मृदा (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 7

1. रेगुर मिट्टी का दूसरा नाम है- [JE मैकेनिकल परीक्षा 22 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) काली मिट्टी
Solution:
  • काली मिट्टी को रेगुर मिट्टी भी कहते हैं। रासायनिक दृष्टि से काली मृदा में चूना, लौह, मैग्नीशियम तथा एलुमिना के तत्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं।
  • इनमें पोटाश की मात्रा भी पाई जाती है, लेकिन इसमें फॉस्फोरस, नाइट्रोजन और जैव पदार्थों की कमी होती है।
  • इस मृदा को कपास वाली काली मृदा भी कहा जाता है।
  • विस्तृत उत्तर
    • प्रमुख क्षेत्र: यह मिट्टी पश्चिमी और दक्षिणी डेक्कन पठार, खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पंजाब-हरियाणा के कुछ हिस्सों में, तथा उत्तरी भारत के कुछ आर्द्र-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है.​
    • निर्माण और भूगोलिक कारण: यह मिट्टी लावा चट्टानों के क्षरण और खनिज युक्त चूर्णों के जमा होने से बनती है
    • जल धारण क्षमता tinggi रहती है, जिससे फसलों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता विविध हो सकती है.​
    • उपयोगी फसलें: कपास प्रमुख फसल है, जबकि दलहन, चारा और अन्य फसलों के लिए भी उपयुक्त हो सकती है
    • जल प्रबंधन के अनुसार उपज बढ़ सकती है.​
    • रासायनिक गुण: इस मिट्टी में उच्च चूना-कार्बोनेट, पोटाश और आयरन-एल्यूमिनियम समृद्ध हो सकते हैं
    • कार्बनिक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती है.​
    • सावधानियाँ: इस मिट्टी के कुछ क्षेत्रों में नमीयuttet और क्षारीयपन अधिक हो सकता है
    • सिंचाई और उचित मालिकाना जल-संरक्षण से उपज सुधरती है.​

2. मिट्टी की किस परत में ह्यूमस होता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाता है? [JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) शीर्षमृदा
Solution:
  • मिट्टी की शीर्षमृदा (Topsoil) परत में ह्यूमस होता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।
  • मिट्टी में उपस्थित सड़े-गले जैव पदार्थ को ह्यूमस कहा जाता है।
  • ह्यूमस क्या है
    • ह्यूमस वह जैविक पदार्थ है जो पौधे-जीवों के अवशेषों के धीमे-धीमे सड़ने-घटने से बनता है
    • मिट्टी में वर्षों तक संरक्षित रहता है. यह गाढ़े भूरे से काले रंग का स्थायी अंश है
    • जो मिट्टी के जैविक गतिशीलता और संरचना में प्रमुख भूमिका निभाता है.​
  • मिट्टी में परतों का प्राकृतिक क्रम
    • मिट्टी प्रोफाइल अक्सर चार प्रमुख परतों से मिलती है: O (humus/कार्बनिक पदार्थ सहित), A (ऊपर की मिट्टी), B (उपभू/मध्य परत), C (आधारखंड/अवशेष) आदि
    • परत में सबसे अधिक जैविक पदार्थ, अर्थात ह्यूमस, सामान्यतः उच्चतम मात्रा में पाया जाता है.​
  • किंतु लाभ और वितरण
    • ह्यूमस मिट्टी की रंगतো को गहरा बनाता है और मिट्टी को ढीला, मॉयिश्चर-रिसेप्शन (जल धारण क्षमता) अधिक बनाने में मदद करता है
    • इसके कारण पौध के जड़ें बेहतर विकसित होती हैं
    • इसकी मात्रा स्थानीय मिट्टी के प्रकार (रेतीली, दोमट, मिट्टी-दाग़ आदि) के अनुसार भिन्न हो सकती है
    • लेकिन ओ-स्तर में इसे सबसे अधिक पाया जाना सामान्य बात है.​
  • क्यों यह उपजाऊ बनाती है
    • जल धारण और अवशोषण क्षमता: ह्यूमस पानी को sponge की तरह सोख लेता है
    • सूखे समय में भी पौधों को नम राखता है. यह ड्रिप-प्रवाह और जलविधारण को सुधरता है.​
    • पोषक तत्व स्टोरेज और रिलीज: यह नाइट्रोजन, फॉस्फोरस आदि पोषक तत्वों को बांधकर रखता है
    • समय-समय पर पौधों को उपलब्ध कराता है, जिससे उर्वरक-गति स्थिर रहती है.​
    • जैविक जीवन को सहयोग: ह्यूमस के साथ मिट्टी के सूक्ष्मजीव booming रहता है
    • जो पोषक तत्वों के चक्रण और रोग-प्रतिरोधक संरचना को मजबूत करते हैं.​
    • मिट्टी की संरचना और एयर-ह्यूमर: यह मिट्टी के ढांचे को बनाये रखता है, ताकि जड़ें हवा ले सकें औरMicrobial activity जारी रहे.,​
  • उपयोगी तथ्य (टिप्स)
    • अगर मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कम हो, तो खेत में जैविक सामग्री (गोबर, हरी खाद, कम्पोस्ट) डालकर इसे बढ़ाना उपयोगी रहता है
    • इससे फसल की उपज और स्वास्थ्य में फर्क दिख सकता है.,​
    • उच्च ह्यूमस सामग्री वाली मिट्टी आम तौर पर काली/गहरी रंग की और नरम-घानी होती है
    • जो जल और पोषक तत्वों को बेहतर रूप से संभालती है.​
    • पादपों के लिए लंबे समय तक स्थायी लाभ के लिए प्राकृतिक अवयवों से ह्यूमस बढ़ाने की खेती-नीतियों (जैसे साइट-विशिष्ट जैविक पदार्थों का उपयोग) को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.,​
  • जो प्रश्न पूछे गए थे उनके जवाब का संक्षेप
    • ह्यूमस सबसे अधिक आमतौर पर ओ-परत (O horizon) में पाया जाता है
    • जिसे उपजाऊ बनाता है और मिट्टी की जैविक उर्वरता को बढ़ाता है.​

3. पौधों को वृद्धि के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति ....... द्वारा की जा सकती है। [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मिट्टी, जल और वायु
Solution:
  • पौधों को वृद्धि के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है
  • जिसकी आपूर्ति मिट्टी, जल और वायु द्वारा की जा सकती है।
  • पौधे आवश्यक पोषक तत्व कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन को वायु, जल एवं सूर्य के प्रकाश से प्राप्त करते हैं।
  • नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटैशियम को पौधे मिट्टी से प्राप्त करते हैं।
  • (माध्यमिक पोषक तत्व): कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S) — ये संरचना, ऊर्जा संवहन और प्रजनन के लिए आवश्यक होते हैं
  • (सूक्ष्म पोषक तत्व): आयरन (Fe), मंगनीज (Mn), जिंक (Zn), कॉपर (Cu), बोरोन (B), क्लोरिन (Cl), मॉलिब्डेनम (Mo) आदि — छोटा pero महत्त्वपूर्ण मात्रा में आवश्यक होते हैं।
  • कहाँ से मिलता है पोषक तत्व
    • मिट्टी (या उर्वरक): मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम के साथ अन्य तत्व धीरे-धीरे पौधों तक पहुँचते हैं।
    • उर्वरकों के माध्यम से कमी होने पर इन्हें補充 किया जा सकता है। सामान्य घरेलू/गार्डन फर्टिलाइज़र NPK ratio के साथ आता है
    • ताकि प्रमुख पोषक तत्व संतुलित रूप से मिल सकें।
    • पानी: कुछ पोषक तत्व पानी के साथ घुलकर सीधे जड़ें लेते हैं; जल की गुणवत्ता और मात्रा पौधों की uptake को प्रभावित कर सकती है।
    • पर्यावरण: प्रकाश, तापमान और मिट्टी की जलधारण क्षमता भी पोषक तत्वों के उपयोग को प्रभावित करते हैं।
    • सही प्रकाश-संयोजन और नमी भी पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग में मदद करते हैं।
  • कौन से पोषक तत्व क्यों जरूरी होते हैं
    • नाइट्रोजन (N): पत्तियों की विकास और हरी रंग के लिए प्रमुख; प्रकाश संश्लेषण और तंतु बनाने में सहायक।
    • फॉस्फोरस (P): जड़ें, बीज, फूल/फल का विकास; ऊर्जा ट्रांसफर और DNA/RNA के निर्माण में भागीदारी।
    • पोटैशियम (K): पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है; पानी पंपिंग और स्टोरेज को नियंत्रित करता है
    • फल-फूल के आकार और स्वाद पर प्रभाव डालता है।
    • कैल्शियम (Ca): पत्तों/फलों की क्लोरोसिस रोकथाम, कोशिका बनावट मजबूत बनाता है।
    • मैग्नीशियम (Mg): क्लोरोफिल का केंद्रक है; ऊर्जा सूत्रों के निर्माण में सहायक।
    • सल्फर (S): प्रोटोीन और प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक तत्व।
    • सूक्ष्म पोषक तत्व: प्रत्येक पौधे की विशिष्ट उम्र/स्थिति के अनुसार, जैसे कि Iron (Fe) पत्तियों में ह्यूजिंग (हरापन) बनाए रखने में, Zinc (Zn) और Mn (मैंगनीज) रोटेशन और विकास के लिए जरूरी हो सकते हैं।
  • कैसे संतुलित करें पोषक तत्व
    •  मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की उपलब्धता जाँचें ताकि कितना उर्वरक चाहिए यह तय किया जा सके।
    • आवश्यकतानुसार fertilization: NPK का संतुलित अनुपात चुनें; पौधे की अवस्था (ज्यादा विकास बनाम फलों का विकास) के अनुसार nutrient mix बदलें।
    • मिनी-मीटर/सूक्ष्म पोषक तत्व: अगर पत्ते पीले पड़ रहे हों, पत्तों पर क्लोरोसिस या वृद्धि मंद दिखे, तो सूक्ष्म पोषक तत्वों के स्प्रे या मिश्रण से補充 करें।
    • अति-उर्वरक से बचें: अत्यधिक पोषक तत्व पौधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं
    • खासकर नाइट्रोजन की अधिकता पत्तों की वृद्धि बढ़ाती है
    • लेकिन फूल/फल की मात्रा घटा सकती है।
  • नोट्स और घरेलू सुझाव
    • हर पौधे की जरूरत भिन्न होती है; फूल, सब्जी, या पेड़-झड़नों के लिए निर्धारित फर्टिलाइज़र रीसाइकल करें।
    • खाद और उर्वरक के अनुसार लेबल पर निर्देशित खुराक और समय-सारिणी का पालन करें।
    • फॉगल्स/फलों के विकास के दौरान थोड़ा अधिक phosphorus-potassium देना फायदेमंद हो सकता है
    • जबकि शुरुआती vegetative stage में N की मात्रा बढ़ी हो सकती है।
    • जल-संयोजन और जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें ताकि पोषक तत्व जड़ तक सही तरीके से पहुँचें।

4. समुद्री नमक, पराग, राख, धुएं की कालिख और महीन मिट्टी किससे संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) धूल के कण
Solution:
  • धूल के कणों में समुद्री नमक, महीन मिट्टी, नमक, राख, धुएं की कालिख और महीन मिट्टी के कण शामिल हैं।
  • धूल के कण क्या हैं
    • खुद पृथ्वी से निकली महीन मिट्टी, समुद्री नमक के सूक्ष्म नमक के कण,植物 से निकलने वाले पराग, गोली जैसे राख के अंश, और आग या धुएं के कारण बने ताप-आधारित कण.​
  • समुद्री नमक और अन्य तत्व धूल के साथ कैसे जुड़ते हैं
    • समुद्री नमक के सूक्ष्म नमक कण भी धूल की घटकों के रूप में वायुमंडल में मिलते हैं
    • विशेषकर समुद्री हवा से उठकर आकाश में फैलते हैं
    • ये नमक के कण धूल के साथ मिलकर बादलों के निर्माण के लिए जल वाष्प को नाभिक के रूप में प्रदान करते हैं
    • जिससे जल-वाष्प कणों के साथ संघनित होकर जल बूंदों को जन्म देता है.​
  • पराग, राख, धुएं की कालिख और महीन मिट्टी का संबंध
    • पराग पौधों से मुक्त होकर वायुमंडल में मिल सकता है और धूल के साथ मिलकर धुएं/कालिख जैसी काले धब्बों के साथ हिस्सेदार बन सकता है
    • साथ ही यह धूल के एक भाग के रूप में मिट्टी और अन्य धूल के साथ समाहित होता है.​
    • राख और धुआँ, विशेषकर ज्वालामुखीय या मानवजनित आग से निकलने वाले ठोस कण भी धूल का हिस्सा होते हैं
    • जो छोटे आकार के होते हैं और जलवाष्प के साथ मिलकर नाभिक बनाते हैं जिससे बादल बनने में मदद मिलती है.​
  • जल चक्र में भूमिका
    • धूल के कण जल वाष्प के लिए नाभिक बनाते हैं, जिनसे जल-कण संकेंद्रित होकर धीरे-धीरे बादलों का निर्माण करते हैं।
    • यही प्रक्रिया जलवायु-चक्र में क्लेम भोजन करती है और मौसम के परिवर्तन में भूमिका निभाती है.​
  • टिप्पणियाँ
    • यदि आप किसी परीक्षा/निबंध के लिए इस विषय का उत्तर ढूंढ रहे हैं
    • तो सामान्यतः सही विकल्प “धूल के कण” ही होता है
    • क्योंकि इनमें समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिख और महीन मिट्टी जैसे सभी घटक आते हैं.​
    • धूल के ये सभी घटक प्राकृतिक और मानवजनित दोनों स्रोतों से आते हैं
    • वायु गुणवत्ता, दृश्यता, तथा जल-वाष्प के संघनन पर प्रभाव डालते हैं.​
  • उद्धरण
    • धूल के कण धूल के रूप में अन्य घटकों के साथ मिलकर जलनाभिक बनाते हैं, जो बादलों के लिए आवश्यक होती है.​
    • समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिख और महीन मिट्टी धूल के अंश के रूप में धूल-कणों में पाए जाते हैं.​

5. निम्नलिखित में से किस मृदा संरक्षण विधि में विभिन्न फसलों को बारी-बारी से कतारों में उगाया जाता है और मृदा को वर्षा में अपरदन से बचाने के लिए अलग-अलग समय पर बोया जाता है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अंतरफसल
Solution:
  • अंतरफसल मृदा संरक्षण विधि में विभिन्न फसलों को बारी-बारी से कतारों में उगाया जाता है
  • मृदा को वर्षा में अपरदन से बचाने के लिए, अलग-अलग समय पर बोया जाता है।
  • नाम और अवधारणा
    • इंटरक्रॉपिंग/अंतर-फसल (Intercropping / Alternate row planting) एक मृदा संरक्षण पद्धति है
    • जिसमें एक ही खेत में विभिन्न फसलों को एक साथ या बारी-बारी क्रम में उगाया जाता है।
    • इसका लक्ष्य वर्षा के दौरान मृदा अपरदन को कम करना, पोषक तत्व संतुलन बनाए रखना और विविध उत्पादन सुनिश्चित करना है.​
  • कैसे काम करती है
    • फसलें एक ही समय पर या अलग-अलग समय पर उगाई जाती हैं, परन्तु पंक्तियों के रूप में व्यवस्थित होती हैं
    • ताकि प्रत्येक फसल की जड़ें मिट्टी के अलग-अलग हिस्सों में काम करें और पानी की सतह प्रवाह धीमा हो।
    • इससे वर्षा के जल का प्रभाव कम होता है और मिट्टी का कटाव घटता है.​
    • यह पद्धति फसलों के प्रकार, क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी की संरचना के अनुसार अनुकूल होती है
    • कुछ प्रचलित संयोजन फसलों के मिश्रण, फसल चक्र और पट्टियों/पंक्तियों के अनुरूप चयन पर निर्भर करते हैं.​
  • लाभ
    • मिट्टी का संरक्षण: बरसात के जल के साथ मिट्टी का कटाव कम होता है
    • क्योंकि पंक्तियों के बीच की जगह में पौधे खाद बनाते हैं और सतही जल का वेग घटता है.​
    • जैविक उर्वरता और नियंत्रण: कुछ इंटरक्रॉपिंग संयोजन पत्तेदार फसलें या मल्चिंग में मदद कर सकती हैं
    • कीट-नियंत्रण में मददगार हो सकती हैं और पोषक तत्व संतुलन बना रहता है.​
    • भूमि उपयोग प्रभावी: एक ही फसल की जगह कई फसलों से एक साथ लाभ मिल सकता है
    • उत्पादन विविध होता है और जोखिम कम होता है.​
  • तुलना के संकेत
    • समोच्च जुताई, वेदिका फार्म, मल्चिंग, चट्टान बाँध आदि भी मृदा संरक्षण के उपाय हैं
    • इंटरक्रॉपिंग/अंतर-फसल वह विधि है जिसमें फसलों को बारी-बारी से या एक ही खेत में विभिन्न फसलें एकान्तर कतारों में उगाकर वर्षा से होने वाले अपरदन को रोकना प्रमुख लक्ष्य होता है.​
  • सीमा और विचारणीय बिंदु
    • सफल इंटरक्रॉपिंग के लिए साइट-स्पेसिफिक चयन जरूरी है
    • कौन-सी फसलें कौन-से मौसम में उगें, उनकी जड़ प्रणाली कैसी है
    • प्रतिस्पर्धा (competition) और सहयोग (complementarity) कैसे होगी, और कौन-सी जल-निकासी/पोषक तत्व संरचना उपयुक्त है।
    • स्थानीय कृषि गाइडेंस और एक्सपर्ट्स से योजना बनाना बेहतर रहता है.​

6. तटीय और शुष्क क्षेत्रों में किस मृदा संरक्षण विधि में मिट्टी के आवरण की रक्षा के लिए हवा की चाल (wind movement) को रोकने हेतु पेड़ों की पंक्तियां लगाई जाती हैं? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) रक्षक मेखलाएं
Solution:
  • तटीय और शुष्क क्षेत्रों में 'रक्षक मेखलाएं' मृदा संरक्षण विधि में मिट्टी के आवरण की रक्षा के लिए हवा की गति को रोकने हेतु पेड़ों की पंक्तियां लगाई जाती हैं।
  • परिचय
    • रक्षक मेखलाएं ऐसे पेड़-झाड़ियाँ बनाती हैं जो हवा की ऊर्ध्वगामी और क्षैतिज चाल को धीमा करती हैं
    • ताकि मिट्टी के पत्थर-रिसाव ( Soil erosion) कम हो सके। यह विधि मिट्टी के आवरण को सुरक्षित रखती है
    • सतही कणों के उड़ने से रोकथाम करती है।​
    • विशेषकर तटीय और शुष्क क्षेत्रों में यह तरीका सबसे प्रभावी माना गया है
    • क्योंकि इन क्षेत्रों में तेज हवा और सूखा मिट्टी की क्षति अधिक होती है।​
  • तकनीकी विवरण
    • कार्य काหลัก उद्देश्य: हवा की गति घटाकर मिट्टी के आवरण को संरक्षित करना; साथ ही जड़ें मिट्टी को बाँधती हैं
    • सतह पर सूखी परतों के विस्थापन को रोकती हैं।​
    • पंक्ति 구성: पेड़ों की एक पंक्ति या एक से अधिक लाइनों की संरचना बनाकर एक धुआँ-सा barrier बनाते हैं
    • जो wind shear और sand/dust drift को घटाती है.​
    • प्रकार के फायदे: मिट्टी की उच्च-उपरणी परत को सुरक्षित रखना, कार्बन स्टोरिंग में सहायक, वन्यजीव आवास और यथासंभव भूमि-स्थिरता बढ़ाने जैसे अतिरिक्त लाभ भी मिलते हैं।​
  • उपयोग के क्षेत्र और उदाहरण
    • तटीय क्षेत्रों में समुद्री लहरों और तेज हवाओं से मिट्टी कटाव रोकने के लिए स्थापित, साथ ही शुष्क क्षेत्रों में भी डस्ट-ड्रिफ्ट और सूखा-एरियोसियन से सुरक्षा देते हैं।​
    • यह मृदा संरक्षण की एक प्रमुख पद्धति है
    • जिसे कई शिक्षण स्रोतों में रक्षक पट्टी के रूप में वर्णित किया गया है।​
  • अन्य से जुड़ी विधियाँ (तुलनात्मक संदर्भ)
    • मल्चिंग, चट्टान बाँध, वेदिका/ढलान संरचना आदि अन्य उपाय मिट्टी के नुकसान को कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं
    • हवा-अपेक्षा में सबसे प्रत्यक्ष रोकथाम रक्षक मेखला द्वारा होती है।​
    • पौधों की जड़ें और पत्तियाँ भी मिट्टी को बाँधने और Humus बनाने में सहयोगी हैं
    • यह संरचना हवा के विरुद्ध विशेष रूप से प्रभावी तब होती है
    • जब पौधों की पंक्तियाँ हवा के प्रवाह को रोके।​
  • संक्षेप में
    • यदि पूछा जाए कि तटीय और शुष्क क्षेत्रों में मिट्टी के आवरण की सुरक्षा के लिए हवा की गति रोकने के लिए कौन-सी मिट्टी संरक्षण विधि प्रयोग की जाती है
    • तो उत्तर होगा: रक्षक मेखलाएं (Shelterbelts / Shelter belts) या आश्रय पट्टी।​
  • किस तरह के प्रश्नों के लिए उपयोगी है
    • मिट्टी कटाव के नियंत्रण के लिए कौन-सी पद्धति अधिक प्रभावी है?
    • तटीय और शुष्क क्षेत्रों में कौन-सी संरचना मिट्टी के आवरण को बेहतर बनाती है?
    • मिट्टी संरक्षण के साथ-साथ किन अन्य लाभों की संभावना होती है?
  • संदर्भ उद्धरण
    • रक्षक मेखलाएं और Shelterbelt का विवरण तटीय और शुष्क क्षेत्रों में मिट्टी संरक्षण के लिए हवा की गति रोकने के माध्यम के रूप में उपलब्ध है.​
    • Shelterbelts के लाभों और संरचना के बारे में अतिरिक्त जानकारी
    • जैसी शैक्षणिक साइटों पर भी संबद्ध बताई गई है.​

7. मृदा निर्माण का निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मृदा के संचय (accumulation) को निर्धारित करता है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) उच्चावच
Solution:
  • मिट्टी के निर्माण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं
  • मूल चट्टान, रंग, बनावट, रासायनिक गुण, खनिज और सामग्री।
  • ये पारगम्यता निर्धारित करते हैं। जलवायु, तापमान तथा वर्षा मौसम और ह्यूमस की दर को प्रभावित करते हैं।
  • इस प्रकार उच्चावच (ऊंचाई और ढलान) मिट्टी के संचय का निर्धारण करते हैं।
  • पैरेंट rock (जन्मक चट्टान)
    • जवाहरात-रासायनिक गुण और फॉर्मेशन की दर भी इसी स्रोत से निर्धारित होती हैं
    • जिससे मिट्टी की गहराई और उसकी पूंजी (उपज) पर असर पड़ता है.​
  • जलवायु
    • तापमान और वर्षा मिट्टी के अपक्षय, ह्यूमस निर्माण और रसायनों के बदलाव को संचालित करते हैं.​
    • भारी वर्षा या उच्च तापमान पर अपक्षय की दर बढ़ती है
    • जिससे मिट्टी का संचय और उसकी गहराई प्रभावित होती है.​
  • राहत (स्थलाकृति)
    • ढाल और ऊँचाई जल निकासी और कटाव को नियंत्रित करते हैं
    • यह मिट्टी की गहराई और पानी-धारण क्षमता पर प्रभाव डालता है, किंतु संचय का मुख्य निर्धारितक नहीं है.​
  • जैविक पदार्थ
    • वनस्पति और जीव-जन्तु से ह्यूमस और कार्बनिक पदार्थ मिट्टी में जुड़ते हैं
    • जिससे मृदा उर्वरकता बढ़ती है; पर यह संचय का प्रमुख निर्धारक नहीं माना जाता है.​
  • समय
    • समय लंबा होने पर मृदा संरचना और उसकी परिपक्वता बढ़ती है
    • जिससे संचय की मात्रा और गुणधर्म विकसित होते हैं.​
  • नोट्स और सामान्य दृष्टिकोण
    • कुछ स्रोत यह स्पष्ट करते हैं कि मृदा निर्माण के प्रमुख कारक पाँच हैं
    • जलवायु, जनक चट्टान, स्थलाकृति, जीव-जंतु/वनस्पति (जैविक प्रभाव)
    • समय; किंतु संचय के शीर्ष निर्धारक के रूप में पैरेंट rock को विशेष महत्व दिया जाता है.​
    • मृदा निर्माण के एक सामान्य मॉडल में पैरेंट rock से शुरू होकर जलवायु, राहत, जीव-जन्तु और समय क्रमवार प्रभाव डालते हैं
    • जिससे मृदा की संरचना, सामग्री और संचय की दिशा तय होती है.​
  • संदर्भ उद्धरण
    • मृदा निर्माण के प्रमुख कारक और पैरेंट rock को संचय के निर्धारितक के रूप में वर्णित:​
    • जलवायु और तापमान-वर्षा के प्रभाव:​
    • जैविक पदार्थ और ह्यूमस योगदान:​