Solution:एक पाद स्कन्धासन संतुलनात्मक आसन नही है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ है- पाद अर्थात पैर को स्कंध अर्थात कंधे से मिलाना। इस आसन को करते समय जमीन पर समानांतर पैर फैलाकर बैठ जाएँ। अब एक पैर धीरे-धीरे उठाकर कंधे पर रखना है। इसके लिए नए अभ्यासी पहले दोनों पैर थोड़े थोड़े मोड़ लें, क्योंकि यह अभ्यास असंतुलनात्मक है।
अब दाहिने पैर के टखने को पकड़े और धीरे-धीरे सिर के ऊपर से दाहिने पैर (पिंडली) को कंधे पर रखने की कोशिश करें। याद रहे दूसरा पैर सीधा जमीन से सटा रहे। एक पैर कंधे पर रखते समय श्वास छोड़े। इस स्थिति को एक पाद स्कंघासन कहते हैं। इस आसन के निम्नलिखित लाभ हैं
1. मेरुदण्ड को अधिक मात्रा में रक्त मिलता है, जिससे संतुलन बनाए रखने वाले चक्रों को ऊर्जा शक्ति मिलती है।
2. कमर एवं नितम्बों में लोच पैदा होती है।
3. प्रजनन-तंत्र सम्बंधी विकार नष्ट होते हैं।
4. शरीर अधिक सुदृढ़ होता है और यह रक्त शुद्धीकरण में बहुत सहयोग प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त वृक्षासन, ताड़ासन, गरुड़ासन, चक्रासन, चंद्रासन, त्रिकोणासन, नटराज आसन, एक पाद विराम आसन, उत्कटासन, उत्तानासन आदि सभी आसन खड़े होकर किए जाने वाले आसन हैं जो संतुलनात्मक हैं।