सके।
  • सारांश
    • यह मौलिक अधिकार है और राज्य द्वारा विधियों के निर्माण या प्रकट भेदभाव को रोکتا है.​
    • अनुच्छेद 14 का मूल विचार: कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण—दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं
    • भेदभावपूर्ण कानून न बनें और हर नागरिक को समान सुरक्षा मिले। इसका केंद्रबिंदु यह है
    • वर्गीकरण (classification) उचित होना चाहिए, ताकि सामान्य हितों और सामाजिक उद्देश्य को संतुलित किया जा सके.​
    • अनुच्छेद 14 बनाम अन्य समानता प्रावधान: अनुच्छेद 14 संपर्क में है उन अन्य प्रावधानों के साथ जिन्हें समानता के अन्य आयामों के लिए रखा गया है
    • जैसे अनुच्छेद 15 (जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव पर रोक) और अनुच्छेद 16 (सरकारी अवसरों में समानता)
    • ये सभी संविधान के समन्वित ढांचे का हिस्सा हैं
    • ताकि समानता के मानदंड व्यापक होते हुए भी स्पष्ट और न्यायसंगत रहें.​
  • विस्तार: अनुच्छेद 14 की मौलिक बातें
    • कानून के समक्ष समानता: राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के अतंर्गत समान स्थिति में रखेगा और किसी के साथ कानून के भीतर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
    • इसका उद्देश्य कानून के लागू होने के समय सभी नागरिकों के लिए एक ही मानक सुनिश्चित करना है।
    • यह अधिकार नागरिकों और विदेशी व्यक्तियों दोनों पर लागू होता है
    • कानूनी संस्थाओं या कंपनियों जैसे कानूनी व्यक्तियों पर भी समान रूप से लागू होता है.​
    • कानून का समान संरक्षण: कानून सभी के लिए समान कानूनन सुरक्षा प्रदान करेगा; भेदभावपूर्ण या अनुचित कानून नहीं बनेंगे।
    • यह विचार यह सुनिश्चित करता है कि किसी के विरुद्ध कानून के दायरे में अलग-अलग परिणाम न निकलें और न ही किसी विशेष वर्ग के पक्ष में कानून का विशेष सुरक्षा या विशेषाधिकार दिया जाए।
    • यह केवल उपायों के साथ समान संरक्षण के सिद्धांत को ध्यान में रखता है, न कि हर स्थिति में समान परिणाम की मांग से जुड़ा है.​
    • “कानून के समक्ष समानता” बनाम “समान परिणाम”: अनुच्छेद 14 कहता है
    • समानता का अधिकार उपायों की समानता है, न कि सभी परिस्थितियों में समान परिणाम की गारंटी।
    • इसका मतलब है कि वैधानिक वर्गीकरण या अच्छे कानून बनाने के लिए वैध आधारों पर भिन्नताओं को स्वीकार किया जा सकता है
    • यह वर्गीकरण योग्यता, क्षमता, सामाजिक उद्देश्य और प्रभावी उद्देश्य पर आधारित हो और आवश्यकतानुसार न्यायपूर्ण हो.​
  • इत्यादि संवैधानिक संदर्भ
    • अनुच्छेद 14 के साथ अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 मिलकर भारत में सामाजिक-आर्थिक समानता के प्रबल ढांचे का निर्माण करते हैं।
    • अनुच्छेद 15 नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव से रोकता है
    • जबकि अनुच्छेद 16 सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में समानता की गारंटी देता है।
    • इन प्रावधानों के साथ अनुच्छेद 14 एक समन्वित ढांचा प्रस्तुत करता है
    • ताकि समानता के सिद्धांत विभिन्न आयामों में क्रियाशील रहे.​

2. संपत्ति के अनिवार्य अर्जन (Acquisition) से संबंधित अनुच्छेद अब भारतीय संविधान से हटा दिया गया है। इस अनुच्छेद की संख्या क्या है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 31
Solution:
  • संपत्ति के अनिवार्य अर्जन (Acquisition) से संबंधित अनुच्छेद जो अब भारतीय संविधान से हटा दिया गया है, वह है 31
  • मूल रूप से अनुच्छेद 31 संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) में शामिल था और संपत्ति के अधिकार की गारंटी देता था।
  • इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया था।
  • संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300A के तहत एक संवैधानिक (कानूनी) अधिकार है
  • जो राज्य को कानून के अधिकार के बिना किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित न करने का प्रावधान करता है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 31 संपत्ति के अनिवार्य अर्जन (compulsory acquisition of property) से संबंधित था
  • जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा हटा दिया गया।
  • यह अनुच्छेद मूल रूप से मौलिक अधिकारों के भाग (भाग III) में शामिल था और संपत्ति के अधिकार को गारंटी देता था
  • लेकिन भूमि सुधारों और सार्वजनिक हित में अधिग्रहण की प्रक्रियाओं से उत्पन्न विवादों के कारण इसे मौलिक अधिकार के दर्जे से हटा दिया गया.​
  • हटाए जाने का इतिहास
    • 44वें संशोधन (1978) ने अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 को पूरी तरह निरस्त कर दिया
    • जिसके फलस्वरूप संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से बाहर हो गया।
    • इसका मुख्य कारण भूमि सुधार कानूनों (जैसे जमींदारी उन्मूलन) को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (जैसे बेलारी हग्गू बनाम तमिलनाडु राज्य) में चुनौती मिलना था
    • जहां अदालत ने अधिग्रहण के लिए "उचित मुआवजा" की अनिवार्यता पर जोर दिया।
    • संशोधन ने इसे संवैधानिक अधिकार बना दिया, जो अब अनुच्छेद 300A के अंतर्गत आता है
    • किसी व्यक्ति को उसके अधिकार के बिना विधि द्वारा उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा".​
  • वर्तमान स्थिति और अनुच्छेद 300A
    • अनुच्छेद 300A ने संपत्ति के अधिकार को संरक्षित रखा, लेकिन यह अब अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन) के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दिया जा सकता।
    • राज्य सार्वजनिक उद्देश्य (जैसे सड़क, रेलवे निर्माण) के लिए भूमि अधिग्रहण कर सकता है
    • लेकिन कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। मुआवजा अब कानून द्वारा निर्धारित होता है
    • जैसे भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में चार गुना बाजार मूल्य का प्रावधान.

3. निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में, "मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाले कानूनों" का उल्लेख किया गया है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 13
Solution:
  • मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाले कानूनों" का उल्लेख अनुच्छेद 13 में किया गया है।
  • अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का आधार है।
  • यह घोषणा करता है कि संविधान के प्रारंभ से पहले या बाद में बनाए गए सभी कानून
  • जो मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं या उन्हें कम करते हैं, उस सीमा तक शून्य (void) माने जाएंगे।
  • यह प्रावधान मौलिक अधिकारों को सरकार की विधायी और कार्यकारी शक्ति से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • विस्तृत विवरण
    • अनुच्छेद 13 भारतीय संविधान का वह मूल प्रावधान है
    • जो मौलिक अधिकारों के विरुद्ध या उनके अनुप्र conséquent अल्पीकरण करने वाले सभी कानूनों को अमान्य ठहराता है।
  • इसके प्रमुख बिंदु:
    • 13(1): मौलिक अधिकारों के विरुद्ध कानून या प्रावधान असंगत हो तो वे शून्य माने जाएंगे।
    • 13(2): संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए किसी भी अधिनियम के वे भाग जो मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हों
    • उन्हें संपूर्ण अधिनियम से अलग कर दिया जा सकता है
    • केवल असंगत भाग-स्तर को अवैध घोषित किया जा सकता है
    • पूरे अधिनियम को अवैध कर देना चाहिए, जब तक कि अधिनियम के मूल उद्देश्य पर आघात न हो।
    • 13(3): यदि किसी मौलिक अधिकार की सुरक्षा को प्रभावित करने वाला कोई प्रावधान अन्य किसी भाग में निहित हो तो ऐसे भाग को भी वैधानिक नहीं माना जाएगा, और अदालत उस स्थिति में आवश्यकतानुसार अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
    • साथ ही, अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक नियंत्रण स्थापित करता है
    • कानूनों के व्यवहार से अधिकारों की हानि न हो।
  • अन्य संबंधित नोट
    • अनुच्छेद 13 के अंश अक्सर मौलिक अधिकारों के साथ असंगत कानूनों के परीक्षण, उदा.
    • असंगति के सिद्धांत” (doctrine of severability) और “विधि के सामने समानता” जैसे विषयों के साथ भी जुड़ते हैं
    • जो न्यायिक समीक्षा के दायरे को स्पष्ट करते हैं। यह न्यायालयों को यह अनुमति देता है
    • वे कानून के वैध भागों को बनाए रखते हुए असंगत हिस्सों को निरस्त कर दें, ताकि संविधान की मूल सुरक्षा बनी रहे ।​
    • किसी परीक्षा/टेस्ट के संदर्भ में, अक्सर प्रश्न आता है: मौलिक अधिकारों से असंगत कानून कौन-सा अनुच्छेद है? सही उत्तर अनुच्छेद 13 है ।​

4. निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में "शोषण के विरुद्ध अधिकार" का उल्लेख है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 12 मई, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली), MTS (T-1) 23 नवंबर, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 24 नवंबर, 2023 (I-पाली), कांस्टेबिल GD 18 फरवरी, 2019 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 23-24
Solution:
  • "शोषण के विरुद्ध अधिकार" का उल्लेख अनुच्छेद 23-24 में है।
  • अनुच्छेद 23 मानव तस्करी (Human Trafficking) और बेगार (Forced Labour) या अन्य प्रकार के जबरन श्रम को प्रतिबंधित करता है।
  • अनुच्छेद 24 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य खतरनाक रोजगारों में नियोजित करने पर रोक लगाता है
  • जिसे बाल श्रम पर प्रतिबंध कहा जाता है।
  • विस्तारपूर्ण उत्तर
    • अनुच्छेद 23: शोषण के विरुद्ध मौलिक अधिकार का केंद्र बिंदु है
    • यह स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी रूप से मानव तस्करी, जबरन श्रम और बेगार जैसे व्यवहारों पर रोक लगाता है
    • यह राज्य को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अनिवार्य सेवा लागू करने की शक्ति देता है
    • बशर्ते ऐसी सेवा में धर्म, नस्ल, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो
    • यह अनुच्छेद नागरिकों के साथ-साथ गैर-नागरिकों पर भी लागू हो सकता है
    • निजी व्यक्तियों से सुरक्षा प्रदान करने के प्रयोजन को भी संबोधित करता है
    • [उद्धरण/स्रोत के संकेत: अनुच्छेद 23 की परिभाषा एवं व्याख्या पर चर्चा वाले लेख]​
    • अनुच्छेद 24: कारखानों, खानामों, दुकानों आदि में चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों के रोजगार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है
    • यह बच्चों के शोषण और छोटे बच्चों के शारीरिक/मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है
    • [उद्धरण/स्रोत के संकेत: अनुच्छेद 24 का स्वरूप और उद्देश्य]​
    • संयुक्त पंक्ति के स्पष्ट निष्कर्ष: शोषण के विरुद्ध अधिकार वास्तव में अनुच्छेद 23 (जबरन या अवांछित श्रम, मानव तस्करी आदि) और अनुच्छेद 24 (बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध) के संयुक्त सिद्धांत हैं
    • जिन्हें कई अध्ययन/प्रश्नोत्तर स्रोतों में इस प्रकार उद्धृत किया गया है
    • उदाहरण के रूप में TestBook आदि स्रोतों में लिखा गया है
    • सही उत्तर अनुच्छेद 23 और 24 ही हैं [उद्धरण: स्रोतों के समानार्थी विवरण]​
  • ध्यान दें
    • ऊपर दिए गए अनुच्छेदों के दायरे और उनके व्यावहारिक प्रभाव संविधानिक न्याय और रोजगार-प्रथाओं के क्षेत्र में स्पष्ट रूप से बताये जाते हैं
    • यदि चाहें, तब इन अनुच्छेदों के लाभार्थियों के रूपरेखा, अदालत के निर्णयों (जैसे मानव तस्करी/बेगार से संबंधित मामलों) और भारतीय समाज
    • नियोजन पर उनके प्रभावों का विश्लेषण विस्तृत रूप से दिया जा सकता है
    • [उद्धरण/स्रोत: सामान्य कानूनी विश्लेषण स्रोत]​

5. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के संविधान में एक मौलिक अधिकार है? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) स्वतंत्रता का अधिकार
Solution:
  • भारत के संविधान में एक मौलिक अधिकार  स्वतंत्रता का अधिकार है।
  • स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक वर्णित है।
  • इसमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण जमाव की स्वतंत्रता, संघ बनाने की स्वतंत्रता, भारत के पूरे क्षेत्र में घूमने की स्वतंत्रता आदि शामिल है।
  • मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, जबकि 'अवसरों का अधिकार' समानता के अधिकार (अनुच्छेद 16) का हिस्सा है
  • 'रोजगार का अधिकार' राज्य के नीति निदेशक तत्वों से संबंधित है।
  • सारांश
    • भारत के संविधान में मौलिक अधिकार छः प्रमुख अधिकारों का समूह है, जो संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक व्यवस्था किए गए हैं।
    • ये नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शोषण से सुरक्षा, धर्म-स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षणिक अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करते हैं.​
    • ये अधिकारoble प्रावधान हैं और न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत सीमाओं के साथ लागू होते हैं
    • कुछ अधिकार किसी स्पेशल कानून के तहत प्रतिबंधित या सीमित हो सकते हैं
    • परन्तु इस प्रतिबन्ध की सार्वजनिक नीति और तार्किकता पर निरंतर न्यायिक गिरहें लागू होती हैं.​
    • मौलिक अधिकार क्या हैं
    • मौलिक अधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत वे अधिकार हैं जो प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र, समान और सम्मानित जीवन के लिए आवश्यक ठहराते हैं
    • इन अधिकारों की सुरक्षा राज्य द्वारा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है
    • यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है
    • तो वह न्यायालय से संवैधानिक उपचार (जैसे habeas corpus, mandamus आदि) मांग सकता है.​
  • मुख्य छह मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 14-32 के अंतर्गत)
    • समानता का अधिकार (Article 14-18): कानून के समक्ष समानता, भेदभाव के खिलाफ अधिकार, सार्वजनिक अवसरों में समान पहुंच आदि।
    • इसमें विशेषकर Article 14 (कानून के समक्ष समानता) और Article 15-18 शामिल हैं
    • जो धार्मिक, जाति, लिंग आदि आधारों पर भेदभाव पर रोक लगाते हैं.​
    • स्वतंत्रता का अधिकार (Article 19-22): अभिव्यक्ति, शांतिपूर्णassembly, संगठनों के गठन, प्रवेश-नियंत्रण आदि से जुड़ा अधिकार; साथ ही जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं.​
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (Article 23-24): सार्वजनिक स्थानों पर समान अधिकार और बाल श्रम/जबरन श्रम के विरुद्ध protections के प्रावधान.​
    • धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Article 25-28): धार्मिक आस्थाओं और आचार-संहिता की स्वतंत्रता, धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन आदि पर नियंत्रण से जुड़े प्रावधान.​
    • सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार (Article 29-30): किसी भी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, भाषा-भेष-धर्म के अनुयायियों के सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में संरक्षण.​
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Article 32): मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में न्यायिक उपचार का अधिकार; इसे “कानून के अनुसार संवैधानिक उपचार” भी कहा जाता है.​
  • आपके प्रश्न के संभावित विकल्प
    • भारत के संविधान में मौलिक अधिकार वास्तव में छह ही मौलिक अधिकार हैं
    • समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार, और संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
    • कुछ स्रोतों में “संपत्ति का अधिकार” को मौलिक अधिकार के रूप में नहीं गिना गया है
    • क्योंकि संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 31 के अंतर्गत था और 1973 के 44वें संविधान संशोधन के बाद इसे मौलिक अधिकार नहीं माना गया
    • यह एक अन्य प्रकार का अधिकार बनकर कानून के अंतर्गत परिभाषित किया गया है, न कि मौलिक अधिकार के रूप में.​
    • अतः यदि विकल्पों में संपत्ति का अधिकार है, तो वह मौलिक अधिकार नहीं है।
    • अन्य पांच मौलिक अधिकारों की गिनती और उनके अनुच्छेद स्पष्ट रूप से अनुबंधित हैं.​
  • महत्वपूर्ण नोट
    • मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में उच्च न्यायालयों के पास न्यायिक उपचार के विभिन्न उपाय उपलब्ध हैं
    • जैसे कि Writs (Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition आदि) ताकि नागरिकों के अधिकार संरक्षित रह सकें.​
    • समाजिक-आर्थिक परिवर्तन के साथ समझौते और चिह्नित प्रावधान भी कानूनी और नीतिगत विकास के साथ विकसित होते रहे हैं
    • उदाहरण स्वरूप संविधान के अनुच्छेदों के पाठ में समयानुसार व्याख्या और संशोधन भी संभव हैं.

6. 42वें संशोधन द्वारा भारत के संविधान में कितने मौलिक कर्तव्य शामिल किए गए हैं? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 10
Solution:
  • 42वें संशोधन (1976) द्वारा भारत के संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य शामिल किए गए थे।
  • ये कर्तव्य स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर जोड़े गए थे।
  • इन्हें संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के तहत सूचीबद्ध किया गया था।
  • बाद में, 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और (11वां) मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दस कर्तव्य
    • देश के प्रति सम्मान और राष्ट्रगान/राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना।
    • समानता और सामाजिक समता के लिए प्रयास करना।
    • नागरिकता के सिद्धांतों के अनुरूप आचरण रखना।
    • संविधान, राष्ट्रीय ध्वज, और राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान करना।
    • शासन संस्थाओं और आदर्शों के प्रति निष्ठा दिखाना।
    • कानून का पालन करना और संविधान की गरिमा बनाए रखना।
    • अन्य लोगओं के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करना।
    • सामाजिक न्याय और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए कोशिश करना।
    • पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना।
    • भाईचारा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना।
  • इतिहास और संदर्भ
    • 42वां संशोधन, तत्कालीन आपातकालीन समय में किया गया एक व्यापक संशोधन-पैक था और इसे “मिनी-संविधान” के रूप में भी जाना जाता है
    • जिससे संरचना और शक्तियों में कई परिवर्तन भी किए गए।
    • यह मूलतः संविधान के भाग I-VI/अनुच्छेदों में संशोधन लेकर आया, पर मौलिक कर्तव्यों के प्रावधान अनुच्छेद 51A के अंतर्गत स्थिर रहे।
  • महत्त्व
    • मौलिक कर्तव्य संविधान में मौलिक अधिकारों की तरह अदालतों के द्वारा सीधे लागू नहीं होते
    • परन्तु नागरिकों के आचरण और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा तय करते हैं।
    • इन कर्तव्यों के पालन का महत्त्व सामाजिक अनुशासन और राष्ट्र-निर्माण के दायित्वों में निहित है।

7. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद सभी धर्मों के लोगों को अपने धर्म के मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता देता है? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 8 मई, 2023 (II- पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 26
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 सभी धर्मों के लोगों को अपने धर्म के मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता देता है।
  • यह अनुच्छेद धार्मिक संप्रदायों को धार्मिक और धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना और रखरखाव, अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने, चल और अचल संपत्ति के अधिग्रहण और स्वामित्व का अधिकार प्रदान करता है।
  • यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
  • संक्षिप्त विवरण
    • यह अधिकार किसी भी धर्म के लिए समान रूप से लागू होता है और किसी एक धार्मिक समूह पर विशेष ऊँच-नीच नहीं करता।
    • यह स्वतंत्रता संविधान के धर्म-स्वतंत्रता (freedom of religion) के भीतर आता है, जो अनुच्छेद 25 से 28 तक विस्तृत है।
    • अनुच्छेद 26 के तहत प्रबंधन की स्वतंत्रता केवल धार्मिक-आचार-व्यवस्था
    • धार्मिक संस्थाओं के चलन-धारण और उनके प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों तक सीमित है
    • सार्वजनिक आदेश/ नैतिकता/स्वास्थ्य जैसे सीमाओं के भीतर आ सकती है।
  • बैकग्राउंड और संदर्भ
    • अन्य संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 25 से 28 तक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकारों को विस्तृत करता है
    • अनुच्छेद 25 धर्म की आंतरिक स्वतंत्रता और प्रचार-प्रसार की स्वतंत्रता देता है
    • जबकि अनुच्छेद 27 और 28 जैसी धाराओं से धार्मिक शिक्षा, कर-धारणा और संस्थागत प्रबंधन के साथ एक विशेष संरचना निर्मित होती है।
    • यह संयोजन एक सेकुलर राज्य के तौर पर सभी धर्मों के सम्मान और समानता को सुनिश्चित करता है ।​
  • महत्वपूर्ण बिंदु
    • अनुच्छेद 26 केवल “धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता” देता है
    • यह अधिकार समुदायों के स्व-प्रबंधन के अधिकार के रूप में माना जाता है
    • परन्तु यह कानूनों/निर्णयों से मुक्त नहीं है
    • सार्वजनिक शिष्टाचार के दायरे में रहता है ।​
    • यह अनुच्छेद धर्मनिरपेक्ष राज्य के सिद्धांत के साथ संगत है
    • जो सभी धर्मों को समान दर्जा देकर उनके अधिकारों का संरक्षण करता है ।​

8. बच्चों की शिक्षा से संबंधित अंतिम उप-धारा (k) 2002 में मौलिक कर्तव्यों के एक भाग के रूप में जोड़ी गई थी। इस संशोधन को संविधान में ....... के तहत शामिल किया गया था। [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 21A
Solution:
  • बच्चों की शिक्षा से संबंधित अंतिम उप-धारा (k) 2002 में मौलिक कर्तव्यों के एक भाग के रूप में जोड़ी गई थी
  • इस संशोधन को संविधान में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत शामिल किया गया था
  • जिसका उद्देश्य अनुच्छेद 21A को जोड़ना भी था।
  • उप-धारा अनुच्छेद 21A के साथ घनिष्ठ रूप से संबंधित है।
  • 86वें संशोधन ने अनुच्छेद 21A को एक मौलिक अधिकार बनाया और उसी समय अनुच्छेद 51A में उप-धारा (k) जोड़ी गई
  • जिसके तहत माता-पिता को अपने 6 से 14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य सौंपा गया।
  • क्या जोड़ा गया और कहाँ
    • मौलिक अधिकार बनाम DPSP: 21A के आगमन से शिक्षा 6–14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए एक बाध्यता के रूप में स्थापित हो गई
    • यह मौलिक अधिकार बन गया, जबकि पूर्व में शिक्षा पर शासन के निर्देशात्मक सिद्धांत (DPSP) थे
    • DPSP में परिवर्तन 45वां संशोधन के अंतर्गत पहले से समाजिक-जनहित के तत्व जोड़े जाते रहे हैं ।​
    • 51A(k) का कर्तव्य: अनुच्छेद 51A(k) विस्तार में शामिल किया गया कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है
    • वह अपने बच्चों/आश्रितों को शिक्षा के अवसर प्रदान करे ।​
  • परिणाम और प्रभाव
    • शिक्षा का अधिकार बनाम अन्य अधिकार: अनुच्छेद 21A के अंतर्गत 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया
    • जबकि यह अधिकार शिक्षा से जुड़ी नीति-निर्माण और बजट-निर्धारण पर भी प्रभाव डालता है ।​
    • शिक्षा से जुड़े कानून: 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) पारित हुआ
    • जिसने 21A के प्रावधानों को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए विस्तृत प्रावधान दिए
    • जैसे नेट-प्रॉपर शिक्षा प्रावधान, अनुपस्थित बच्चों के लिए सुधार आदि ।​
  • पुराने और नए मौलिक कर्तव्य का तुलनात्मक दृष्टिकोण
    • 42वें संशोधन (1976) से पहले मौलिक कर्तव्य 10 थे
    • 42वें संशोधन के साथ 10 मौलिक कर्तव्य बनाए गए और 11वां मौलिक कर्तव्य 2002 में जोड़ा गया ताकि शिक्षा के अधिकार को मजबूत किया जा सके
    • 86वां संशोधन 2002 ने 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा, जो बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने को नागरिक के मौलिक कर्तव्य के रूप में परिभाषित करता है ।​
  • संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु
    • यह शिक्षा के अधिकार के दायरे में आने वाले निर्णयों और नीतियों के विकास के लिए एक कानूनी आधार बनाता है
    • जैसे कि 6–14 आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करना और सरकार के DPSP से जुड़े दायित्वों को मजबूत करना ।​
    • इस संशोधन के बाद शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत 21A का व्यापक प्रभाव रहा है
    • 2009 के आरटीई अधिनियम ने इसे व्यावहारिक रूप से लागू किया ।​

9. निम्न में से किस अनुच्छेद में शामिल मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 21A के समान है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 51A (k)
Solution:
  • जिस अनुच्छेद में शामिल मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 21A के समान है, वह है अनुच्छेद 51A (k)
  • अनुच्छेद 21A (एक मौलिक अधिकार) 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 51A (k) (एक मौलिक कर्तव्य) प्रत्येक माता-पिता या अभिभावक पर यह कर्तव्य डालता है
  • वह 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
  • दोनों प्रावधान 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़े गए थे, जो शिक्षा को एक साझा जिम्मेदारी बनाता है।
  • अनुच्छेद 21A और 51A (k) का संयुक्त स्वरूप
    • अनुच्छेद 21A: हर six से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करना।
    • यह प्रावधान 2002 के संविधान संशोधन (86th Amendment) द्वारा जोड़ा गया और इसे शिक्षा का अधिकार बताता है
    • जो समान अवसरों के आधार पर सभी के लिए शिक्षा का लक्ष्य निर्धारित करता है ।​
    • अनुच्छेद 51A (k): माता-पिता या अभिभावक पर यह दायित्व है कि वे अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
    • यह मौलिक कर्तव्यों में से एक है, और 11 मौलिक कर्तव्यों की सूची में आता है।
    • यह शिक्षा के अधिकार के कार्यान्वयन को कानूनी रूप से समर्थ बनाता है
    • विशेषकर बच्चों की शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समाज और राज्य की भूमिका को रेखांकित करता है ।​
  • तात्पर्य और विश्लेषण
    • अनुच्छेद 21A के मौलिक अधिकार होने के नाते शिक्षा एक अधिकार है
    • जिसे राज्य के द्वारा सुरक्षित और प्रदत्त किया जाना चाहिए
    • जबकि अनुच्छेद 51A (k) एक मौलिक कर्तव्य के रूप में नागरिकों (विशेषकर माता-पिता/अभिभावक) पर यह दबाव डालता है
    • शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएं। इस प्रकार, अनुच्छेद 21A और 51A (k एक-दूसरे के पूरक हैं
    • मिलकर शिक्षा के पूर्ण सामाजिक संदर्भ को बनाते हैं: अधिकार बनाम कर्तव्य) ।​
  • अन्य संदर्भ जो साझा करता है (यदि आप चाहें, deeper विवरण के लिए)
    • मौलिक कर्तव्य 51A के अन्य तत्व भी इस कर्तव्य-आधार को साझा करते हैं
    • जैसे धर्म, भाषाई विविधता, सांस्कृतिक विरासत आदि पर नागरिकों के कर्तव्य। यह दिखाता है
    • संविधान शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय जैसी व्यापक दृष्टि से नागरिकों के कर्तव्यों को कैसे संरचित करता है ।​
    • गोपालन मामले आदि में अनुच्छेद 21 की व्याख्या को देखते हुए जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संरक्षण के साथ शिक्षा के अधिकार का परस्पर संबंध भी समाहित रहता है
    • क्योंकि शिक्षा और शिक्षा तक पहुँच जीवन की गुणवत्ता और स्वतंत्रता के व्यापक विकसन में सहायक होती है ।

10. संस्कृति व शिक्षा के अधिकार का उद्देश्य क्या है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अल्पसंख्यक समुदायों की भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा करना
Solution:
  • संस्कृति व शिक्षा के अधिकार का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा करना है।
  • यह अधिकार अनुच्छेद 29 और 30 के तहत प्रदान किया गया है।
  • अनुच्छेद 30 विशेष रूप से भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है
  • ताकि वे अपनी विशिष्ट संस्कृति और पहचान को संरक्षित और विकसित कर सकें।
  • अनुच्छेद 29 का उद्देश्य
    • अनुच्छेद 29(1) भारत के किसी भाग में रहने वाले नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है
    • उसे बनाए रखने का अधिकार प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक पहचान को अस्मिलेशन से बचाना और समुदायों को अपनी परंपराओं को जीवित रखने की स्वतंत्रता देना है
    • जो सभी नागरिकों पर लागू होता है न कि केवल अल्पसंख्यकों पर।
    • अनुच्छेद 29(2) राज्य-प्रायोजित या सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों में धर्म, जाति, भाषा या मूलवंश के आधार पर प्रवेश में भेदभाव निषेध करता है
    • जिससे समान अवसर सुनिश्चित होते हैं।​
  • अनुच्छेद 30 का उद्देश्य
    • अनुच्छेद 30(1) धर्म या भाषा आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी पसंद की शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है।
    • इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों को अपनी सांस्कृतिक विरासत, भाषा और मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम प्रदान करना है
    • ताकि वे मुख्यधारा में विलीन हुए बिना अपनी पहचान बनाए रख सकें।
    • अनुच्छेद 30(1A) ऐसी संस्थाओं की संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण पर उचित मुआवजा सुनिश्चित करता है
    • जबकि 30(2) राज्य सहायता में भेदभाव रोकता है।​
  • इन अधिकारों का व्यापक महत्व
    • ये अधिकार संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करते हैं
    • विशेषकर पंडित नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव से प्रेरित होकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
    • शिक्षा को सांस्कृतिक संरक्षण का साधन मानते हुए, ये विविधता को राष्ट्रीय एकता का आधार बनाते हैं
    • राज्य को हस्तक्षेप सीमित रखने का आदेश देते हैं।
    • प्रमुख मामलों जैसे टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य ने इनकी व्याख्या की
    • जिसमें संस्थानों को स्वायत्तता दी गई लेकिन राष्ट्रीय हितों का पालन अनिवार्य किया।​​