Solution:ऐतरेय ब्राह्मण - इसके संकलन कर्ता महिदास थे। शूद्र महिला 'इतरा' का पुत्र होने के कारण महिदास 'ऐतरेय' कहलाये। ऐतरेय ब्राह्मण में वर्णित बातें हैं- इसमें राज्याभिषेक के नियम तथा राज्य एवं राजा की उत्पत्ति का सिद्धान्त दिया गया है।
इसमें उपमहादेश के 5 भौगोलिक विभागों में विभाजित किया गया है- उदीचीदिक, दक्षिणादिक, प्राचीदिक, प्रतीचीदिक एवं प्रतिष्ठादिक है, 10 प्रकार के शासन प्रणाली का उल्लेख । यह प्रणाली वैराज्य, कुरु, पांचाल, मत्स्य आदि, इसमें दुष्यन्त के पुत्र 'भरत' से सम्बद्ध गाथाएँ हैं, इसमें राजा को 'विशमत्ता' (वैश्य का भक्षण करने वाला), धर्मस्यगोप्ता (धर्म का रक्षक) कहा गया है।
ऐतरेय ब्राह्मण में वैश्य को 'आद्य', शूद्र को 'यथाकामवध्य' तथा लड़की को कृपण (दुख देने वाली) कहा गया है। इसी में शूनः शेप की कथा, जिसमें एक पिता अपने पुत्र को बेचते हुए वर्णित है। इसी में चतुर्युग (कलियुग, द्वापर, त्रेता और सतयुग) की सुन्दर व्याख्या है। ऐतरेय ब्राह्मण में 'अतिथि सत्कार सबसे बड़ा यज्ञ है।' इसी में समुद्र का भी उल्लेख है।