Solution:न्याय दर्शन में तीन प्रकार के कारण माने गये हैं- (1) उपादान कारण (समवायी), (2) असमवायी कारण, (3) निमित्त कारण। जिसमें से उपादान कारण उस द्रव्य को कहा जाता है, जिसके द्वारा कार्य का निर्माण होता है जैसे मिट्टी घड़े का, सूत कपड़े का तथा कपड़े के टुकड़े के रंग का स्वयं कपड़ा समवायी करण है।
दूसरा असमवायी कारण उस गुण या कर्म को कहते हैं, जो समवायी कारण में समवेत रहकर कार्य की उत्पत्ति में सहायक होता है, कपड़े का निर्माण सूतों के संयोग से होता है, यही सूतों का संयोग (कर्म) कपड़े का असमवायीकरण है तीसरा निमित्त कारण वो है, जो द्रव्य से कार्य उत्पन्न करने में सहायक होता है।
जैसे- कुम्भकार मिट्टी से घड़े का निर्माण करता है, इसलिए कुम्भकार ही घड़े का निर्मित कारण है।
(भारतीय दर्शन की रूपेरखा- डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)