यांत्रिकी (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 13

11. यदि एक पिंड का संवेग दोगुना कर दिया जाए, तो गतिज ऊर्जा ....... हो जाती है। [MTS (T-I) 16 सितंबर, 2017 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एक-चौथाई
Solution:
  • मूल सूत्र
    • संवेग P=mv होता है, जहाँ m द्रव्यमान और v वेग है।
    • गतिज ऊर्जा KE=12mv2 है।
    • संवेग को वेग के रूप में व्यक्त करने पर v=Pm, इसलिए KE=P22m प्राप्त होता है।
    • इससे स्पष्ट है कि गतिज ऊर्जा संवेग के वर्ग के समानुपाती होती है।
  • गणना
    • प्रारंभिक संवेग P के लिए KE1=P22m
    • नया संवेग 2P के लिए KE2=(2P)22m=4P22m=4KE1
    • अनुपात KE2KE1=4। इस प्रकार, गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।
  • प्रतिशत वृद्धि
    • प्रारंभिक ऊर्जा KE1 से नई ऊर्जा 4KE1 तक वृद्धि 4KE1−KE1=3KE1 है।
    • प्रतिशत वृद्धि 3KE1KE1×100%=300% होती है।
    • यह 400% कुल ऊर्जा के रूप में भी देखा जा सकता है, लेकिन वास्तविक वृद्धि 300% है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए एक 2 kg द्रव्यमान वाला पिंड 5 m/s वेग से चल रहा है।
    • प्रारंभिक संवेग P=10 kg m/s और KE=25 J। संवेग दोगुना करने पर वेग 10 m/s हो जाता है
    • तो KE=100 J, जो चार गुना है।
    • यह रॉकेट या गेंद की टक्कर जैसे मामलों में लागू होता है।

12. यदि एक ईंट पर 7N बल लगाया जाए और वह 5m तक गति करती है, तो किया गया कार्य कितना होगा? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 35 J
Solution:
  • यदि एक ईंट पर 7 N बल लगाया जाए और वह बल की दिशा में 5 मीटर तक गति करे, तो किया गया
  • कार्य 35 जूल होगा। कार्य की गणना के लिए सूत्र W = F × d × cosθ का उपयोग होता है
  • जहाँ θ = 0° होने से cosθ = 1। इस प्रकार, W = 7 × 5 = 35 J।
  • कार्य की परिभाषा
    • भौतिकी में कार्य तब किया जाता है जब कोई बल किसी वस्तु को उसके बल की दिशा में विस्थापित करे।
    • यहाँ बल स्थिर (constant) माना गया है और विस्थापन भी सरल रेखा में है
    • इसलिए कोई जटिल गणना की आवश्यकता नहीं।
    • इकाई जूल (J) होती है, जो न्यूटन-मीटर (N·m) के बराबर है।
  • सूत्र और गणना
    • कार्य W = बल (F) × विस्थापन (d) × cosθ, जहाँ θ बल और विस्थापन के बीच का कोण है।
    • दिए गए मान: F = 7 N, d = 5 m, θ = 0° (क्योंकि "गति करती है
    • बल दिशा में ही विस्थापन माना जाता है)।
    • इसलिए, W = 7 × 5 × 1 = 35 J।
  • इकाइयों का विश्लेषण
    • न्यूटन (N) = kg·m/s², इसलिए कार्य = (kg·m/s²) × m = kg·m²/s² = जूल। यह SI इकाई मानक है।
    • यदि कोण अलग होता, तो cosθ जोड़ना पड़ता, लेकिन यहाँ सरल स्थिति है।
  • व्यावहारिक महत्व
    • यह उदाहरण कार्य-ऊर्जा प्रमेय को दर्शाता है
    • जहाँ किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होता है
    • यदि प्रारंभिक वेग शून्य हो)। वास्तविकता में घर्षण आदि बल कार्य को कम कर सकते हैं
    • लेकिन प्रश्न में केवल दिया बल ही विचारणीय है।

13. चंद्रयान-3, अत्यधिक मात्रा में ईंधन जलाकर पृथ्वी की सतह से प्रस्थान करता है। फिर निकलने वाली गैसें रॉकेट को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर की ओर धकेलती हैं। यहां गति का कौन-सा नियम लागू होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) न्यूटन का गति का तीसरा नियम
Solution:
  • चंद्रयान 3 अत्यधिक मात्रा में ईंधन जलाकर पृथ्वी की सतह से प्रस्थान करता है।
  • फिर निकलने वाली गैस रॉकेट को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर की ओर धकेलती है। यह न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर आधारित है।
  • न्यूटन का तीसरा नियम
    • न्यूटन का गति का तीसरा नियम कहता है कि हर क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
    • जब चंद्रयान-3 के इंजन ईंधन जलाते हैं, तो गैसें नीचे की ओर उच्च वेग से बाहर निकलती हैं
    • (क्रिया), जिससे रॉकेट ऊपर की ओर समान बल से धकेलता है (प्रतिक्रिया) ।
    • यह थ्रस्ट उत्पन्न करता है, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार करने में मदद करता है।
  • रॉकेट प्रणोदन में अनुप्रयोग
    • रॉकेट इंजन में ठोस या द्रव ईंधन (जैसे LVM3-M4 में प्रयुक्त) जलने पर उच्च दाब वाली गैसें नोजल से बाहर फेंकी जाती हैं।
    • गैसों का वेग लगभग 2-4 किमी/सेकंड होता है
    • जो रॉकेट को विपरीत दिशा में गति देता है ।
    • चंद्रयान-3 के पहले चरण में बूस्टर गैसें नीचे धकेलकर रॉकेट को 45 किमी ऊंचाई तक ले गए।
  • चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण विवरण
    • चंद्रयान-3 को LVM3-M4 रॉकेट से 14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया।
    • प्रारंभिक चरण में सॉलिड बूस्टर ने भारी ईंधन जलाया
    • फिर लिक्विड और क्रायोजेनिक इंजन ने क्रमिक थ्रस्ट प्रदान किया, रफ्तार को 36,000 किमी/घंटा तक बढ़ाया ।
    • यह नियम पूरे मिशन में लागू रहा, जैसे चंद्र कक्षा में समायोजन।
  • अन्य नियमों से तुलना
    • न्यूटन का पहला नियम (जड़त्व) रॉकेट की गति बनाए रखने में, दूसरा नियम (F=ma) थ्रस्ट से त्वरण में सहायक है
    • लेकिन मुख्य रूप से तीसरा नियम ही प्रक्षेपण का आधार है।
    • रॉकेट अंतरिक्ष में भी काम करता है
    • क्योंकि गैसें रॉकेट के सापेक्ष बाहर निकलती हैं, न कि वायुमंडल के।
  • वैज्ञानिक महत्व
    • यह सिद्धांत रॉकेट्री का मूल है
    • जिसे ट्सिओलकोवस्की समीकरण से जोड़ा जाता है: Δv = ve ln(m0/mf), जहां ve गैस वेग है।
    • चंद्रयान-3 में 100 किग्रा अतिरिक्त ईंधन ने मिशन विस्तार संभव किया ।
    • ISRO ने इससे सिद्ध किया कि कुशल ईंधन प्रबंधन से लंबे मिशन सफल होते हैं।