यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

31. सेंट थॉमस एक्विनास की तरह मीमांसा को कौन-सा कथन सही अभिव्यक्त करता है?

Correct Answer: (b) तत्वमीमांसा का सम्बन्ध अनिवार्यतः सार्वभौम से है।
Solution:

सेंट थॉमस एक्विनास की तरह मीमांसा, तत्वमीमांसा का सम्बन्ध अनिवार्यतः सार्वभौम से मानता है।

32. वैशेषिक दर्शन के अनुसार विमुक्त आत्मा और दुखाभाव में किस प्रकार का सम्बन्ध है?

Correct Answer: (a) स्वरूप
Solution:

वैशेषिक दर्शन के अनुसार विमुक्त आत्मा और दुःखाभाव में स्वरूप का सम्बन्ध है, वैशेषिक दर्शन में ज्ञान को आत्मा का आगन्तुक लक्षण माना गया। आत्मा अपने स्वरूपावस्था में मूलतः जड़ तथा अभौतिक है, यहाँ जड़ का तात्पर्य है, कि आत्मा चैतन्य रहित है।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

33. 'ये बाह्य वस्तुएँ हैं' - यह दृष्टिकोण निम्नलिखित में से किस बौद्ध दर्शन धारा का है?

Correct Answer: (d) सोत्रात्तिक और वैभाषिक दोनों
Solution:बौद्ध दर्शन में सौत्रन्तिक एवं वैभाषिक विचारधारा में दोनों बाह्य वस्तुओ को यथार्थ माना गया है, जिसमें सौत्रान्तिक बाह्य जगत् वस्तु का ज्ञान प्रत्यक्ष से मानते हैं, जबकि सौत्रान्तिक बाह्य वस्तु का ज्ञान अनुमान पर आधारित मानते हैं।
(भारतीय दर्शन हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

34. योग के सन्दर्भ में चित्त भूमि का सही क्रम दर्शाने वाला विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (c) क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र और निरूद्ध
Solution:

योग के सन्दर्भ में चित्त-भूमि का सही क्रमः-
क्षिप्त → मूढ़ → विक्षिप्त → एकाग्र और निरुद्ध
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

35. किसके लिए दर्शनशास्त्र का अध्ययन चतेना का अध्ययन है?

Correct Answer: (b) हर्सल
Solution:

हुर्सल के दर्शनशास्त्र का अध्ययन चेतना का अध्ययन है, और इस अध्ययन के आधार पर स्वतः सिद्ध वस्तुनिष्ठ सारतत्व को प्रस्तुत करते हैं और संवृत्रिशास्त्र के विधि के माध्यम से चेतना के आदम स्वरूप एवं चेतना को आदम रूप से प्रदत्त विश्लेषण है।
(समकालीन पश्चात्य दर्शन- वसन्त कुमार लाल) 

36. निम्नलिखित में कौन-सा वक्तव्य इसका औचित्य सिद्ध करता है, कि अनुभव पर निर्भर रहे बिना प्रमाणिक ज्ञान सम्भव है?

Correct Answer: (c) योग सभी अंगों की समग्रता है।
Solution:

योग सभी अंगो की समग्रता है, जिससे अनुभव पर निर्भर रहे बिना प्रामाणिक ज्ञान सम्भव है।

37. तर्क पर विचार कीजिए और निम्नलिखित में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

सभी ट्राउट स्तनधारी होते हैं।
सभी स्तनधारियों के पंख होते हैं।
अतः सभी ट्राउट के पंख होते हैं।
विकल्पः

Correct Answer: (c) एक ऐसा तर्क जिसके तर्कवाक्य असत्य हैं, पर एक वैध है।
Solution:

सभी ट्राउट स्तनधारी होते हैं।
सभी स्तनधारियों के पंख होते हैं।
अतः सभी ट्राउट के पंख होते हैं।
यह एक ऐसा तर्क है, जिसके तर्कवाक्य असत्य हैं, पर वह वैध है।
(तर्कशास्त्र प्रवेशिका राममूर्ति पाठक) 

38. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म हिराविलटस का मुख्य विचार है?

Correct Answer: (d) स्थायित्व और परिवर्तन
Solution:

हिराक्लिटस का मुख्य विचार स्थायित्व और परिवर्तन है, उनके अनुसार कोई वस्तु में स्थायित्व की प्रतीति भ्रमवश होती है हर वस्तु सतत् परिवर्तनशील है, हेरावलाइट्स के अनुसार- 'तुम उसी जल में दो बार नहीं उतर सकते, क्योंकि भिन्न-भिन्न जलराशि का निरन्तर आगमन हो रहा है।

39. पारिवारिक साम्यता क्या निरूपित करता है:

Correct Answer: (b) एक शब्द के विभिन्न प्रयोगों में कुछ समानताएं होती हैं, किन्तु कोई परिभाषक लक्षण नही होता है।
Solution:

विटगेन्स्टाइन भाषा सिद्धान्त के अनुसार, एक शब्द के विभिन्न प्रयोगों में कुछ समानताएँ होती हैं, किन्तु कोई परिभाषक लक्षण नहीं होता है। जैसे:- एक परिवार में विभिन्न सदस्य होते हैं, यद्यपि कोई एक समानता सभी में विद्यमान नहीं होती है, फिर भी सभी को एक परिवार का सदस्य कहते हैं, इसी के आधार पर विटगेन्स्टाइन सारतत्ववाद का खण्डन करते हैं।

40. काण्ट के नैतिक सिद्धान्त के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

(A) नैतिक क्रियाओं को मात्र कर्त्तव्य भाव से किया जाना चाहिए
(B) नैतिक क्रियाओं के परिणाम शुभ होने चाहिए।
(C) मात्र शुभ-इच्छा ही स्वयं में शुभ है।
(D) प्रसन्नता नैतिक क्रियाओं का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।
निम्नलिखित कूट में से सही विकल्प चुनिए :

Correct Answer: (c) (A) और (C) सत्य है।
Solution:

काण्ट के नैतिक सिद्धान्त के सम्बन्ध में, नैतिक क्रियाओं को मात्र कर्त्तव्यभाव से किया जाना चाहिए, जिसमें काण्ट कहते हैं कि किसी कर्म का नैतिक मूल्य उसके परिणामों द्वारा नही बल्कि उस कर्म के मूल में निहित मनुष्य की विशुद्ध कर्तव्य चेतना द्वारा निर्धारित होता है और काण्ट के अनुसार मात्र शुभ इच्छा ही स्वयं में शुभ है।
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धानत वेद प्रकाश वर्मा)