यूजीसी NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 इतिहास (SHIFT-II)

Total Questions: 100

61. दक्षिण भारत में कृषि उत्पादन के संदर्भ में कुड्डापाह कर और संब पेषणम् क्या निर्दिष्ट करते हैं?

(1) चावल की खेती के दो मुख्य मौसम जिनका नाम गर्मी और सर्दी के मौसम में उगाई जाने वाली चावल की किस्मों के आधार पर रखा गया है
(2) सिंचाई कर
(3) भूमि कर
(4) भूमि मापन की विधियां

Correct Answer: (a) 1
Solution:

भारत में विविध जलवायु क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न फसलों का एक बहुत बड़ा भूमि क्षेत्र है। दक्षिण भारत में चावल की खेती के दो मुख्य मौसम थे कुडापाह कर और संब पेषणम् । उनका गर्मी और सर्दियों के मौसम में उगाए जाने वाले चावल की विविधता के नाम पर रखा गया है।

गर्मियों की फसल के लिए सबसे अच्छी भूमि का एक हिस्सा आवंटित किया गया था जिसकी उत्पादकता अधिक थी। सर्दियों की फसले अधिक व्यापक बोए गए क्षेत्र में उगाई जाती थीं, हालांकि उत्पादकता आधे या एक तिहाई से कम थी तथा सकल उत्पादक बहुत अधिक प्रचुर मात्रा में था।

चावल की फसल एक उष्ण आर्द्र जलवायु की फसल होती है। जिसे औसत तापमान 21°C से 42°C (डिग्री सेल्सियस) होना चाहिए। मृदा चिकनी, गहरी दोमट चीका, जलोढ़ होनी चाहिए। उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र- पूर्वी भारत (बिहार, बंगाल, उड़ीसा) पूर्वी यू०पी० के कुछ हिस्सों के साथ गुजरात के दक्षिणी तट और दक्षिण भारत में चावल की खेती के प्रमुख भाग थे। 16वीं शताब्दी में बारबोसा ने चावल की बुआई के लिए तटीय क्षेत्र में एक प्रकार की सीड ड्रिल के उपयोग का उल्लेख किया है।

62. भारत में आरंभिक औपनिवेशिक दौर से 'पोर्टफोलियो कैपिटलिस्ट' कौन थे?

(1) ब्रिटिश और अमेरिकी बागान मालिक जो भारत के विभिन्न हिस्सों में बस गए थे
(2) अंग्रे, फ्रांसीसी और डच व्यापारी जो देशी शिल्पकारों वर्ग का शोषण कर रहे थे।
(3) भारत के क्षेत्रीय शासक जो ताकतवर व्यापारी वर्ग का समर्थन कर रहे थे
(4) एक बिचौलिया वणिक वर्ग जो राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने लगा

Correct Answer: (d) 4
Solution:

भारत के आरंभिक और निवेशिक दौर में 'पोर्टफोलियो कैपिटलिस्ट' एक बिचौलिया वणिक वर्ग था, जो राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने लगा। भारतीय बाजार में इसे विशेष रूप से उन्हें कमोवेश व्यक्तिवादी उद्यमियों के रूप में वर्णित करता है।

जिन्होंने व्यापारिक पूँजीवाद और राजनीतिक पूँजीवाद के बीच के मध्य मैदान पर कब्जा कर लिया, तथा वह आगे की व्यावसायिक हितों के लिए रानीतिक पदों को प्राप्त करना और उसका उपयोग करना, राजनीतिक प्रभाव हासिल करने के लिए वाणिज्य का उपयोग करना और जजमानी और गाँव के साहूकारों के भूमि के रूप में भारत की प्राच्यवादी अवधारणा के अनुसार अकल्पनीय पैमाने पर सामान्य संचालन।

सुब्रह्मण्यम के शब्दों में "राज्य और उत्पादक अर्थव्यवस्था के बीच एक अस्पष्ट मध्य जमीन पर कब्जा कर लिया और अंतर्देशीय व्यापार, मुद्रा लेन-देन, विनिमय के बिलों की आवाजाही और यहाँ तक समुद्री व्यापार में भागीदारी के साथ राजकोषीय संरचना में (पोर्टफोलियो पूँजीपति)' ने एक अहम् भूमिका निभाई।

63. मौरिस डी मौरिस के अनुसार उनीसवीं सदी में भारत का निरीद्योगीकरण एक मिथक है, क्योंकि

(1) हस्त उद्योग के पतन के सूचक आंकड़ों को प्राप्त करना मुश्किल है
(2) उसने अपने शोध की सामग्री 19वीं शताब्दी के आरंभिक संस्मरणों से प्राप्त की, जिस समय हस्तशिल्प फल-फूल रहा था।
(3) इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि अमीर जमींदार हस्तशिल्प को प्रश्रय देते थे।
(4) बीसवीं सदी के स्रोत हस्तशिल्प के अतीत के शानदार अध्याय पर रोशनी डालते हैं

Correct Answer: (a) 1
Solution:

19वीं शताब्दी के आर्थिक इतिहासकार मौरिस डी मौरिस ने औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप विदेशों में होने वाली औद्योगिकरण की नीति का व्यवहारिक अध्ययन के उपरान्त यह पाया कि हस्तशिल्प के पतन के सूचक आंकड़ों को प्राप्त करना मुश्किल है।

इस समय भारतीय हस्तशिल्प का अत्यधिक हास हुआ क्योंकि अंग्रेज उद्योगपति अपना माल भारत में मनमाने ढंग से बेंचकर भारत निर्मित मालों को पूरी तरह प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया। यह स्थिति आगे की शताब्दियों में भी बनी रही। यूरोप में इस समय हस्तशिल्प उद्योग का ह्रास इसलिए हुआ क्योंकि वहाँ परिवर्तित रूप से कारखानों का विकास हुआ।

64. अकबर ने निम्नलिखित में से किसे आगरा के किले के निर्माण का अधीक्षक नियुक्त किया था, जिसकी ख्याति सैन्य अभियंता के साथ-साथ एक भवन निर्माता की भी थी?

Correct Answer: (a) कासिम खान
Solution:

जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर (1542-1605) ने आगरा के किले के निर्माण के लिए कासिम खान को अधीक्षक नियुक्त किया, जिसकी ख्याति सैन्य अभियंता के साथ-साथ एक भवन निर्माता की थी। आगरा का किला अकबरी शैली का सर्वप्रथम उदाहरण है।

यह किला 1565 से प्रारम्भ होकर लगभग 15 वर्षों में पूर्ण हुआ। इसके निर्माण में लगभग 35 लाख रुपया व्यय हुआ। यह यमुना नदी के दाये किनारे पर लगभग डेढ़ मील के घेरे में स्थित है। इसके दो प्रवेश द्वार है। मुख्य प्रवेश द्वारा को 'दिल्ली दरवाजा' कहते हैं। किले के अन्दर अकबर ने लाल पत्थरों से पाँच सौ से अधिक भवनों का निर्माण करवाया है।

इनमें से कुछ भवनों का निर्माण-बंगाल तथा गुजरात की स्थापत्य शैली पर हुआ है। यह ताजमहल से 2.5 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है। आगरा का किला 1638 तक मुगल राजवंश के सम्राटों का मुख्य निवास स्थल था। 1983 ई.में आगरा के किले को यूनेस्कों की विश्व धरोहर में अंकित किया गया है।

65. 1783 में मेजर जेम्स रेनेल द्वारा बनाया गया हिंदुस्तान का नक्शा किस बात का द्योतक था?

Correct Answer: (c) भारतीय पद्धति के सहयोग के साथ मानचित्र बनाने का यूरोपीय वैज्ञानिक प्रयोग।
Solution:

मेजर जेम्स रेनेल (1742-1830) यह एक ब्रिटिश भूगोल वेत्ता थे। ये रॉयल नेवी में सेवा करते हुए ईस्ट इंडिया में शामिल हो गये। 1767 में बंगाल और बिहार के तात्कालीन गवर्नर लॉर्ड राबर्ट क्लाइव ने उन्हें बंगाल में ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रभुत्व के सर्वेक्षक जनरल के रूप में नियुक्त किया।

जेम्स रेनेल को समुद्र विज्ञान का जनक भी कहा जाता है। वे 1830 में लंदन में 'रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी' के संस्थापक सदस्य भी रहे। रेनेल का पहला और प्रभावशाली काम बंगाल एटलस (1779) था। उसके बाद 1783 में भारत का विस्तृत नक्शा बनाया, जो कि भारतीय पद्धति के सहयोग के साथ मानचित्र बनाने का यूरोपीय वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग किया।

जिसमें पेरम्बुलेटर कैलिब्रेटेड व्हील तथा कंपास प्रमुख था। इनके अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य जैसे- हेरोडोटस की भौगोलिक प्रणाली (1800) तथा पश्चिमी एशिया का तुलनात्मक भूगोल (1831) में था। इन्होंने मेमोयर ऑफ ए मैप ऑफ हिन्दोस्तान (1788) नामक पुस्तक प्रकाशित की और सर जोसेफ बैक्स को समर्पित किया।

66. विज्ञान में महेंद्रलाल सरकार के योगदान के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(A) सरकार ने विज्ञान के प्रयोग और लोकप्रियता द्वारा भारत में विज्ञान की संस्कृति के निर्माण से अपने राष्ट्रीयता के कार्यक्रम की शुरुआत की।
(B) सरकार के लिए विज्ञान राष्ट्रवाद का रूपक था।
(C) सरकार ने इस बात पर बल दिया कि विज्ञान की पथ प्रदर्शक आत्मा के बिना राजनैतिक राष्ट्रवाद का कोई अर्थ नहीं।
(D) बंकिम चंद्र जैसे अपने समकालीन की तरह सरकार वे भी यूरोप को कोई तर्कयुक्त प्रगतिशील संस्कृति नहीं मानते थे। लेकिन वे एशिया को भी प्रतिगामी और तर्कहीन मानसिकता से पीड़ित समझते थे।

Correct Answer: (a) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

महेन्द्र लाल सरकार (2 नवम्बर 1833 23 फरवरी 1904) एक बंगाली चिकित्सक (एम.डी.) थे। कलकत्ता मेडिकल कालेज के दूसरे स्नातक मेडिकल डॉक्टर थे। वे एक समाज सुधारक थे। 19वीं शताब्दी में भारत में वैज्ञानिक अध्ययन के प्रचारक थे। इन्होंने 1876 ई0 में 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS) की स्थापना की तथा इसके पहले सचिव भी थे।

इन्होंने 1867 में 'राष्ट्रीय विज्ञान संघ' की स्थापना की थी। इन्होंने बुनियादी विज्ञान विभाग, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, शरीर विज्ञान, भू-विज्ञान, वनस्पति विज्ञान आदि की स्थापना की। विज्ञान को लोकप्रिय करने के लिए जनता में नियमित व्याख्यान दिये।

मद्रास मेडिकल कोलेज में महिलाओं के प्रवेश के निर्णय के समर्थक थे। IACS के व्याख्यान में 'सरला देवी चौधुरानी' की उपस्थिति को सुनिश्चित किया, ताकि वह भौतिकी में उच्च अध्ययन कर सके। 1898 ई. में कलकत्ता वि०वि० द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से इन्हें सम्मालित किया गया।

67. इतिहास लेखन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही है?

A. लियोपोल्ड वॉन रांके का इतिहास दर्शन पूरी तरह से विरोधाभास से भरा हुआ है। उनके इन दो विचारों मे मेल देखना मुश्किल है कि इतिहास में अधिकतम संभव वस्तुनिष्ठता होनी चाहिए और 'इतिहास में ईश्वर बसता है'।
B. वह कार्ल मार्क्स नहीं, बल्कि हेगेल था, जिसने कहा कि ऐतिहासिक प्रक्रिया का प्राथमिक प्रेरक बल समाज में मानव श्रम है।
C. ओसवाल्ड स्पेंगर का इतिहास दर्शन यूरोप में काल विभाजन प्राचीन, मध्य और आधुनिक पर तीखे हमले के साथ शुरु ही होता है।
D. आर.जी. की राय में 'सारा इतिहास विचारों कोलिंगवुड का इतिहास है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तरका चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (A), (B), (C) और (D)
Solution:

इतिहास लेखन की आधारशिला इतिहास-दर्शन (चिन्तन) ही है। पाश्चात्य इतिहास दर्शन की आधार शिला यूनानी- रोमन चिंतन पर आधारित है। लियोपोल्ड वॉन रांके (1795-1886) एक जर्मन इतिहासकार है। इन्होंने कहा था कि 'इतिहासकार को पवित्र चित्र लिपि की तलाश करनी चाहिए।

इनका दर्शन पूरी तरह विरोधाभास से भरा हुआ है। इनके दो विचारों में मेल देखना मुश्किल है कि इतिहास में अधिकतम संभव वस्तुनिष्ठता होनी चाहिए और इतिहास में ईश्वर बसता है। 'ऐतिहासिक प्रक्रिया में प्राथमिक प्रेरक बल समाज में मानवश्रम है' यह उक्ति कार्लमार्क्स (1818-1883) जर्मन दार्शनिक की नहीं अपितु हेगेल (1770-1831) जर्मन आदर्शवाद का माना जाता है।

ओसवाल्ड स्पेंगर (1880-1936) तक जर्मन इतिहासकार और इतिहास के दार्शनिक थे। इन्होंने गणित, विज्ञान, कला में जैविक सिद्धान्त का सम्बन्ध स्थापित किया है। प्रमुख रचना 'द डिक्लाइन ऑफ द वेस्ट' है। इन्होंने इतिहास विभाजन की तीव्र आलोचना की है। आर.जी. कॉलिंगवुड (1889-1943) एक जर्मन इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे। 'द प्रिंसिपल्स ऑफ आर्ट (1938) प्रमुख कृति है। इनका कथन "सारा इतिहास विचारों का इतिहास है।"

68. इनमें से कौन सती प्रथा के तीव्र आलोचक थे?

Correct Answer: (d) बाणभट्ट
Solution:

प्राचीन काल में भारत में एक कुप्रथा प्रचलित थी, कि पति की मृत्यु के बाद पत्नी को भी पति के शव के साथ दाहसंस्कार में जबरन या उसके इच्छा से जिन्दा ही बैठा दिया जाता था। इस परंपरा को सती प्रथा के नाम से जाना जाता है।

510 ई. एरण प्रस्तर अभिलेख में गुप्त नरेश भानुगुप्त के मित्र गोपराज जो हूणों के विरुद्ध युद्ध में मारे जाने पर उसकी पत्नी अग्नि में जलकर सती हो गयी थी। जो कि सतीप्रथा का प्रथम लिखित साक्ष्य है। बाणभट्ट सातवीं शताब्दी के संस्कृत गद्य लेखक और राजा हर्षवर्धन (606-647 ई) के राजकवि थे। उनकी दो प्रमुख ग्रन्थ- हर्षचरितम् तथा कादम्बरी।

गद्य रचना के क्षेत्र में इनका वही स्थान है, जो संस्कृत काव्य क्षेत्र में 'कालिदास' का है। इन्होंने सती प्रथा की तीव्र आलोचना किया था। इन्होंने हर्षवर्धन की माता 'यशोमति के सती होने के फैसले का तीव्र विरोध किया था। बाणभट्ट ने इसे "मुख की प्रथा" कहकर आलोचना की थी। कालिदास के 'कुमारसंभव' से उल्लेख मिलाता है कि "रति कामदेव के साथ सती होना चाहती थी लेकिन स्वर्ग से आवाज आयी और उसे ऐसा करने से रोक दिया गया।

वात्स्यायन के 'कामसूत्र' में सती प्रथा का उल्लेख मिलता है, पर इसे सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। भास के नाटक दृत-घटोत्कच्छ और उरभंग में वर्णन है कि अभिमन्य की पत्नी उत्तरा, जयद्रथ की पत्नी दुःशला, दुर्योधन की पत्नी पौरवी सती हुई थी।

नोट:- आधुनिक भारत में राजा राम मोहन राय व लार्ड विलियम बैंटिंक के सहयोग से दिसम्बर 1829 में नियम 17 के द्वारा सती प्रथा को अवैध घोषित कर दिया गया।

69. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (लेखक)सूची-II (पुस्तक)
(A) मार्गरेट चैटर्जी(I) गांधीज पॉलिटिकल फिलॉसफी
(B) गंगेय मुखर्जी(II) गांधीज दूथ-ऑन द ओरिजीन्स ऑफ मिलिटेंट नान वायलेंस
(C) भिखू पारेख(III) गांधी एंड टैगोर : पॉलिटिक्स, दूथ एंड कांशिएंस
(D) एरिक एच एरिक्सन(IV) गांधी एंड हिज जेविश फ्रेंड्स
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IVIIIIII
(c)IIIIVIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (b)
Solution:सही सुमेलित है-
सूची-I (लेखक)सूची-II (पुस्तक)
(A) मार्गरेट चैटर्जी(IV) गांधी एंड हिज जेविश फ्रेंड्स
(B) गंगेय मुखर्जी(III) गांधी एंड टैगोर : पॉलिटिक्स, दूथ एंड कांशिएंस
(C) भिखू पारेख(I) गांधीज पॉलिटिकल फिलॉसफी
(D) एरिक एच एरिक्सन(II) गांधीज दूथ-ऑन द ओरिजीन्स ऑफ मिलिटेंट नान वायलेंस

70. 1618 में अपनी गुजरात यात्रा के दौरान जहाँगीर लिखता है, 'शेख, सुल्तान अहमद जिन्होंने अहमदाबाद शहर की स्थापना की थी, के समय में हुए थे, और वे (सुल्तान) उनका बहुत सम्मान करते थे। इस क्षेत्र के लोगों का उनमें अद्भुत विश्वास है और उन्हें वे एक महान् संत मानते हैं। प्रत्येक शुक्रवार की रात को उनके मकबरे पर अमीरों और गरीबों का सैलाब उमड़ कर आता है।' गुजरात के इस सूफी संत की पहचान करें जिसे एक बार तैमूर के सैनिकों ने गिरफ्तार भी कर लिया थाः

Correct Answer: (a) शेख अहमद मगरिबी
Solution:

जहाँगीर ने 1605 - 1627 तक शासन किया था। 1618 में अपनी गुजरात यात्रा के दौरान जहाँगीर लिखता है कि शेख सुल्तान अहमद जिन्होंने अहमदाबाद शहर की स्थापना की थी, तथा वे (सुल्तान) उनका बहुत सम्मान करते थे। वे सूफी सन्त 'शेख अहमद मगरिबी थे। जोकि शुक्रवार की रात को उनके मकबरे पर अमीरों और गरीबों का सैलाब उमड़ कर आता है।

इनको तैमूर के सैनिकों ने एक बार गिरफ्तार भी कर लिया था। 1617 में सम्राट जहाँगीर ने दाहोद के जंगली हाथियों का शिकार करने के लिए गुजरात आए। फिर वहाँ से कैम्बे का दौरा किया। मार्च 1618 में गर्मी के मौसम में अहमदाबाद गए।

जहाँगीर ने अपने संस्मरण ग्रन्थ 'तुजुके जहाँगीरी'में 'शहर को धूल का निवास' (गर्दाबाद) कहते हुए इसकी रेतीली सड़कों को गाली देकर खुद को संतुष्ट किया। जहाँगीर सूफी सन्त 'शेख अहमद सर हिन्दी' का शिष्य था। जोकि नक्शबन्दी से सम्बन्धित थे।