यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

1. पूर्व मीमांसा के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन - सही नहीं है?

Correct Answer: (d) पूर्व-मीमांसा ज्ञानमीमांसा की कृति है।
Solution:

मीमांसा वेद की प्रामाणिकता को ही नही मानती है, बल्कि वेद पर पूर्णतः आधारित है, वेद के दो अंग है, ज्ञानकाण्ड और कर्मकाण्ड जिसमें से वेद के कर्मकाण्ड का सम्बन्ध पूर्व मीमांसा से तथा वेद के ज्ञानकाण्ड का सम्बन्ध वेदान्त या उत्तर मीमांसा से है। अतः पूर्व मीमांसा का सम्बन्ध ज्ञानमीमांसा से नही है, बल्कि उत्तरमीमांसा का सम्बन्ध ज्ञानमीमांसा से है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

2. न्याय के अनुसार एक वर्ग के सभी सदस्यों को हम निम्न में सेकिस कूट द्वारा पहचान सकते हैं?

Correct Answer: (b) सामान्य लक्षण सन्निकर्ष
Solution:

सामान्य लक्षण सन्निकर्ष यह एक असाधारण प्रत्यक्ष है, जिसमें हम न केवल वस्तु का प्रत्यक्ष करते हैं, बल्कि उसमें निहित एक वर्ग का या जाति का प्रत्यक्ष करते हैं।
उदाहरण - मनुष्य को देखकर मनुष्यत्व का ज्ञान
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

3. निम्नलिखित में कौन-सा कथन महात्मा गाँधी के द्वारा स्वीकृत नहीं।

Correct Answer: (a) एक सत्याग्रही को ईश्वर में जीवन्त आस्था नही होनी चाहिए।
Solution:

गाँधी जी के अनुसार एक सत्याग्रही को ईश्वर में जीवन्त आस्था होनी चाहिए इनके अनुसार 'सत्य ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है' इसमें ईश्वर आस्था का विषय है। अतः सत्याग्रह ईश्वरीय आग्रह है, जिसमें हमे जीवन्त आस्था होनी चाहिए।
(सामाजिक-राजनीतिक दर्शन की रूपरेखा-प्रो. राममूर्ति पाठक)

4. निम्नलिखित में से टैगोर के विचार के अनुसार कौनसा विचार संसुगत है?

Correct Answer: (c) सच्चे धर्म का प्रयोजन मनुष्य के अंतरतम सत्य को जानना है।
Solution:

टैगोर का मानना है, मनुष्य के आन्तरिक स्वरूप की अभिव्यक्ति मानव धर्म या सच्चा धर्म है और वैयक्तित्क आत्म की परम आत्म के साथ प्रेम एवं आनन्द से सराबोर की अनुभूति ही इस धर्म का लक्ष्य है। टैगोर के अनुसार 'इस जगत में मनुष्य की स्थिति अपने वास्तविक घर से बिछड़े पक्षी की तरह है और उसके घर वापस लौटने की आतुर एवं अधीर आकांक्षा ही धर्म (सच्चे धर्म) का सर्वस्व है।
(आधुनिक भारतीय चिन्तन - डॉ. ओमप्रकाश पाठक) 

5. आकाश दो प्रकार का है- लोक - आकाश और अलोक - अकाश। ऊपर उल्लिखित विचार किस शाखा से सम्बद्ध है?

Correct Answer: (c) जैन-विचार पद्धति
Solution:

जैन दर्शन के अनुसार नित्य और अनन्त आकाश दो प्रकार का है- जिसमें द्रव्यों की स्थिति होती है वह लोकाकाश है, तथा इसके ऊपर अलोकाकाश है। जहाँ द्रव्य नही है। आकाश का प्रत्यक्ष नही होता। द्रव्यों के विस्तार की सिद्धि के लिये आकाश का अनुमान किया जाता है।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

6. बौद्ध धर्मावलंबियो के अनुसार दुःख का तात्कालिक पूर्ववर्ती कारक है:

Correct Answer: (c) जाति
Solution:

बौद्ध धर्मावलंबियों के अनुसार दुख का तात्कालिक पूर्वर्ती कारण जाति है, बौद्ध दर्शन में द्वारस अंग या निरन्तर कारण-कार्यक्रम से चक्कर घुमते रहते हैं, श्रम अंग, द्वितीय अंग का कारण है, तृतीय अंग तृष्णा अंग का और इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है। ये द्वारस अंग हैं-
अविद्या→ संस्कार → विज्ञान → नामरूप → षड़ायतन → स्पर्श → वेदना → तृष्णा → उपदान → भव → जाति → जरामरण।
(भारतीय दर्शन - चंद्रधर शर्मा)

7. निम्नलिखित में से शंकर को क्या स्वीकार्य है?

Correct Answer: (a) जीव सारतः ब्रह्म ही है।
Solution:

शंकर के अनुसार जीव सारतः ब्रह्म ही है, उनके अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या जीवों ब्रह्ममेव नापरः ।' अर्थात ब्रह्म ही एक मात्र सत्य है, जगत मिथ्या है तथा जीव और ब्रह्म अभिन्न हैं। शंकर के अनुसार ब्रह्म निर्गुण, निराकार है, तथा ज्ञान मोक्ष का साधन है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)

8. निर्देशवाद के सम्बन्ध में कौन-सा कथन असत्य है?

Correct Answer: (b) यह विभिन्न नैतिक मूल्यों का निर्देश करता है।
Solution:

आर. एम. हेयर का परामर्शवाद या निर्देशवाद मूलतः अवर्णनात्मक सिद्धान्त है, यह नैतिक निर्णय किसी को कुछ करने या न करने का परामर्श या निर्देश देते हैं। हेयर के अनुसार तथ्यात्मकनिर्णय की भाँति नैतिक निर्णय भी अनिवार्यततः सार्वजनीन होते हैं अर्थात् वे समान परिस्थितियों में सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन हेयर के अनुसार विभिन्न निर्देशवाद विभिन्न नैतिक मूल्यों का निर्देश करता है, असत्य है।
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धान्त वेद प्रकाश वर्मा)

9. निम्नलिखित में से कौन-सा तर्कवाक्यीय फलन नही है?

Correct Answer: (e) *
Solution:

UGC Net में इसका Answer नही दिया है।

10. जैनियों के अनुसार निम्नलिखित में से क्या आत्मा का गुण है?

Correct Answer: (d) चैतन्य
Solution:

जैनियों के अनुसार आत्मा का गुण चैतन्य है और चैतन्य जीव (आत्मा) का स्वरूप लक्षण है। यहाँ पर अर्थात् जैन दर्शन में आत्मा के स्थान पर 'जीव' शब्द का प्रयोग किया गया है, यह जीव आत्मा का पर्यायवाची है।