यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 योग (YOGA)

Total Questions: 88

61. कफ़ दोष में किन महाभूतों की प्रधानता होती है :

(A) वायु महाभूत
(B) जल महाभूत
(C) पृथ्वी महाभूत
(D) आकाश महाभूत

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (c) (B) और (C)
Solution:

वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों को त्रिदोष कहते हैं। त्रिदोप, धातु और मल को दूषित करते हैं, इसी कारण से इनको 'दोष' कहते है। ये दोष असामान्य आहार-विहार से विकृत या दूषित हो जाते हैं।

पंच महाभूतों से दोषों की उत्पत्ति होती है -

1. सृष्टि में व्याप्त वायु महाभूत से शरीरगत वात दोष की उत्पत्ति होती है।
2. अग्नि महाभूत से पित्त दोष की उत्पत्ति होती है।
3. जल तथा पृथ्वी महाभूतों से कफ दोष की उत्पत्ति होती है।

अर्थात शरीर रक्त आदि धातु से निर्मित होता है एवं मल शरीर को स्तंभ की तरह सम्हाले हुए हैं। दोष, धातु, मल, प्राकृतिक रूप से रहकर उचित आहार विहार करने वाला शरीर धारण करते हैं। शरीर की क्षय, वृद्धि, शरीरगत अवयवों द्रव्यों की विकृति, आरोग्यता- अनारोग्यता आदि दोष धातु मलों पर ही आधारित हैं।

62. हठप्रदीपिका के अनुसार एक योगाभ्यासी के लिए कौन से आहार द्रव्य निषिद्ध हैं?

(A) तिल
(B) यव
(C) सर्षप
(D) शुन्ठी

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (a) (A) और (C)
Solution:

हठप्रदीपिका के अनुसार एक योगाभ्यासी के लिए मिताहार, अपथ्यकर आहार तथा पथ्यकारक आहार का वर्णन किया गया है- सुस्निगद्ध तथा मधुर भोजन, भगवान को अर्पित कर, अपने पूर्ण आहार का चतुर्थाश कम खाया जाय उसे मिताहार कहते हैं।

ह. प्र. -1/59-60 में अपथ्यकर आहार का वर्णन है - कटु, अम्ल, तीखा, नमकीन, गरम, हरी शाक, खट्टी भाजी, तेल, मत्स्यान, सरसों मद्य, मछली, बकरे आदि का मांस, दही, छाछ, कुथली, कोल (बैर), खल्ली, हींग तथा लहसुन आदि वस्तुएं योग साधकों के लिए अपथ्यकर कहे गए हैं। फिर से गर्म किया गया, रूखा, अधिक नमक या खटाई वाला, अपथ्यकारक तथा उत्कट अर्थात वर्जित शाक युक्त भोजन अहितकर है। अतः इन्हे नही खाना चाहिए।

ह. प्र.-1/62 पथ्यकारक भोजन या आहार - उत्तम साधकों के लिए गेहूँ, चावल, जो, साठी चावल जैसे सुपाच्य अन्य, दूध, घी, खांड, मक्खन, मिसरी, मधु, सुंठ, परवल जैसे फल आदि पाँच प्रकार के शाक (जीवन्ति, बथुआ, चौलाई, मेघनाद तथा पुनर्ववा), मूंग आदि तथा वर्षा का जल पथ्यकारक भोजन है।

63. विबंध में कौन से आसन निषिद्ध हैं?

(A) त्रिकोणासन
(B) कुक्कुटासन
(C) पादहस्तासन
(D) सर्वांगासन

सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (b) (A) और (C)
Solution:

विबंध में निम्न आसन निषिद्ध हैं -
(a) त्रिकोणासन
(c) पादहस्तासन

आयुर्वेद के अनुसार बीमारी चाहे जो भी हो अधिकांश का मूल कारण कब्ज या विबंध को माना जाता है। कब्ज का विबंध, पाचन तंत्र की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें शरीर का मल बहुत सख्त हो जाता है और उसका त्याग करना कठिन हो जाता है।

सामान्य अवस्था में व्यक्ति प्रतिदिन दो बार मल का त्याग करता है जिससे शरीर स्वस्थ बना रहता है, जब व्यक्ति मल का त्याग आसानी से नहीं कर पाता तब उसे विबंध कहते हैं। विबंध की स्थिति में योग चिकित्सा ने निम्न आसनों का सुझाव दिया है -
1. सूर्य नमस्कार
2. पवनमुक्तासन
3. भुजंगासन

64. निम्नलिखित में से कौन से योगाभ्यास अवसाद में सकारात्मक प्रभाव नहीं डालते हैं?

(A) भस्त्रिका प्राणयाम
(B) शवासन
(C) कपालभाति
(D) भ्रामरी प्राणायाम

सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (a) (B) और (D)
Solution:

निम्नलिखित योगाभ्यास अवसाद में सकारात्मक प्रभाव नहीं डालते हैं-

1. शवासन
2. भ्रामरी प्राणायाम

शवासन, योग विज्ञान का बेहद महत्वपूर्ण आसन है। शवासन को किसी भी योग सेशन के बाद बतौर अंतिम आसन किया जाता है। इसे करने से डीप हीलिंग के साथ ही शरीर को गहरे तक आराम भी मिलता है। शवासन साधारण कठिनाई वाला अष्टांग योग का आसन हैं। रोज, योग करने के बाद 10-12 मिनट तक इसका अभ्यास किया जा सकता है।

भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास द्वारा किसी भी व्यक्ति का मन, क्रोध, चिंता व निराशा से मुक्त हो जाता है। यह एक साधारण प्रक्रिया है जिसको घर या आफिस, कहीं पर भी किया जा सकता है। इस प्राणायाम में साँस छोड़ते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आप किसी मधुमक्खी की ध्वनि निकाल रहे हैं।

65. 'घेरण्डसंहिता' के अनुसार कौन से षट्‌कर्म दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं?

(A) नेति
(B) त्राटक
(C) कपालभाति
(D) लौलिकी

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (d) (A) और (B)
Solution:

'घेरण्ड संहिता' के अनुसार नेति और त्राटक षट्कर्म दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं। सूत्रनेति में धागे का मार्ग नेति, षट्कर्म का महत्वपूर्ण अंग है। नेति मुख्यतः सिर के अन्दर वायु मार्ग को साफ करने की क्रिया है। हठयोग प्रदीपिका और अन्य स्रोतों में नेति के बहुत से लाभ वर्णित हैं। नेति के मुख्यतः दो रूप हैं -

1. जलनेति,
2. सूत्रनेति

जलनेति में जल का प्रयोग किया जाता है और सूत्रनेति में धागा या पतला कपडा प्रयोग में लाया जाता है। त्राटक क्रिया षट्कर्म की पाँचवी क्रिया है। वस्तुतः त्राटक बाह्य ध्यान है। घेरण्ड संहिता में कहा गया है कि पलकों को बिना झपकाएँ आंखों से आँसू आने तक किसी सूक्ष्म द्रव्य को देखना ही त्राटक है।

66. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) है :

अभिकथन (A): नारद एक भक्ति योगी हैं जो परम भक्ति के पक्षधर हैं। जो आत्मसाक्षात्कार कराती है।
तर्क (R): कबीर, मीराबाई, तुलसीदास और सूरदास ने भक्ति योग को अपनाया।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन- नारद एक भक्ति योगी हैं जो परम भक्ति के पक्षधर हैं जो आत्मसाक्षात्कार कराती है, सही है। नारद एक महान देवर्षि थे। जैसे मनुष्यों में ऋषि या बड़े-बड़े योगी रहते हैं, वैसे ही देवताओं में भी बड़े-बड़े योगी हैं।

नारद भी वैसे ही एक अच्छे और अत्यंत महान योगी थे। तर्क- कबीर, मीराबाई, तुलसीदास और सूरदास ने भक्ति योग को अपनाया, सही है। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

67. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A)और दूसरा तर्क (R) है:

अभिकथन (A): समाधि प्राप्ति में सिद्धियाँ विघ्र हैं।
तर्क (R) : देवताओं के आमंत्रण पर भी योगी को साधना छोड़कर भोगों की ओर आसक्त नहीं होना चाहिए।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन समाधि प्राप्ति में सिद्धियाँ विघ्र हैं, सत्य है क्योंकि सिद्धियाँ मन की तरह चंचल होती हैं जो समाधि रूपी शरीर में प्रवेश कर उसे चंचला बना देती हैं। तर्क देवताओं के आमंत्रण पर भी योगी को साधना छोड़कर भोगों की ओर आसक्त नही होना चाहिए, सही है। देवता जब योगी की साधना से घबराने लगते हैं तो वह उसे विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों से भंग करने की कोशिश करते हैं। गुरु विश्वमित्र इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं, तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

68. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) है :

अभिकथन (A) : व्याधि चित्तविक्षेप के साथ प्रकट होती है।
तर्क (R) : चित्तविक्षेप त्रिदोष में वैषम्य को उत्पन्न करता है।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा संबंधित हैं
Solution:

दिए गए अभिकथन व्याधि चित्त विक्षेप के साथ प्रकट होती है, सही है क्योंकि संसार के अनेक अस्थिर मन वाले व्यक्ति दुर्बल अन्तःकरण एवं अशुद्ध अन्तरंग के कारण ही रोग तथा व्याधि का भार वहन करते हैं। चित्त विक्षेप त्रिदोष में वैषम्य को उत्पत्र करता है, सही है। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं तथा एक दूसरे से संबंधित हैं।

69. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) है :

अभिकथन (A) : प्रकाश संवेदक वर्णक नेत्र के शंकु में विद्यमान होते हैं।
तर्क (R) : तीन प्रकार के शंकु और उसके प्रकाशवर्णक के विभिन्न संयुग्मन द्वारा अलग-अलग वर्णों के संवेदक उत्पन्न नहीं होते हैं।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (c) (A) सही है, परन्तु (R) गलत है
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन प्रकाश संवेदक वर्णक नेत्र के शंक में विद्यमान होते हैं, सही है। वाह्य तंतुमयी परत का अग्र पारदर्शी भाग होता है, जो नेत्रगोलक के अग्र उभरे भाग पर स्थित रहता है। कार्निया नेत्र गोलक का सामने वाला 1/6 भाग बनाता है। इसमें रक्तवाहिकाओं का पूर्णतया अभाव होता है।

प्रकाश किरणें कार्निया से होकर रेटिना पर पहुँचती हैं। तर्क तीन प्रकार के शंकु और उनके प्रकाशवर्णक के विभिन्न संयुग्मन द्वारा अलग-अलग वर्णों के संवेदक उत्पन्न नहीं होते हैं, गलत है। अतः (A) सही है, परन्तु (R) गलत है।

70. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A)और दूसरा तर्क (R) है:

अभिकथन (A) : अम्ल और लवण रस प्रधान आहार वातशामक होता है।
तर्क (R) : अम्ल और लवण रस प्रधान आहार वातज विकारों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अपथ्य है।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (c) (A) सही है, परन्तु (R) गलत है
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन अम्ल और लवण रस प्रधान आहार वात- शामक होते है, सही है क्योंकि अम्ल और लवण रस ही भोजन को पचाने का कार्य करते हैं। जब इनकी प्रधानता होती है। तो भोजन का पूर्ण पाचन हो जाता है। जिसके परिणामस्वरुप वातका जन्म ही नहीं होता है।

तर्क अम्ल और लवण रस प्रधान आहार वातज विकारों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अपथ्य है, गलत हैं क्योंकि विकारों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह पथ्य अर्थात खाने योग्य है। अतः (A) सही है, परन्तु (R) गलत है।