वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में 7,935 शहर है, जिनमें 2001से 2,774 शहरों की वृद्धि (अथवा 53.75 प्रतिशत का उछाल) हुई है। यहाँ यह महत्वपूर्ण है कि वृद्धि प्रमुखतः जनगणना शहरों (सीटीज) (अर्थात् 185.90 प्रतिशत) में आंकी गई है। जनगणना में रिकार्ड किए गए शहरों में से कई शहरी जनसमूह (बस्ती) वाले भाग हैं।
वर्ष 2001 की जनगणना में, 962 की अभिवृद्धि के साथ 384 शहरी जनसमूहों (Urban Agglomeration) की तुलना में वर्ष 2011 की जनगणना में 981 की अभिवृद्धि के साथ 475 शहरी जनसमूह हैं। भारत की शहरी संरचना के अंतर्गत शहरी जनसमूहों (बस्तियों) शहरों की संख्या 6166 है।
तथापि, इनमें सबसे प्रमुख आश्चर्य जनक घटना जनगणना शहरों (सीटीज) की संख्या में वृद्धि है, जो बढ़कर 1362 से 3892 हो गई है, जबकि साविधिक शहरों (एसटीज) की संख्या में 3,799 से 4041 की आंशिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2011 की जनगणना में पाया गया विदेश की कुल 37% मिलियन (अथवा 31.16 प्रतिशत) जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है।
जनगणना शहरी जनसमूहों को उनकी जनसंख्या के आधार पर वर्गीकृत करता है। शहरी जनसमूह शहर जिनकी जनसंख्या कम से कम 1,00,000 लोगों की है, उन्हें वर्ग-1 के शहर के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
वर्ष 2011 में 468 शहरी क्षेत्र/ शहर थे, जो वर्ष 2001 की (394) तुलना में 18.78% की वृद्धि दर्शाता है; कुल शहरी जनसंख्या का 70% (अथवा 264.9 मिलियन) इन शहरी जनसमूहों और शहरों में रहता है। जनगणना से यह पता चलता है कि जनसंख्या का अनुपात पिछली जनगणना से काफी बढ़ गया है। शेष शहरों कीश्रेणियों में वृद्धि न्यून गति से हुई है।
वर्ष 2001 से 2011 के बीच कितने शहरी जनसमूहों की वृद्धि हुई?