यूजीसी NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 इतिहास (SHIFT-II)

Total Questions: 100

71. निम्नलिखित में नवपाषाण युग के स्थलों में हड्डियों से बने औजार कहाँ पाए गए हैं?

(A) गुफकराल
(B) सरूतारू
(C) चिराद
(D) दाओजलि हेडिंग

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A) और (C)
Solution:

इतिहास का विभाजन प्रागैतिहासिक, आद्यइतिहास तथा एतिहासिक काल तीन भागों में किया गया है। प्रागैतिहासिक काल के परिधि में 'नवपाषाण कालीन सभ्यताएँ आती हैं। नवपाषण कालीन निम्न स्थलों से हड्डियों से बने औजार मिलते हैं। जिनमें गुफ्कराल, चिरौंद प्रमुख हैं। गुफकराल - यह स्थल कश्मीर प्रान्त में स्थित है। इसकी खुदाई 1981 ई. में ए.के. शर्मा ने करवाई थी।

यहाँ से भेड़ बकरी आदि जानवारों की हड्डियाँ तथा उनके बने उपकरण प्राप्त हुए हैं। जैसे - हड्डी की बनी सुइयाँ। यहाँ के उपकरण ट्रैप पत्थर पर बनी कुल्हाड़ी, बंसुली, खुरपी, छेनी, कुदाल गदा शीर्ष आदि है। चिरौंद - मध्य गंगा घाटी स्थल पर महत्त्वपूर्ण नवपाषाणकालीन स्थल चिराँद बिहार के छपरा जिले में स्थित है।

यहाँ के उपकरणों में पॉलिसदार पत्थर की कुल्हाड़ी, सिलबट्टे, हथौड़े, हड्डी तथा सींग के बने छेनी, बरमा, बाण, कुदाल, सूई, चूडी आदि। सरूतारू - गुवाहाटी से 25 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसके उत्खनन के दौरान कुल्हाड़ी, जैसी सामाग्री मिली। यहाँ से मृदभांड भूरे और धूसर रंग के मिले हैं।

जिन पर रस्सी का निशान है। यह नवीन नवपाषण कालीन स्थल है। दाओजलि हेडिंग - यह मेघालय में स्थित 'कथार' पहाड़ियों में स्थित है। यहाँ से 45 सेमी. मोटे निक्षेप नवपाषाण कालीन लकडी के बने कुल्हाड़ी के अवशेष तथा पत्थरों के कुल्हाड़ी, छेदी, सिलबट्टा, ओखली, मूसल तथा हाथ के बने मृदभांडों पर लाल रंग का मुहर देखा जा सकता है।

72. ऐतिहासिक पद्धति के संबंध में निम्न कथनों में से कौन से सही हैं?

(A) पाद टिप्पणी आंकड़ों तथा विभिन्न प्रकार के विचार विमर्श के लिए सुविधाजनक आधार बनता है, सीधे जो पाठ का पूरक बनता है और स्रोतों से उसे जोड़कर उसे समृद्ध और वजनी बनाता है।
(B) संत गाथ चरित में तोड़ मरोड़ के पीछे •स्थायी उद्देश्य चमत्कार के लिए उन्माद होता है
(C) पाद टिप्पणी में उस स्रोत या प्रमाण के उल्लेख मात्र से उसे सुनिश्चित गारंटी नहीं माना जा सकता, जिस पर कथन का सार आधारित है।
(D) इतिहास में भ्रमपूर्ण लेखन का कारण अक्सर यह होता है कि वह जिस साक्ष्य पर आधारित होता है, वही झूठी कल्पना से प्रदूषित होता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (A), (B) और (D)
Solution:

ऐतिहासिक पद्धति के द्वारा किसी भी समाज का पूर्वकालीन प्रभाव के महत्त्व का मूल्यांकन कर सकते हैं। अतीत के प्रभाव से कोई समाज मुक्त नहीं होता है। इस निरन्तर प्रक्रिया को समझने के लिए ऐतिहासिक पद्धति के द्वारा किसी भी समाज की उत्पत्ति और विकास के दौरान उत्पन्न हुई परिस्थितियों की जानकारी संकलित कर सकते हैं।

(A) ऐतिहासिक पद्धति की कुछ सीमाएँ हैं जो इस प्रकार है-

(1) विश्वसनीय सामग्री का अभाव।
(2) रिकॉर्ड रखने में दोषपूर्ण तरीके।
(3) दस्तावेज/प्रलेख का विखराव।
(4) गणना और माप संभव नहीं।
(5) एकरुपता का अभाव।
(6) पक्षपात की संभावना।
(7) काल्पनिक तथ्यों का प्रयोग।

(B) ऐतिहासिक पद्धति के द्वारा सही निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं के द्वारा तथ्यों का अध्ययनः-

(1) समस्या का निर्धारण
(2) तथ्य संकलन के स्रोत का निर्धारण
(3) संकेलित तथ्यों का वर्गीकरण
(4) तथ्यों का विश्लेषण एवं व्याख्य

73. कांग्रेस ने 1946 के कैबिनेट मिशन योजना की आलोचना क्यों की?

Correct Answer: (c) केबिनेट मिशन ने देशी रियासतों के
Solution:

फरवरी 1946 ई.में ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने भारत को सत्ता हस्तांतरण, संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा के गठन आदि की सम्भावनाओं की तलाश में एक तीन सदस्यीय दल, कैबिनेट मिशन को भारत भेजा। जिसमें पैथिक लारेंस (भारत सचिव), स्टैफर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष) तथा ए.वी. एलेक्जेंडर (नौसैन्य मंत्री) शामिल थे।

विभिन्न दलों के साथसाथ कांग्रेस ने भी कैबिनेट मिशन की आलोचना किया जिसमें प्रमुख रूप से देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के संविधान सभा में नहीं शामिल किया जाना एवं समूहों में सम्मिलित होने की अनिवार्यता प्रान्तीय स्वायत्तता के सिद्धान्त के विपरीत ह

74. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (भक्तिकालीन साहित्य)सूची-II (लेखक)
(A) कबीर परचई(I) केशवादास
(B) भक्तमाल(II) महीपति
(C) विज्ञानगीता(III) अनंतदास
(D) भक्तविजय(IV) नाभादास
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (c)
Solution:सही सुमेलित है-
सूची-I (भक्तिकालीन साहित्य)सूची-II (लेखक)
(A) कबीर परचई(III) अनंतदास
(B) भक्तमाल(IV) नाभादास
(C) विज्ञानगीता(I) केशवादास
(D) भक्तविजय(II) महीपति

75. निम्नलिखित में से दिल्ली के किस सुल्तान ने अपने शाही पुस्तकालय (किताब खाना-ए खास) में खगोल शास्त्र औरपर कुतुबनुमा पर अनेक किताबें जमा कर रखीं थीं, और जो चाहता था कि उनका उपयोग जो भी इच्छुक हो वे सभी कर सकें?

Correct Answer: (c) फिरोज तुगलक
Solution:

तुगलक वंश के शासक फिरोजशाह तुगलक ने अपने शाही पुस्तकालय (किताब खाना-ए-खास) में खगोल शास्त्र, दर्शन, कुतुबनुमा आदि विषय से सम्बन्धित किताबें जमा कर रखी थीं।जो सभी के लिए सर्वसुलभ थी। कोई भी व्यक्ति जब चाहे उसका उपयोग कर सकता था।

इस समय संस्कृत से फारसी में अनुदित सबसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथ 'दलायल-ए-फिरोजशाही' थी। फारसी भाषा में इसका अनुवाद अजीजुद्दीन किरमानी नामक विद्वान ने किया था। फिरोजशाह तुगलक ने स्वयं अपनी आत्मकथा फुतुहात-ए- फिरोजशाही की रचना की।

76. निम्नलिखित में से किन गुप्त शासकों ने धनुर्धर प्रकार के सिक्के जारी किये?

(A) समुद्रगुप्त
(B) चन्द्रगुप्त-II
(C) कुमारगुप्त-
(D) स्कन्दगुप्त

Correct Answer: (d) (A), (B), (C), (D)
Solution:

इतिहासकारों द्वारा गुप्त काल में विधिवत् रूप से मुद्राओं के प्रचलन का श्रेय समुद्रगुप्त को दिया जाता है। समुद्रगुप्त ने 6 प्रकार की स्वर्ण मुद्राएँ प्रचलित करवाया था, जिसमें प्रमुख रूप से धर्नुधारी (धर्नुधर) प्रकार की मुद्रा थी। इन मुद्राओं पर इसकी उपाधि 'अप्रतिरथ एवं समुद्र' का अंकन प्राप्त होता है।

चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य ने 5 प्रकार की स्वर्ण मुद्राएँ प्रचलित की, जिसमें सर्वाधिक संख्या धर्नुधारी प्रकार की थी। इसके सिक्कों पर 'श्री विक्रम' गरुडध्वज तथा 'देवश्री महाराजाधिराज' का अंकन मिलता है।

कुमारगुप्त की मुद्राओं में धर्नुधारी, अश्वमेघ, कार्तिकय आदि प्रकार प्राप्त होता है। इसके इसक मुद्राओं पर गरूढ़ के स्थान पर मयूर की आकृति मिलती है। स्कन्दगुप्त ने 4 प्रकार के स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन करवाया था जिसमें धर्नुधारी, राजा- लक्ष्मी आदि प्रकार प्रमुख हैं।

77. नीचे दो कथन दिएगए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में :

अभिकथन  : औरंगजेब के काल में मृत मनसबदारों की सम्पति पर दावा मुतालिबा तक सीमित था

कारण : 1691 में औरंगजेब ने अपने अधिकारियों को फरमान जारी किया कि वे उन अमीरों की सम्पत्ति जब्त न करें जिनके उत्तराधिकारी सरकारी सेवा में थे क्योंकि मृत अमीरों द्वारा संविदाकृत मुतालिबा का भुगतान करने के लिए उनके उत्तराधिकारियों को कहा जा सकता था।

उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R)(A) की सही व्याख्या है
Solution:

मनसब फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है पद । इसके दो भाग होते थे जात एवं सवार । जात व्यक्तिगत पद जबकि सवार का तात्पर्य घुड़सवारों की संख्या से था। औरंगजेब ने मनसबदारी व्यवस्था में मशरूत की शुरूआत की थी, उसके समय हिन्दू मनसबदारों की संख्या (33 प्रतिशत) सर्वाधिक थी।

औरंगजेब के समय मृत मनसबदारों की सम्पत्ति का दावा मुतालिबा तक सीमित था। 1691 ई0 में औरंगजेब द्वारा फरमान जारी किया गया कि ऐसे मृत मनसबदारों की सम्पत्ति को जब्त न किया जाए जिनके उत्तराधिकारी मुगलिया सल्तनत की सेवा में है,क्योंकि ऐसे संविदाकृत मुतालिबा का भुगतान मृत अमीरों के उत्तराधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

78. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I सूची-II
(A) ब्रह्म-यज्ञ(I) सभी प्राणियों को आहुति सूच
(B) भूत-यज्ञ(II) अग्नि को आहुति
(C) दैव-यज्ञ(III) अतिथियों का सम्मान
(D) मनुष्य यज्ञ(IV) वेदों को पढ़ना व पढ़ाना
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IVIIIIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (a)
Solution:सही सुमेलित है-
सूची-I सूची-II
(A) ब्रह्म-यज्ञ(IV) वेदों को पढ़ना व पढ़ाना
(B) भूत-यज्ञ(I) सभी प्राणियों को आहुति सूच
(C) दैव-यज्ञ(II) अग्नि को आहुति
(D) मनुष्य यज्ञ(III) अतिथियों का सम्मान

79. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (लेखक)
सूची-II (पुस्तकें)
(A) फ्रैंक एंकरस्मिट(I) कस्टम्स इन कामन
(B) एडवर्ड सइड(II) डिस्पलिन एंड पनिश द बर्थ ऑफ द प्रिजन
(C) मिशेल फुको(III) कल्चर एंड इंपीरियलिज्म
(D) इ.पी. थांपसन(IV) मीनिंग, टूथ एंड रेफरेंस इन हिस्टोरिकल रिप्रेजेंटेशन
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IVIIIIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (a)
Solution:सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।
सूची-I (लेखक)
सूची-II (पुस्तकें)
(A) फ्रैंक एंकरस्मिट(IV) मीनिंग, टूथ एंड रेफरेंस इन हिस्टोरिकल रिप्रेजेंटेशन
(B) एडवर्ड सइड(III) कल्चर एंड इंपीरियलिज्म
(C) मिशेल फुको(II) डिस्पलिन एंड पनिश द बर्थ ऑफ द प्रिजन
(D) इ.पी. थांपसन(I) कस्टम्स इन कामन

80. फारसी स्रोत तजकिरा पीर हस्सू तेली और इसके लेखक के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(1) फारसी तजकिरा पीर हस्सू तेली पंजाब में जहाँगीर के शासन काल के दौरान लिखा गया।
(2) लेखक सूरत सिंह का परिवार पेशे से व्यापारी था।
(3) उन्हें शेख सितरुल्ला द्वारा तेली संत पीर हस्यू के प्रमुख शेख कमाल के पास उनका शिष्य बनाने के लिए ले जाया गया।
(4) यह एक सूफी संप्रदाय था, जो मलामतिया के नाम से जाना जाता था, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों शामिल किए जाते थे।

नीचे दिये गये विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए-

Correct Answer: (c) 1 और4
Solution:

फारसी स्रोत 'तजकिरा पीर हस्यू तेली' सूरत सिंह द्वारा लिखा गया था। यह एक छंदपूर्ण कृति है, जिसमें लगभग 7000 श्लोक संकलित हैं। ये शाहजहाँ के समय के फारसी भाषा के विद्वान थे, जो धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाने जाते थे। इनका परिवार व्यापारिक क्रियाकलापों से सम्बन्धित था।

यह पुस्तक मुगल काल के मध्यवर्ग के नैतिक स्वरूप को प्रकट करती है। उन्हें सूफी सम्प्रदाय के मलामतिया शाखा से सम्बन्धित तेली संत पीर हस्सू के प्रमुख शिष्य शेख कमाल का, शिष्य बनने के लिए भेजा गया था। मलामतिया शाखा एक धार्मिक सहिष्णु था, जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों वर्ग के लोग शामिल थे।