यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

21. यदि एक विरोहावर्ग में "T' सत्य हो, तो निम्नलिखित में से क्या सही तरीके से निगमित हो सकता है?

Correct Answer: (c) 'E' असत्य, 'A' और 'O' अनिर्धारित
Solution:

22. निम्नलिखित में से काण्ट के नैतिक सिद्धान्त के सम्बन्ध में क्या असत्य है?

Correct Answer: (b) मनुष्य नैतिक क्रियाओं का साधन मात्र है।
Solution:

काण्ट के नैतिक सिद्धान्त के सम्बन्ध में मनुष्य नैतिक क्रियाओं का साधन मात्र असत्य कथन है, बल्कि नैतिक सिद्धान्त सार्वभौमीकरण, कर्तव्यभाव और वस्तुनिष्ठ मापदण्ड निरर्थक होना चाहिए।
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धान्त वेद प्रकाश वर्मा) 

23. निम्नलिखित में से रामानुज को क्या स्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) प्रपत्ति मोक्ष का राजमार्ग है।
Solution:

रामानुज के अनुसार प्रपत्ति मोक्ष का राजमार्ग है। जबकि जीव ब्रह्म से पूर्णार्तः विलग या पृथक मध्वाचार्य का मत है, इसके अतिरिक्त शंकराचार्य जगत् का आभास, ब्रह्म केवल निर्गुण मानते है।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा)

24. स्वामी विवेकानन्द के अनुसार,

Correct Answer: (a) माया मात्र तथ्यों का यथारूप कथन है।
Solution:

स्वामी विवेकानन्द के अनुसार, माया मात्र तथ्यों का यथारूप कथन है। स्वामी विवेकानन्द नव-वेदान्तवादी ही हैं, इनका माया विचार अद्वैत वेदान्त का ऋणी तो है ही फिर भी वह सर्वथा शंकर के माया विचार जैसा नहीं है। क्योंकि शंकराचार्य के समान यह स्वीकारते हैं कि जगत के आविर्भाव एवं परिवर्तन का आधार तो 'माया' है ही कि शंकर के विचार में माया वह शक्ति है, जो भ्रान्ति उत्पन्न करती तथा जगत् को सत् समझने की भ्रान्ति का जनक है।
जबकि विवेकानन्द के अनुसार 'माया' जगत् की व्याख्या का कोई सिद्धान्त नहीं है, बल्कि जगत् का एक तथ्यात्मक विवरण है।

25. सूची I और II को सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
(A) वैयक्तिक चर(i) FY
(B) वैयक्तिक अवचर(ii) a-w
(C) विधेय पद(iii) x, y, z
(D) तर्कवावयीय फलन(iv) P, Q, R

दिए गए विकल्प में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A-(iii), B-(ii), C-(iv), D-(i)
Solution:
सूची-Iसूची-II
(A) वैयक्तिक चर(iii) x, y, z
(B) वैयक्तिक अचर(ii) a-w
(C) विधेय पद(iv) P, Q, R
(D) तर्कवाक्यीय फलन(i) FY

26. लोकसंग्रह के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

Correct Answer: (b) यह सभी आसक्तियो से मुक्त सार्वजानिक कल्याणकारी गतिविधियो को निरूपित करता है।
Solution:

भगवद्गीता में 'लोक संग्रह' के दर्शन का वर्णन हुआ है, यह स्थित प्रज्ञ की अवधारणा के साथ वर्णित हुआ है, लोक संग्रह का अर्थ होता है, मानवता के हित में किये गये कर्म है, यह सभी आसक्तियों से मुक्त सार्वजनिक कल्याणकारी गतिविधियों को निरूपित करता है, गीता में 'लोक संग्रह' के लिए कर्मयोग का उपदेश दिया गया है। 'लोक संग्रह' एक सामाजिक आदर्श है।

27. किस वेदान्ती के अनुसार सृष्टि के सम्बन्ध में 'पराधीन विशेषप्ति' का विचार प्रस्तुत किया गया है?

Correct Answer: (c) मध्व
Solution:

मध्वाचार्य के अनुसार सृष्टि के सम्बन्ध में 'पराधीन विशेषप्ति' विचार है, मध्वाचार्य एक द्वैतवादी दार्शनिक हैं।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा)

28. रामानुज किस प्रमाण को स्वीकार नही करते हैं?

Correct Answer: (c) उपमान
Solution:

रामानुज उपमान को प्रमाण के रूप में स्वीकार नही करते हैं, रामानुज केवल तीन प्रमाण, प्रत्यक्ष, अनुमान तथा शब्द को स्वीकार करते हैं, जो मध्वाचार्य, निम्बार्क और वल्लभाचार्य भी स्वीकार करते हैं।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा - डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

29. द्वैताद्वैत वेदान्त के प्रर्वतक कौन हैं?

Correct Answer: (d) निम्बार्क
Solution:

वेदान्त परम्परा में द्वैताद्वैतवाद के प्रवर्तक निम्बाक माने जाते हैं, इसके अतिरिक्त वेदान्त परम्परा में अद्वैत वेदान्त के शंकराचार्य, विशिष्टाद्वैत के रामानुज, द्वैतवाद के निम्बार्क तथा शुद्धाद्वैतवाद के वल्लभाचार्य प्रवर्तक हैं।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

30. निम्नलिखित अभिकथनों को वैदिक दर्शन के सन्दर्भ में समझिए :

(A) ऋषि ऋण को ब्रह्मचर्य द्वारा अदा किया जा सकता है।
(B) देव ऋण को यज्ञ द्वारा अदा किया जा सकता है।
(C) ऋत और मण्डल का विनियमन करता है। (सौर- मण्डल)
(D) सामवेद के ऋत्विक को 'होता' कहा जाता है।
उस सही अभिकथन को चुनिए जो सही भाव प्रकट करता है :

Correct Answer: (b) A, B, С
Solution:

वैदिक दर्शन के सन्दर्भ में ऋषि ऋण को ब्रह्मचर्य द्वारा, देव ऋण को यज्ञ द्वारा, पितृ ऋण को गृह आश्रय के द्वारा तथा मनुष्य ऋण को अच्छे व्यवहार के द्वारा अदा किया जाता है, इसके अतिरिक्त ऋत् सौर मण्डल का विनियमन करता है, जबकि सामदेव के ऋत्विक को 'उद्गाता' कहा जाता है, न कि 'होता' ऋग्वेद के ऋत्विक को कहा जाता है।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा)