Solution:महर्षि 'पतंजलि' के अनुसार यम् नियमों के अनुष्ठान में उत्पन्न बाधा को दूर करने का उपाय प्रतिपक्ष भावना से है। यमनियमों का पालन करने में कई प्रकार, की विघ्न बाधाएँ हैं, जो हमें योग से विचलित करती हैं। महर्षि पतंजलि कहते हैं- वितर्कबाघने प्रतिपक्षभावनम् ।
(योगसूत्र- 2.33) यम नियमों के अनुष्ठान में, इनके विपरीत हिंसा, असत्य, चोरी, असंयम, परिग्रह तथा अशुचिता, असंतोष, विलासिता, स्वाध्याय का अभाव आत्म विमुखता तथा नास्तिकता ईश्वर से विमुखता अधर्म है। इनके प्रतिपक्ष का चिन्तन करके इनसे बचना चाहिए। साधक को एक बार यह दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए कि मैने इस दुःखमयी संसाराग्नि के ताप से बचने के लिए जो इन हिंसा, असत्य, चोरी, असंयमादि वितकों का परित्याग किया है।