यूजीसी NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 इतिहास (SHIFT-II)

Total Questions: 100

21. इनमें से कौन प्रारंभिक भारत के जाने माने शैव थे?

(A) ऐयडिगल काडव
(B) तिरूमूलर
(C) तिरूमंगै
(D) तिरूमलिशै

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिय :

 

Correct Answer: (b) केवल (A) और (B)
Solution:

छठीं से नौवीं शताब्दी में वैष्णव व शैव भक्तों द्वारा अनेक साहित्य रचे गये। जिसके कारण यह समय आलवार व नयनार भक्ति आन्दोलन का 'हीरक युग' कहा जाने लगा। प्रारम्भिक भारत में तमिल शैव सन्तों को 'नयनार' कहा जाता था।

इनकी कुल संख्या 63 बताई गयी। इनमें से तिरूमूलर एक रहस्यवादी सन्त थे। इन्हें आध्यात्मिक सुधारक और प्रवर्तक भी माना जाता है। वहीं 'ऐयडिगल काडवर्को' तमिलनाडु के नयनार सन्त थे। दक्षिण भारत में वैष्णव भक्ति से सम्बन्धित सन्त 'आलवार' कहलाये।

इनकी संख्या 12 थी। इनमें से तिरुमंगै, चोल सैनिक अधिकारी व लुटेरा वर्ग से सम्बन्धित थे। वैष्णव भक्ति में विभोर (डूबे हुए) तिरुमंगै ने श्रीरंगम मन्दिर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'पेरियातिरुमोलि' इनकी प्रसिद्ध रचना है। आलवार सन्त तिरुमलि का जन्म पल्लव क्षेत्र में हुआ। ये पल्लव शासक महेन्द्रवर्मन के समकालीन थे।

22. दबिस्तान-ए-मजाहिब के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(A) दबिस्तान-ए मजाहिब गुरू नानक की रचनाओं को ईश्वर की प्रशंसा तथा नैतिकता के निर्देशों से परिपूर्ण बताता है।
(B) दबिस्तान का लेखक गुरू अर्जुन द्वारा संग्रहित आदि ग्रंथ का उल्लेख करता है।
(C) दबिस्तान का लेखक एक व्यक्ति की इच्छा की पूर्ति के लिए संपूर्ण सभा से प्रार्थना करने की सिख प्रथा का उल्लेख करता है।
(D) दबिस्तान में सिख समुदाय के संगठन के बारे में अत्यंत सार्थक जानकारियां दी गई हैं।

नीचे दिए गए, विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए

(1) केवल (A), (B) और (C)
(2) केवल (B) और (C)
(3) केवल (A), (C) और (D)
(4) केवल (B) और (D)

Correct Answer: (c) 3
Solution:

'दबिस्तान-ए-मजाहिब' 17वीं शताब्दी (1665 ई.) फारसी भाषा में लिखा गया था। यह प्रारंभिक सिख समुदाय के संगठन के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देता है। दबिस्तान में इस्लाम, ईसाई, सूफी, नानकपंथी और हिन्दू धर्म के विभिन्न सम्प्रदायों से सम्बन्धित 12 वर्गों में विभाजित है।

काफी विवाद के बाद विद्वान दबिस्तानी - ए - मजाहिब के लेखन का श्रेय मौबाद जुल्फिकार अरदास्तानी नामक एक ईरानी को दिया जाता है। यह एक उदारवादी दृष्टिकोण वाले धार्मिक विचारधारा वाले व्यक्ति थे। वह लेखक एक व्यक्ति की इच्छा की पूर्ति के लिए सम्पूर्ण सभा से प्रार्थना करने की प्रथा का उल्लेख करता है।

'दबिस्तान' गुरु नानक की रचनाओं को ईश्वर की प्रशंसा तथा नैतिकता के निर्देशों से परिपूर्ण बताता है। दबिस्तान-ए-मजाहिब में कहीं भी आदि ग्रंथ का उल्लेख नहीं हुआ है। आदि ग्रंथ को गुरु अर्जुन द्वारा संग्रहित किया गया है।

23. एशियाई समुद्री व्यापार के बारे में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) पन्द्रहवीं शताब्दी में चीन के बेड़े 'जंक्स' मलक्का के पश्चिम के समुद्र से पीछे हट गए।
(B) इससे हुए रिक्त स्थान को गुजराती व्यापारियों के जहाजों द्वारा भरा गया।
(C) एम. एन. पियर्सन का विचार है कि गुजरात के सुल्तानों की विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने में रूचि नहीं थी क्योंकि शासकों और व्यापारी समुदायों के बीच बहुत कम पारस्परिक संपर्क था।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का कीजिए :

(1) केवल (A) और (C)
(2) केवल (B) और (C)
(3) केवल (A) और (B)
(4) (A), (B) और (C)

Correct Answer: (d) 4
Solution:मध्यकालीन भारत में वाह्य व्यापार थल एवं जल दोनों मार्ग से होता था। अफ्रीका के तट पर बसे अरबी लोगों ने गुजरात तथा पूर्वी अफ्रीका के मध्य व्यापार को उन्नतिशील बनाया। मलक्का दक्षिण-पूर्वी एशिया का एक महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह था, जहाँ कैम्बे, रान्र, कालीकट, श्रीलंका, कोरोमण्डल, बंगाल एवं थाईलैण्ड के बन्दरगाहों से व्यापारिक जहाज आते थे।

मलक्का में गुजरात, जावा एवं उसके निकटवर्ती द्वीपों के लोग आकर बस गये थे, जो व्यापारिक गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण भाग लेते थे। अल्बुकर्क लिखता है कि "गुजरातियों को अन्य राष्ट्रों के लोगों की अपेक्षा उस क्षेत्र की जहाजरानी का अच्छा ज्ञान है क्योंकि उनके वहाँ के लोगों से व्यापारिक सम्बन्ध था।”

पेगू (म्यांमार) उस क्षेत्र का एक अन्य बंदरगाह था। मलक्का के एक व्यापारिक केन्द्र के रूप में उदय से पूर्व चीनी जहाज, लाल सागर के प्रवेश द्वारा तथा फारस की खाड़ी तक जाते थे, परन्तु 14वीं शताब्दी के बाद कोरोमण्डल तट तक पहुँचने लगे। इस प्रकार भारतीय व्यापारिक जहाज भी अब मलक्का में ही रूक जाते थे जिसके परिणाम स्वरूप भारतीय सामुद्रिक उद्यम में तीव्र ह्रास हुआ।

24. 1857 के विद्रोह में दलितों की भागीदारी के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही नहीं हैं ?

(A) 1857 के विद्रोह के समय जिन सिपाहियों ने ब्रितानियों पर हमला किया उनमें से अधिकतर दलित थे।
(B) झलकारी बाई, रानी लक्ष्मी बाई की सहयोगी थी, लेकिन दलित विमर्श में उनका नाम मुश्किल से नजर आता है।
(C) लखनऊ में ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने विद्रोही सिपाहियों का नेतृत्व किया था।
(D) दलित समुदाय के 3000 विद्रोहियों ने छत्रा कस्वे को घेर लिया।
(E) प्रो बद्री नारायण ने 1857 के दलित आख्यानों के मौखिक इतिहास पर विस्तृत शोध कार्य किया है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन किजिए :

(1) केवल (B) और (C)
(2) केवल (A), (C) और (D)
(3) केवल (B) और (E)
(4) केवल (B), (C) और (E)

Correct Answer: (b) 2
Solution:

1857 का विद्रोह इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। यह विद्रोह सर्वप्रथम 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में सैनिक मंगल पाण्डे और उनके साथियों द्वारा चयुक्त कारतूस के प्रयोग से इन्कार करने को लेकर हुआ।

क्योंकि ब्रिटिश सेना में सैनिक विशेष रूप से बंगाल, अवध और उत्तरी-पश्चिमी प्रान्तों से आते थे। इनमें से अधिकांश ब्राह्मण और राजपूत थे और वे सेना के अनुशासन को स्वीकारने को तैयार नहीं थे। 1857 में अनेक वीरों ने अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध का नेतृत्व किया। इसमें से झारखण्ड के उत्तरी छोटानागपुर का नेतृत्व ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने किया। जिसके परिणामस्वरूप इन्हें 1858 में फाँसी की सजा मिली।

1857 में दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करने में झलकारी बाई का नाम प्रमुख है। ये भोजला गाँव (झाँसी) के कोली परिवार में पैदा हुई थीं। ये झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना में महिला शाखा 'दुर्गा दल' की सेनापति थीं।

प्रो. बद्री नारायण तिवारी ने 1857 के दलित आख्यानों के मौखिक इतिहास पर विस्तृत शोध कार्य किया। 2004 में इनकी अंग्रेजी पुस्तक 'मल्टीपल मार्जिनलिटिजः एन थोलॉजी ऑफ आईडेंटिफाइड दलित राइटिंग्स' निकली।

25. निम्नलिखित में से किस स्थान पर 20 अक्टूबर, 1934 को ऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का औपचारिक उद्घाटन हुआ ?

(1) पटना
(2) कलकत्ता
(3) बॉम्बे
(4) इलाहाबा

Correct Answer: (c) 3
Solution:

जुलाई 1931 में जय प्रकाश नारायण, फूलन प्रसाद वर्मा तथा अन्य लोगों ने 'बिहार समाजवादी दल' की नींव रखी। 1933 में पंजाब समाजवादी दल बना।

ऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन खुद कांग्रेस के भीतर युवा नेताओं के समूह ने 20 अक्टूबर 1934 को आचार्य नरेन्द्र देव, जय प्रकाश नारायण, डॉ राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन आदि लोगों ने बॉम्बे में औपचारिक उद्घाटन किया था।

ऑल इंडिया कांग्रेस समाजवादी दल का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस के भीतर ही रहकर कांग्रेस के समाजवादी, समतावादी मूल्यों से आबद्ध करना तथा इसकी बुनियादी नीतियों को बचाये रखना था।

26. औरंगजेब के शासनकाल में चांदी के रुपया का वजन था:

(1) 176 ट्रॉय (ग्रेन)
(2) 178 ट्रॉय
(3) 180 ट्रॉय
(4) 182 ट्रॉय

Correct Answer: (c) 3
Solution:शेरशाह द्वारा प्रचलित 'रूपया' (चाँदी का सिक्का) 178 ग्रेन वजन का था जो अकबर के शासनकाल में प्रचलित था। बाबर ने काबुल में चांदी के 'शाहरूख' तथा कन्धार में चाँदी का 'बाबरी' नामक सिक्का चलाया। अकबर ने वर्गाकार आकृति का 'जलाली' नाम से नया चांदी का सिक्का चलाया था।

जिसका वजन 175.5 ग्रेन था। जहाँगीर ने 'निसार' नाम से चांदी का सिक्का चलाया था, जबकि औरंगजेब के शासनकाल में प्रचलित 'रूपया' (चांदी का सिक्का) का वजन 180 ग्रेन था।  रूपया की सबसे छोटी इकाई 'सुकी' (रूपये का 20वां भाग) थी वहीं उसका 16वाँ भाग 'काला' थी।

विशेष तथ्य- मुगलकालीन मुद्रा प्रणाली अत्यन्त सुव्यवस्थित थी। सिक्के के निर्माण में सोने, चांदी व तांबे का प्रयोग किया जाता था। मुगलकाल में सिक्के ढ़ालने का काम टकसालों में होता था ये टकसालें पूरे साम्राज्य में विभिन्न स्थानों पर मुख्यतः लाहौर, जौनपुर, अहमदाबाद, दिल्ली, बंगाल, पटना व काबुल में स्थापित थीं। औरंगजेब के शासनकाल में सर्वाधिक टकसालें थी।

इस टकसाल के अधिकारी को दरोगा-ए-टकसाल कहा जाता था। यह केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण में होती थी। सर्वाधिक चांदी के सिक्के (रूपया) की ढ़लाई औरंगजेब के शासनकाल में हुआ। औरंगजेब ने धार्मिक दृष्टि से सिक्कों पर कलमा एवं चार खलीफाओं का नाम लिखवाना बंद करवा दिया था।

27. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन (I): सांख्य दर्शन के अनुसार पच्चीस आधारभूत तत्व हैं जिनमें से पहला प्रकृति और दूसरा पुरूष है।
कथन (II): बादरायण का बह्मसूत्र वेदान्त दर्शन परंपरा का आधारभूत ग्रंथ है।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

(1) कथन (I) और (II) दोनों सत्य हैं
(2) कथन (I) और (II)दोनों असत्य हैं
(3) कथन (I) सत्य है,लेकिन कथन (II) असत्य हैं
(4) कथन (I) असत्य है, लेकिन कथन (II) सत्य हैं

Correct Answer: (d) 4
Solution:

सांख्य दर्शन का प्रर्वत्तक महर्षि कपिल को माना जाता है। चूंकि इसमें 25 आधारभूत तत्वों का विवरण मिलता है। अतः इसे संख्या का दर्शन कहा जा सकता है। सांख्य दर्शन द्वैतवादी है। इसमें प्रकृति तथा पुरुष नामक दो स्वतंत्र शक्तियों की सत्ता को स्वीकार किया गया है।

जिनके संयोग से सृष्टि की उत्पत्ति होती है। प्रकृति सृष्टि का आदिकारण है, जिसे 'प्रधान' तथा 'अव्यक्त' की संज्ञा दी जाती है न कि पहला तत्व । जबकि सांख्य दर्शन का दूसरा प्रधान तत्व पुरुष है। इसका स्वरूप नित्य, सर्वव्यापी एवं शुद्ध चैतन्य है। चैतन्य, आत्मा का ही स्वभाव है।

इस कारण कथन (1) असत्य है। जबकि बादरायण का ब्रह्मसूत्र वेदान्त दर्शन परम्परा का आधार भूत ग्रंथ है। क्योंकि अनेक प्रकार की युक्तियों द्वारा वेदों की प्रामाणिकता सिद्ध करने का प्रयत्न इस दर्शन में मिलता है। उपनिषद तथा वेदान्त, उत्तर मीमांसा कहे जाते हैं, क्योंकि इनमें कर्मकाण्डों के स्थान पर ज्ञान का विवेचना मिलता है, क्योंकि हम पाते हैं कि बादरायण का ब्रह्मसूत्र तथा गीता, उपनिषद दर्शन का ही विकास करते हैं। इस तरह कथन (ii) सत्य है।

28. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन (I): तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है।
कथन (II): ग्रेनाइट की चट्टानें निकटवर्ती क्षेत्रों में उपलब्ध है।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

(1) कथन (I) और (II) दोनों सही हैं
(2) कथन (I) और (II) दोनों गलत हैं
(3) कथन (I) सही है, लेकिन कथन (II) गलत है
(4) कथन (I) गलत है, लेकिन कथन (II) सही है

Correct Answer: (c) 3
Solution:

तंजावुर का भव्य शिव मंदिर जिसे राजराजेश्वर मंदिर या बृहदीश्वर मंदिर कहा जाता है, यह सभी भारतीय मंदिरों में सबसे बड़ा एवं ऊँचा है। इसके निमार्ण कार्य में ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जिसे सुदूर क्षेत्र से लाया जाता था। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1003 ई. से 1010 ई. के मध्य चोल शासक राजराज प्रथम के शासन काल में हुआ।

इस मंदिर का बहुमंजिला विमान 70 मीटर की गगन चुंबी ऊँचाई तक खड़ा है, जिसकी चोटी पर एकाश्म शिखर है जो अष्टभुज गुंबद के शक्ल की स्तूपिका है यह द्रविड़ शैली का सबसे ऊँचा विमान है। इस मंदिर में शिव के विविध रूप- नटराज, हरिहर, भिक्षाटन, विष्णुअनुग्रह, वीरभद्र, चन्द्रशेखर, दक्षिणामूर्ति, अर्द्धनारीश्वर, भैरव तथा त्रिपुरान्तक इत्यादि मूर्तियों को उत्कीर्ण किया गया है।

विशेष तथ्य - गंगैकोण्डचोलपुरम का भव्य शिव मंदिर या बृहदीश्वर मंदिर का निमार्ण कार्य चोल शासक राजेन्द्र प्रथम ने शुरू कराया था, जो पूरा नहीं हो सका था। इस मंदिर की योजना तंजौर मंदिर के समान होते हुए भी इसकी कारीगरी काफी फीकी रही है।

इस मंदिर का विमान तंजौर मंदिर की अपेक्षा कम है तथा इसके शिखर भीतर की ओर मुड़े हुए हैं। इसके विमान पर गोल स्तूपिका है, शिखर पर लम्बवत् रेखाएं उत्कीर्ण है। पर्सी ब्राउन ने इन्हीं लहरदार रेखाओं के कारण इस मंदिर को 'गीतों की तरह संवेदना पैदा करने वाला महान कलात्मक निमार्ण' कहा है।

29. सामाजिक धार्मिक आंदोलनों के संबंध में नीचे दिए गए कथनों में से कौन से सही हैं ?

(A) खितानियों की जीत और फलस्वरूप औपनिवेशिक संस्कृति और विचारधारा के प्रसार ने देशी मंस्कृति और संस्थाओं के आत्मनिरीक्षण को अनिवार्य बना दिया।
(B) उनीसवीं सदी में भारत का सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्जारण औपनिवेशिक ताकतों की उपस्थिति के समय हुआ था, उनके द्वारा नहीं हुआ था।
(C) सुधारवादी आंदोलन की प्रेरणा पूरी तरह से गैरमानवतावादी थी, परलौकिकता और मोक्ष के विचार उनके कार्यक्रम का हिस्सा था।
(D) डा.सैयद अहमद खान ने समाज के विकास में धर्म की भूमिका को रेखांकित करते हुए लिखा है, यदि धर्म समय की मांग के अनुसार नहीं चलता, तो वह रूढ़िवादी हो जाता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

(1) केवल (A), (C) और (D)
(2) केवल (B) और (C)
(3) केवल (A), (B) और (D)
(4) केवल (C) और (D)

Correct Answer: (c) 3
Solution:

उन्नीसवीं शताब्दी का धार्मिक और सामाजिक पुनर्जागरण, आधुनिक भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है। इसने भारतीयों को आत्म-निरीक्षण करने के लिए विवश किया। इस समय हिन्दू धर्म एवं समाज निष्क्रिय एवं शक्तिहीन अवस्था में था। हिन्दू समाज का निचला वर्ग सामाजिक सम्मान और आर्थिक सुविधाओं के लिए ईसाई धर्म स्वीकार करने लगा था।

अतः हिन्दू धर्म में समाज की रक्षा के लिए सुधार की आवश्यकता थी। उन्नीसवीं सदी में भारत का सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्जागरण, औपनिवेशिक ताकतों की उपस्थिति के समय हुआ क्योंकि अंग्रेज लेखक यह मानते हैं कि भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ उन्हीं के द्वारा शुरु किया गया।

पर्सिवल ग्रिफिथ लिखते हैं कि "अंग्रेजों ने भारत में जो कुछ भी अच्छा-बुरा किया" उनका यह दावा सत्य ही है कि उन्होंने भारत में पुनर्जागरण का प्रादुर्भाव किया न कि पूर्ण पुनर्जागरण किया। सुधारवादी आन्दोलन की प्रेरणा पूरी तरह से गैर-मानवतावादी थी, पारलौकिकता और मोक्ष के विचार उनके कार्यक्रम का हिस्सा था।

यह कहना सर्वदा अनुचित होगा, क्योंकि सुधार आन्दोलनों का एक पक्ष यह भी था कि वे धार्मिक व सामाजिक सुधार चाहते थे। जबकि पारलौकिकता और मोक्ष भारतीय संस्कृति की जड़ मानी जाती थी। डॉ. सैयद का कथन है कि “यदि धर्म समय की मांग के अनुसार नहीं चलता तो वह रूढ़िवादी हो जाती है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने कुरान पर 'टीका' लिखी व अपने विचारों का प्रचार करने के लिए एक पत्रिका 'तहजीब उल अखलाक' का सम्पादन किया।

30. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (मुगल आक्रमण)
सूची-II (संबंधित दिल्ली सुल्तान का
शासनकाल)
(A) तैर बहादुर(I) अलाउद्दीन खलजी
(B) तरमाशिरीन(II) मुइजुद्दीन बहरामशाह
(C) शीर मुगल(III) मुहम्मद तुगलक
(D) कुतलग ख्वाजा(IV) गियासुद्दीन तुगलक
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIVI
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सही सुमेलित है-
सूची-I (मुगल आक्रमण)
सूची-II (संबंधित दिल्ली सुल्तान का
शासनकाल)
(A) तैर बहादुर(II) मुइजुद्दीन बहरामशाह
(B) तरमाशिरीन(III) मुहम्मद तुगलक
(C) शीर मुगल(IV) गियासुद्दीन तुगलक
(D) कुतलग ख्वाजा(I) अलाउद्दीन खलजी