यांत्रिकी (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 13

1. किसी चलती हुई वस्तु की गति को आधा करने पर उसकी ....... है। [C.P.O.S.I. (T-I) 3 जुलाई, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) गतिज ऊर्जा प्रारंभिक का 1/4 हो जाती है
Solution:
  • संवेग क्या है?
    • संवेग ( momentum ) एक वस्तु का द्रव्यमान और गति का गुणनफल है: p = m v.
    • यह एक सदिश राशि है, जिसका दिशा वस्तु की गति के अनुरूप होती है.
    • <IS>द्रव्यमान (m) और गति (v) दोनों परिवर्तनशील हो सकते हैं
    • परन्तु संवेग conserved होने के नियम से कुछ परिस्थितियों में कुल संवेग स्थिर रहता है (जैसे बंद सिस्टम में बिना बाहरी बल के)।
  • गति को आधा करने का प्रभाव
    • मान लें किसी वस्तु का द्रव्यमान m स्थिर है और इसकी वेग v है।
    • अगर गति को आधा कर दिया जाए, तो नया वेग v' = v/2 होगा।
    • इस स्थिति में नया संवेग p' = m × (v/2) = (1/2) m v = p/2।
    • यानी संवेग आधे हिस्से हो जाते हैं। यह सीधे गतिकी के नियमों से निकलता है।
  • अगर गति के साथ अन्य परिवर्तन हों
    • अगर बाहरी बल लगने से वस्तु का द्रव्यमान भी बदले (जैसे भारी वस्तु के टूटने या जोड़ने से), तो संवेग में परिवर्तन द्रव्यमान के अनुसार होगा।
    • अगर कोई सिस्टम उच्च-त्वरण (जैसे ब्रेकिंग के दौरान) या बहिर्विशेष बल (external impulse) लगाते हैं
    • तब संवेग में अस्थाई या नियत परिवर्तन होंगे।
    • संवेग परिवर्तन की दर बल के समानुपाती होती है
    • Newton के द्वितीय नियम के अनुसार F = dp/dt), तो अगर बल स्थिर हो तो समय के साथ संवेग का परिवर्तन भी निर्देशित रूप से होता है।
  • विस्तृत विचारधाराएं
    • गति, वेग (velocity) और संवेग (momentum) तीनों अलग-अलग लेकिन परस्पर संबंधित өл: वेग एक मात्रिक माप है
    • संवेग वह वास्तविक मात्रा है जो द्रव्यमान से योगित होती है।
    • यदि वस्तु एक ही द्रव्यमान के साथ समान दूरी तय करती है
    • तो औसत वेग और औसत चाल में समानता-सीमत हो सकती है
    • यह स्थिति समय, दूरी और बल पर निर्भर करती है।
  • निष्कर्ष
    • अगर किसी चलती वस्तु की गति केवल घट कर आधी हो जाए, और द्रव्यमान वही रहे, तो उसका संवेग आधा हो जाता है।
    • यह परिणाम केवल वही स्थितियों में लागू होता है
    • जहाँ बाहरी बलों द्वारा संवेग पर अन्य प्रभाव न हो रहे हों और द्रव्यमान स्थिर रहे।
    • यदि गति घटाने का तरीका या परिस्थिति भिन्न हो (जैसे साथ में द्रव्यमान परिवर्तन, या बाहरी impulse), तो संवेग का बदलाव भी उसी हिसाब से होगा।

2. वे वस्तुएं जो एक निश्चित समय अंतराल गति को दोहराती हैं, ....... में कहलाती हैं। [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) आवर्ती गति
Solution:
  • वे वस्तुएं जो एक निश्चित समय अंतराल गति को दोहराती हैं, आवर्ती गति में कहलाती है।
  • किसी सरल लोलक (Simple Pendulum) की गति आवर्ती गति का उदाहरण है।
  • सरल लोलक में एक कम व्यास का धातु का गोलक (Bob) एक पतले मजबूत तथा अतन्य (non-stretchable) धागे या तार से एक सिरे से बंधा रहता है
  • दूसरा सिरा किसी दृढ़ आधार जैसे छत पर लगे हुक से बंधा रहता है।
  • इस प्रकार लटका सरल लोलक स्वतंत्रतापूर्वक दोलन करता है।
  • विस्तृत विवरण
    • परिभाषा: आवर्त गति वह गति है जिसमें किसी वस्तु की स्थिति या दिशा-गति एक समान समय अंतराल के बाद पूर्ववत लौट जाती है
    • वही गति पुनः दोहराती है. यह सामान्यत: एक ऐसी गति है
    • जिसमें पथ, दूरी, समय-आवृत्ति या कोणीय गति आदि किसी निर्धारित क्रम से बार-बार होते रहते हैं.​
  • विशेषताएं
    • नियमित समय-अंतराल: आवर्त गति में समय का अंतराल निर्धारित होता है, जैसे हर 1 सेकंड, हर 2 सेकंड आदि.​
    • पुनरावृत्ति: गति या पथ एक ही दिशा में या उसी मार्ग पर बार-बार दोहराया जाता है.​
    • बहुधा सरल प्रतीक: उदाहरणों में घड़ी की सुईयों की गति, पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना, एक पिंग पोंग गेंद का राउंड-रोबिन व्यवहार आदि आते हैं.​
  • उदाहरण
    • घड़ी की सुइयों की गति: हर एक निर्धारित समय के बाद वही स्थिति वापस आती है।
    • पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना: निश्चित पथ और कालचक्र के साथ आवर्त गति का उदाहरण है।
    • किसी पिंड का वृत्ताकार गति या एक-आयामी आवर्ती गति: जैसे एक धारणा के अनुसार एक अक्ष के चारों ओर वस्तु घूमती है
    • समान दूरी समान समय पर तय करती है।
  • अन्य प्रकार की गतियाँ के साथ अंतर
    • Fourier-type शब्दावली में कहा जाए तो एक ऐसी गति जिसमें समय के साथ स्थिति एक निश्चित चक्र की तरह दोहराती है
    • वह आवर्त गति है, जबकि अन्य गतियाँ जैसे कंपन गति, घूर्णन गति आदि भी विभिन्न वर्षों के भीतर दोहराव दिखा सकते हैं
    • लेकिन आवर्त गति का स्पष्ट संकेत समय-अंतराल के बाद नये-पूर्ववत घटनाक्रम का दोहराव होता है.​
  • अन्य विवरण
    • शब्दावली: हिंदी में इसे “आवर्त गति” या “बार-बार दोहराने वाली गति” भी कहा जा सकता है
    • यह अक्सर एक निर्धारित काल-चक्र (period) के साथ जुड़ी होती है.​
    • स्रोत-उदाहरण: आवर्त गति के सार को समझाने के लिए पाठ्यपुस्तकों, प्रश्न उत्तर स्रोतों और शिक्षण साइटों पर संकेत दिए जाते हैं
    • जैसे कि समय-आवर्त गति (repetitive motion) के ठोस उदाहरण.​

3. निम्नलिखित में से किस अग्रणी वैज्ञानिक ने 1890 के दशक में कई किलोमीटर की दूरी तक संकेतों को प्रसारित करने के लिए रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया था? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) गुग्लिल्मो मार्कोनी
Solution:
  • गुग्लिल्मो मार्कोनी नामक अग्रणी वैज्ञानिक ने 1890 के दशक में कई किलोमीटर की दूरी तक संकेतों को प्रसारित करने के लिए रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया था।
  • गुग्लिल्मो मार्कोनी द्वारा दिए गए नियम को मार्कोनी नियम के नाम से भी जाना जाता है।
  • गुग्लिल्मो मार्कोनी को रेडियो टेलीग्राफ के विकास में योगदान के लिए भी जाना जाता है।
  • प्रमुख खोज और पथ
    • मार्कोनी ने 1901 में ट्रांस-अटलांटिक वायरलेस सिग्नल सफलतापूर्वक प्रसारित किया
    • जो वैश्विक दूरसंचार के क्षेत्र में एक निर्णायक माइलस्टोन था.​
    • इनके योगदान के लिए 1909 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार दिया गया
    • जो उनके वायरलेस संपर्क साधन विकसित करने के योगदान की मान्यता है.​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • ऐतिहासिक तौर पर 1890-1892 के दौरान कई भौतिकविदों ने विद्युतचुंबकीय तरंगों और Hertzian तरंगों के संचार/नेविगेशन उपयोग पर विचार प्रस्तुत किए
    • परंतु वास्तविक विकसित रियो-टेलिग्राफी और दूरस्थ संचार के लिए व्यावहारिक उपकरणों की स्थापना मार्कोनी ने ही की थी.​
    • अन्य उल्लेखनीय योगदान में Hertz ने elektromagnetic तरंगों की प्रकृति और प्रसारण को प्रयोगात्मक रूप से स्थापित किया
    • जिससे बाद में दूरसंचार के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ
    • लेकिन 1890s के दशक में वास्तविक दूरी पार करने वाले उपयोगी प्रणालियों के निर्माण का श्रेय मार्कोनी को ही जाता है.​
  • महत्वपूर्ण तथ्य (कंठस्थ करने योग्य)
    • Marconi ने 1895 के आसपास पहली सफल वायरलेस Morse संदेश दूरी पर भेजा
    • 1896 में इंग्लैंड में वायरलेस टेलिग्राफी प्रणाली के लिए पेटेंट कराया गया.​
    • 1901 में ट्रांस-अटलांटिक सिग्नल सफल, जिससे लंबी दूरी के वायरलेस संचार की व्यवहार्यता सिद्ध हुई.​
    • नोबेल पुरस्कार (1909) उनके योगदान की मान्यता के रूप में दिया गया.​
  • टिप्पणी और सावधानियाँ
    • रेडियो के आविष्कार के बारे में ऐतिहासिक खातों में कभी-कभी अन्य नाम भी पीछे रहते हैं
    • प्रचलित समकालीन स्रोतों के अनुसार 1890s में दूरी पर संकेत प्रसारित करने के लिए अग्रणी और अधिक मान्यता प्राप्त नाम Marconi ही हैं.​

4. उस विकल्प का चयन कीजिए, जो अभिकथन (A) और कारण (R) नामक निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सत्य है। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

(A) एक चिकनी सतह की तुलना में एक वस्तु खुरदरी सतह पर कम फिसलती है।

(R) जब सतह खुरदरी होती है, तो घर्षण बल बढ़ता है।

Correct Answer: (c) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
Solution:
  • एक चिकनी सतह की तुलना में एक वस्तु खुरदरी सतह पर कम फिसलती है उसका प्रमुख कारण है
  • जब सतह खुरदरी होती है, तो घर्षण बल का मान बढ़ जाता है।
  • अतः अभिकथन (A) तथा कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
  • अभिकथन (A) और कारण (R) के प्रकार
    • अभिकथन (A): किसी स्थिति या घटना के बारे में एक कथन जिसे सत्य/असत्य के रूप में जाँचा जा सकता है।
    • कारण (R): वह कथन जो अभिकथन (A) के सत्य होने के पीछे के कारण को स्पष्ट करता है या उसका स्पष्टीकरण देता है।
  • सामान्य प्रश्न-प्रकार
    • अगर A और R दोनों सत्य हों और R A का सही स्पष्टीकरण दे, तो选项 यह है
    • A और R दोनों सत्य हैं और R A का सही व्याख्या करता है।
    • अगर A सत्य और R असत्य हो, या A असत्य और R सत्य हो
    • तो उत्तर फिर भी उस विशिष्ट विकल्प पर निर्भर करेगा जो इन परिस्थितियों को शामिल करता है (जैसे R A को सही स्पष्टीकरण देता है या नहीं देता)।
    • अगर दोनों असत्य हों, तब भी दिए गए विकल्पों में से किसी एक के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
  • विश्लेषण के संकेतक
    • A का तथ्यात्मक सत्यापन: A में दी गई घटना/स्थिति के बारे में विश्वसनीय तर्क से सत्यता जाँचें।
    • R का कारण-व्याख्या: R में दिए गए कारण से A क्यों सत्य है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
    • निर्गम (relation) स्पष्टता: R अगर A के कारण-व्यवस्था को स्पष्ट रूप से व्याख्या करता है, तो यह सही संयोजन माना जाएगा।
  • संभावित चयन के तरीके (उदाहरण-संरचना)
    • विकल्प 1: A और R दोनों सत्य हैं और R A का सही स्पष्टीकरण है — यह अक्सर सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है।
    • विकल्प 2: A और R दोनों सत्य हैं किन्तु R A का सही स्पष्टीकरण नहीं है — तब विकल्प संभवतः गलत समझा जाएगा।
    • विकल्प 3/4: A सत्य है पर R असत्य है, या A असत्य है पर R सत्य है — इन स्थितियों में उपयुक्त विकल्प चुनना होगा।
    • नोट: ऊपर दिए गए निष्कर्ष सामान्य तर्क के दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
    • यदि विशिष्ट प्रश्न-पंक्तियाँ (A) और (R) दी जाएँ
    • तो सटीक विश्लेषण के लिए उन्हें उसी क्रम में खोजना और हर विकल्प के अनुसार सत्य-स्थिति की जाँच करना चाहिए।

5. एक गेंद में 300 इकाई का संवेग है। यदि गेंद का वेग दोगुना कर दिया जाए तो गेंद का नया संवेग क्या होगा? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 600 इकाई
Solution:
  • संवेग की परिभाषा
    • संवेग किसी वस्तु के द्रव्यमान (m) और वेग (v) के गुणनफल के रूप में परिभाषित होता है
    • अर्थात् p=mv。 इसकी SI इकाई किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड (kg m/s) है।
    • यह न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से जुड़ा होता है, जहाँ बल संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
    • समस्या का विश्लेषण
    • प्रारंभिक संवेग p=300 इकाई दिया गया है
    • अर्थात् mv=300。 वेग दोगुना होने पर नया वेग 2v हो जाता है।
    • द्रव्यमान m में कोई परिवर्तन नहीं माना जाता
    • इसलिए नया संवेग p′=m×(2v)=2(mv)=2×300=600 इकाई होता है।
  • गणना का चरणबद्ध तरीका
    • चरण 1: प्रारंभिक संवेग p1=mv=300
    • चरण 2: नया वेग v′=2v
    • चरण 3: नया संवेग p2=mv′=m(2v)=2p1=600
    • यह शास्त्रीय भौतिकी (न्यूटनीय यांत्रिकी) के लिए लागू होता है
    • जहाँ वेग प्रकाश की गति से बहुत कम होता है।
    • संबंधित प्रभाव
    • वेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा (12mv2) चार गुना हो जाती है
    • लेकिन संवेग केवल दोगुना। वास्तविक उदाहरण में, जैसे क्रिकेट गेंद का वेग बढ़ाने पर उसके संवेग का प्रभाव बल से जुड़ा होता है।

6. यदि स्थिति और संवेग में अनिश्चितता बराबर है, तो वेग में अनिश्चितता ....... होगी। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 1/2m√(h/π)
Solution:
  • अनिश्चितता सिद्धांत
    • हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी का मूल सिद्धांत है
    • जो 1927 में वर्नर हाइजेनबर्ग द्वारा प्रतिपादित किया गया। इसका गणितीय रूप है:
    • जहाँ Δx स्थिति की अनिश्चितता, Δp संवेग की अनिश्चितता और h प्लांक स्थिरांक है।
    • संवेग Δp=mΔv होता है, जहाँ m कण का द्रव्यमान और Δv वेग की अनिश्चितता है।
    • न्यूनतम अनिश्चितता तब होती है जब Δx=Δp=h4π
  • गणना प्रक्रिया
    • दिया गया है Δx=Δp:
    • Δx⋅Δp=h4π
    • Δx2=h4π
    • चूंकि Δp=mΔv, इसलिए:
    • mΔv=Δx
    • Δx=mΔv
    • अब प्रतिस्थापन करने पर:
    • (mΔv)2=h4π
    • m2(Δv)2=h4π
    • (Δv)2=h4πm2
    • Δv=12mhπ
  • भौतिक महत्व
    • यह परिणाम दर्शाता है कि सूक्ष्म कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) के लिए, जहाँ द्रव्यमान m छोटा होता है
    • वेग की अनिश्चितता बड़ी हो जाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, इलेक्ट्रॉन (m≈9.1×10−31 kg) के लिए Δv महत्वपूर्ण रूप से बड़ा होगा।
    • यह क्वांटम व्यवहार को क्लासिकल भौतिकी से अलग करता है, जहाँ सटीक मापन संभव होता है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • यदि Δx=10−10 m (परमाणु आकार) हो
    • तो इलेक्ट्रॉन के लिए Δv≈5.8×105 m/s होगी, जो ध्वनि वेग के आसपास है।
    • यह अनिश्चितता कण की लहर प्रकृति को दर्शाती है।

7. एक कार की एकसमान गति के लिए वेग-समय ग्राफ है- [JE मैकेनिकल परीक्षा 22 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा
Solution:
  • एक कार की एकसमान गति के लिए वेग-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होगी।
  • समय-वेग ग्राफ और समय-अक्ष से आच्छादित क्षेत्र का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा दिए गए समय-अंतराल में चली गई दूरी को व्यक्त करता है।
  • ग्राफ की प्रकृति
    • इसकी ढाल शून्य होती है, जो शून्य त्वरण को दर्शाता है।
    • उदाहरण के लिए, यदि कार 40 km/h की स्थिर गति से चल रही है
    • तो ग्राफ पूरे समय के लिए समान ऊँचाई पर रहता है।
  • भौतिक महत्व
    • वेग-समय ग्राफ का क्षेत्रफल कार द्वारा तय विस्थापन को दर्शाता है।
    • एकसमान गति के लिए यह क्षेत्रफल आयताकार होता है
    • जिसे वेग × समय से गणना की जाती है।
    • ग्राफ की समानांतर रेखा से पता चलता है कि कोई त्वरण या मंदन नहीं है।
  • गणना विधि
    • मान लीजिए कार का वेग v है और समय अंतराल t2−t1 है।
    • विस्थापन s=v(t2−t1) होता है।
    • ग्राफ पर दो समानांतर रेखाएँ खींचकर आयताकार क्षेत्रफल निकाला जा सकता है।
    • ढाल 0t=0 त्वरण की पुष्टि करता है।

8. घर्षण, सतहों की चिकनाई पर निर्भर करता है। घर्षण बल हमेशा प्रयुक्त बलों ....... I [MTS (T-I) 18 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) का विरोध करता है
Solution:
  • घर्षण बल दो सतहों के संपर्क में आने पर कार्यरत होता है।
  • तथा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है
  • अर्थात घर्षण बल हमेशा गति प्रदान करने वाले बलों का विरोध करता है।
  • घर्षण बल की परिभाषा
    • घर्षण बल तब उत्पन्न होता है जब दो वस्तुएँ एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं
    • गति की प्रवृत्ति दिखाती हैं। यह बल गति को रोकने या धीमा करने का प्रयास करता है
    • जैसे ब्रेक लगाने पर कार रुकती है।
    • सूत्र रूप में F=μN होता है, जहाँ μ घर्षण गुणांक और N अभिलंब बल है।
  • सतहों की चिकनाई पर निर्भरता
    • चिकनी सतहों पर घर्षण कम होता है क्योंकि सूक्ष्म उभार कम होते हैं
    • जबकि खुरदरी सतहों पर अधिक।
    • सामग्री के प्रकार (लकड़ी, धातु, प्लास्टिक) और साफ-सफाई भी प्रभावित करती है।
    • उदाहरणस्वरूप, बर्फ पर घर्षण न्यूनतम होता है।
  • प्रयुक्त बलों के विपरीत दिशा
    • घर्षण बल हमेशा लगाए गए बल या गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
    • यदि आप दायें धकेलते हैं, तो घर्षण बायें की ओर प्रतिक्रिया देता है।
    • यह न्यूटन के तृतीय नियम से जुड़ा है।

9. बल की दिशा में विस्थापन के साथ बल के गुणन द्वारा क्या निरूपित किया जाता है? [CGL (T-I) 17 अगस्त, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कार्य
Solution:
  • बल तथा बल की दिशा में उत्पन्न हुए विस्थापन के गुणन में प्राप्त भौतिक राशि कार्य कहलाती है।
  • अर्थात कार्य = बल × बल की दिशा में हुआ विस्थापन कार्य का S.I. मात्रक न्यूटन मीटर या जूल होता है।
  • कार्य की परिभाषा
    • कार्य तब किया जाता है जब कोई बल किसी वस्तु को उसकी दिशा में विस्थापित करता है।
    • गणितीय रूप से, जब बल F की दिशा में विस्थापन s होता है
    • तो कार्य W=F×s होता है। यह स्केलर राशि होती है
    • क्योंकि कोण शून्य होने पर cos⁡0∘=1
    • SI मात्रक जूल (Joule) है, जहाँ 1 जूल = 1 न्यूटन बल द्वारा 1 मीटर विस्थापन।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि 10 N बल 2 m दूरी तय करवाए, तो कार्य 20 J होता है।
  • गणितीय सूत्र
    • सामान्यतः कार्य का सूत्र W⃗=F⃗⋅s⃗=Fscos⁡θ
    • है। बल की दिशा में विस्थापन होने पर θ=0∘, अतः W=Fs
    • वेगctor रूप में F⃗=Fxi^+Fyj^, s⃗=sxi^+syj^ के लिए W=Fxsx+Fysy
    • यदि बल विस्थापन के लंबवत हो (θ=90∘), तो W=0。 यह गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा ऊर्ध्वाधर गति में स्पष्ट होता है।
  • भौतिकीय महत्व
    • यह कार्य यांत्रिक ऊर्जा रूपांतरण को दर्शाता है
    • गतिज से स्थितिज या इसके विपरीत।
    • कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, शुद्ध कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन (Wnet=ΔK)। दैनिक जीवन
    • साइकिल चलाते समय पैरों का बल चेन की दिशा में कार्य करता है।

10. किसी पिंड की गतिज और स्थितिज ऊर्जाएं उसकी ....... ऊर्जा की घटक होती हैं- [MTS (T-I) 18 अक्टूबर, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) यांत्रिक
Solution:
  • किसी पिंड की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) एवं स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) उसकी यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical energy) के ही घटक या भाग होते हैं
  • जैसे पृथ्वी से किसी ऊंचाई पर ऊपर या नीचे की ओर गतिमान पिंड की कुल यांत्रिक ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा का योग होती है।
  • यांत्रिक ऊर्जा की परिभाषा
    • यांत्रिक ऊर्जा किसी पिंड में गतिज ऊर्जा (K) और स्थितिज ऊर्जा (U) का योग होती है
    • E=K+U。 गतिज ऊर्जा गति से संबंधित होती है
    • जबकि स्थितिज ऊर्जा स्थिति या आकृति परिवर्तन से।
    • संरक्षी बल प्रणाली में कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
    • उदाहरण: लोलार्क में गेंद ऊपर जाने पर स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है
    • नीचे आते समय गतिज ऊर्जा। कुल E अपरिवर्तित रहता है।
  • गतिज ऊर्जा का विवरण
    • गतिज ऊर्जा K=12mv2 है, जहाँ m द्रव्यमान और v वेग।
    • यह कार्य-ऊर्जा प्रमेय से व्युत्पन्न होती है। वेग दोगुना होने पर K चतुर्गुणित।
    • दैनिक उदाहरण: दौड़ती कार में उच्च वेग से अधिक K, ब्रेक लगाने पर घर्षण कार्य द्वारा K शून्य।
  • स्थितिज ऊर्जा का विवरण
    • स्थितिज ऊर्जा गुरुत्वाकर्षण के लिए U=mgh (ऊँचाई h) या वसंत के लिए U=12kx2
    • यह संरक्षी बलों से संचित होती है
    • पर्वत पर रखी चट्टान में उच्च U, गिरने पर U गतिज में परिवर्तित।