मूल अधिकार (भारतीय राजव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 30

21. अस्पृश्यता निम्नलिखित में से किस मौलिक अधिकार के विरुद्ध है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) समानता का अधिकार
Solution:
  • अस्पृश्यता निम्नलिखित में से समानता का अधिकार के विरुद्ध है।
  • समानता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 में निहित है।
  • विशेष रूप से, अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके अभ्यास को निषिद्ध करता है।
  • अस्पृश्यता का अभ्यास जाति और जन्म के आधार पर असमानता को बढ़ावा देता है
  • इसलिए यह सीधे समानता के अधिकार के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
  • अनुच्छेद 17 का प्रावधान
    • अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता के किसी भी रूप में अभ्यास को निषिद्ध करता है
    • इससे उत्पन्न किसी भी अक्षमता को लागू करना कानून के अनुसार दंडनीय अपराध बताता है।
    • यह प्रावधान सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए मौलिक अधिकारों के भाग-3 (अनुच्छेद 12-35) में शामिल है
    • विशेष रूप से समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) के अंतर्गत।
    • अस्पृश्यता जैसी प्रथा जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है
    • जो अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) से भी जुड़ी है
    • लेकिन अनुच्छेद 17 इसका प्रत्यक्ष उन्मूलन करता है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारतीय संविधान सभा ने अस्पृश्यता को सामाजिक बुराई मानते हुए इसे मौलिक अधिकारों में शामिल किया
    • ताकि दलित और पिछड़े वर्गों को सार्वजनिक स्थानों, मंदिरों, कुओं आदि तक समान पहुंच मिले।
    • डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नेतृत्व में यह प्रावधान अपनाया गया
    • जो स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय की नींव रखता है।
    • इससे पहले, अस्पृश्यता सामाजिक बहिष्कार का कारण बनती थी
    • लेकिन संविधान ने इसे मौलिक अधिकारों के विरुद्ध रखकर राज्य को इसे समाप्त करने का दायित्व सौंपा।​
  • कार्यान्वयन और संबंधित कानून
    • अनुच्छेद 17 को लागू करने के लिए नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 बनाया गया
    • जो अस्पृश्यता के अपराधों जैसे सार्वजनिक स्थानों से वंचन या अपमान के लिए दंड निर्धारित करता है।
    • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 इसकी पूरक है
    • जो विशेष अदालतों और पीड़ितों के पुनर्वास का प्रावधान करती है।
    • इन अपराधों के दोषी को संसद या विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है
    • जो सामाजिक समानता को मजबूत करता है।​

22. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में उल्लेख किया गया है कि किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 20
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 में उल्लेख किया गया है कि किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
  • यह प्रावधान अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (Protection in respect of conviction for offences) का हिस्सा है।
  • अनुच्छेद 20(3) में कहा गया है कि "किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • इसे आत्म-अभिशंसन से संरक्षण (Protection against Self-Incrimination) कहा जाता है।
  • मुख्य बिंदु
    • अन्य न्यायप्रणालियों (जैसे नागरिक मामलों) या जांच के कुछ चरणों में इसकी व्याख्या परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकती है।
    • अनुच्छेद 20(3) का उद्देश्य accused personen को अपने पक्ष के खिलाफ गवाही देकर खुद को अत्यधिक दबाव में न डालना है
    • ताकि न्यायप्रिय प्रक्रिया बनी रहे।
  • विस्तार और व्याख्या
    • संवैधानिक सुरक्षा: भारत के संविधान का अनुच्छेद 20(3) अदालती प्रक्रिया में आरोपी को सीधे-सीधे असत्य या गलत गवाही देने के दायित्व से मुक्त रखता है
    • ताकि अभियुक्त स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए विवश न हो।
    • यह अधिकार अदालतों के द्वारा स्वतः लागू माना गया है और इसे व्यक्तिगत अधिकार माना गया है ।​
    • अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: समान सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध कराई जाती है
    • उदाहरण के लिए ICCPR की सामग्री में आत्म-ध्वंस से सुरक्षा का अवधारणा समान होती है
    • हालांकि भारतीय संविधान expressly केवल अनुच्छेद 20(3) तक सीमित है ।​
    • अन्य धाराओं से तुलना: अनुच्छेद 20(3) के अलावा अन्य अनुच्छेदों में भी कुछ रक्षा-उद्देश्य होते हैं
    • गवाह-बहस से सुरक्षा प्रमुख रूप से अनुच्छेद 20(3) से संबद्ध है ।​
  • क्या समझना आवश्यक है (क्विक नोट्स)
    • यह अधिकार केवल आरोपी पर लागू होता है
    • जो व्यक्ति दोषी साबित होने के जोखिम के साथ अदालत में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
    • यह मौलिक अधिकार है, और इसे अदालतें सामान्य प्रक्रियाओं में संरक्षित मानती हैं
    • जैसे कि पूछताछ के समय भी आत्म-गवाही न देने का अधिकार।
    • प्रयुक्त शब्दावली: “किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
    • यह सीधा, सरल और कानूनी भाषा में है।
  • उच्चारण/उद्धरण
    • अनुच्छेद 20(3) स्पष्ट प्रवचन है कि आरोपी को अपने विरुद्ध स्वयं के बारे में गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता ।​

23. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सभी नागरिकों को भारत के क्षेत्र के बाहर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार होगा।
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के बारे में सभी नागरिकों को भारत के क्षेत्र के बाहर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार होगा कथन सही नहीं है।
  • अनुच्छेद 19 मुख्य रूप से नागरिकों को छह स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है, जो भारत के क्षेत्र के भीतर लागू होती हैं।
  • अनुच्छेद 19(1)(d) भारत के क्षेत्र के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमने के अधिकार की बात करता है
  • भारत के क्षेत्र के बाहर। भारत के बाहर जाने का अधिकार अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत आता है।
  • अन्य विकल्प (b, c, d) अनुच्छेद 19 में स्पष्ट रूप से शामिल हैं।
  • हालाँकि, इन अधिकारों के साथ इसकी सीमाएं (restrictions) भी निर्धारित थीं
  • कुछ अधिकारों से पहले के कुछ प्रावधान बाद में बदल दिए गए या परिभाषित किए गए।
  • यह कथन कि 19(1) में सात अधिकार थे, सही है, परंतु उनके दायरे और लागू होने की स्थितियाँ समय-समय पर संशोधित होती रहीं ।​
  • नीचे अनुच्छेद 19 के प्रमुख बिंदु और संभावित गलत सूचनाओं की पहचान
    • सही अधिकारों की सूची: अनुच्छेद 19(1) के तहत नागरिक को निम्न अधिकार दिए गए थे:
    • भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
    • शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होना
    • संघ/संस्था बनाना
    • भारत के किसी भाग में निवास करने की स्वतंत्रता
    • जीवनयापन (जीविका अर्जन) और व्यवसाय/कैरियर चुनने की स्वतंत्रता
    • किसी भी प्रेस, प्रकाशन या संचार के माध्यम से सूचना पहुँचाने की स्वतंत्रता (आमतौर पर इकाइयों के माध्यम से संचार/प्रसारण)
    • कुछ अन्य विशिष्ट प्रकार की संवैधानिक स्वतंत्रताएँ जो 19(1)(e) से 19(1)(g) तक पूछे जाते हैं
    • इन अधिकारों के साथ राज्य को “उचित प्रतिबंध” लगाने का अधिकार भी अनुच्छेद 19(6) के अंतर्गत दिया गया है
    • ताकि सार्वजनिक सुरक्षा, नैतिकता, सुरक्षा और अन्य आवश्यकताओं के आधार पर बाधाएं लगाई जा सकें ।​
    • कौन सा कथन गलत हो सकता है: कुछ स्रोतों में यह गलत فهم बन सकता है कि 19(1) में “सात” अधिकार हैं
  • सभी निजी व्यक्ति/नागरिक के लिए बराबर सुरक्षित हैं। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि:
    • 19(1) में मूल अधिकार नाम रूप में छह या सात धाराएँ दिखती हैं
    • किन्तु न्यायिक विवेचनाओं और संशोधनों के कारण इन अधिकारों के दायरे में विविध स्पष्टताएँ और व्याख्याएं आ गईं
    • कुछ अधिकारों को अलग-अलग अनुच्छेदों/धाराओं से जोड़ा गया गया है (19(1)(a)–19(1)(g) के भीतर)।
    • इसके साथ 19(1) के अधिकार परमाणित नहीं हैं
    • राज्य द्वारा निर्धारित “उचित प्रतिबंध” (जैसे 19(6) आदि) के अधीन आते हैं।
    • इसका आशय यह है कि अधिकार पूर्ण नहीं होते और कुछ सीमाएं संभव हैं
    • यह एक सामान्य गलतफहमी हो सकती है कि अधिकार असीमित हैं ।​
  • अस्पष्ट/भ्रमित दावे जिन्हें सावधानी से समझना चाहिए:
    • “अनुच्छेद 19(1)(डी) भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र घूमने की स्वतंत्रता देता है”
    • यह कड़ियों में स्पष्ट है कि यह अधिकार 19(1)(d) के अंतर्गत है जो निवास और घूमने-फिरने की स्वतंत्रता देता है
    • परन्तु उचित प्रतिबंध लागू होते हैं (उदा., बॉर्डर नियंत्रण, सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा) ।​
    • “अनुच्छेद 19(1)(ई) में इब्राहिम वजीर बनाम बॉम्बे राज्य जैसे मामलों में निष्कासन/आगमन से जुड़े तथ्य
    • यह ऐतिहासिक केसों के विशिष्ट बिंदु हैं
    • परन्तु 19(1)(ई) का मूल आशय प्रायः आर्थिक/जीविका से संबंधित अधिकारों से है
    • न्यायिक निर्णयों में इन अधिकारों के उपयोग की दायरे को अलग ढंग से परिभाषित किया गया है ।​

24. संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार निम्नलिखित में से किसे समाप्त कर दिया गया है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास निषिद्ध है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अस्पृश्यता
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार निम्नलिखित में से अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया है
  • किसी भी रूप में इसका अभ्यास निषिद्ध है।
  • अनुच्छेद 17 समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • इसे लागू करने के लिए, संसद ने अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 (जिसे अब नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 कहा जाता है) पारित किया है।
  • अनुच्छेद 17 का उद्देश्य और दायरा
    • उद्देश्य: अनुच्छेद 17 भारत में अस्पृश्यता की प्रथा के उन्मूलन को औपचारिक रूप से स्थापित करता है
    • इसके अभ्यास पर पूरी तरह रोक लगाता है। इसके तहत अस्पृश्यता के कारण होने वाली किसी भी अक्षमता या भेदभाव को अवैध माना गया है।
    • यह मौलिक अधिकारों के भाग III के भीतर आता है
    • जो सभी नागरिकों को समान सुरक्षा और गरिमा प्रदान करने के लिए संरचना-निर्मित किया गया है ।​
    • दायरा: यह सिर्फ सामाजिक व्यवस्था से जुड़े व्यवहार नहीं, बल्कि अस्पृश्यता से उत्पन्न होने वाले किसी भी दुष्प्रभाव के लागूकरण (जैसे प्रवेश-गृह, सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध सेवाओं आदि से रोकना) को कानूनन दंडनीय बनाता है ।​
  • क्या समाप्त किया गया और क्या निषेध है
    • समाप्त किया गया: अस्पृश्यता की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है ।​
    • निषेध क्या है: किसी भी रूप में अस्पृश्यता का अभ्यास, प्रदर्शन, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में भेदभाव, या अस्पृश्यता से जुड़ी अक्षमता (जैसे किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश से रोकना) सभी निषेध हैं और इनके लिए दंड/जुर्माना तय किया गया है ।​
  • अनुपालन और दंड
    • संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुकूल दण्ड विधायिका द्वारा अस्पृश्यता के अपराधों के लिए दंड निर्धारित किया गया है
    • उदाहरण के तौर पर यह दंडित अपराध हो सकता है और इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है ।​
    • इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए अक्सर अन्य कानून भी साथ में कदम रखते हैं
    • जैसे सामाजिक सशक्तिकरण अधिनियम आदि, ताकि अस्पृश्यता के विरुद्ध सामाजिक और कानूनी दबाव बनाए रखा जा सके ।​
  • महत्त्वपूर्ण बिंदु
    • अस्पृश्यता सामाजिक भेदभाव का एक पुरानी परम्परा है
    • अनुच्छेद 17 इसे समाप्त करता है और सभी के लिए समान अवसर और गरिमा सुनिश्चित करता है ।​
    • अनुच्छेद 17 के अंतर्गत, अस्पृश्यता के उन्मूलन के साथ-साथ इसके किसी भी रूप में अभ्यास/उद्धोष प्रचलन को भी निषेध किया गया है
    • ताकि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा हो सके ।​
  • उपयोगी नोट्स
    • अगर आप किसी परीक्षा या अध्ययन के लिए तैयारी कर रहे हैं
    • तो अनुच्छेद 17 को अक्सर “अस्पृश्यता का उन्मूलन” के अंतर्गत पढ़ा जाता है
    • इसके साथ मौलिक अधिकारों के संरक्षण के दायरे में इसका स्थान समझना उपयोगी रहता है ।​
    • संबंधित कानूनों के पाठ और व्याख्या के लिए आधिकारिक या विश्वसनीय अध्ययन सामग्री देखना उचित रहेगा
    • ताकि प्रावधानों के शब्दों और दायरे में स्पष्टता बनी रहे ।​

25. निम्नलिखित में से कौन-सा, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में शामिल नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) रोजगार के संबंध में अपात्रता पर रोक लगाना
Solution:
  • निम्नलिखित में से रोजगार के संबंध में अपात्रता पर रोक लगाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में शामिल नहीं है।
  • रोजगार के संबंध में अपात्रता पर रोक (भेदभाव का निषेध) अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता) से संबंधित है, न कि अनुच्छेद 19 से।
  • विकल्प (a), (b), और (d) सभी अनुच्छेद 19(1) में दी गई छह मौलिक स्वतंत्रताओं का हिस्सा हैं:
  • (a) संघों का गठन: अनुच्छेद 19(1)(c)
  • (b) पेशा/व्यवसाय: अनुच्छेद 19(1)(g)
  • (d) रहना और बसना: अनुच्छेद 19(1)(e)
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में संपत्ति का अधिकार शामिल नहीं है
  • क्योंकि इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 19(1)(f) से हटा दिया गया था।
  • यह अनुच्छेद नागरिकों को छह प्रकार की स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है। नीचे पूर्ण विवरण दिया गया है।
  • अनुच्छेद 19 का प्रावधान
    • वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
    • शांतिपूर्वक और निहत्थे इकट्ठा होने की स्वतंत्रता।
    • संघों या समितियों का गठन करने की स्वतंत्रता।
    • भारत के क्षेत्र में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने की स्वतंत्रता।
    • भारत के किसी भी भाग में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता।
    • किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कर्म करने की स्वतंत्रता।
  • संपत्ति का अधिकार क्यों हटाया गया
    • मूल रूप से अनुच्छेद 19(1)(f) संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और निपटान करने की स्वतंत्रता प्रदान करता था
    • लेकिन 44वें संशोधन द्वारा इसे विलोपित कर दिया गया ।​
    • अब संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 300A के तहत संवैधानिक अधिकार है, जो मौलिक अधिकार नहीं है।
    • यह परिवर्तन भूमि सुधार और आर्थिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया ।​
  • उचित प्रतिबंध
  • इन स्वतंत्रताओं पर राज्य द्वारा उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं:​
    • अनुच्छेद 19(2) से (6) तक विभिन्न खंडों में राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता आदि के आधार पर सीमाएं निर्धारित हैं।
    • उदाहरण: अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध न्यायालय अवमानना, मानहानि या अपराध उकसाने के लिए ।​
  • महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ
    • संविधान सभा में बहस मुख्यतः इन स्वतंत्रताओं की सीमाओं पर केंद्रित रही ।​
    • सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में इनकी व्याख्या की, जैसे स्पष्ट और वर्तमान खतरे का परीक्षण ।​
    • ये अधिकार केवल नागरिकों को लागू होते हैं, विदेशियों को नहीं।

26. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों का उद्देश्य नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) नागरिकों को सरकार के उद्देश्यों की ओर ले जाना
Solution:
  • निम्नलिखित में से नागरिकों को सरकार के उद्देश्यों की ओर ले जाना भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों का उद्देश्य नहीं है।
  • मौलिक अधिकारों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को राज्य या सरकार की सत्तावादी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करना है
  • यह सुनिश्चित करना है कि सरकार व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न करे।
  • विकल्प (a), (b), और (d) मौलिक अधिकारों के मुख्य उद्देश्य हैं:
  • (a) सत्तावादी शासन रोकना: मौलिक अधिकार सरकार की शक्ति को सीमित करते हैं।
  • (b) राजनीतिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना: यह सरकार के लिए व्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करता है।
  • (d) कानून की सरकार स्थापित करना: व्यक्ति की मनमानी के बजाय कानून की सर्वोच्चता स्थापित करना।
  • प्रमुख उद्देश्य (मौलिक अधिकारों के उद्देश्य) के संदर्भ में स्पष्ट उत्तर से पहले जरूरी बिंदु:
    • मौलिक अधिकारों का प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा है
    • ताकि नागरिक शासन में सक्रिय भागीदारी कर सकें और नीतिगत निर्णयों में इन अधिकारों के दायरे में रहें ।​
    • ये अधिकार बुनियादी حقوق हैं जो कानून के समक्ष समानता, स्वतंत्रता, जीवन की सुरक्षा और धार्मिक-नीतिक-संस्कृतिक अधिकारों की गारंटी देते हैं।​
    • कुछ स्रोत बताते हैं कि वस्तुपरक उद्देश्य में कल्याणकारी राज्य की दिशा भी एक प्रभावी आयाम है
    • लेकिन मौलिक अधिकारों का प्राथमिक लक्ष्य राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना है,न कि पूर्ण स्वतंत्रता या आर्थिक justice का अकेला उद्देश्य ।​
  • अब उत्तर—कौन सा उद्देश्य नहीं है?
    • पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना: मौलिक अधिकारों का उद्देश्य नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता देना नहीं है
    • यह अधिकार सुनिश्चित करते हैं कि स्वतंत्रता के साथ-साथ नियम-विरोधी या देश के संस्थागत दायरे भी बनाए रखें
    • ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदार ढंग से हो और शासन के निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी संभव हो ।​
    • आर्थिक न्याय को अधिकतम स्थापित करना: आर्थिक न्याय मूलभूत अधिकारों के एक प्रमुख हिस्से के रूप में उभर सकता है
    • परंतु मौलिक अधिकारों का प्राथमिक उद्देश्य आर्थिक न्याय को स्वतः स्थापित करना नहीं है
    • यह नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और जीवन-स्वतंत्रता के अधिकार प्रदान करने पर केंद्रित है ।​
    • विदेशियों के लिए भी अनुच्छेद 19 आदि के अधिकारों की पूर्ण उपलब्धता
    • अनुच्छेद 19 जैसे अधिकार आमतौर पर भारतीय नागरिकों के लिए स्पष्ट रूप से संरक्षित हैं
    • विदेशी नागरिकों के लिए कुछ समान अधिकार नहीं हो सकते, अतः यह एक विशिष्ट परिस्थिति है
    • मौलिक अधिकारों के सामान्य उद्देश्य का हिस्साअनुसार नहीं हो सकता ।​
  • उद्धरण (जरूरी जानकारी के स्रोत):
    • मौलिक अधिकारों का उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना और नागरिक स्वतंत्रता के संरक्षण से जुड़ा है ।​
    • मौलिक अधिकार बुनियादी अधिकार हैं
    • जो नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और कानून के सामने सुरक्षा देते हैं ।​
    • कल्याणकारी राज्य की स्थापना के साथ भी संबंध है
    • मौलिक अधिकारों का प्राथमिक लक्ष्य राजनीतिक लोकतंत्र है, न कि पूर्ण स्वतंत्रता या पूर्ण आर्थिक न्याय की एकल प्राप्ति ।​

27. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद घोषित करता है कि वे सभी कानून, जो मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं या अल्पीकरण में हैं, शून्य (वोइड) होंगे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 13
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13 घोषित करता है कि वे सभी कानून, जो मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं या अल्पीकरण में हैं, शून्य (वोइड) होंगे।
  • यह अनुच्छेद न्यायिक समीक्षा के सिद्धांत की स्थापना करता है
  • न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में कार्य करने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार देता है
  • अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है
  • लेकिन शून्य घोषित करने का सिद्धांत अनुच्छेद 13 से आता है।
  • अनुच्छेद 13 का सार
    • उद्देश्य: मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या उनके आल्पीकरण करने वाले सभी कानूनों के बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश देना।
    • मुख्य कथन: “जो कानून मौलिक अधिकारों के साथ असंगत है या उनका अल्पीकरण करता है
    • वे शून्य (void) होंगे।” इसका मतलब है कि अगर किसी कानून का प्रावधान सीधे याामी-आत्मिक तौर पर मौलिक अधिकारों के खिलाफ है
    • तो वह कानून वैधानिक रूप से लागू नहीं माना जाएगा और अदालतें उसे रद्द कर सकती/सकती हैं।
    • न्यायिक समीक्षा का आधार: अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध न्यायपालिका के अधिकार और शक्तियों को स्थापित करता है
    • ताकि कानूनों की वैधता को जांचा जाए और असंवैधानिक प्रावधानों को समाप्त किया जा सके।
  • भागों का संक्षेप
    • मौलिक अधिकार कौनसे भाग में आते हैं: भारतीय संविधान में छह मौलिक अधिकार प्रमुख रूप से शामिल हैं
    • (अनुच्छेद 12–35-ish के भीतर; विशिष्ट समूह: समानता, स्वतंत्रता, शोषण विरोध, धर्म-स्वतंत्रता, आदर-व्यवहार आदि)।
    • अनुच्छेद 13 इन अधिकारों से असंगत कानूनों पर विशेष प्रभाव डालता है।​
    • कानून बनाम मौलिक अधिकार: सामान्य कानूनों से अधिक कठोर तुलनात्मक सुरक्षा मौलिक अधिकारों द्वारा दी जाती है
    • इसलिए यदि कोई कानून मौलिक अधिकारों से मेल नहीं खाता, तो वह अदालत से टिक नहीं पाएगा।​
  • संबंधित बिंदु और संदर्भ
    • मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायिक समीक्षा के सिद्धांत मजबूत हैं
    • गुजरात/मध्यप्रदेश आदि के उदाहरणों में अनुच्छेद 13 की भूमिका विशेष रूप से दर्शाई जाती है।​
    • आधिकारिक स्रोतों और शिक्षण सामग्री में अनुच्छेद 13 को “मौलिक अधिकारों से असंगत विधियाँ शून्य होंगी” के तौर पर दर्ज किया गया है।​

28. भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस भाग को 'भारतीय संविधान की अंतरात्मा' के रूप में संदर्भित किया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मौलिक अधिकार
Solution:
  • भारत के संविधान के निम्नलिखित में से मौलिक अधिकार को 'भारतीय संविधान की अंतरात्मा' के रूप में संदर्भित किया गया है।
  • डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने हालाँकि, अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार का अधिकार) को "संविधान की हृदय और आत्मा" कहा था।
  • फिर भी, मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता के मूलभूत मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • जिन्हें अक्सर सामूहिक रूप से संविधान की अंतरात्मा के रूप में देखा जाता है।
  • मूल तथ्य
    • भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार (Part III) और नीति निर्देशक तत्व (Part IV) को अक्सर संविधान की अंतरात्मा कहा जाता है।
    • इन दोनों के योग से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और शासन के नैतिक/सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति संभव होती है ।​
  • मौलिक अधिकार का स्थान
    • मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य के अत्याचार से सुरक्षा देते हैं और उनके बुनियादी अधिकारों की गारंटी देते हैं।
    • यह भाग नागरिक स्वतंत्रता, समानता, धार्मिक स्वतंत्रता आदि पर केंद्रित है
    • संसद/विधानपालिका द्वारा कानून के दायरे में सुधार/संशोधन के बावजूद इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है ।​
  • नीति निर्देशक तत्व का स्थान
    • नीति निर्देशक तत्व शासन के आदर्शों और सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को निर्धारित करते हैं
    • ये राज्यों के कर्तव्य और देश के विकास की दिशा तय करते हैं।
    • यह भाग संविधान के “चेतना” हिस्से के रूप में भी उद्धृत किया जाता है
    • क्योंकि यह सरकार के नीति-निर्माण के मूल्यों को निर्देशित करता है ।​
  • आंतरिक व्याख्या और निहितार्थ
    • मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व मिलकर उस समाज की संरचना और अधिकारों के प्रभावी कार्यान्वयन का आधार बनते हैं।
    • इसका मतलब है कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और शासन के नैतिक/सामाजिक दायित्व संविधान की अंतरात्मा को दर्शाते हैं ।​
  • प्रश्न के स्पष्ट उत्तर
    • “भारतीय संविधान की अंतरात्मा” कहा जाने वाला भाग: मौलिक अधिकार (Part III) और नीति निर्देशक तत्व (Part IV) मिलकर परिभाषित करते हैं
    • खासकर मौलिक अधिकारों को अक्सर संविधान की अंतरात्मा कहा जाता है
    • क्योंकि वे नागरिकों के मूल अधिकारों की संरक्षा करते हैं
    • सत्ता के दुरुपयोग के विरुद्ध रक्षक का काम करते हैं ।​

29. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण की बात करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 14
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण की बात करता है।
  • यह समानता के अधिकार का मूल स्तंभ है।
  • यह कहता है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता (Equality before Law) और कानूनों के समान संरक्षण (Equal Protection of Laws) से वंचित नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 14 का मूल अधिकार क्या है
    • संविधान के राज्य-क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जाएगा।
    • इसका उद्देश्य प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता बनाए रखना है
    • [ध्यान दें: नीचे उद्धृत स्रोतों के अनुरोध के अनुसार उद्धरण दिए गए हैं।]​
  • कानून के समक्ष समानता बनाम कानूनों के समान संरक्षण
    • कानून के समक्ष समानता (Equality before Law) का अर्थ है हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार, चाहे उसका धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान आदि हो या न हो
    • यह अवधारणा ब्रिटिश मूल से प्रभावित है और न्यायिक प्रक्रियाओं में हर किसी के लिए समान अवसर की बात करता है.​
    • कानूनों के समान संरक्षण (Right to Equal Protection of Laws) का विचार कुछ हद तक अमेरिकी संविधान से प्रेरित प्रतीत होता है
    • भारतीय संदर्भ में अनुच्छेद 14 यह सुनिश्चित करता है
    • राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के किसी भी वर्गीकरण के आधार पर भेदभाव करके कानून की समान सुरक्षा से वंचित न करे.​
  • अनुच्छेद 14 के दायरे
    • यह नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों और कानूनी संस्थाओं (जैसे कंपनियाँ) पर भी लागू होता है
    • ताकि कानून के समक्ष समान व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके.​
    • अनुच्छेद 14 का उद्देश्य जन्म, जाति, धर्म, लिंग, स्थान आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना है और समान अवसर देना है.​
  • उत्पत्ति और महत्त्व
    • अनुच्छेद 14 एक मौलिक अधिकार है और भाग III के भीतर आता है, जो समानता, स्वतंत्रता, और बंधुत्व के सिद्धांतों को समर्थ बनाता है.​
    • साथ ही, कानूनी समानता (14) का अर्थ उपायों की समानता नहीं, बल्कि उपायों में समानता का संरक्षण है
    • इसका मतलब है कि कानून के अंतर्गत सभी के लिए एक समान उपाय लागू हों ताकि किसी विशेष वर्ग को विशेष लाभ न मिले.​
  • तुलनात्मक संकेत
    • कानून के समक्ष समानता (Article 14) और कानूनों के समान संरक्षण (Equal Protection of Laws) की धारणा के बीच संतुलन बनाए रखना संविधान की संवैधानिक योजना का एक अहम हिस्सा है
    • 14 के तहत राज्य को यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के तहत भेदभावपूर्ण नियमों से अन्याय न हो.​
  • संक्षिप्त उत्तर के साथ प्रमुख बिंदु
    • कौन-सा अनुच्छेद? अनुच्छेद 14 (Right to Equality) है।
    • क्या देता है? कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है
    • यदि यह किसी भी आधार पर भेदभाव न हो तो।
    • किस भाग में? भाग III के मौलिक अधिकारों में।
    • महत्त्व क्या है? न्यायिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, समान अवसर और नीति-नियं conventional भेदभाव पर रोक

30. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद कहता है कि एक राज्य भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों की समान सुरक्षा से इनकार नहीं करेगा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 14
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है कि एक राज्य भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों की समान सुरक्षा से इनकार नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 14 में निहित सिद्धांत को संदर्भित करता है, जिसका अर्थ है
  • सभी समान रूप से स्थित व्यक्तियों पर कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।
  • अनुच्छेद 14 का परिचय
    • विषय: अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता (Right to Equality) का मूल सिद्धान्त है।
    • प्रकार: यह भाग III के मौलिक अधिकारों में आता है और राज्य के सभी निर्णयों में सामान्य कानून के समान सुरक्षा का मानक स्थापित करता है।
  • अनुच्छेद 14 का पाठ और अर्थ
    • वास्तविक पाठ (संक्षेप में): “राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा।
    • इसका तात्पर्य है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा
    • किसी भी किसी की नागरिकता, धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा
    • जब तक कि संविधान के अन्य अनुच्छेदों के अंतर्गत भिन्नताओं की कोई वैधानिक जगह न हो।
    • सुरक्षा की दिशा: यह अनुच्छेद कानून की समान सुरक्षा और विधि के समक्ष समानता का दायित्व राज्य के ऊपर डालता है
    • ताकि कानून सभी के लिए समान अप्लाई हो और किसी भी भेदभावपूर्ण व्यवहार को रोका जा सके।
  • अनुच्छेद 14 के साथ अन्य समकक्ष धाराएँ
    • अनुच्छेद 15: धर्म, जन्मजात आदि के आधार पर भेदभाव रोकता है।
    • अनुच्छेद 16: नियुक्ति/कायदे में अवसर की समानता सुनिश्चित करता है।
    • अनुच्छेद 17–18: क्रमशः अस्पृश्यता और पेशों के समन्धित विशेष प्रावधानों से संबंधित हैं।
    • इन धाराओं के साथ अनुच्छेद 14 का संयुक्त प्रभाव नागरिकों के अधिकारों को व्यापक बनाता है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • एक राज्य सरकारी भर्ती के निर्णय में हर नागरिक के लिए समान पात्रता मानदंड लागू किए जाएँ, बिना किसी धर्म, जाति, लिंग आदि के भेदभाव के।
    • कानूनों की समीक्षा में न्यायपालिका यह देखती है
    • किसी भी वैधानिक प्रावधान से कानून के समक्ष समानता की धारणा टूटती है या नहीं।
  • कुछ सामान्य गलत धारणाएँ
    • कानूनी समानता और कानूनों के समान संरक्षण एक ही बात नहीं है
    • अनुच्छेद 14 संविधान के भीतर “कानूनी समानता” और “विधि के समान संरक्षण” दोनों के सिद्धान्तों को समाहित करता है।
    • अनुच्छेद 14 से जुड़ी अवधारणाओं को अमेरिकी कानूनी परंपरा से भी निकासी के तौर पर समझा जाता है
    • लेकिन भारतीय संविधान इसे अपने ढंग से व्याख्यायित करता है।