मूल अधिकार (भारतीय राजव्यवस्था) (भाग-II)

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31. भारतीय संविधान में उल्लेखित मौलिक अधिकारों के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) आपातकाल के दौरान केवल अनुच्छेद 20 और 21 को निलंबित किया जा सकता है।
Solution:
  • सत्य स्थिति यह है कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 को निलंबित नहीं किया जा सकता है
  • अन्य मौलिक अधिकारों को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जा सकता है।
  • विकल्प (a) सत्य है: कुछ मौलिक अधिकार, जैसे अनुच्छेद 14 (राज्य को किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता से वंचित नहीं करना चाहिए) और अनुच्छेद 18 (राज्य को उपाधियाँ प्रदान नहीं करनी चाहिए), नकारात्मक प्रकृति के होते हैं क्योंकि वे राज्य पर कुछ करने से प्रतिबंध लगाते हैं।
  • विकल्प (b) सत्य है: मौलिक अधिकार वाद योग्य (Justiciable) हैं। इसका अर्थ है कि उनके उल्लंघन के मामले में नागरिक सीधे न्यायालय (उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय) जा सकते हैं।
  • विकल्प (d) सत्य है: राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान, अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर, अन्य मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है।
  • ये अधिकार मूल रूप से सात थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) को हटा दिया गया
  • जिससे अब छह मौलिक अधिकार शेष हैं. प्रश्न में पूछे गए "असत्य कथन" का संदर्भ सामान्यतः MCQ-शैली के प्रश्नों से लिया जाता है
  • जहाँ विकल्प दिए जाते हैं, लेकिन यहाँ पूर्ण विवरण के साथ सभी प्रमुख कथनों का विश्लेषण प्रस्तुत है ताकि असत्य को स्पष्ट किया जा सके।​
  • मौलिक अधिकारों की सूची
  • भारतीय संविधान में निम्नलिखित छह मौलिक अधिकार हैं:​​
    • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18): कानून के समक्ष समानता, भेदभाव निषेध, अस्पृश्यता उन्मूलन।
    • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सभा, संघ, आवागमन, निवास, व्यवसाय की स्वतंत्रता; गिरफ्तारी से सुरक्षा।
    • शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24): मानव व्यापार, बेगार, बाल श्रम निषेध।
    • धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28): अंतःकरण, धर्म अभ्यास एवं प्रचार की स्वतंत्रता।
    • संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30): अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण, शिक्षा संस्थान स्थापना।
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32): मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर उच्चतम न्यायालय में सीधा याचिका।
    • ये अधिकार मुख्य रूप से नागरिकों के लिए हैं, लेकिन कुछ विदेशियों को भी लागू होते हैं.​
  • सामान्य असत्य कथन
    • संपत्ति का अधिकार मौलिक है: असत्य। 44वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 19(1)(f) एवं 31 हटाए गए; अब अनुच्छेद 300A के तहत कानूनी अधिकार.​
    • सभी अधिकार पूर्णतः अकटनीय हैं: असत्य। "उचित प्रतिबंध" (जैसे सार्वजनिक व्यवस्था) लगाए जा सकते हैं (अनुच्छेद 19(2-6)).​
    • केवल नागरिकों के लिए: असत्य। अनुच्छेद 14-18, 21 विदेशियों पर भी लागू (सुप्रीम कोर्ट निर्णय).​
    • संसद इन्हें संशोधित नहीं कर सकती: असत्य। अनुच्छेद 13 के अधीन असंगत कानून शून्य, लेकिन संशोधन संभव (केशवानंद भारती केस: मूल संरचना सिद्धांत).​
    • मौलिक कर्तव्य मौलिक अधिकार हैं: असत्य। कर्तव्य भाग IV-A (अनुच्छेद 51A) में, 42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए; 11 कर्तव्य.​
  • विशेषताएँ एवं सीमाएँ
    • मौलिक अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं, अनुच्छेद 13 द्वारा पूर्व-संविधान कानून शून्य. आपातकाल में (अनुच्छेद 359) निलंबित हो सकते हैं
    • सिवाय अनुच्छेद 20-21 के. 86वें संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया: 6-14 वर्ष बच्चों को निःशुल्क शिक्षा. ये अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित हैं.​
  • महत्वपूर्ण निर्णय
    • मेनका गांधी केस (1978): अनुच्छेद 21 में "उचित प्रक्रिया" का विस्तार.​
    • गोलकनाथ केस (1967): मौलिक अधिकार मूल संरचना.​
    • ये अधिकार लोकतंत्र की रक्षा करते हैं, लेकिन राज्य हितों से संतुलित. असत्य कथन मुख्यतः संपत्ति संबंधी होता है।​

32. मौलिक अधिकारों से संबंधित भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से कौन-से अनुच्छेद को आपातकाल के दौरान निलंबित नहीं किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 3 दिसंबर 2023 (1-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 20-21
Solution:
  • राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है
  • यह प्रावधान 44वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है ताकि आपातकाल के समय भी नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल अधिकार सुरक्षित रहें।
  • अनुच्छेद 20 का विवरण
    • अनुच्छेद 20 अपराधों के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है, जिसमें पूर्व प्रभाव से कानून (ex post facto law) लागू न करना, दोहरी सजा (double jeopardy) न देना और स्वयं के विरुद्ध गवाही न देने को बाध्य करना शामिल है।
    • राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 359 द्वारा अन्य अधिकारों का प्रवर्तन निलंबित हो सकता है, लेकिन अनुच्छेद 20 को स्पष्ट रूप से अपवाद माना गया है।
    • यह सुनिश्चित करता है कि आपात स्थिति में भी न्यायिक सुरक्षा बरकरार रहे।​
  • अनुच्छेद 21 का विवरण
    • अनुच्छेद 21 राज्य को किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने का अधिकार नहीं देता, सिवाय कानून की प्रक्रिया के अनुसार।
    • 44वें संविधान संशोधन (1978) ने इसे आपातकाल में भी अक्षुण्ण रखा। मेनका गांधी मामले (1978) ने इसकी व्याख्या को विस्तृत किया, जिसमें उचित प्रक्रिया (due process) शामिल हुई।​​
  • निलंबन की प्रक्रिया
    • राष्ट्रीय आपातकाल में अनुच्छेद 358 अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता के अधिकार) को स्वतः निलंबित करता है, जबकि अनुच्छेद 359 राष्ट्रपति को अन्य अधिकारों का प्रवर्तन निलंबित करने की शक्ति देता है
    • किंतु 20 और 21 को छोड़कर। 1975 के आपातकाल में इसका दुरुपयोग हुआ, जिसके बाद संशोधन द्वारा सीमाएं लगाई गईं।
    • निलंबन केवल आपातकाल की अवधि तक सीमित रहता है।​
  • महत्वपूर्ण अपवाद और सीमाएं
    • अनुच्छेद 20 और 21 मौलिक अधिकारों की मूल संरचना का हिस्सा हैं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता (केशवानंद भारती मामले)।
    • न्यायालय इनकी न्यायिक समीक्षा कर सकता है। राज्य आपात (अनुच्छेद 356) में भी ये लागू रहते हैं। यह प्रावधान लोकतंत्र की रक्षा करता है।