Solution:चार्ल्स मेटकॉफ ने भारतीय गाँवों का 'लघु गणतंत्रों के रूप में उल्लेख किया है। इस संबंध में वर्ष 1932 में उन्होंने भारतीय ग्रामीण सुदायों के बारे में लिखा था- ग्रामीण समुदाय छोटे गणराज्य हैं, प्रायः जितनी वस्तुओं की उन्हें आवश्यकता होती है व सब उनके पास रहती हैं और वह बाह्य संबंधों से अधिकांशतः स्वतंत्र रहते हैं जहाँ और कोई चीज स्थाई नहीं रही, ऐसा प्रतीत होता है, वे स्थाई रहे हैं। एक राजवंश के बाद दूसरा राजवंश लुढ़कता गया, एक क्रान्ति के बाद दूसरी क्रान्ति हुई, किन्तु ग्रामीण समुदाय अपरिवर्तित रहा।