Solution:हैबरमास ने पूँजीवादी समाजों में संकट के संवेगात्मक स्वरूप की चर्चा नहीं की है। इन्होंने पूँजीवादी समाजों में संकट के तीन स्वरूप वैधता, तार्किकता एवं अभिप्रेरणा की चर्चा की है तथा आधुनिक समाज को आहत समाज की संज्ञा दी है। ये जर्मनी के सुप्रसिद्ध फ्रैंकफर्ट संप्रदाय के द्वितीय पीढ़ी के अत्यन्त प्रखर एवं अग्रणी विद्वान हैं। इनकी प्रमुख पुस्तकें इस प्रकार हैं-
- Theory and Practice, (1963)
- Knowledge and Human Interests, (1868)
- Legitimation Crises, (1972)