यूजीसी NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 इतिहास (SHIFT-II)

Total Questions: 100

1. भद्रबाहु से चन्द्रगुप्त मौर्य को जोड़ने वाले प्रमाण का स्वरूप क्या है?

(1) सिक्का साक्ष्य
(2) पुरालेखविधा साक्ष्य
(3) चीनी साक्ष्य
(4) प्राचीन ऐतिहासिक मूर्तिविधा साक्ष्य

 

Correct Answer: (b) 2
Solution:

चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अन्तिम चरण में पुत्र (बिन्दुसार) के पक्ष में सिंहासन छोड़कर जैनमुनि 'भद्रबाहु' से जैन धर्म की दीक्षा ले ली और श्रवणबेलगोला (मैसूर) जाकर 298 ईसा पूर्व में उपवास द्वारा शरीर त्याग दिया। भद्रबाहु एवं उनके अनुयायियों को दिगम्बर कहा गया। ये दक्षिणी जैन कहे जाते थे।

श्रवणबेलगोला से प्राप्त 5वीं से 15वीं शताब्दी के बहुसंख्यक लेखों (मुख्यतः 1129 ई. का लेख) में चन्द्रगुप्त तता भद्रबाहु का उल्लेख मिलता है। यहीं पर 'भद्रबाहु गुफा' तथा 'चन्द्रगिरी पहाड़ी' स्थित है। जहाँ चन्द्रगुप्त तथा भद्रबाहु ने तपस्या की थी।

चन्द्रबस्ती नामक एक मन्दिर श्रवणबेलगोला में स्थित है। सम्भवतः इसका निर्माण चन्द्रगुप्त ने किया था। इस मंदिर में भद्रबाहु तथा चन्द्रगुप्त के जीवन सम्बन्धी 90 दृश्य पाषाण पर अंकित हैं। अतः यही पुरालेख विद्या साक्ष्य भद्रबाहु से चन्द्रगुप्त मौर्य को जोड़ने के प्रमाण है।

2. सियाही कलम या नीम कलम तकनीक निम्नलिखित में से चित्रकारों द्वारा भारत लाई गई?

(1) अरेबिया
(2) ईरान
(3) ट्रांसऑक्सियाना
(4) तुर्की

Correct Answer: (c) 3
Solution:

चित्रकला में सियाही कलम या नीम कलम तकनीक चित्रकारों द्वारा ट्रांसऑक्सियाना के क्षेत्र से भारत में लाई गयी। इस्लाम के आगमन से पूर्व मध्य एशिया में सियाही कलम तकनीक के कई चित्र प्राप्त होते हैं। सियाह कलम एक प्रकार से बिना रंग भरे रेखा चित्रों के लिए जाना जाता है।

मुगल काल में ऐसे चित्रांकनों में शारीरिक बनावट पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें एक-एक बाल तक अलग-अलग दिखाया गया है एवं अन्य अंगों पर हल्की रंगत दिखती है।

यह कभी-कभी रेशमी कपड़ों पर, सामग्रियों पर, चिन्ह एवं सुलेख प्राप्त होते हैं जो तकनीक एवं कौशल में चीनी कला एवं बौद्ध कला के समकक्ष ठहरती है।

3. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (ध्यानी बुद्ध)सूची-II (उनके बोधिसत्व)
(A) अमिताभ(I) वज्रपाणि
(B) अक्षोभ्य(II) पद्मपाणि
(C) वैरोचन(III) विश्वपाणि
(D) अमोघसिद्धि(IV) समन्तभद्र
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIVIII
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सही सुमेलित है-
सूची-I (ध्यानी बुद्ध)सूची-II (उनके बोधिसत्व)
(A) अमिताभ(II) पद्मपाणि
(B) अक्षोभ्य(I) वज्रपाणि
(C) वैरोचन(IV) समन्तभद्र
(D) अमोघसिद्धि(III) विश्वपाणि

4. 1882 में मौलिक कृति 'स्त्री-पुरूष तुलना' की रचना किसने की थी?

(1) काशीबाई कानितकर
(2)आनंदीबाई कर्वे
(3) रमाबाई रानाडे
(4)ताराबाई शिंदे

Correct Answer: (d) 4
Solution:

1882 ई. में 'ताराबाई शिन्द' ने मराठी भाषा में स्त्री - पुरुष तुलना (ए कम्पेरिजन बिटविन वीमन एण्ड मैन) लिखी है।

अन्य - रमाबाई रानाडे - रमाबाई रानाडे (1863-1924 ई.) 19वीं सदी में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली प्रथम भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक थीं। इनका विवाह महादेव गोविंद रानाडे से हुआ था।

इन्होंने पुणे में सेवा सदन और महिलाओं के कल्याण के लिए आर्य महिला समाज की स्थापना की। रमाबाई रानाडे ने मुम्बई में 'हिन्दू लेडीज सोशल क्लब' की स्थापना किया तथा 1886 ई. में पुणे में महिलाओं का पहला उच्च विद्यालय स्थापित किया।

आनन्दीबाई कर्वे यह एक मराठी सामाजिक शैक्षणिक कार्यकर्ता थी। यह मराठी शिक्षण प्रसारक 'धोंडो केशव कर्वे' की पत्नी थी। काशीबाई कानितकर यह 15वीं शताब्दी के सन्त कवि कान्हो पात्रा के बाद से महाराष्ट्र, भारत की मराठी की पहली प्रमुख महिला लेखिका थी। इनका विवाह नौ साल की उम्र में गोविन्द वासुदेव कानितकर से हुई थी।

5. असहयोग आंदोलन के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(A) असहयोग आंदोलन में गांधी ने लोगों से अन्याय पूर्ण व्यवस्था से यानी दुष्ट प्रणाली से असहयोग करने को कहा।
(B) ब्रितानियों के भारतीय प्रशासन तंत्र को दुष्ट बता कर गांधी ने लोगों के दिलों से 'कानून की आंतक' का भय निकाल दिया।
(C) असहयोग आंदोलन में गांधी ने लोगों से नागरिक और आपराधिक कानूनों तोड़ने को कहा।
(D) गांधी ने लोगों को निर्भय हो कर जेल जाने को कहा, जिसे वे महाराजा का होटल (हिज मैजेस्टिज होटेल) बताया करते थे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

(1) केवल (A) और (C)
(2) केवल (B), (C) और (D)
(3) केवल (A), (B) और (D)
(4) केवल (C) और (D)

Correct Answer: (c) 3
Solution:

असहयोग आन्दोलन, कलकत्ता में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन (1920) में पास हुआ, असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव दिसम्बर, 1920 में नागपुर में हुए कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में पुष्टि कर दी गयी। असहयोग आन्दोलन, गाँधी जी द्वारा । अगस्त, 1920 को शुरू कर दिया गया। इस आन्दोलन में गाँधी जी ने लोगों से अपील की कि वे-

• अन्यायपूर्ण व्यवस्था यानि दुष्ट प्रणाली से असहयोग करें।

• ब्रितानियों (ब्रिटिशों) के भारतीय प्रशासन तंत्र को दुष्ट बताकर गाँधी ने लोगों के दिलों से 'कानून के आतंक' का भय निकाला दिया।

• गाँधी जी ने निर्भय होकर जेल जाने को कहा, जिसे वे महाराजा का होटल (हिज मैजेस्टिज होटेल) बताया करते थे। अतः असहयोग आन्दोलन सचमुच भारत का पहला जन-आन्दोलन था।
इसका सूत्रपात एक क्रांतिकारी कदम था, जिसने कांग्रेस के स्वरूप और स्वभाव में मूलभूत परिवर्तन ला दिया। कांग्रेस अब लोकप्रिय लोकतंत्रीय अखिल भारतीय संस्था तथा भारत में विदेशी शासन के विरुद्ध अहिंसात्मक विद्रोह का माध्यम बन गई।

6. दक्षिण-पूर्व एशिया के जावा द्वीप में :

(A) प्रथम शताब्दी ई. में पहली भारतीय बस्तियाँ स्थापित की गई थीं।
(B) फिर भी भारतीय राजनैतिक शासन, तीसरी शताब्दी ई. में ही स्थापित हो पाया था।
(C) एक बौद्ध यात्री के अनुसार पाँचवी शताब्दी ई. में यहाँ ब्राह्मण धर्म ही प्रचलित था।
(D) पल्लवों ने चौथी शताब्दी ई. तक अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) 2
Solution:

दक्षिण-पूर्व एशिया के जावा द्वीप (रामायण में 'यवद्वीप' का उल्लेख), जहाँ सोने की खाने थीं। अनुश्रुति के अनुसार- 'अजिसक नामक भारतीय ने 78 ई. में 'जावा सम्वत्' की शुरूआत की। जावा द्वीप में प्रथम शताब्दी ई. में पहली भारतीय बस्तियाँ स्थापित की गयी थी। "फाह्यान (एक बौद्ध यात्री) यहाँ की यात्रा करते हुए बताता है कि पाँचवीं शताब्दी तक यहाँ केवल ब्राह्मण धर्म ही प्रचलित था।

यहाँ के शासकों के नाम 'वर्मन' से समाप्त होते थे। पाँचवी सदी से जावा में गुणवर्मा के नेतृत्व में बौद्ध धर्म का प्रचारचार हुआ। जावा तथा आस-पास के द्वीपों में इस धर्म का प्रचार हुआ। जावा तथा आस-पास के द्वीपों में इस धर्म को उन्नत अवस्था में ले जाने का श्रेय 'गुणवर्मा' को ही है।

पश्चिमी जावा से प्राप्त छठीं शताब्दी ई. के चार संस्कृत लेखों में पूर्णवर्मा' नामक शासक का उल्लेख है। 'तरूम' उनकी राजधानी थी। इसके पूर्वज राजाधिराज चन्द्रभागा नहर तथा स्वयं पूर्णवर्मा ने गोमती नहर का निर्माण करवाया।

7. बुरहानपुर शहर के संस्थापक नासिर खान किस वंश के थे?

(1) खानदेश के फारूकी वंश का
(2) गोलकोंडा के कुतबशाही वंश का
(3) बीजापुर के आदिलशाही वंश का
(4) बीदर के इमादशाही वंश का

Correct Answer: (a) 1
Solution:

बुरहानपुर शहर के संस्थापक नासिर खान खानदेश के 'फारूकी वंश' का था। ताप्ती नदी घाटी क्षेत्र में स्थित खानदेश के स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की स्थापना मलिक रजा फारूकी ने 1399 ई. में की। मलिक रजा फारूकी के नाम पर इस वंश का नाम 'फारूकी वंश' पड़ा। इस वंश के अगले शासक नासिर खान ने असीरगढ़ किले पर विजय प्राप्त की और इसे अपनी राजधानी बनाया।

इन्होंने नई राजधानी बुरहानपुर की स्थापना की। असीरगढ़ का किला एक शक्तिशाली सैनिक अड्डा था। इस वंश का प्रसिद्ध शासक आदिल खान द्वितीय था। उसने गोंडवाना और गढ़मण्डला के हिन्दू शासकों पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित की। इस वंश के सभी सुल्तानों ने खान की उपाधि धारण की। अतः फारूकी साम्राज्य को खानदेश (खानों का देश) कहा जाने लगा। 1601 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने खानदेश को मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया।

8. आइन-ए अकवरी में निम्नलिखित में से किन फसलों का किसी भी दस्तूर सर्किल में उल्लेख नहीं मिलताः

(A) कॉफी
(B) चाय
(C) अफीम
(D) नील
(E) तम्बाकू

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

(1) केवल (A), (B) और (C)
(2) केवल (B), (C) और (D)
(3) केवल (A), (C) और (E)
(4) केवल (A), (B) और (E)

Correct Answer: (d) 4
Solution:

मुगलकालीन आर्थिक जीवन की विस्तृत जानकारी 'आइने अकबरी' तथा विदेशी लेखकों के संस्मरणों से प्राप्त होती है। 'आइने अकबरी' में रबी (बसन्त) की 16 फसलों तथा खरीफ (शरद ऋतु) की 25 फसलों से प्राप्त होने वाले राजस्व का विस्तृत उल्लेख मिलता है।

अतः अबुल फजल के कथनानुसार गेहूँ, चना, जौ, बाजरा, मक्का, गन्ना, कपास, अफीम, नील, पोस्त आदि की खेती देश के विभिन्न भागों में की जाती थी। गेहूँ की उपज मुख्यतया पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार, गन्ना बंगाल और बिहार, चना और जौ पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार, बाजरा और मक्का उत्तर प्रदेश और राजस्थान में, नील मुख्यतया बयाना जिले में, अफीम मुख्यतया मालवा और बिहार में उत्पन्न किया जाता था।

आइने-अकबरी में चाय, कॉफी तथा तम्बाकू का उल्लेख नहीं मिलता है। नोट:- भारत में तम्बाकू 1604 के अन्त अथवा 1605 के प्रारम्भ में (अकबर के काल) पुर्तगालियों द्वारा लायी गयी थी।

9. पंचशील के बारे में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(A)नेहरू ने 1954 में अमेरिका के राष्ट्रपति के सम्मान में इस शब्द का प्रयोग किया।
(B) पंचशील के सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भारत, युगोस्लाविया और स्वीडेन द्वारा रखे गए प्रस्ताव में शामिल किए गए।
(C) बर्मा और इंडोनेशिया ने पंचशील के विचार का समर्थन नहीं किया।
(D) गुट निरपेक्षता की नीति पंचशील से उपजी थी।
(E) नेहरू और चीनी शासन प्रमुख चाउ-एन-लाई ने 1954 में पंचशील समझौता पर हस्ताक्षर किए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

(1) केवल (A), (C) और (E)
(2) केवल (B), (D) और (E)
(3) केवल (A), (D) और (E)
(4) केवल (B) और (D)

Correct Answer: (b) 2
Solution:

29 अप्रैल, 1954 ई. को चीन के क्षेत्र तिब्बत और भारत के बीच व्यापार और आपसी सम्बन्धों को लेकर 'पंचशील समझौता हुआ था। इस समझौते की प्रस्तावना में पाँच सिद्धान्त थे जो अगले पाँच साल तक भारत की विदेश नीति की रीढ़ रहे, इसके बाद ही हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे लगे और भारत ने गुट-निरपेक्ष रवैया अपनाया।

पंचशील शब्द ऐतिहासिक बौद्ध अभिलेखों से लिया गया है, जो कि बौद्ध भिक्षुओं का व्यवहार निर्धारित करने वाले पाँच निषेध होते हैं। अतः पंचशील सिद्धान्त संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में, भारत, युगोस्लाविया और स्वीडेन द्वारा रखे गये प्रस्ताव में शामिल किये गये।

पंचशील समझौते के पाँच सिद्धान्त हैं-

एक दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता और सर्वोच्च सत्ता के लिये पारस्परिक सम्मान की भावना।
अनाक्रमण की भावना।
एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना। समानता एवं पारस्परिक लाभ।
शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना का विकास।

इन पाँच सिद्धान्तों के आधार पर 28 जून, 1954 को चीन के प्रधानमंत्री चाउ-एन-लाई तथा भारत के प्रधानमंत्री नेहरू ने पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किये।

10. मुगल प्रशासन में मार्गों की सुरक्षा के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही है?

(A) मार्गों की सुरक्षा को प्रशासन का एक प्रमुख दायित्व माना जाता था।
(B) कारवाओं, सरायों, बंजारों के टांडाओं, जो आम तौर पर सशस्त होते थे, और नदियों में नौकाओं के बेड़े मार्ग में होने वाली डकैती और लूटपाट से सुरक्षा के लिए संगठित किए जाते थे।
(C) मुगल साम्राज्य में जिस अधिकारी के इलाके में चोरी या डकैती होती थी, उसे माल बरामद करना होता था या खुद उसे पीड़ित को मुआवजा देना होता था।
(D) अधिकारी अपना यह दायित्व पूरा करने के लिए क्रूरता की नीति अपनाते थे और संदिग्ध गाँवों को ही लूट लेते थे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्तउत्तर का चयन कीजिए:

(1) केवल (A),(C) और (D)
(2) केवल (B)और (C)
(3) (A), (B), (C) और (D)
(4) केवल (B), (C) और (D)

Correct Answer: (c) 3
Solution:

मुगल प्रशासन सैन्य शक्ति पर आधारित एक केन्द्रीकृत व्यवस्था थी, जो 'नियंत्रण एवं सन्तुलन' पर आधारित थी। मुगल साम्राज्य चूंकि पूर्णतः केन्द्रीकृत था इसलिए बादशाह की शक्ति असीम होती थी फिर भी प्रशासन की गतिविधियों को चलाने के लिए मंत्रिपरिषद् होती थी। मुगल प्रशासन पाँच स्तरों में विभक्त था, केन्द्रीय स्तर, प्रान्तीय स्तर, सरकार (जिले) का प्रशासन, परगने का प्रशासन तथा ग्राम स्तर का प्रशासन था।

प्रान्तीय स्तर प्रशासन का प्रमुख सूबेदार होता था और यही सूबे में शान्ति और सुरक्षा की व्यवस्था, प्रजा के हित की रक्षा और वृद्धि, फौजदारी मुकदमों का निर्णय करना, विद्रोहों को दबाना, पुल, सराय, सड़कों आदि की सुरक्षा तथा निर्माण करवाता था। मुगल प्रशासन में मार्गे की सुरक्षा के सम्बन्ध में सत्य है-

• मार्गों की सुरक्षा को प्रशासन का एक प्रमुख दायित्व माना जाता था।

• कारावाओं, सरायों, बंजारों के टांडाओं, जो आमतौर पर सशस्त होते थे, और नदियों में नौकाओं के बेड़े मार्ग में होने वाली डकैती और लूटपाट से सुरक्षा के लिए संगठित किये जाते थे।

• मुगल साम्राज्य में जिस अधिकारी के इलाके में चोरी या डकैती होती थी, उसे माल बरामद करना होता था या खुद उसे पीड़ित को मुआवजा देना होता था।

• अधिकारी अपना यह दायित्व पूरा करने के लिए क्रूरता नीति अपनाते थे और संदिग्ध गाँवों को लूट लेते थे।