मूल अधिकार (भारतीय राजव्यवस्था) (भाग-II)

Total Questions: 32

11. निम्नलिखित में से किसे भारतीय संविधान द्वारा लागू किया जा सकता है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) मौलिक अधिकार
Solution:
  • मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) भारतीय संविधान के भाग III में निहित हैं और प्रवर्तनीय (enforceable) होते हैं।
  • इसका अर्थ है कि यदि राज्य किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो नागरिक न्यायालयों (उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय) में जाकर इन अधिकारों को लागू करने की मांग कर सकता है।
  • इसके विपरीत, मौलिक कर्तव्य और राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत गैर-प्रवर्तनीय होते हैं; उन्हें कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता यद्यपि वे शासन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
  •  मौलिक अधिकारों में समानता का अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है।
  • प्रस्तावना किसी अदालत में लागू करने योग्य नहीं है, लेकिन यह भारतीय संविधान की बुनियादी संरचना और मूल्य प्रदान करती है।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत सरकार के पालन के लिए दिशानिर्देश हैं, लेकिन वे कानून की अदालत में लागू करने योग्य नहीं हैं।
  • मौलिक कर्तव्य वे दायित्व हैं जिन्हें नागरिकों से पूरा करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन वे कानून की अदालत में लागू नहीं होते हैं।
    Other Information
  •  भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च कानून है और सरकार और उसके नागरिकों के लिए रूपरेखा प्रदान करता है।
  •  26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान लागू किया, जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।
  •  राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में न्यायसंगत और न्याययुक्त समाज, पर्यावरण की सुरक्षा और शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं।
  •  मौलिक कर्तव्यों में संविधान और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना सद्भाव और सामान्य भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना शामिल है।
  • संशोधन की प्रक्रिया
  • संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है, जो विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित और मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत) से पारित होना चाहिए।
  • कुछ मामलों में, जैसे संघीय ढांचे से जुड़े (उदाहरण: राज्य सूची, राष्ट्रपति चुनाव), कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक होता है।
  • अंत में राष्ट्रपति की सहमति से यह लागू हो जाता है, बिना वीटो शक्ति के।​​
  • क्या लागू नहीं किया जा सकता
  • संविधान का "मूल ढांचा" (Basic Structure Doctrine), जिसे 1973 के केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रतिपादित किया, संशोधन द्वारा बदला नहीं जा सकता।
  • इसमें संघवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों का मूल स्वरूप आदि शामिल हैं।
  • उदाहरणस्वरूप, अनुच्छेद 368 स्वयं या मूल ढांचे को नष्ट करने वाला संशोधन अमान्य होगा।​
  • प्रकार और उदाहरण
  • साधारण संशोधन: केवल विशेष बहुमत से, जैसे संपत्ति अधिकारों में बदलाव (42वां संशोधन)।​
  • राज्य अनुसमर्थन वाले: जैसे GST (101वां संशोधन) या राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया।​
    106 संशोधन तक (2023 तक) हो चुके हैं, जो संविधान की लचीलापन दर्शाते हैं, लेकिन मूल सिद्धांत अटल हैं।​
  • सीमाएँ और न्यायिक समीक्षा
  • सर्वोच्च न्यायालय संशोधनों की न्यायिक समीक्षा कर सकता है यदि वे मूल ढांचे का उल्लंघन करें, जैसा मिनर्वा मिल्स मामले में हुआ।
  • निर्देशक सिद्धांत (भाग IV) गैर-न्यायोचित हैं, लेकिन वे मूल ढांचे का हिस्सा हैं। इस प्रकार, संविधान स्वयं को पूरी तरह बदलने की अनुमति नहीं देता।

12. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह उल्लेख है कि जो कानून किसी भी मौलिक अधिकार के साथ असंगत हैं या उनका अल्पीकरण करते हैं, वे ऐसी असंगति की सीमा तक शून्य होंगे? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 13
Solution:
  • अनुच्छेद 13 यह स्पष्ट रूप से घोषित करता है कि जो कानून किसी भी मौलिक अधिकार के साथ असंगत हैं या उनका अल्पीकरण (derogation) करते हैं
  • वे ऐसी असंगति की सीमा तक शून्य होंगे। यह प्रावधान न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की नींव रखता है।
  • यह न केवल विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों पर लागू होता है, बल्कि सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेशों, आदेशों, उप-नियमों और अधिसूचनाओं पर भी लागू होता है
  • यह सुनिश्चित करते हुए कि मौलिक अधिकार हमेशा सर्वोच्च रहें।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13 :-
    • इसमें उल्लेख किया गया है कि जो कानून किसी भी मौलिक अधिकार के साथ असंगत हैं या उनका अपमान करते हैं, वे अमान्य होंगे।
    • इसका मतलब यह है कि कोई भी कानून जो संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के खिलाफ जाता है, उसे अमान्य और अप्रवर्तनीय माना जाएगा।
    • मौलिक अधिकार भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं और संविधान के भाग । में निहित हैं।
    • इन अधिकारों में समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल हैं।
    • संविधान न्यायपालिका के माध्यम से इन मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का भी प्रावधान करता है
    • जो इन अधिकारों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून को रद्द कर सकता है।
      Other Information
  • संविधान का अनुच्छेद 14 :-
    •  यह कानून के समक्ष समानता के अधिकार और सभी नागरिकों को कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
  • अनुच्छेद 15 :-
    •  यह धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है।
  •  अनुच्छेद 16 :-
    • यह सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता की गारंटी देता है और धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान, निवास या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव को रोकता है।

13. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर के अधिकार की गारंटी देता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III- पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 12 अप्रैल, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 32
Solution:
  • अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में याचिका दायर करने के अधिकार की गारंटी देता है।
  • यह स्वयं एक मौलिक अधिकार है। इसे डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा संविधान की आत्मा और हृदय कहा गया था।
  • यह सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, आदि) जारी करने का अधिकार देता है
  • जिससे यह सुनिश्चित होता है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर प्रभावी उपाय उपलब्ध हों।
  • इस अनुच्छेद को डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने अक्सर संविधान का "'हृदय और आत्मा"' कहा है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में सीधे उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार है।
  • इस अनुच्छेद के तहत, सर्वोच्च न्यायालय को संविधान के भाग । द्वारा प्रदत्त किसी भी अधिकार के प्रवर्तन के लिए निर्देश या आदेश या रिट जारी करने का अधिकार है
  • जिसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण रिट शामिल हैं, जो भी उचित हो।
    Other Information
  • भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया तथा 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
  • यह विश्व में किसी भी देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है और मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने वाला ढांचा तैयार करता है
  • सरकारी संस्थाओं की संरचना, प्रक्रियाएं शक्तियां और कर्तव्यों को स्थापित करता है, तथा मौलिक अधिकारों, नीति निर्देशक सिद्धांतों और नागरिकों के कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
  • अनुच्छेद 32 संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह सर्वोच्च न्यायालय को यह सुनिश्चित करने की शक्ति प्रदान करता है
  • नागरिकों को दिए गए अधिकारों की रक्षा की जाएँ और उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  •  डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद बताया, जिसके बिना संविधान निरर्थक होगा।
  •  यह अनुच्छेद भारतीय संविधान की अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

14. भारतीय संविधान में उल्लेखित मौलिक अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) ये छुआ-छूत मानने के लिए आवश्यक स्थितियां प्रदान करते हैं।
Solution:
  • यह कथन असत्य है। मौलिक अधिकार वास्तव में इसके विपरीत कार्य करते हैं: अनुच्छेद 17 छुआछूत (untouchability) को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके अभ्यास को प्रतिबंधित करता है।
  • मौलिक अधिकार भौतिक सुरक्षा (जैसे जीवन और स्वतंत्रता), सामाजिक न्याय (जैसे समानता और भेदभाव का निषेध), और नैतिक सुरक्षा (जैसे धार्मिक स्वतंत्रता) के लिए आवश्यक स्थितियां प्रदान करते हैं।
  • भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में मौलिक अधिकारों का उल्लेख है, जो नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शोषण से सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचार प्रदान करते हैं।
  • ये अधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत हैं, लेकिन पूर्णतः निरपेक्ष नहीं हैं क्योंकि राज्य के हितों या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।​
  • मौलिक अधिकारों की सूची
    • भारतीय संविधान वर्तमान में छह मौलिक अधिकार प्रदान करता है:
    • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18): कानून के समक्ष समानता, भेदभाव का निषेध।
    • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आवागमन आदि।
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24): मानव व्यापार और बाल श्रम पर रोक।
    • धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28): अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म प्रचार।
    • संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30): अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण।
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32): अधिकारों के उल्लंघन पर उच्चतम न्यायालय में याचिका।​
  • असत्य कथन की पहचान
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है" कहा गया है, लेकिन विकल्प नहीं दिए गए। सामान्यतः ऐसे प्रश्नों में असत्य कथन यह होता है
    • "मौलिक अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष हैं", क्योंकि ये उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं (जैसे अनुच्छेद 19 में)। संपत्ति का अधिकार मूल रूप से मौलिक था (अनुच्छेद 31), किंतु 44वें संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 300A में सामान्य अधिकार बना दिया गया।​
  • विशेषताएं एवं सीमाएं
    • मौलिक अधिकार न्यायोचित हैं, अर्थात् इन्हें अदालतों द्वारा लागू कराया जा सकता है। ये मुख्यतः नागरिकों के लिए हैं, परंतु कुछ विदेशियों को भी लागू होते हैं।
    • इन्हें संविधान संशोधन द्वारा सीमित किया जा सकता है, किंतु मूल संरचना सिद्धांत (केशवानंद भारती मामले) से संरक्षित। शीतलन यंत्र सिद्धांत के तहत निलंबित हो सकते हैं।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • ये अधिकार अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित हैं। प्रारंभ में सात थे, किंतु संपत्ति हटने से छह रह गए। अनुच्छेद 13 पूर्ववर्ती असंगत कानूनों को शून्य घोषित करता है।

15. भारतीय संविधान में उल्लेखित मौलिक अधिकारों का उद्देश्य क्या है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करना
Solution:
  • भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का मुख्य उद्देश्य देश में राजनीतिक लोकतंत्र (Political Democracy) की स्थापना करना है।
  • मौलिक अधिकार लोगों को राज्य की निरंकुश सत्ता से बचाकर, समानता, स्वतंत्रता और न्याय सुनिश्चित करते हैं
  • जो एक लोकतांत्रिक शासन के लिए आवश्यक है। वे लोगों के लिए ऐसी स्थितियां बनाते हैं जहाँ वे स्वतंत्र रूप से अपने राजनीतिक अधिकारों का प्रयोग कर सकें और देश के शासन में भाग ले सकें।
  • भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में वर्णित मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य के मनमाने कार्यों से सुरक्षा प्रदान करते हुए राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए हैं। ये अधिकार व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करते हैं, जिससे लोकतांत्रिक समाज का पूर्ण विकास संभव होता है।​
  • मुख्य उद्देश्य
    • मौलिक अधिकारों का प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को विचार व्यक्त करने, संघ बनाने और शासन में भाग लेने की स्वतंत्रता मिलती है।
    • ये अधिकार वोट देने, कानून के समक्ष समानता और जीवन-स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं, जो लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक हैं।
    • हालांकि कल्याणकारी राज्य या आर्थिक न्याय इनके द्वितीयक लाभ हैं, लेकिन मुख्य फोकस व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की शक्ति पर अंकुश लगाना है।​
  • अधिकारों की विशेषताएँ
    • ये न्यायोचित हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय या अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में सीधे अपील की जा सकती है।​
    • संविधान निर्माताओं ने इन्हें "भारत का मैग्ना कार्टा" माना, जो विश्व लोकतांत्रिक सिद्धांतों से प्रेरित हैं।​
    • ये राज्य के हस्तक्षेप से मुक्त व्यक्ति के पूर्ण विकास के लिए आधारभूत हैं।​
  • छह मौलिक अधिकार
    • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18): भेदभाव निषेध और अवसर की समानता।​​
    • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22): बोलने, घूमने और व्यापार की आजादी।​
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24): बाल श्रम और मानव तस्करी पर रोक।​
    • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28): धर्म का स्वतंत्र पालन।​​
    • सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30): अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण।​
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32): अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक उपचार।​​
  • महत्व और प्रभाव
    • ये अधिकार विविधता वाले भारत में सांस्कृतिक, धार्मिक समुदायों की स्वतंत्रता बनाए रखते हैं तथा कमजोर वर्गों को सशक्त बनाते हैं।
    • राज्य इनका उल्लंघन नहीं कर सकता, सिवाय आपातकाल या युक्तियुक्त प्रतिबंधों के। कुल मिलाकर, ये लोकतंत्र की नींव हैं
    • जो नागरिकों को सम्मानपूर्ण जीवन जीने की क्षमता प्रदान करते हैं।

16. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में सहकारी समितियों के गठन के अधिकार का उल्लेख है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 19 (1) (c)
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (c) में नागरिकों को संघ (Association) या सहकारी समितियाँ (Cooperative Societies) बनाने की स्वतंत्रता का अधिकार उल्लेखित है।
  • सहकारी समितियों को यह दर्जा 97वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा प्रदान किया गया था
  • जिसने सहकारी समितियों को भारत में एक मौलिक अधिकार बना दिया। यह अधिकार लोगों को स्वेच्छा से समूह बनाकर अपने आर्थिक हितों को बढ़ावा देने की अनुमति देता है।
  •  इस संदर्भ में, इसने संविधान में निम्नलिखित तीन बदलाव किए हैं:
    •  इसने सहकारी समितियों बनाने के अधिकार को मौलिक अधिकार बना दिया (अनुच्छेद 19)।
    •  इसमें सहकारी समितियों के प्रचार पर राज्य नीति का एक नया निर्देशक सिद्धांत शामिल था (अनुच्छेद 43-8)।
    •  इसने संविधान में एक नया भाग IX-B जोड़ा जिसका शीर्षक है ''सहकारी समितियां" (अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT)।
    •  नए भाग IX-B में यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रावधान हैं कि देश में सहकारी समितियां लोकतांत्रिक, पेशेवर, स्वायत्त और आर्थिक रूप से मजबूत तरीके से कार्य करें।
    •  यह बहु-राज्य सहकारी समितियों के संबंध में संसद और अन्य सहकारी समितियों के संबंध में राज्य विधानसभाओं को उपयुक्त कानून बनाने का अधिकार देता है।
    • अनुच्छेद 438 सहकारी समितियों के संवर्धन से संबंधित है। राज्य सहकारी सोसाइटियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकरण, लोकतांत्रिक नियंत्रण और वृत्तिक प्रबन्ध की
    • अभिवृद्धि करने का प्रयास करेगा। [अनुच्छेद 438 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा डाला गया]।
      Other Information
  •  97वां संशोधन अधिनियम, 2011
    • सहकारी समितियों के गठन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसे भारतीय संविधान में प्रदान किया गया है।
    • यह संविधान के अनुच्छेद 19(c) में निहित है, जो संघों या यूनियनों को बनाने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
    • यह अधिकार 2011 के 97वें संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था.
    • अनुच्छेद 19 (1)(c) सभी नागरिकों को 'संघ या संघ या सहकारी समितियां बनाने" का अधिकार देता है।
    • हालांकि, यह अधिकार, अनुच्छेद 19 के तहत अन्य अधिकारों की तरह, पूर्ण नहीं है और उसी अनुच्छेद के खंड (4) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है
    • अर्थात् "भारत की संप्रभुता और अखंडता के हितों में, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था या नैतिकता या अदालत की अवमानना के संबंध में मानहानि या किसी अपराध के लिए उकसाना।"

17. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान में उल्लिखित अधिकार नहीं है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मतदान का अधिकार
Solution:
  • मतदान का अधिकार (Right to Vote) भारतीय संविधान में एक संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right) है (अनुच्छेद 326 के तहत), लेकिन यह मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है।
  • अन्य विकल्प - स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22), धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28), और समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18) - सभी मौलिक अधिकार हैं जो संविधान के भाग III में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं।
  • भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में वर्णित मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य के मनमाने कार्यों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • मूल रूप से संविधान में सात मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) को हटा दिया गया।
  • अब केवल छह मौलिक अधिकार शेष हैं: समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18), स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22), शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24), धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28), संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30), तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)।​
  • वर्तमान मौलिक अधिकार
    • समता का अधिकार: विधि के समक्ष समानता, भेदभाव निषेध, अवसर की समानता आदि सुनिश्चित करता है।​
    • स्वतंत्रता का अधिकार: वाक् एवं अभिव्यक्ति, सभा, संघ बनाने, आवागमन, निवास, व्यवसाय आदि की स्वतंत्रता प्रदान करता है।​
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार: मानव व्यापार, बंधुआ मजदूरी तथा बाल श्रम पर रोक लगाता है।​
    • धर्म की स्वतंत्रता: अंतःकरण एवं धर्म की स्वतंत्रता, धार्मिक प्रथाओं का प्रबंधन आदि की गारंटी देता है।​
    • संस्कृति एवं शिक्षा: अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण, शिक्षा संस्थान स्थापना का अधिकार।​
    • संवैधानिक उपचार: मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार।​
  • संपत्ति का अधिकार क्यों हटाया गया?
    • प्रारंभिक संविधान (1950) में संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(f) एवं 31 के अंतर्गत मौलिक अधिकार था, जो संपत्ति अर्जन, धारण एवं विसर्जन की स्वतंत्रता देता था।
    • 25वें संशोधन (1971) एवं 44वें संशोधन (1978) द्वारा इसे समाप्त कर अनुच्छेद 300A में संवैधानिक अधिकार (कानूनी अधिकार) बना दिया गया। कारण थे
    • भूमि सुधार, राष्ट्रीयकरण एवं सामाजिक न्याय की आवश्यकता, क्योंकि अदालतें इससे संबंधित कानूनों को असंवैधानिक घोषित करती रहीं।
    • अब संपत्ति का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि राज्य इसे सार्वजनिक हित में अधिग्रहित कर सकता है, किंतु उचित क्षतिपूर्ति देकर।​​
  • अन्य गैर-मौलिक अधिकार
    • कई अधिकार संविधान में उल्लिखित हैं लेकिन मौलिक नहीं, जैसे राज्य नीति के निर्देशक तत्व (भाग IV, अनुच्छेद 36-51) में समान कार्य के लिए समान वेतन (अनुच्छेद 39) या नि:शुल्क कानूनी सहायता (अनुच्छेद 39A)। ये प्रवर्तनीय नहीं, अपितु राज्य के लिए नीतिगत दिशानिर्देश हैं।
    • प्रश्न में यदि विकल्प दिए होते जैसे "संपत्ति का अधिकार", "समान वेतन का अधिकार" आदि, तो संपत्ति का अधिकार ही उत्तर होता।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • मौलिक अधिकार मूलभूत हैं किंतु पूर्ण नहीं: आपातकाल में निलंबित हो सकते हैं (अनुच्छेद 359), कुछ केवल नागरिकों को (जैसे अनुच्छेद 19), अन्य विदेशियों को भी (अनुच्छेद 20-21)। उल्लंघन पर अनुच्छेद 32/226 के तहत रिट याचिकाएं दायर की जा सकती हैं। ये अधिकार अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित हैं।​

18. यदि किसी भारतीय नागरिक को गिरफ्तार कर लिया जाता है और बचाव के अधिकार से वंचित कर दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राहत प्रदान कर सकता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 22
Solution:
  • अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध (detention) से संरक्षण प्रदान करता है। यह किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को निम्नलिखित अधिकार प्रदान करता है
  • जो बचाव के अधिकार को सुनिश्चित करते हैं
  • गिरफ्तारी के कारणों की सूचना दिए बिना निरोधित नहीं करना।
  • अपनी पसंद के वकील (legal practitioner) से परामर्श करने और बचाव करने का अधिकार।
  • गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार (यात्रा के समय को छोड़कर)।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 एक भारतीय नागरिक को राहत प्रदान करता है जिसे गिरफ्तार किया गया है और बचाव के अधिकार से वंचित किया गया है।
  • अनुच्छेद 22(1) में प्रावधान है कि गिरफ्तार किए गए और हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी गिरफ्तारी के आधार के बारे में सूचित किया जाएगा और उसे अपनी पसंद के कानूनी व्यवसायी से परामर्श करने और बचाव करने की अनुमति दी जाएगी
  • अनुच्छेद 22(2) । में कहा गया है कि गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी गिरफ्तारी के 24 घंटे की अवधि के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश
    किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 22(4) में कहा गया है कि निवारक हिरासत का प्रावधान करने वाला कोई भी कानून किसी व्यक्ति को तीन महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखने की अनुमति नहीं देगा
  • जब तक कि एक सलाहकार बोर्ड ने उक्त अवधि की समाप्ति से पहले रिपोर्ट नहीं दी है कि उसकी राय में, पर्याप्त कारण है।
    Other Information
  •  अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और बलात् श्रम के निषेध से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 24 कारखानों आदि में बच्चों के रोजगार पर रोक लगाता है।
  • अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के मुक्त व्यवसाय, आचरण और प्रचार-प्रसार से संबंधित है।
  • अतः कथन 1 सही है।

19. मूल अधिकारों की अवधारणा सर्वप्रथम ....... में मैग्नाकार्टा में अस्तित्व में आई। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) इंग्लैंड
Solution:
  • मैग्नाकार्टा, जिसे 1215 में इंग्लैंड के किंग जॉन द्वारा जारी किया गया था, अधिकारों का पहला लिखित चार्टर था।
  • इसने राजा की शक्तियों को सीमित किया और बैरनों (Barons) और अन्य लोगों को कुछ मौलिक कानूनी अधिकार प्रदान किए, जिसने बाद में विकसित होकर दुनिया भर में मौलिक अधिकारों की अवधारणा की नींव रखी।
  •  महाधिकार पत्र :-
    • इसने इस सिद्धांत को स्थापित किया कि राजा सहित हर कोई कानून के अधीन था और उसके पास कुछ अधिकार थे जिन्हें उचित प्रक्रिया के बिना छीना नहीं जा सकता था।
  • मौलिक अधिकार :-
    • मौलिक अधिकारों की अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि कुछ ऐसे अधिकार हैं जो सभी मनुष्यों में अंतर्निहित हैं, चाहे उनकी राष्ट्रीयता, नस्ल या लिंग कुछ भी हो।
    • ये अधिकार अक्सर राष्ट्रीय संविधानों और अंतर्राष्ट्रीय संधियों में निहित हैं।
    • जबकि मैग्ना कार्टा मौलिक अधिकारों की अवधारणा का एक महत्वपूर्ण अग्रदूत था, इसमें वे सभी अधिकार शामिल नहीं थे जिन्हें अब हम मौलिक मानते हैं।
    • उदाहरण के लिए, इसने बोलने या धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी नहीं दी।
      Other Information
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान :-
    • इसमें अधिकारों का एक विधेयक शामिल है जो बोलने, धर्म और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे कुछ मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है।
    • हालाँकि मौलिक अधिकारों की अवधारणा अमेरिकी संविधान से पहले की है, और मैग्ना कार्टा इस सिद्धांत को स्थापित करने वाला पहला दस्तावेज़ था
    • हर कोई कानून के अधीन है और उसके पास कुछ अधिकार हैं जिन्हें उचित प्रक्रिया के बिना छीना नहीं जा सकता है।
  • कनाडा :-
    • इसमें अधिकारों और स्वतंत्रता का एक चार्टर है जो अभिव्यक्ति, धर्म और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
    • हालांकि, मौलिक अधिकारों की अवधारणा कनाडा के चार्टर से पहले की है, और मैग्ना कार्टा इस सिद्धांत को स्थापित करने वाला पहला दस्तावेज़ था
    • हर कोई कानून के अधीन है और उसके पास कुछ अधिकार हैं जिन्हें उचित प्रक्रिया के बिना छीना नहीं जा सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया :-
    • इसका एक संविधान है, जो कुछ मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, जैसे कि धर्म की स्वतंत्रता और वोट देने का अधिकार आदि।
    • हालाँकि, मौलिक अधिकारों की अवधारणा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से पहले की है, और मैग्ना कार्टा इस सिद्धांत को स्थापित करने वाला पहला दस्तावेज़ था
    • हर कोई कानून के अधीन है और उसके पास कुछ अधिकार हैं जिन्हें उचित प्रक्रिया के बिना छीना नहीं जा सकता है।

20. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा भाग मूल अधिकारों से संबंधित है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 15 अप्रैल, 2021 (III-पाली), MTS (T-I) 14 अगस्त, 2019 (III-पाली), MTS (T-I) 20 सितंबर, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) भाग III
Solution:
  • भारतीय संविधान का भाग III (अनुच्छेद 12 से 35 तक) छह श्रेणियों के तहत मौलिक अधिकारों से संबंधित है। यह भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण भाग है
  • जिसे भारत का मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है, जो नागरिकों को राज्य की निरंकुश शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है और न्याय एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
  • मूल अधिकारों का विस्तार
    • मूल अधिकार संविधान की आत्मा माने जाते हैं, जो राज्य की मनमानी से नागरिकों की रक्षा करते हैं। ये न्यायोचित हैं
    • अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। मूल रूप से सात अधिकार थे
    • लेकिन 44वें संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति का अधिकार हटा दिया गया।​
  • छह मौलिक अधिकार
    • संविधान में वर्तमान में छह प्रकार के मूल अधिकार निहित हैं:
    • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18): कानून के समक्ष समानता, भेदभाव निषेध।
    • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22): अभिव्यक्ति, सभा, आवागमन की स्वतंत्रता; जीवन और दंड से सुरक्षा।
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24): बाल श्रम और मानव व्यापार पर रोक।
    • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28): धर्म का पालन और प्रचार की आजादी।
    • सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30): अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण।
    • संवैधानिक उपचार का अधिकार (अनुच्छेद 32): अधिकारों की रक्षा के लिए रिट याचिका।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • ये अधिकार मुख्य रूप से नागरिकों के लिए हैं, लेकिन कुछ विदेशियों को भी लागू होते हैं। इन्हें आपातकाल में निलंबित किया जा सकता है
    • सिवाय अनुच्छेद 20 और 21 के। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इन्हें संविधान की आत्मा कहा।