Solution:इतिहास का विभाजन प्रागैतिहासिक, आद्यइतिहास तथा एतिहासिक काल तीन भागों में किया गया है। प्रागैतिहासिक काल के परिधि में 'नवपाषाण कालीन सभ्यताएँ आती हैं। नवपाषण कालीन निम्न स्थलों से हड्डियों से बने औजार मिलते हैं। जिनमें गुफ्कराल, चिरौंद प्रमुख हैं। गुफकराल - यह स्थल कश्मीर प्रान्त में स्थित है। इसकी खुदाई 1981 ई. में ए.के. शर्मा ने करवाई थी।
यहाँ से भेड़ बकरी आदि जानवारों की हड्डियाँ तथा उनके बने उपकरण प्राप्त हुए हैं। जैसे - हड्डी की बनी सुइयाँ। यहाँ के उपकरण ट्रैप पत्थर पर बनी कुल्हाड़ी, बंसुली, खुरपी, छेनी, कुदाल गदा शीर्ष आदि है। चिरौंद - मध्य गंगा घाटी स्थल पर महत्त्वपूर्ण नवपाषाणकालीन स्थल चिराँद बिहार के छपरा जिले में स्थित है।
यहाँ के उपकरणों में पॉलिसदार पत्थर की कुल्हाड़ी, सिलबट्टे, हथौड़े, हड्डी तथा सींग के बने छेनी, बरमा, बाण, कुदाल, सूई, चूडी आदि। सरूतारू - गुवाहाटी से 25 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसके उत्खनन के दौरान कुल्हाड़ी, जैसी सामाग्री मिली। यहाँ से मृदभांड भूरे और धूसर रंग के मिले हैं।
जिन पर रस्सी का निशान है। यह नवीन नवपाषण कालीन स्थल है। दाओजलि हेडिंग - यह मेघालय में स्थित 'कथार' पहाड़ियों में स्थित है। यहाँ से 45 सेमी. मोटे निक्षेप नवपाषाण कालीन लकडी के बने कुल्हाड़ी के अवशेष तथा पत्थरों के कुल्हाड़ी, छेदी, सिलबट्टा, ओखली, मूसल तथा हाथ के बने मृदभांडों पर लाल रंग का मुहर देखा जा सकता है।