यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 योग (YOGA)

Total Questions: 88

71. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A)और दूसरा तर्क (R) है:

अभिकथन (A) : ध्यान की शिक्षण पद्धति के लिए शांत वातावरण उत्पन्न करना आवश्यक है ताकि ध्यानात्मक मन : स्थिति उत्पन्न हो सके।
तर्क (R) : समस्त योगाभ्यास ध्यानात्मक मनःस्थिति के निर्माण में योगदान करते हैं।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन ध्यान की शिक्षण पद्धति के लिए शांत वातावरण उत्पन्न करना आवश्यक है ताकि ध्यानात्मक मनः स्थिति उत्पन्न हो सके, सही है। समस्त योगाभ्यास ध्यानात्मक मनःस्थिति के निर्माण में योगदान करते हैं, सही है। परन्तु शांत वातावरण से ध्यानात्मक मनःस्थिति उत्पन्न हो यह आवश्यक नही है। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

72. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) है:

 

अभिकथन (A): योगाभ्यासों का स्थान शांत होना चाहिए।
तर्क (R): योगाभ्यास शांत स्थान पर शरीर और मन को शिथिल करने के उद्देश्य से रिक्त उदर पर किए जाने चाहिए।

उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution:

प्रश्नगत अभिकथन- योगाभ्यासों का स्थान शांत होना चाहिए, सही है। क्योंकि शांत स्थानों पर ही मन, चित्त और चेतना एक साथ संयुक्त होकर योगाभ्यासों को प्रभावी बनाते हैं। योगाभ्यास शांत स्थान पर शरीर और मन को शिथिल करने के उद्देश्य से रिक्त उदर पर किए जाने चाहिए। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

73. निम्नलिखित योगियों को उसके जन्म के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(A) स्वामी विवेकानन्द
(B) महर्षि दयानन्द सरस्वती
(C) महर्षि महेश योगी
(D) स्वामी शिव

सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (c) (B)-(A)-(C)-(D)
Solution:

प्रश्नगत योगियों का उनके जन्म के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित क्रम निम्नलिखित है -
(b) महर्षि दयानन्द सरस्वती (जन्म वर्ष 12 फरवरी, 1824)
(a) स्वामी विवेकानन्द (जन्म वर्ष 12 जनवरी, 1863)
(c) महर्षि महेश योगी (जन्म वर्ष 12 जनवरी, 1918)
(d) स्वामी शिवानंद (जन्म वर्ष- 8 सितंबर, 1887)

महर्षि महेश योगी का जन्म छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास पांडुका गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की उपाधि अर्जित की। हिमालय क्षेत्र में दो वर्ष का मौन व्रत करने के बाद सन् 1955 में उन्होंने टी एम तकनीक की शिक्षा देना आरम्भ किया।

74. बौद्ध दर्शन के अष्टांगिक मार्ग के अनुसार निम्नलिखित के सही क्रम बताएँ :

(A) सम्यक् कमत
(B) सम्यक् वाक्
(C) सम्यक् दृष्टि
(D) सम्यक् संकल्प

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (c) (C)-(D)-(B)-(A)
Solution:

बौद्ध दर्शन के अष्टांगिक मार्ग के अनुसार सही क्रम निम्नलिखित है -
(c) सम्यक् दृष्टि
(d) सम्यक् संकल्प
(b) सम्यक् वाक्
(a) सम्यक् कर्मांत

अष्टांग मार्ग भगवान बुद्ध की प्रमुख शिक्षाओं में से एक है जो दुःखों से मुक्ति पाने एवं तथ्य ज्ञान के साधन के रूप में बताया गया है। बौद्ध धर्म के अनुसार, चौथे आर्य सत्य का आर्य अष्टांग मार्ग है- दुःखनिरोध पाने का रास्ता।

गौतम बुद्ध कहते थे कि चार आर्य सत्य की सत्यता का निश्चय करने के लिए इस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। सभी अष्टांगिक मार्ग निम्न हैं - 1. सम्यक् दृष्टि, 2. सम्यक् संकल्प, 3. सम्यक् वाक, 4. सम्यक् कर्मात, 5. सम्यक् जीविका, 6. सम्यक् प्रयास, 7. सम्यक् स्मृति, 8. सम्यक् समाधि ।

75. 'तैत्तिरीयोपनिषद' के अनुसार पंचभूत के उद्‌गम का सही क्रम क्या है?

Correct Answer: (d) आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी
Solution:

'तैत्तिरीयोपनिषद् के अनुसार पंचभूत के उद्गम का सही क्रम निम्न है - आकाश,वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी पंचभूत या पंचतत्व भारतीय दर्शन में सभी पदार्थों के मूल माने गए है। आकाश, वायु, अग्नि, जल तथा पृथ्वी ये पंचमहाभूत माने गए हैं। जिनसे सृष्टि का प्रत्येक पदार्थ बना है।

लेकिन इनसे बने पदार्थ जड़ (यानि निर्जीव) होते हैं, सजीव बनने के लिए इनको आत्मा चाहिए। आत्मा को वैदिक साहित्य में पुरुष कहा जाता है। सांख्या शास्त्र में प्रकृति इन्ही पंचभूतों से बनी मानी गयी है।

76. निम्नलिखित को 'भगवद्‌गीता' के अनुसार श्रेष्ठता की दृष्टि से क्रमबद्ध करें :

(A) अभ्यास
(B) ज्ञान
(C) परमेश्वर का ध्यान
(D) सब कर्मों में फल त्याग

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (b) (A)-(B)-(C)-(D)
Solution:

'भगवद्गीता' के अनुसार श्रेष्ठता की दृष्टि से क्रमबद्धता निम्नलिखित है -
(a) अभ्यास
(b) ज्ञान
(c) परमेश्वर का ध्यान
(d) सब कार्मों में फल त्याग

'भगवद्गीता' में भगवान श्री कृष्ण सर्वप्रथम अभ्यास पर जोर देते हैं। और यह सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि अभ्यास योग से एक साधारण व्यक्ति महानयोगी बन सकता है। इसके बाद ज्ञानयोग के विषय में अर्जुन का मार्ग दर्शन कराते हैं। ज्ञान के बाद ही परमेश्वर के असली रुप का दर्शन हो पाता है। इन सब के बाद कर्म को प्रधान बताते हैं और कर्म फल के त्याग के विषय में छाए अन्धकार को मिटाने हैं।

77. 'त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद्' के अनुसार नियम का आरोही क्रम है

(A) तप
(B) सन्तोष
(C) दान
(D) हरिआराधना
(E) आस्तिक्य

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (b) (A)-(B)-(E)-(C)-(D)
Solution:

'त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद् के अनुसार नियम का आरोही क्रम निम्न है -
(A) तप
(B) सन्तोष
(E) आस्तिक्य
(C) दान
(D) हरिआराधना

शुक्ल यजुर्वेद से सम्बन्धित इस उपनिषद में अष्टांग योग द्वारा ब्रहम प्राप्ति का वर्णन है। इस उपनिषद का प्रारम्भ त्रिशिखी नामक ब्राहमण और भगवान आदित्य के बीच 'आत्मा' और 'ब्रह्म' विषयक प्रश्नोत्तर से होता है।

इसके बाद इसमें शिवतत्व की विद्यमानता, 'ब्रह्म' से अखिल विश्व की उत्पत्ति, एक ही पिण्ड के विभाजन से सृष्टि के निर्माण, आकाश का अंश भेद, सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव में ब्रह्म का स्थान, ब्रह्म से लेकर पंजीकरण तक सृष्टि का विकास आदि।

78. क्लेश की निम्नलिखित अवस्थाओं को क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(A) तनु
(B) उदार
(C) प्रसुप्त
(D) विच्छिन्न

सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (d) (C)-(A)-(D)-(B)
Solution:

क्लेश की अवस्थाओं का व्यवस्थित क्रम निम्नलिखित है -
(C) प्रसुप्त
(A) तनु
(D) विच्छिन्न
(B) उदार

योग दर्शन के अनुसार अविद्या, आस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश पाँच क्लेश हैं। भाष्यकर व्यास ने इन्हें विपर्यय कहा है और इनके पाँच अन्य नाम बताए हैं तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अंधतामिस्र । इन क्लेशों का सामान्य लक्षण है - कष्टदायिकता। इनके रहते आत्मस्वरुप का दर्शन नहीं हो सकता।

79. निम्नलिखित को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए :

(A) मूत्रवाहिनी (यूरेटर)
(B) वृक्क (किडनी)
(C) मूत्राशय (यूरीनरी ब्लेडर)
(D) मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा)

Correct Answer: (a) (B)-(A)-(C)-(D)
Solution:

प्रश्नगत तथ्यों का क्रमानुसार व्यवस्थितिकरण निम्नलिखित है -
(b) वृक्क (किडनी)
(a) मूत्र वाहिनी (यूरेटर)
(c) मूत्राशय (यूरीनरी ब्लैडर)
(d) मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा)

किसी जीव के शरीर के विषाक्त अपशिष्ट को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है। मनुष्यों का उत्सर्जन तंत्र शरीर के तरल अपशिष्टों को एकत्र करता है और उन्हे बाहर निकालने में मदद करता है।

इनमें निम्नलिखित मुख्य अंग होते हैं- दो वृक्क, दो मूत्रवाहिनियाँ, मूत्राशय और मूत्रमार्ग । प्रत्येक वृक्क से एक मूत्रवाहिनी मूत्राशय में खुलती है। मूत्र वाहिनियां वे नलियां होती हैं, जो मूत्र को वृक्क से मूत्राशय में लेकर जाती है। यहां मूत्र जमा होता है।

80. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:

सूची-I सूची-II
(A) श्यामाचरण लाहिड़ी(I) प्रज्ञा योग
(B) कृष्णमाचार्य(II) भावातीत ध्यान
(C) महर्षि महेश योगी(III) विन्यास योग
(D) श्री रामशर्मा आचार्य(IV) क्रिया योग
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IVIIIIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (a)
Solution:सूची-I और सूची-II का सही सुमेल निम्नलिखित है - 
सूची-I सूची-II
(A) श्यामाचरण लाहिड़ी(IV) क्रिया योग
(B) कृष्णमाचार्य(III) विन्यास योग
(C) महर्षि महेश योगी(II) भावातीत ध्यान
(D) श्री रामशर्मा आचार्य(I) प्रज्ञा योग