यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

11. सूची I और सूची II को सुमेलित कीजिए :

सूची-Iसूची-II
(A) अजातवाद(i) जातियर्थ
(B) परिवर्तनवाद(ii) गौतम
(C) सद्द्कार्यवाद(iii) गौड़पाद
(D) आत्मवाद(iv) भृगु प्रणव

निम्नलिखित में से सही विकल्प को चिन्हित कीजिए:

Correct Answer: (b) A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii)
Solution:
सूची-Iसूची-II
अजातवादगौड़पाद
परिवर्तनवादभृगुप्रंच
सद्स्कारवादजातियर्थ
आत्मवादगौतम

12. रूसों के अनुसार 'प्रकृति की ओर लौटना निम्न में से किसके द्वारा सम्भव नही हो सकता है?

Correct Answer: (d) सामान्य इच्छा से प्रतिबद्ध व्यक्ति का स्वातंत्र्य
Solution:

रूसों के अनुसार 'प्रकृति की ओर लौटना' सामान्य इच्छा से प्रतिबद्ध व्यक्ति की स्वातंत्र्य से सम्भव नहीं है। रूसों अपनी पुस्तक Social Contract में सामाजिक समझौते के सिद्धान्त का विस्तृत वर्णन करता है, इसमें उन्होंने कहा कि 'मनुष्य स्वतन्त्र उत्पन्न हुआ है, किन्तु वह सर्वत्र बेड़ियों से जकड़ा हुआ है। वो कहते हैं। कि स्वतन्त्रता, समानता और प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है अतः हमारा अज्ञान, हमारा भोलापन, हमारी गरीबी लौटा दो, हम स्वतन्त्र हो जाएगें।

13. न्याय के अनुसार निम्नलिखित में से किस सन्निकर्ष द्वारा हमें चीनी में कड़वाहट की अनुपस्थिति का बोध होता है?

Correct Answer: (d) विशेषणता या विशेष्य-विशेषणभाव
Solution:

न्याय के अनुसार विशेषणता सन्निकर्ष द्वारा हमें चीनी में कड़वाहट की अनुपस्थिति का बोध होता है। विशेषणता सन्निकर्ष, उसे कहते हैं, जब हम किसी वस्तु के अभाव का प्रत्यक्ष करते हैं, तब स्वतः अभाव नहीं दिखाई देता है, प्रत्यय के साथ मिला हुआ कोई न कोई आधार दिखाई देता है। जैसे घड़ा नहीं है कहने के लिए यह जानना पड़ता है, कि भूतल परपर घड़े का अभाव (घटाभाव) है, यह भूतल विशेष्य और घड़े का अभाव विशेषण है।

14. निर्बीध समाधि के द्वारा निम्नलिखित में से कौन कैवल्य प्राप्त करता है?

Correct Answer: (c) पुरुष
Solution:

योग दर्शन में समाधि दो प्रकार की मानी गयी है-
(1) सम्प्रज्ञात समाधि, जिससे ध्येय विषय का स्पष्ट ज्ञान रहता हो। इसे सबीज समाधि भी कहा जाता है।
(2) असम्प्रज्ञात समाधि, जिसमें ध्यान का विषय ही लुप्त हो जाता
इस अवस्था में आत्मा अपने यथार्थ स्वरूप को पहचान लेती है,
इसी समाधि को निर्बीज समाधि कहते हैं।
इसी में सभी प्रकार की चित्रवृत्तियों का निरोध हो जाता है।

15. ऋत् के द्वारा क्या सुनिश्चित नही होता है?

Correct Answer: (b) एक व्यक्ति विशेष की नैतिकता
Solution:

ऋत् सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त एक व्यवस्था का नाम है। इसी ऋत् के कारण विश्व की खागोलीय, भौगोलिक, नैतिक, धार्मिक, भौतिक आदि सभी प्रकार की घटनाएं नियमबद्ध तरीके से घटित होती हैं। अतः ऋतु एक व्यक्ति विशेष की नैतिकता नही है।
(भारतीय नीतिशास्त्र वसन्त कुमार लाल)

16. निम्नलिखित अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है? 'सर्वम् अनित्यम् प्रमेयत्वात्' सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (b) अनुपसंहारी
Solution:

अनुपसहारी हेत्वाभास में है, जिसमें हेतु का न तो कोई अन्यय न ही व्यतिरेक दृष्टान्त की उपलब्धि हो। अतः 'सर्वम् अनित्यम् प्रमेयत्वात' में अनुपसंहारी हेत्वाभास है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)

17. न्याय ज्ञानमीमांसा के अनुसार किस प्रकार के संज्ञान को प्रत्यक्ष रूप में ग्रहण नही किया जा सकता है?

Correct Answer: (c) निर्विकल्पक प्रत्यक्ष
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा में संज्ञान को निर्विकल्पक प्रत्यक्ष में प्रत्यक्ष रूप में ग्रहण नही किया जा सकता क्योंकि निर्विकल्पक प्रत्यक्ष में वस्तु के अस्तित्व का केवल आभास होता है। हमें वस्तु के विशिष्ट गुणों का ज्ञान नही होता।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

18. निम्नलिखित कथनों पर अपूर्व के सन्दर्भ में विचार कीजिए:

(A) इसका एक प्रारम्भ होता है।
(B) वह कर्म के नियम की व्याख्या करता है।
(C) यह एक सत् स्वरूप है।
(D) यह आवश्यक रूप से वैदिक कर्मकाण्डों के निष्पादन से सम्बद्ध है।
नीचे दिए गए कूट में से सही विकल्प का चयन कीजिए। 

Correct Answer: (d) (A), (B) और (D) सही है।
Solution:

पूर्व मीमांसा के अनुसार, यज्ञ आदि वैदिक कर्मकाण्डों अनुष्ठान यज्ञकर्ता की आत्मा में एक अदृश्य शक्ति उत्पन्न करते हैं, जिसे अपूर्व कहते हैं, यह अपूर्व आत्मा में रहता है और कालान्तर में यज्ञ का अभीष्ट फल उत्पन्न करता है, अतः अपूर्व का एक आरम्भ होता है, और यह कर्म के नियम की व्याख्या करता है, परन्तु यह एक सत् स्वरूप नहीं है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)

19. किसका मत है कि 'नगर राज्य की आवधारणा यह है कि उसमें नागरिक सिर्फ वही होते हैं, जिनकी शिक्षा एवं जीवन में स्थिति उन्हे शासन में सक्रिय सहभागिता के योग्य बनाती है?

Correct Answer: (c) अरस्तू
Solution:

अरस्तु के अनुसार, 'नगर राज्य की आवधारणा यह है कि उसमें नागरिक सिर्फ वही होते हैं, जिनकी शिक्षा एवं जीवन में स्थिति उन्हे शासन में सक्रिय सहभागिता के योग्य बनाती हैं'

20. निम्नलिखित में से पर्यावरणीय नीतिशास्त्र के सन्दर्भ में क्या असत्य है?

Correct Answer: (c) पर्यावरण प्राथमिक रूप से मनुष्यो के उपयोग के लिए है।
Solution:

पर्यावरणीय नीतिशास्त्र के सन्दर्भ में यह असत्य है कि यह प्राथमिक रूप से मनुष्यों के उपयोग के लिए है।