Solution:तंजावुर का भव्य शिव मंदिर जिसे राजराजेश्वर मंदिर या बृहदीश्वर मंदिर कहा जाता है, यह सभी भारतीय मंदिरों में सबसे बड़ा एवं ऊँचा है। इसके निमार्ण कार्य में ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जिसे सुदूर क्षेत्र से लाया जाता था। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1003 ई. से 1010 ई. के मध्य चोल शासक राजराज प्रथम के शासन काल में हुआ।
इस मंदिर का बहुमंजिला विमान 70 मीटर की गगन चुंबी ऊँचाई तक खड़ा है, जिसकी चोटी पर एकाश्म शिखर है जो अष्टभुज गुंबद के शक्ल की स्तूपिका है यह द्रविड़ शैली का सबसे ऊँचा विमान है। इस मंदिर में शिव के विविध रूप- नटराज, हरिहर, भिक्षाटन, विष्णुअनुग्रह, वीरभद्र, चन्द्रशेखर, दक्षिणामूर्ति, अर्द्धनारीश्वर, भैरव तथा त्रिपुरान्तक इत्यादि मूर्तियों को उत्कीर्ण किया गया है।
विशेष तथ्य - गंगैकोण्डचोलपुरम का भव्य शिव मंदिर या बृहदीश्वर मंदिर का निमार्ण कार्य चोल शासक राजेन्द्र प्रथम ने शुरू कराया था, जो पूरा नहीं हो सका था। इस मंदिर की योजना तंजौर मंदिर के समान होते हुए भी इसकी कारीगरी काफी फीकी रही है।
इस मंदिर का विमान तंजौर मंदिर की अपेक्षा कम है तथा इसके शिखर भीतर की ओर मुड़े हुए हैं। इसके विमान पर गोल स्तूपिका है, शिखर पर लम्बवत् रेखाएं उत्कीर्ण है। पर्सी ब्राउन ने इन्हीं लहरदार रेखाओं के कारण इस मंदिर को 'गीतों की तरह संवेदना पैदा करने वाला महान कलात्मक निमार्ण' कहा है।